जब आर्मी जवान थाने में रिपोर्ट लिखवाने गया फिर जो हुआ सब हैरान।
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सेना के जवान का भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष
एक व्यस्त बाजार में, दुकानदारों की आवाज़ें और ग्राहकों की मोलभाव की आवाज़ें गूंज रही थीं। इस भीड़ में, एक जवान रोहन, जो छुट्टी पर था, अपने परिवार के लिए ताजे फल और सब्जियाँ खरीदने आया था। उसे नहीं पता था कि वह एक ऐसा भ्रष्टाचार देखेगा जो सब कुछ बदल देगा।
जब रोहन बाजार में घूम रहा था, उसने देखा कि एक पुलिस अधिकारी, दरोगा गुप्ता सिंह, स्थानीय दुकानदारों से पैसे मांग रहा था। उसके हाथ में एक मोटी रजिस्टर थी, जिसमें वह नाम लिख रहा था और पैसे अपनी जेब में डाल रहा था। रोहन का दिल तेजी से धड़कने लगा जब उसने देखा कि एक बुजुर्ग सब्जी बेचने वाले से गुप्ता पैसे मांग रहा है। गुस्सा उसके चेहरे पर स्पष्ट था।
निर्णय लेते हुए, रोहन ने ठान लिया कि वह चुप नहीं रह सकता। अगले दिन, उसने जल्दी उठकर एक ठेला किराए पर लिया और उसमें सब्जियाँ भरकर बाजार में खड़ा हो गया। उसे पता था कि गुप्ता इस समय वसूली के लिए आएगा। जब रोहन ने अपना ठेला लगाया, तो स्थानीय लोग हैरान थे कि एक सेना का जवान ठेला क्यों लगा रहा है। उसने किसी से बात नहीं की, उसका चेहरा दृढ़ था।
लगभग एक घंटे बाद, गुप्ता अपनी अकड़ के साथ आया। जैसे ही वह रोहन के ठेले पर आया, उसने बिना देखे ही हाथ बढ़ाया और कहा, “चल पैसे निकाल।” रोहन ने ठंडे स्वर में कहा, “पैसे किस बात का, दरोगा साहब?”
गुप्ता पहले तो हैरान हुआ, फिर हंसने लगा, “ओ नया है क्या? लगता है आज ही आया है तू, देना।” रोहन ने कहा, “मैं कोई पैसा नहीं दूंगा।” गुप्ता का चेहरा तमतमा गया। उसने तुरंत रोहन का कॉलर पकड़ लिया और गुस्से में कहा, “बहुत हीरो बन रहा है। पता है मैं कौन हूं?”
भीड़ इकट्ठा होने लगी। गुप्ता ने गुस्से में रोहन को एक जोरदार थप्पड़ मारा। ठेला हिल गया और कुछ सब्जियाँ गिर गईं। भीड़ में सन्नाटा छा गया। किसी की हिम्मत नहीं थी कि बीच में आए। लेकिन रोहन की आंखों में गुस्सा था। उसने धीरे-धीरे अपना कॉलर छुड़ाया और कहा, “दरोगा साहब, इसका बदला मैं जरूर लूंगा।”
अगले दिन, रोहन थाने पहुंचा। थाने के बाहर पुलिस की जीप खड़ी थी और अंदर से हंसी-मजाक की आवाजें आ रही थीं। रोहन अंदर गया तो देखा कि एसएओ साहब अपनी कुर्सी पर बैठे समोसे खा रहे थे। गुप्ता सिंह भी वहीं मुस्कुरा रहा था।
रोहन ने सीधे एसएओ के सामने खड़े होकर कहा, “साहब, मैं गुप्ता सिंह की शिकायत दर्ज कराना चाहता हूं। उसने कल बाजार में मेरे साथ बदतमीजी की और थप्पड़ मारा।” एसएओ ने कहा, “यहां कोई रिपोर्ट नहीं लिखी जाती, चलो यहां से।”
रोहन ने कहा, “रिपोर्ट तो थाने में ही लिखी जाती है।” एसएओ ने कहा, “रिपोर्ट लिखी जाएगी, लेकिन पहले ₹10 लगेंगे।” रोहन ने कहा, “₹10 किस बात के?” एसएओ ने ठंडे चेहरे से कहा, “यह हमारे थाने का नियम है। दे सकते हो तो ठीक है, नहीं तो यहां से जाओ।”
