रिश्तों का कत्ल और डॉक्टर दीदी का खौफनाक राज: जिगर पटेल मर्डर केस की वो सच्चाई जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी
पाटन, गुजरात। जब हम किसी ‘डॉक्टर’ शब्द को सुनते हैं, तो हमारे मन में जीवन रक्षक और मसीहा की छवि उभरती है। लेकिन गुजरात के पाटन जिले से एक ऐसी घटना सामने आई जिसने न केवल चिकित्सा पेशे को कलंकित किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि लालच और ईर्ष्या की आग में इंसानियत किस हद तक जलकर राख हो सकती है। यह कहानी है जिगर पटेल और उसकी 14 महीने की नन्ही बेटी माही की, जिनकी हत्या किसी दुश्मन ने नहीं, बल्कि उनकी अपनी सगी बहन और डेंटिस्ट किन्नरी पटेल ने की।
एक हंसता-खेलता परिवार और ‘रहस्यमयी’ बीमारी
पाटन जिले के कल्याण गांव का पटेल परिवार समाज में बेहद प्रतिष्ठित था। घर के मुखिया नरेंद्र भाई पटेल का अहमदाबाद में लोहे का बड़ा कारोबार था। बेटा जिगर बिजनेस संभालता था, बहू भूमि डॉक्टर थी और बेटी किन्नरी पटेल एक डेंटिस्ट (दांतों की डॉक्टर) थी। सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक जिगर की तबीयत बिगड़ने लगी।
जिगर को अजीब से दौरे पड़ते, गला सूख जाता और आंखों की रोशनी कम होने लगी। अहमदाबाद के बड़े से बड़े अस्पतालों में चेकअप कराया गया, लेकिन सारी रिपोर्ट्स ‘नॉर्मल’ आती थीं। डॉक्टर भी हैरान थे कि आखिर बिना किसी बीमारी के जिगर का शरीर लकड़ी की तरह क्यों सूखता जा रहा है। 7-8 महीनों तक जिगर हर रोज तिल-तिल कर मरता रहा।
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5 मई 2019: वो मनहूस सुबह और चाबी का रहस्य
परिवार अपनी कुलदेवी के मंदिर जाने की तैयारी कर रहा था। तभी जिगर को एक भीषण दौरा पड़ा। बहन किन्नरी, जो खुद एक डॉक्टर थी, उसने जिगर को एक ‘दवाई’ (कैप्सूल) दी। लेकिन उस दवाई को लेते ही जिगर की हालत और बिगड़ गई। वह तड़पते हुए अपनी कार की ओर भागा, लेकिन उसकी जेब से कार की चाबी गायब थी।
पूरा परिवार चाबी ढूंढता रहा, कीमती समय बर्बाद हो गया। जब तक वे दूसरी गाड़ी से अस्पताल पहुंचे, जिगर की मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों ने इसे ‘हार्ट अटैक’ बताया और परिवार ने बिना पोस्टमार्टम के अंतिम संस्कार कर दिया। किसी को शक नहीं था कि कातिल उनके बीच ही खड़ा आंसू बहा रहा है।
माही की मौत और पिता का शक
जिगर की मौत के ठीक 25 दिन बाद, 30 मई को घर में फिर वही मंजर दोहराया गया। जिगर की पत्नी भूमि को भी वही लक्षण महसूस होने लगे। जब परिवार भूमि को लेकर अस्पताल गया, तो पीछे घर में 14 महीने की मासूम माही को भी दौरे पड़ने लगे। अस्पताल पहुँचते ही माही ने दम तोड़ दिया।
एक महीने में दो मौतें और बहू की बिगड़ती हालत ने पिता नरेंद्र पटेल के मन में संदेह पैदा कर दिया। उन्होंने गौर किया कि जहाँ पूरा घर मातम में डूबा है, वहीं बेटी किन्नरी बहुत खुश है, फोन पर हंसकर बातें कर रही है और दोस्तों के साथ घूम रही है। जब पिता ने किन्नरी की आंखों में आंखें डालकर पूछा, तो उसने जो कहा उसने नरेंद्र भाई को जीते-जी मार दिया।

“हाँ पिताजी, भाई और माही को मैंने ही मारा है। मैं तो भाभी को भी मारने वाली थी।”
स्लो पॉइजन और साइनाइड का जानलेवा कॉकटेल
पुलिस की पूछताछ में किन्नरी ने अपनी खौफनाक साजिश का खुलासा किया। वह खुद को परिवार में उपेक्षित महसूस करती थी और पिता की करोड़ों की संपत्ति की इकलौती वारिस बनना चाहती थी।
रिसर्च: किन्नरी ने इंटरनेट पर ऐसे जहरों की खोज की जो शरीर में धीरे-धीरे असर करें और पोस्टमार्टम में पकड़ में न आएं। उसने जहरीले पौधों के बीजों का अर्क निकाला।
स्लो पॉइजन: वह जिगर को रोज ग्लूकोज के पानी में यह अर्क मिलाकर देती थी, जिससे उसके अंग धीरे-धीरे डैमेज होने लगे।
साइनाइड का इस्तेमाल: जब वह उसे पूरी तरह खत्म करना चाहती थी, तो उसने ज्वेलर से ‘सोने के दांत साफ करने’ के बहाने पोटेशियम साइनाइड खरीदा।
मासूम माही का कत्ल: उसने माही को इसलिए मारा ताकि भविष्य में संपत्ति में कोई हिस्सेदार न बचे। उसने सोती हुई बच्ची के मुंह में साइनाइड का कैप्सूल डाल दिया।
इंसाफ की लड़ाई: सलाखें और जमानत
पुलिस ने किन्नरी के लैपटॉप से सर्च हिस्ट्री बरामद की, जहाँ वह ‘How to kill with poison without trace’ जैसे विषय सर्च कर रही थी। 4 अप्रैल 2022 को पाटन सेशन कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, मार्च 2023 में उसे हाई कोर्ट से जमानत मिल गई और वह फिलहाल बाहर है, लेकिन केस अभी जारी है।
निष्कर्ष: लालच और ईर्ष्या का अंत
यह मामला हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या उच्च शिक्षा और ‘डॉक्टर’ की डिग्री किसी को दयालु बनाती है? किन्नरी पटेल का मामला यह साबित करता है कि जब मन में ईर्ष्या और लालच घर कर जाए, तो इंसान अपनी ही कोख के रिश्तों का गला घोंटने में नहीं हिचकिचाता।
सीख: परिवारों में बच्चों के बीच संवाद और समानता बहुत जरूरी है। साथ ही, अचानक होने वाली मौतों को कभी भी ‘नेचुरल’ मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, खासकर जब घर में कोई ‘जानकार’ मौजूद हो।
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