एक मामूली चायवाले ने वो सॉफ्टवेयर ठीक कर दिया, जिसे ठीक करने में डायरेक्टर के पसीने छूट गए थे।
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“एक मामूली चायवाले ने वो सॉफ्टवेयर ठीक कर दिया, जिसे ठीक करने में डायरेक्टर के पसीने छूट गए थे”
कहते हैं कि हीरा अक्सर कोयले की खान में ही मिलते हैं। लेकिन दुनिया की नजरें अक्सर चमकते शोरूम और बड़े-बड़े ऑफिसों पर ही टिकती हैं। किसी ने सही कहा है कि काबिलियत की कोई वेशभूषा नहीं होती, और सपने देखने के लिए किसी डिग्री की जरूरत नहीं होती। असल में, हुनर तो हर किसी के अंदर होता है—बस उसे पहचानने और उसे निखारने की जरूरत होती है।
शहर के सबसे पॉश इलाके, सिलिकॉन वैली आईटी पार्क के बाहर एक छोटी सी चाय की टपरी थी। धूल और धुएं के बीच, यह छोटी सी दुकान हर दिन नई उम्मीदें और नई कहानियां लेकर आती थी। यहाँ दिन-रात कोड लिखने वाले इंजीनियरों की भीड़ लगी रहती थी। लेकिन इन सबके बीच, एक लड़का था—बिशन। उसकी उम्र महज 15 साल थी। लेकिन उसकी आंखों में एक अनोखी चमक थी, जैसे उसने दुनिया की सारी जटिलताएं अपने अंदर समेट रखी हों।
बिशन का जीवन बहुत संघर्षपूर्ण था। वह स्कूल नहीं गया था। उसे अंग्रेजी के बड़े-बड़े उपन्यास पढ़ना नहीं आता था। लेकिन उसके पास एक दैवीय शक्ति थी—उसकी याददाश्त किसी सुपरकंप्यूटर से कम नहीं थी। वह जब भी किसी कोड को देखता, तो वह उसके दिमाग में छप जाता था। वह कचरे में फेंकी गई पुरानी किताबों को उठा लाता और रातभर उन अक्षरों को समझने की कोशिश करता। उसके लिए कोडिंग कोई पढ़ाई नहीं बल्कि एक खेल थी—एक ऐसा खेल जिसे वह बिना किसी को बताए, चुपके से खेल रहा था।
उसकी इस प्रतिभा को देखकर, शहर के बड़े-बड़े कंपनी मालिक भी हैरान रह जाते थे। लेकिन वह खुद को कभी बड़ा नहीं समझता था। उसके लिए तो बस एक ही बात महत्वपूर्ण थी—सपने देखने की आजादी और अपने हुनर को निखारने का जज्बा।

सिलिकॉन वैली का संघर्ष
उधर, आईटी पार्क की सबसे ऊंची इमारत की 20वीं मंजिल पर, नेक्सस डायनामिक्स का ऑफिस था। उस दिन का माहौल किसी युद्ध के मैदान जैसा था। कंपनी के मालिक समीर वर्मा, जो अपने प्रोजेक्ट पर पूरी तरह से फोकस थे, अपने केबिन में बैठे थे। उनके सामने का कंप्यूटर स्क्रीन लाल रंग का एरर मैसेज दिखा रहा था। वह मैसेज, जो कंपनी की बर्बादी का संकेत था।
उनकी टीम के 50 इंजीनियर, जिनमें से हर एक अपने-अपने क्षेत्र का माहिर था, उस बग को हल करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन कोई भी सफलता नहीं पा रहा था। प्रोजेक्ट का डेडलाइन खिसक रहा था। अगर यह प्रोजेक्ट फेल हो गया, तो कंपनी का दिवालिया होना तय था। सैकड़ों लोगों की नौकरी खतरे में थी।
समीर की हालत भी बेहाल थी। पिछले तीन दिनों से वह सोए नहीं थे। आंखों के नीचे गहरे काले घेरे पड़ गए थे। हर रात की नींद उनसे दूर हो गई थी। वह अपने कंप्यूटर स्क्रीन को देख रहे थे, जहां लाल रंग का एरर मैसेज बार-बार चमक रहा था।
रात के 2 बजे थे। ऑफिस लगभग खाली हो चुका था। बस समीर अपनी कुर्सी पर बैठे थे। उनकी आंखें बंद हो चुकी थीं। तभी, ऑफिस का कांच का दरवाजा धीरे-धीरे खुला। अंदर आया एक छोटा सा लड़का—बिशन। उसके हाथ में गरमागरम चाय का गिलास था।