रोहन का गुस्सा बढ़ गया। उसने कहा, “रिपोर्ट तो फ्री में लिखी जाती है। यह कौन सा नया नियम है?” गुप्ता सिंह पीछे से हंस पड़ा। “यही नियम है यहां का। जो रिपोर्ट लिखवाएगा, वह पैसे देगा। वरना जाकर कहीं और कोशिश कर लो।”
रोहन ने एसएओ की आंखों में देखते हुए कहा, “यह नियम नहीं, रिश्वत है। आप लोगों का काम जनता की मदद करना है, उनसे पैसे लेना नहीं। मैं यह ₹10,000 नहीं दूंगा।” एसएओ का चेहरा गंभीर हो गया। उसने टेबल पर हाथ मारा और जोर से कहा, “ज्यादा समझदार मत बन। यह थाना है। यहां वही होता है जो हम चाहते हैं। अगर शिकायत करनी है तो पैसे दो, वरना दरवाजा खुला है।”
रोहन का गुस्सा खौल उठा। लेकिन उसने खुद को काबू में रखा। वह जानता था कि अगर अभी गुस्से में कोई कदम उठाया तो मामला उसके खिलाफ जा सकता है। उसने गहरी सांस ली और कहा, “साहब, मैं यहां से खाली हाथ नहीं जाऊंगा। अगर यहां रिपोर्ट नहीं लिखी गई तो मैं ऊपर तक जाऊंगा।”
एसएओ ने हंसते हुए कहा, “ऊपर तक जाओ, नीचे तक जाओ। यहां कुछ नहीं होगा। गुप्ता सिंह हमारा आदमी है। समझे?” रोहन ने बिना कुछ कहे मुड़कर थाने का दरवाजा खोला और बाहर निकल गया। लेकिन उसके चेहरे पर अब पहले से ज्यादा सख्ती थी।
जैसे ही वह थाने से बाहर निकला, दो पुलिस वाले उसके पीछे आए और बोले, “साहब ने कहा है ज्यादा हीरो मत बन। बात समझ में नहीं तो अंदर करने में एक मिनट भी नहीं लगेगी।” रोहन के कदम तेज हो गए थे। उसका चेहरा पत्थर जैसा सख्त था। लेकिन तभी उसे महसूस हुआ कि कोई पीछे आ रहा है। उसने बिना मुड़े तेज कदमों से सड़क पार की और बाजार की तरफ मुड़ गया।
बाजार में सब्जी वाले अपनी दुकानें सजा रहे थे। ग्राहक मोलभाव कर रहे थे। लेकिन उसने एक बार पीछे मुड़कर देखा। वहीं दो कांस्टेबल थे जो थाने में भी मौजूद थे। उनकी आंखों में अजीब सी चमक थी। “बहुत बहादुर बन रहा है ना तू? अभी बताते हैं तुझे असली कानून,” उनमें से एक बोला।

रोहन ने शांत आवाज में कहा, “कानून तुम्हारे हाथ में नहीं है। मैं जानता हूं तुम लोग किसके कहने पर आए हो।” तभी दूसरे कांस्टेबल ने आगे बढ़कर रोहन के गाल पर जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। बाजार में मौजूद लोग सन्न रह गए। कुछ ठेले वालों ने फुसफुसाना शुरू कर दिया। लेकिन कोई आगे नहीं बढ़ा।
पहले कांस्टेबल ने कॉलर पकड़ कर कहा, “तेरी हिम्मत कैसे हुई एसएओ और दरोगा गुप्ता सिंह के आगे बोलने की? आज तुझे सबक सिखाना ही पड़ेगा।” रोहन ने कहा, “मैं डरने वाला नहीं हूं। तुम लोग चाहे जितना मार लो लेकिन मैं चुप नहीं बैठूंगा।”
कांस्टेबल गुस्से से तिलमिला गए। भीड़ अब इकट्ठी हो चुकी थी। लोग शोर मचाने लगे, “अरे छोड़ो उसे, मार क्यों रहे हो?” लेकिन कांस्टेबल पर कोई असर नहीं हुआ। वे फिर से रोहन पर टूट पड़े। इस बार रोहन ने पूरी ताकत से एक कांस्टेबल को धक्का दिया जिससे वह ठेले से टकराकर नीचे गिर पड़ा। दूसरा कांस्टेबल पीछे हटा।
रोहन की आंखों में अब गुस्सा उतर आया था। बाजार में मौजूद लोग भी अब रोहन का नाम लेने लगे। “जवान है यह, अकेला लड़ रहा है। कोई तो मदद करो।” लेकिन इससे पहले कि कोई मदद को आगे आता, गुप्ता सिंह खुद वहां पहुंच गया। उसकी आंखों में गुस्सा साफ झलक रहा था।
