अजमेर हत्याकांड: मोबाइल फोन का मोह और एक ड्राइवर का खूनी प्रतिशोध
अध्याय 1: अंबा मसीना का वह शांत घर
अजमेर जिले के अंबा मसीना गाँव में अशोक कुमार का जीवन एक सीधी लकीर की तरह चल रहा था। वह गाँव के बड़े जमींदार सतपाल सिंह की निजी गाड़ी का ड्राइवर था। ₹15,000 की मामूली तनख्वाह में वह अपने चार सदस्यों के परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। उसकी पत्नी कांता देवी खर्चीले स्वभाव की थी, जबकि उसकी बेटी आरती (12वीं कक्षा) और बेटा बबलू (9वीं कक्षा) अपनी पढ़ाई में व्यस्त थे।
अशोक एक जिम्मेदार पिता था। तीन महीने पहले ही उसने अपनी जमापूँजी और जमींदार से कर्ज लेकर अपनी पत्नी और बेटी को दो मोबाइल फोन खरीद कर दिए थे ताकि वे आधुनिक दुनिया से जुड़ सकें। उस समय उसे अंदाजा भी नहीं था कि ये ‘स्मार्टफोन’ उसके घर की बर्बादी का पहला कदम साबित होंगे।
अध्याय 2: वाशिंग मशीन और टूटी हुई उम्मीदें
20 सितंबर 2025 की वह सुबह अशोक के परिवार के लिए मनहूस साबित हुई। कांता देवी कपड़े धो रही थी, तभी अनजाने में उसका फोन कपड़ों के साथ वाशिंग मशीन में चला गया। पानी घुसने के कारण फोन पूरी तरह डेड हो गया। उसी दिन शाम को बेटी आरती भी रोती हुई घर आई और बताया कि उसका फोन स्कूल में चोरी हो गया है।
जब अशोक शाम को घर लौटा, तो कांता ने डरते-डरते उसे सब बताया। अशोक ने अपनी लाचारी जाहिर की, “कांता, मेरी ₹15,000 की कमाई में मैं फिर से नए फोन नहीं खरीद सकता।” लेकिन कांता और आरती के लिए फोन अब विलासिता नहीं, बल्कि एक लत बन चुकी थी। फोन की इसी तड़प ने कांता को एक खतरनाक रास्ते पर धकेल दिया।

अध्याय 3: गौरव की दुकान और वासना का जाल
2 अक्टूबर 2025 को गाँव में गौरव नाम के एक युवक ने नई मोबाइल शॉप खोली। गौरव काम से ज्यादा महिलाओं में दिलचस्पी रखने वाला व्यक्ति था। कांता ने उसे अपने जाल में फंसाने की योजना बनाई ताकि मुफ्त में फोन हासिल कर सके। वह गौरव की दुकान पर पहुँची और उधार पर पुराना फोन माँगा। गौरव ने कांता की खूबसूरती को देखते हुए एक घिनौनी शर्त रखी— “फोन मिल जाएगा, लेकिन तुम्हें मेरी इच्छाएँ पूरी करनी होंगी।”
कांता ने फोन के लिए अपना जमीर बेच दिया। उसने न केवल गौरव के साथ अनैतिक संबंध बनाए, बल्कि मुफ्त के मोबाइल के लालच में वह रोज रात को दबे पाँव गौरव की दुकान के शटर के पीछे जाने लगी।
अध्याय 4: ब्लैकमेलिंग और बेटी की बलि
पाप का घड़ा तब भरा जब कांता का पुराना फोन खराब हो गया और उसने अपनी बेटी आरती को उसे ठीक कराने के लिए गौरव की दुकान पर भेजा। गौरव की नजर अब जवान होती आरती पर थी। उसने आरती को अपनी माँ कांता और उसके (गौरव) अश्लील वीडियो दिखाए, जो उसने चुपके से रिकॉर्ड किए थे।
“आरती, अगर तुम नहीं चाहती कि तुम्हारी माँ की ये वीडियो पूरा गाँव देखे, तो तुम्हें भी वही करना होगा जो तुम्हारी माँ करती है,” गौरव ने उसे डराया। बेबस आरती अपनी माँ और परिवार की इज्जत बचाने के लिए गौरव के चंगुल में फंस गई। उसे चुप रहने के बदले एक नया फोन दिया गया।
अध्याय 5: बबलू की गवाही और अशोक का क्रोध