वह बिना आवाज किए, धीरे-धीरे अंदर आया। उसकी नजरें समीर के कंप्यूटर स्क्रीन पर पड़ीं। वह देख रहा था कि कैसे वहां लाल रंग की कोडिंग लाइनें चमक रही थीं। उसकी आंखें जैसे किसी संगीत की धुन सुन रही थीं।
बिशन का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसे पता था कि यह वही समस्या है, जिसे उसकी पुरानी किताबों और अपने अनुभव से उसने समझा था। वह बिना किसी को बताए, अपने हुनर का इस्तेमाल कर रहा था।
उसने अपने छोटे से हाथ से कीबोर्ड पर उंगलियां चलाना शुरू कर दिया। वह धीरे-धीरे उस कोड को समझने लगा। उसकी आंखें चमक उठीं। उसने उस बग को हल कर दिया। फिर, बिना किसी शोर के, उसने उस कोड को ठीक कर दिया।
अचानक, स्क्रीन पर हरे रंग का मैसेज चमकने लगा। “सिस्टम रिस्टोर ऑन प्रेशर”। समीर की आंखें फैल गईं। वह समझ गए कि उनके सबसे बड़े संकट का समाधान मिल गया है।
उनके चेहरे पर पहली बार एक मासूम सी मुस्कान आई। लेकिन अगले ही पल, उन्हें अपने अंदर एक खौफ का अनुभव हुआ।
“क्या मैंने गलत किया?” उन्होंने अपने आप से पूछा। “क्या यह लड़का, जो अभी तक गरीब था, इस सिस्टम का मालिक बन जाएगा?”
वह घबराकर अपनी कुर्सी से उठे। उस बच्चे की तरफ देखा। उसकी आंखों में वही चमक थी, जो किसी जीनियस की पहचान थी।
सपनों का सच
बिशन ने अपने हुनर का परिचय दिया। उसने उस प्रोजेक्ट को हल कर दिया। उसकी इस प्रतिभा ने समीर को हिला कर रख दिया। वह उस बच्चे को देखकर सोचने लगा—”क्या यह वही लड़का है, जो कभी इस सड़क पर चाय बेचता था?”
उस रात, उस छोटे से लड़के ने न सिर्फ एक बड़ी कंपनी का सिस्टम ठीक किया, बल्कि साबित कर दिया कि हुनर और मेहनत किसी भी वेशभूषा या जाति का मोहताज नहीं होता।
उसके बाद, उस पूरे शहर में उसकी चर्चा होने लगी। उसकी कहानी हर किसी के दिल को छू गई। अब वह लड़का, जो कभी सड़क पर चाय बेचता था, अब एक बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा बन चुका था। उसकी मेहनत ने दिखा दिया कि असली हीरा तो कोयले की खान में ही छुपा होता है।
सच्चाई का फल
कुछ ही महीनों में, उस लड़के का नाम पूरे शहर में फैल गया। उसकी मेहनत और प्रतिभा का सम्मान होने लगा। वह अपने हुनर से बड़ी-बड़ी कंपनियों में काम करने लगा। उसकी कहानी यह साबित कर रही थी कि अगर नियत साफ हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो मंजिल दूर नहीं रहती।
वहीं, उस अमीर औरत का जीवन भी धीरे-धीरे बदलने लगा। उसकी शान-शौकत, उसकी दौलत, सब कुछ खत्म हो गया। उसका रुतबा मिट्टी में मिल गया। उसने समझ लिया कि दौलत और शोहरत अस्थायी हैं। असली ताकत तो अपने अंदर की होती है।
अंत में
यह कहानी हमें सिखाती है कि इंसान की पहचान उसकी मेहनत, उसकी ईमानदारी और उसकी नियत से ही होती है। दौलत और शोहरत तो अस्थायी हैं, लेकिन हुनर और कर्म हमेशा अमर रहते हैं।
यह लड़का, जो कभी सड़क पर चाय बेचता था, आज एक मिसाल बन चुका है। उसकी कहानी यह भी कहती है कि सपने देखने के लिए किसी डिग्री की जरूरत नहीं, बस अपने हुनर पर भरोसा चाहिए।
और हाँ, यह भी कि कभी-कभी सबसे बड़े हीरे तो कोयले में ही मिलते हैं। बस जरूरत है उन्हें पहचानने और उनका सही इस्तेमाल करने की।
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