अफेयर जान पत्नी सीढ़ियों से गिरी, बच्चा खोया! CEO पछताया पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी! 

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अफेयर की सच्चाई: एक रात में उजड़ गया सब कुछ

मुंबई की रात उस दिन असामान्य रूप से बेचैन थी।
मूसलाधार बारिश खिड़कियों के शीशों पर लगातार चोट कर रही थी, मानो प्रकृति भी किसी अनहोनी का संकेत दे रही हो।

बांद्रा की एक ऊँची इमारत की 25वीं मंज़िल पर बने आलीशान पेंटहाउस की बालकनी से अरब सागर का दृश्य दिखाई देता था। आम दिनों में यह दृश्य किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता था, लेकिन उस रात वही समुद्र मीरा को एक गहरी और अंधेरी खाई जैसा लग रहा था।

कमरे में हल्की रोशनी थी। दीवार घड़ी की टिक-टिक सन्नाटे को और गहरा बना रही थी।

रात के दो बज चुके थे।

मीरा अभी भी जाग रही थी।

उसने धीरे से अपने पेट पर हाथ फेरा।
सात महीने का बच्चा उसकी कोख में पल रहा था।

वह खुद को बार-बार समझा रही थी—
“तनाव मत लो… बच्चे के लिए अच्छा नहीं है।”

लेकिन दिल था कि मानने को तैयार ही नहीं था।

यह वही घर था जिसे अर्जुन ने बड़े प्यार से सजाया था। इटालियन मार्बल का फर्श, महंगे फर्नीचर, विदेशी पेंटिंग्स—सब कुछ था यहाँ।

लेकिन सुकून नहीं था।

मीरा धीरे-धीरे रसोई की ओर चली।
उसे पानी पीना था।

गिलास भरते समय उसे अपने पुराने घर की याद आ गई—
जहाँ शाम को सब साथ बैठकर चाय पीते थे, हँसते थे।

यहाँ तो अर्जुन के पास उससे बात करने का भी समय नहीं था।

तभी मुख्य दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई।

मीरा का दिल धड़क उठा।

अर्जुन आ गया था।

वह जल्दी से लिविंग रूम में आई और अपने चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करने लगी।

अर्जुन अंदर आया।

उसकी चाल लड़खड़ा रही थी।

वह थका हुआ लग रहा था… या शायद नशे में था।

उसने कोट सोफे पर फेंका और बिना कुछ बोले बैठ गया।

मीरा पानी का गिलास लेकर उसके पास आई।

“खाना खाओगे?” उसने धीरे से पूछा।

अर्जुन ने बिना उसकी ओर देखे हाथ से मना कर दिया।

मीरा झुककर गिलास मेज पर रख रही थी कि अचानक उसे एक अजीब सी खुशबू महसूस हुई।

यह खुशबू अर्जुन के परफ्यूम की नहीं थी।

यह किसी और औरत के इत्र की खुशबू थी।

मीरा का दिल जोर से धड़कने लगा।

उसने कुछ नहीं कहा।

अर्जुन ने फोन निकाला।

स्क्रीन देखते ही उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।

लेकिन वह मुस्कान मीरा के लिए नहीं थी।

उसने तुरंत फोन उल्टा रख दिया।

मीरा सब समझ रही थी।

लेकिन वह चुप रही।

उस रात दोनों एक ही बिस्तर पर सोए, मगर उनके बीच की दूरी मीलों की थी।

रात के सन्नाटे में अचानक अर्जुन का फोन बजा।

मीरा ने अनजाने में स्क्रीन की ओर देखा।

स्क्रीन पर एक नाम चमक रहा था—

काव्या ❤️

मीरा का दिल टूट गया।

अब शक नहीं… सच सामने था।

उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।

लेकिन उसने कोई आवाज़ नहीं की।

उस रात मीरा ने फैसला कर लिया—

अब वह सच जाने बिना नहीं रहेगी।


अगला दिन

अगले दिन सिंघानिया विला में भव्य समारोह था।

मीरा की गोद भराई

पूरा घर फूलों से सजा हुआ था।

मेहमानों की भीड़ लगी थी।

सभी लोग खुश थे।

लेकिन मीरा के दिल में तूफान चल रहा था।

वह भारी साड़ी और गहनों से सजी थी, लेकिन उसके चेहरे की मुस्कान झूठी थी।

अर्जुन मेहमानों के बीच खड़ा था।

सभी उसे आदर्श पति मान रहे थे।

लेकिन मीरा जानती थी कि सच्चाई कुछ और है।

अचानक अर्जुन का फोन मेज पर बजा।

मीरा की नजर स्क्रीन पर पड़ी।

मैसेज था—

“मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ… आज मुझे तुम्हारी ज़रूरत है।”

मीरा का दिल बैठ गया।

उसका भ्रम पूरी तरह टूट चुका था।


उसी रात

समारोह खत्म हो गया।

अर्जुन फिर बाहर जाने की तैयारी करने लगा।

मीरा ने उसे रोका।

“क्या तुम काव्या से मिलने जा रहे हो?”

