करोड़पति के माता जागरण में गायक नहीं आयी… गरीब लड़के ने कहा ‘मैं ये भजन ग़ा सकता हूँ सर | Story

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करोड़पति के माता जागरण में गायक नहीं आयी: एक प्रेरणादायक कहानी

एक रात का समय था जब करोड़पति विक्रम अग्रवाल ने अपने इकलौते बेटे के जन्मदिन पर माता का भव्य जागरण आयोजित किया था। पंडाल सज चुका था, सभी तैयारियाँ पूरी हो चुकी थीं, लेकिन एक समस्या थी। शहर की सबसे मशहूर जागरण सिंगर ने अचानक आने से मना कर दिया। विक्रम का दिल बैठ गया। अगर भजन नहीं हुआ तो माता नाराज होंगी, और उसका मान-सम्मान मिट्टी में मिल जाएगा।

विक्रम ने फोन पर सिंगर का मैसेज देखा, “सॉरी सर, आज नहीं आ पाऊंगी।” वह घबराया हुआ था, फोन उसके हाथ में कांप रहा था। पंडाल के अंदर हलचल मच गई थी। ढोलक, मंजीरे और घंटियाँ सब तैयार थे, लेकिन एक चीज गायब थी – आवाज।

तभी, पीछे से एक पतली सी आवाज आई, “मैं भजन गा सकता हूँ, साहब। आप चिंता मत करिए।” विक्रम ने मुड़कर देखा, एक छोटा सा लड़का फटे कपड़ों में खड़ा था। उसकी आंखों में डर और हिम्मत दोनों थे। विक्रम ने उसे नजरअंदाज करते हुए कहा, “तू भजन गाएगा? पागल हो गया है क्या? यह कोई खेल नहीं है।”

लेकिन लड़का डटा रहा। “साहब, मुझ पर यकीन करो। मैं गा सकता हूँ।” विक्रम ने थोड़ी हिचकिचाहट दिखाई, लेकिन फिर भी उसने लड़के को गाने की अनुमति दी। लड़के ने माइक पकड़ा और भजन गाना शुरू किया।

जैसे ही उसने गाना शुरू किया, पूरे पंडाल का माहौल बदल गया। उसकी आवाज इतनी साफ और मीठी थी कि वह सीधे दिल में उतरती चली गई। पहले जो लोग हंस रहे थे, वे अब चुपचाप खड़े थे। कुछ की आंखें भर आईं, कुछ हाथ जोड़कर खड़े हो गए। उसकी आवाज में एक अद्भुत ताकत थी, जो सभी को मंत्रमुग्ध कर रही थी।

लड़का भजन गाता गया, और विक्रम ने देखा कि उसकी आंखों में आंसू हैं। उसे अपने बेटे का चेहरा याद आया, जो अभी अपने कमरे में सो रहा होगा, केक्स और गिफ्ट्स के सपने देखते हुए। दूसरी तरफ, यह बच्चा था, जिसकी पूरी रात भजन में निकल गई और सुबह वह फिर हॉस्पिटल भागेगा।

जब भजन समाप्त हुआ, तो विक्रम ने लड़के के पास जाकर कहा, “तुमने मेरी इज्जत बचाई। यह तेरे लिए है।” उसने अपने जेब से मोटा सा लिफाफा निकाला। लेकिन लड़के ने हाथ जोड़कर लिफाफा वापस कर दिया। “पैसे मत दीजिए अंकल। मेरी मां बहुत बीमार है। मैं भजन गाकर मां के लिए थोड़ा-थोड़ा पैसा जोड़ता हूं। अगर आप मेरी मदद करना चाहते हैं, तो यह पैसे मेरी मां के इलाज में लगा दो।”

विक्रम सन्न रह गया। उसे लगा था बच्चा पैसे के लिए गा रहा है, लेकिन यहां तो मामला उल्टा था। बच्चा दान नहीं, दुआ मांग रहा था। विक्रम ने तुरंत निर्णय लिया और बच्चे के साथ अस्पताल गया। उसने डॉक्टरों से कहा, “जो भी बेस्ट ट्रीटमेंट है, सब करिए। बिल मैं भरूंगा।”

कुछ महीनों में मां की हालत सुधारने लगी। एक दिन वह आईसीयू से जनरल वार्ड में आई और फिर कुछ हफ्तों बाद घर लौट आई। विक्रम हर महीने उनकी खबर लेता, कभी दवाई भेजता, कभी राशन। वह बच्चे को स्कूल में दाखिला करवाने की भी जिद करता।

धीरे-धीरे वह बच्चा सिर्फ नौकरानी का बेटा नहीं रहा, बल्कि उस पूरी कॉलोनी का छोटा भजन गायक बन गया। उसकी आवाज ने सभी का दिल जीत लिया। इंस्टाग्राम पर उसकी रील्स आई, और किसी ने उसका वीडियो वायरल कर दिया।

उस रात जब उसने पहली बार खुले मंच पर माता का गुणगान किया, उसने साबित कर दिया कि माता की भक्ति कपड़ों से नहीं देखी जाती। सच्ची श्रद्धा ही माता को सुनाई देती है।

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि जब इरादा साफ हो, तो मां खुद गायक चुन लेती हैं। कोई महंगा मशहूर नाम नहीं, बल्कि वह छोटा बच्चा जिसकी आवाज में सिर्फ श्रद्धा होती है।

जय माता दी!