अस्पताल में जिसे पति मारा थप्पड़.., वही निकला दुनिया का सबसे बड़ा डॉक्टर |
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“अस्पताल में जिसे पति मारा थप्पड़.., वही निकला दुनिया का सबसे बड़ा डॉक्टर!”
यह कहानी एक ऐसे पति की है, जिसे उसकी पत्नी ने भिखारी कहकर ठुकरा दिया था, लेकिन यही व्यक्ति बाद में दुनिया के सबसे बड़े डॉक्टरों में से एक बन गया। उसकी कड़ी मेहनत, अपने सपनों के प्रति समर्पण और बदले हुए हालात ने उसे एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। यह कहानी न केवल एक डॉक्टर की है, बल्कि एक ऐसे इंसान की भी है, जो समाज की तुच्छ नजरों को नकारते हुए अपनी मेहनत और ईमानदारी से सब कुछ हासिल करता है।
भाग 1: संघर्ष की शुरुआत
अर्जुन एक साधारण परिवार से था। उसकी शादी अंजलि से हुई थी, जो एक अमीर परिवार की लड़की थी। अर्जुन ने अपनी मेहनत और लगन से मेडिकल की पढ़ाई पूरी की थी। उसकी आँखों में एक सपना था, वह दुनिया का सबसे बड़ा न्यूरोसर्जन बनना चाहता था। उसने अपनी शादी के पहले दिन से ही अपने जीवन को एक उद्देश्य दिया था—अपने देश और लोगों की सेवा करना।
अंजलि, जो शुरू में अर्जुन की सादगी और मेहनत से प्रभावित थी, धीरे-धीरे उसकी सफलता से असंतुष्ट होने लगी। अर्जुन का सपना और उसकी कड़ी मेहनत अंजलि की अपेक्षाओं से मेल नहीं खा रही थी। अंजलि एक रईस घराने की लड़की थी और उसे हमेशा अपने पति की दौलत और रुतबे की उम्मीद थी। वह अर्जुन की सफलता के बजाय, उसकी साधारणता को लेकर परेशान रहती थी।
एक दिन, अर्जुन के खिलाफ एक बड़ी साजिश रची गई। अस्पताल में एक बड़े राजनैतिक रसूख वाले मरीज के ऑपरेशन के दौरान, अर्जुन की गैरमौजूदगी में उसकी दवाइयों की फाइलों के साथ छेड़छाड़ की गई। नतीजा यह हुआ कि मरीज की हालत बिगड़ गई और अर्जुन पर सारी गलती का इल्जाम डाल दिया गया। अस्पताल प्रशासन ने बिना उसकी बात सुने उसकी मेडिकल डिग्री रद्द कर दी।
अर्जुन अपनी डिग्री खोकर घर लौटता है। अब वह डॉक्टर अर्जुन नहीं, बल्कि घर में बैठा एक बेकार इंसान था। अंजलि, जो अब अपने पिता का बिजनेस संभालने लगी थी, धीरे-धीरे बदलने लगी। वह अब अर्जुन को बोझ समझने लगी थी।

भाग 2: घर में टूटते रिश्ते और अलगाव
अंजलि के व्यवहार में बदलाव आने के बाद अर्जुन का दिल टूटने लगा। वह जानता था कि उसकी पत्नी अब उसे वैसा नहीं देखती जैसे पहले देखती थी। लेकिन उसने कभी भी इस बात का विरोध नहीं किया। वह दिन-रात मेहनत करता रहा, लेकिन अंजलि अब उसकी मेहनत की कद्र नहीं करती थी।
अर्जुन ने कभी नहीं सोचा था कि वह एक दिन अपने ही घर में इस तरह अपमानित होगा। अंजलि के तानों और अपमान से वह अंदर ही अंदर टूट चुका था। एक दिन जब वह घर लौटता है, तो अंजलि और उसके एक्स बॉयफ्रेंड रोहन के साथ उसे देखकर वह पूरी तरह चौंक जाता है।
अंजलि ने अर्जुन को कहा, “तुम अब नहीं हो हमारे साथ। अब तुम्हारी कोई जगह नहीं है। तुम्हारी औकात हमारे जूतों के बराबर भी नहीं है।” इस पल ने अर्जुन को पूरी तरह से तोड़ दिया।
लेकिन उसके अंदर का सच्चा डॉक्टर अब जाग चुका था। उसने खुद से वादा किया कि वह कभी हार नहीं मानेगा और अपने काम में वापस लौटेगा। उसने सोचा कि अगर किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है, तो यह उसकी जिम्मेदारी है।