अर्जुन ठिठक गया।

उसकी आँखों में गुस्सा भर गया।

“मेरी जासूसी मत करो।”

इतना कहकर वह घर से निकल गया।

मीरा पूरी रात रोती रही।

लेकिन उसने तय कर लिया था—

अब सच्चाई सामने आएगी।


वह मनहूस रात

रात के दो बजे अर्जुन वापस लौटा।

वह नशे में था।

और उसके कॉलर पर लिपस्टिक का निशान था।

मीरा का सब्र टूट गया।

“कौन है काव्या?”

अर्जुन चिल्लाया—

“हाँ है मेरा अफेयर! क्योंकि वह मुझे समझती है… तुम नहीं।”

यह सुनकर मीरा के पैरों तले जमीन खिसक गई।

झगड़ा बढ़ता गया।

मीरा ने कहा—

“मैं यह घर छोड़ दूँगी।”

अर्जुन गुस्से में सीढ़ियाँ चढ़ने लगा।

उसने मीरा की बाँह पकड़ ली।

मीरा खुद को छुड़ाने की कोशिश करने लगी।

अचानक उसका पैर साड़ी में उलझ गया।

और वह…

सीढ़ियों से गिर पड़ी।

उसकी चीख पूरे घर में गूँज उठी।

वह संगमरमर की सीढ़ियों से टकराती हुई नीचे गिरती चली गई।

अर्जुन का नशा पल भर में उतर गया।

वह दौड़कर नीचे आया।

मीरा खून में लथपथ पड़ी थी।

उसका पेट…

जिसमें उनका बच्चा था…

खून से भीग चुका था।

अर्जुन पागलों की तरह चिल्लाने लगा—

“मीरा… उठो!”

लेकिन मीरा बेहोश थी।


अस्पताल

डॉक्टरों ने घंटों ऑपरेशन किया।

अर्जुन बाहर बैठा रोता रहा।

आखिर डॉक्टर बाहर आए।

उन्होंने कहा—

“हम माँ को बचा पाए… लेकिन बच्चे को नहीं।”

अर्जुन वहीं गिर पड़ा।

उसकी दुनिया खत्म हो चुकी थी।


आईसीयू

जब मीरा को होश आया, उसने सबसे पहले अपने पेट को छुआ।

वह खाली था।

उसने अर्जुन की ओर देखा।

अर्जुन सिर झुकाए खड़ा था।

मीरा सब समझ गई।

उसकी आँखों से आँसू नहीं निकले।

बस एक ठंडी खामोशी थी।

नर्स उनके मृत बच्चे को लेकर आई।

मीरा ने उसे अपनी छाती से लगाया।

और धीरे से रो पड़ी।

उसकी दुनिया खत्म हो चुकी थी।


सच सामने आया

सावित्री देवी मीरा को दोष देने लगीं।

तभी अर्जुन चिल्लाया—

“गलती मीरा की नहीं… मेरी है। मैंने धक्का दिया था।”

कमरे में सन्नाटा छा गया।

अब सब खत्म हो चुका था।


तलाक

दो महीने बाद अदालत में तलाक हुआ।

अर्जुन ने अपनी आधी संपत्ति मीरा को देने की पेशकश की।

लेकिन मीरा ने कहा—

“मुझे इस आदमी का एक पैसा नहीं चाहिए।”

उसने सिर्फ अपनी स्वतंत्रता मांगी।

और अपने साथ ले गई—

भगवान कृष्ण की छोटी सी मूर्ति।


अंत

मीरा ऋषिकेश चली गई।

वह आश्रम में संगीत सिखाने लगी।

अर्जुन अकेला रह गया।

उसके पास पैसा था…
महल था…

लेकिन परिवार नहीं।

हर रात वह उस खाली नर्सरी के बाहर बैठता।

जहाँ कभी उसके बच्चे की हँसी गूंजने वाली थी।

लेकिन अब वहाँ सिर्फ सन्नाटा था।

और पछतावा।

क्योंकि कुछ गलतियाँ ऐसी होती हैं—

जिनकी सज़ा पूरी जिंदगी भुगतनी पड़ती है।