गेट पर रोका बूढ़ा, निकला 3-स्टार जनरल, कांप उठा बेस!

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गेट पर रोका बूढ़ा, निकला 3-स्टार जनरल

प्रस्तावना

यह कहानी है एक ऐसे बूढ़े सैनिक की, जिसने अपने जीवन में कई युद्ध लड़े, अपने साथी जवानों का सिर गर्व से ऊंचा किया, लेकिन आज अपने ही देश की व्यवस्था और अपने ही परिवार के betrayal का शिकार हो रहा था। यह कहानी है उस जवान लड़की की, जिसने अपने दादाजी की वीरता और बलिदान को समझकर अपने जीवन का मिशन तय किया। यह कहानी है उस देशभक्ति और इंसानियत की, जिसने हर मोड़ पर अपने वतन का साथ दिया।

यह कहानी है उस जंग की, जो बाहर नहीं बल्कि अपने ही घर और अपने ही समाज के अंदर चल रही थी।

गर्मी का ताप, नसीराबाद का सूखा मैदान

शाम का समय था। राजस्थान का प्रसिद्ध नसीराबाद, जो अपनी गर्मी और सूखे खेतों के लिए जाना जाता है। उस दिन भी तेज धूप का कहर अपने पूरे शबाब पर था। दम घोट देने वाली लू ने पूरे वातावरण को झुलसा कर रख दिया था। सड़कें सूखी और बंजर थीं। हर तरफ वीरानगी का माहौल था।

उस भीषण गर्मी में, भारतीय सेना की प्रतिष्ठित राजपूताना राइफल्स का बेस था। यहां सब कुछ पिघल रहा था। इस जलते हुए बेस में, एक नई भर्ती, हवलदार प्रिया शर्मा, खड़ी थी। उसकी आंखों में नई बनी तलवार की धार जैसी चमक थी। उसकी आवाज में कोई भावना का अंश नहीं था, बल्कि अनुशासन की कठोरता थी।

उसने बूढ़े आदमी को देखा, जो धूप से झुलसा हुआ था। उसकी आंखें कठोर थीं, जैसे कोई सख्त नियम का पालन कर रहा हो। उसने कहा, “आपको लौट जाना चाहिए। यहाँ कोई जगह नहीं है, बिना पहचान के अंदर नहीं आ सकते।” उसकी आवाज में कठोरता थी, लेकिन उसके अंदर एक अनुशासन का जज्बा भी था।

बूढ़े का विनम्र अनुरोध और उसकी कहानी

बूढ़ा आदमी, जिसका नाम गजराज सिंह था, बहुत ही बुजुर्ग और थका हुआ था। उसकी आंखों में पुरानी यादें थीं। उसकी झुर्रियों से भरे चेहरे पर मेहनत का तप था। उसके खुरदरे हाथ, फटे हुए कपड़े, और सूखी चप्पलें उसकी गरीबी की कहानी कह रही थीं।

वह अपने पोते के लिए घर का बना खाना लेकर आया था। उसकी आंखों में एक उम्मीद थी कि वह अपनी पोती से मिल सके। उसने देखा कि प्रिया का चेहरा कठोर था, जैसे किसी स्टील की दीवार। उसने अपने दिल में सोचा, “काश, मेरी पोती बस एक बार उसका चेहरा देख ले।”

लेकिन प्रिया के लिए यह मुलाकात एक खतरनाक वायरस की तरह थी, जो यूनिट के अनुशासन को तोड़ सकता था। उसने साफ कह दिया, “आपका नाम सूची में नहीं है। आप अंदर नहीं आ सकते।” उसकी आवाज में कठोरता थी, लेकिन अंदर एक दर्द भी था।

उस बूढ़े की पीठ पर एक फीकी सी मुस्कान थी, जैसे उसने सबकुछ समझ लिया हो। वह धीरे-धीरे मुड़ गया, उसकी पीठ में दर्द था, लेकिन उसकी आंखों में एक हल्की सी उम्मीद जगी थी।

अंजलि का शॉक और उसकी शर्मिंदगी

उस समय, बैरक के गलियारे में, जवान सैनिकों के बीच, एक लड़की, अंजलि सिंह, अपने दादा की पीठ को देख रही थी। वह अपने दादाजी को पहचान नहीं पाई। उसकी आंखें फटी रह गईं। वह सोच रही थी, “यह वही बूढ़ा है जिसे मैंने भगा दिया था।”