कहानी में मोड़ तब आया जब कांता का बेटा बबलू अपनी तबीयत खराब होने के कारण स्कूल से जल्दी घर लौट आया। उसने घर के अंदर अपनी माँ को गौरव के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया। कांता ने बबलू को कसम देकर चुप करा दिया, लेकिन बबलू का बाल मन इस बोझ को सहन नहीं कर पाया।
8 नवंबर 2025 की रात बबलू ने अपनी बहन आरती को भी चोरी-छिपे गौरव की दुकान की ओर जाते देखा। अगली सुबह बबलू ने रोते हुए अपने पिता अशोक को सब कुछ सच-सच बता दिया। “पिताजी, माँ और दीदी दोनों गलत रास्ते पर हैं। वे गौरव की दुकान पर रात को जाते हैं।”
अशोक के पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस पत्नी और बेटी के लिए उसने दिन-रात मेहनत की, उन्होंने उसे इतना बड़ा धोखा दिया था। उसके अंदर का प्यार अब एक ठंडे और खौफनाक प्रतिशोध में बदल चुका था।
अध्याय 6: चलती कार और मौत का मंजर
अशोक ने फैसला कर लिया था कि वह इस ‘गंदगी’ को खत्म कर देगा। उसने जमींदार सतपाल सिंह की कार ली और परिवार को होटल में खाना खिलाने के बहाने बाहर ले गया। रास्ते में उसने एक पेट्रोल पंप से 5 लीटर पेट्रोल खरीदा।
एक सुनसान इलाके में ले जाकर अशोक ने बहाना बनाया कि कार खराब हो गई है। उसने बबलू को इंजन चेक करने के बहाने कार से बाहर उतारा और तुरंत कार के दरवाजे और खिड़कियाँ लॉक कर दीं। कांता और आरती अंदर चिल्लाती रहीं, लेकिन अशोक ने कार पर पेट्रोल छिड़क कर माचिस जला दी।
देखते ही देखते कार आग का गोला बन गई। चलती कार में फोन फटने का बहाना बनाने के लिए उसने कार के अंदर दोनों मोबाइल फोन भी डाल दिए थे। कांता और आरती जिंदा जलकर राख हो गई।
अध्याय 7: बबलू का खुलासा और गिरफ्तारी
अशोक ने पुलिस को फोन किया और मनगढ़ंत कहानी सुनाई कि शॉर्ट सर्किट और फोन की बैटरी फटने से हादसा हुआ। पुलिस पहले तो इसे एक दुर्घटना मान रही थी, लेकिन पास खड़े बबलू की आँखों का खौफ कुछ और ही बयां कर रहा था।
पछतावे और डर से भरे बबलू ने पुलिस के सामने चीखते हुए सच उगल दिया, “पुलिस अंकल, मेरे पापा ने माँ और दीदी को जलाकर मार डाला है! उन्होंने खुद कार पर पेट्रोल डाला था।”
पुलिस ने तुरंत अशोक को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ के बाद अशोक टूट गया और अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि मोबाइल फोन ने उसके घर की सुख-शांति छीन ली थी। पुलिस ने मुख्य आरोपी गौरव को भी उकसाने और ब्लैकमेलिंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।
निष्कर्ष: समाज के लिए एक कड़वा सबक
यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या तकनीक और दिखावे की दुनिया हमारे रिश्तों से बड़ी हो गई है? एक पिता का अपराधी बनना और एक माँ-बेटी का अनैतिकता की भेंट चढ़ना समाज के नैतिक पतन का संकेत है। अजमेर की अदालत अब इन आरोपियों की सजा मुकर्रर करेगी, लेकिन अंबा मसीना गाँव की गलियों में यह सवाल आज भी गूँज रहा है— “क्या मोबाइल फोन इतना कीमती था कि उसके लिए दो जानें चली गईं?”
अगला कदम: क्या आप चाहते हैं कि मैं इस घटना के कानूनी पहलुओं और कोर्ट ट्रायल पर एक विस्तृत अनुवर्ती (Follow-up) लेख तैयार करूँ? या फिर डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा पर एक विशेष रिपोर्ट चाहेंगे?
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