भाग 3: अर्जुन की वापसी और सम्मान
कुछ साल बाद अर्जुन ने विदेश जाने का फैसला किया। वह अपनी रिसर्च पूरी करने के लिए वहां गया और दुनिया के सबसे बड़े न्यूरोसर्जन डॉक्टरों में से एक बन गया। अर्जुन ने अपनी पहचान पूरी तरह से बदल डाली। लेकिन इस यात्रा में वह एक और बड़ा कदम उठाने वाला था।
जब अर्जुन को पता चला कि उसकी पूर्व पत्नी की बेटी, पीहू, गंभीर रूप से बीमार है, तो वह बिना कोई समय गंवाए उस अस्पताल में पहुंचा, जहां पीहू का इलाज हो रहा था। वहां उसकी मुलाकात अंजलि और रोहन से हुई। अंजलि की आंखों में नफरत और गुस्से की झलक थी।
अंजलि और रोहन ने अर्जुन का मजाक उड़ाते हुए उसे अपमानित किया। अंजलि ने कहा, “तुम यहां क्या करने आए हो? डॉक्टर नहीं हो तुम, तुम तो एक भिखारी हो।” रोहन भी अंजलि की बात में साथ देता रहा, लेकिन अर्जुन चुपचाप अपनी जगह खड़ा रहा।
भाग 4: सच्चे डॉक्टर की पहचान
अर्जुन की मेहनत ने उसे एक सच्चे डॉक्टर में बदल दिया था। उसने न सिर्फ अपनी पुरानी पहचान को छोड़ा, बल्कि अब वह एक सच्चे पेशेवर की तरह काम कर रहा था। उसने शांत रहकर कहा, “मुझे किसी से कुछ साबित नहीं करना है, लेकिन अगर पीहू की जान बचाई जा सकती है तो वह सिर्फ मैं ही बचा सकता हूं।”
अंजलि और रोहन उसकी बातों को नजरअंदाज करते रहे, लेकिन अर्जुन ने पीहू का ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया। उसकी जान बचाई गई। यही नहीं, अर्जुन ने अपनी पूरी टीम के साथ मिलकर पीहू का इलाज किया और उसकी स्थिति को स्थिर किया।
अंजलि और रोहन को यह अहसास हुआ कि उन्होंने जो कुछ किया वह बिल्कुल गलत था। अंजलि की आंखों में अब पछतावा और अफसोस था। अर्जुन ने कोई भी जवाब नहीं दिया, बस पीहू की हालत सुधारने के लिए काम करता रहा।
भाग 5: सच्चे डॉक्टर का मार्गदर्शन
अर्जुन के काम के बाद अंजलि ने अपनी गलतियों को महसूस किया और उसे माफी मांगने का मौका दिया। लेकिन अर्जुन ने कहा, “मैंने उसे इसलिए बचाया क्योंकि वह एक इंसान है, और एक डॉक्टर का धर्म है किसी की जान बचाना। तुम्हारे साथ क्या हुआ, वह अब मायने नहीं रखता।”
अर्जुन ने यह साबित किया कि एक सच्चा डॉक्टर वही होता है, जो अपने कर्तव्यों से कभी पीछे नहीं हटता, चाहे उसके साथ क्या हो। अंजलि ने समझा कि अर्जुन की जोड़ी अब टूट चुकी थी, और उसे अब कोई बदलाव नहीं हो सकता।
निष्कर्ष:
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि किसी की असल पहचान उसकी मेहनत और ईमानदारी से बनती है। हमें कभी भी किसी इंसान को उसकी स्थिति से नहीं आंकना चाहिए। अर्जुन ने अपनी मेहनत से ना केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि उन सभी को भी जवाब दिया जिन्होंने उसे नकारा था।
अर्जुन की कहानी यह बताती है कि अगर आपके अंदर मेहनत करने का जुनून हो और आप अपने काम के प्रति ईमानदार हों, तो आप किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हैं। सच्ची पहचान सिर्फ आपके काम से होती है, न कि आपकी स्थिति से।
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