उसने अपने साथियों से पूछा, “क्या यह मेरा दादा है?” उसके दिल में एक भारी दबाव था। उसकी आंखों में शर्म और अपराध का एहसास था। उसने अपने होंठ काट लिए और सोच लिया, “अगर मैं अभी भागकर उसे पुकारूं, तो सबको पता चल जाएगा कि मैं उसकी पोती हूं।”

उसने अपने मन में तय किया कि वह अपने दादा से मिलकर अपने दिल का सारा दर्द बयान करेगी। लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हुई। वह चुपचाप वापस चली गई। उसकी आंखें भर आईं, और उसने अपने दिल में ठाना कि वह अपने दादा का सम्मान फिर से लौटाएगी।

दादाजी का वीरतापूर्ण परिचय

कुछ ही देर बाद, वह बूढ़ा गजराज सिंह अपने पुराने कंबल में लिपटा, एक पेड़ के नीचे बैठा था। उसकी आंखें दूर कहीं खोई हुई थीं। उसकी यादें उसकी आंखों में तैर रही थीं। वह अपने जवान दिनों की वीरता को याद कर रहा था।

वह कह रहा था, “मैं एक सैनिक था, जो अपने देश के लिए लड़ता था। मेरी जिंदगी का मकसद था, अपने साथियों का सम्मान और देश की रक्षा।” उसकी आवाज में गर्व था, लेकिन साथ ही एक गहरा दर्द भी था।

उसने कहा, “मैंने अपने साथी जवानों के साथ बहुत लड़ाइयां लड़ीं। कई साथी शहीद हो गए, लेकिन मैं उनके परिवार का सहारा बना रहा।”

उसने अपने जीवन की कहानी सुनाई, कैसे उसने अपने साथी जवानों की जान बचाई, और अपने जीवन का सबसे बड़ा बलिदान दिया। वह कह रहा था, “मैंने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ पाया, लेकिन अपने ही परिवार के betrayal ने मुझे तोड़ कर रख दिया।”

सच्चाई का खुलासा और उसकी पीड़ा

उस बूढ़े ने कहा, “मेरा नाम गजराज सिंह था। मैं सेना में था। लेकिन मेरी कहानी सिर्फ युद्ध का नहीं है। यह उस दर्द की कहानी है, जो मैंने अपने ही परिवार के betrayal में पाया।”

उसने बताया कि उसके बेटे और पोते ने उसकी सारी दौलत हड़प ली, और उसे जमीन पर छोड़कर चले गए। वह बूढ़ा, जिसने अपने जीवन का सारा सम्मान देश की सेवा में लगाया, आज अपने ही परिवार के betrayal का शिकार था।

उसने कहा, “मैंने अपने बेटे को बहुत प्यार किया, लेकिन उसने मेरी सारी दौलत और सम्मान को मिट्टी में मिला दिया।” उसकी आंखों में आंसू थे, और उसकी आवाज में एक टूटन थी।

मिशन की शुरुआत और नई उम्मीद

उस बूढ़े ने अपने साथियों से कहा, “मुझे अपनी पूरी जिंदगी का बदला लेना है। मैं अपने बेटे और पोते को सजा दिलवाना चाहता हूं।”

प्रिया और अंजलि ने तय किया कि वे इस सच्चाई का पर्दाफाश करेंगे। उन्होंने अपने पुराने दस्तावेज़, तस्वीरें और सबूत इकट्ठे किए।

उन दोनों ने मिलकर उस बूढ़े की कहानी को सामने लाने का फैसला किया। उन्होंने सोचा कि अब उन्हें अपने देश की सच्चाई को दुनिया के सामने लाना है।

अंत में: न्याय और सम्मान की जीत

आखिरकार, वह दिन आया जब सभी सबूतों के साथ, उन्होंने अपने मिशन को पूरा किया। उनके सामने उनके ही परिवार के betrayal का सच था। उस बेटे और पोते को गिरफ्तार कर लिया गया।

विक्रम और उसकी पोती, अंजलि, उस दिन गर्व से खड़ी थीं। उन्होंने अपने देश का सम्मान फिर से लौटाया। उनकी आंखों में अब एक नई उम्मीद जगी थी।

उनकी कहानी हमें सिखाती है कि सच का सामना करना जरूरी है। चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, यदि हम हिम्मत और ईमानदारी से काम लें, तो हर जालिम का अंत होता है।

निष्कर्ष

यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि परिवार की कीमत दौलत से नहीं, बल्कि प्यार और ईमानदारी से होती है। यदि हमारे पास सच्चाई और हिम्मत है, तो हम किसी भी कठिनाई का सामना कर सकते हैं। और अंत में, सच की जीत हमेशा होती है।