“अरे बस करो,” वह चिल्लाया। “इसे जाने दो।” कांस्टेबल ने रोहन को पकड़ लिया। गुप्ता सिंह उसके पास आया और उसके गाल पर एक और जोरदार थप्पड़ मारा। “अब भी समझ में नहीं आया? यह शहर हमारा है। यहां वही होगा जो हम चाहेंगे।”
रोहन ने धीरे से अपना सिर ऊपर उठाया और आंखों में आंखें डालकर कहा, “तुम्हारा वक्त अब खत्म होने वाला है। तुम लोगों ने जिस दिन मुझे मारा था, उसी दिन यह लड़ाई शुरू हो गई थी। अब मैं इसे खत्म करके ही दम लूंगा।”
गुप्ता सिंह ने ताना मारते हुए कहा, “देखते हैं तेरी यह बहादुरी कब तक रहती है।” इसके बाद उन्होंने कांस्टेबल को इशारा किया और सब वहां से चले गए। रोहन की आंखों में डर नहीं था। सुबह होते ही उसने पहला फोन अपने बचपन के दोस्त अमित को किया जो पास के शहर में पत्रकार था। “अमित, मुझे तेरी मदद चाहिए। कुछ बड़ा होने वाला है। आज शाम तक गांव आजा।”
दूसरा फोन उसने सुरेश को किया जो जिला मुख्यालय में वकील था। “सुरेश भाई, एफआईआर दर्ज करानी है। शाम तक पहुंचो।” तीसरा फोन उसने रवि को किया जो आर्मी में उसी के साथ था। “रवि, जल्दी से जल्दी आना।”
रोहन ने तय कर लिया था कि अब वह अकेला नहीं लड़ेगा। शाम तक तीनों दोस्त गांव पहुंच गए। रोहन ने उन्हें पूरी घटना सुनाई। सबके चेहरे पर गुस्सा साफ दिख रहा था। “आज अगर हम चुप रहे, तो कल यह किसी और के साथ करेंगे,” रवि ने कहा।
“सही कहा,” सुरेश ने कहा। “इस बार हम कानूनी तरीके से ही इन्हें सबक सिखाएंगे। डीएम मैडम को कॉल करना पड़ेगा।” चारों ने मिलकर योजना बनाई और थाने पर पहुंचे। अंदर वही एसएओ बैठा था। लेकिन इस बार उसकी हंसी गायब थी। गुप्ता सिंह भी वहीं बैठा था, लेकिन दोनों के चेहरों पर हल्की बेचैनी थी।
एसएओ ने कहा, “अरे वाह, हीरो साहब फिर आ गए। और यह कौन है? पत्रकार, वकील?” रोहन ने सीधे कहा, “साहब, आज रिपोर्ट लिखवाने नहीं आया। आज सच्चाई दिखाने आया हूं और ये लोग गवाह हैं। अब आप डीएम मैडम से बात करेंगे।”
एसएओ का चेहरा लाल हो गया। “अरे, हमें सिखाएगा तू कि हमें किससे बात करनी है?” रोहन ने बिना कुछ कहे फोन निकाला और सीधे डीएम मैडम को कॉल लगाया। “नमस्ते मैडम। मैं आर्मी जवान रोहन बोल रहा हूं। कल थाने में मेरे साथ मारपीट हुई। रिश्वत मांगी गई और आज बाजार में मुझे दो कांस्टेबल ने मारा। एसएचओ और दरोगा गुप्ता सिंह इसमें शामिल हैं। हम सब अभी थाने में हैं। क्या आप आ सकती हैं?”
फोन के दूसरी तरफ से आवाज आई, “मैं अभी आ रही हूं। थाने से हिलना मत।” करीब आधे घंटे बाद थाने के बाहर गाड़ियां आती हुई दिखाई दीं। डीएम मैडम अपनी सरकारी गाड़ी से उतरीं।
डीएम मैडम सीधी अंदर आईं और बोलीं, “कौन है रोहन?” रोहन आगे बढ़ा। “जी, मैं पूरी बात बताऊं।” डीएम मैडम ने आदेश दिया। रोहन ने शुरू से लेकर बाजार वाली घटना तक सब कुछ बताया।
डीएम मैडम का चेहरा कड़क हो गया। उन्होंने एसएओ और गुप्ता सिंह की ओर देखा। “क्या यह सब सच है?” एसएओ कुछ बोलने ही वाला था कि डीएम मैडम ने टेबल पर हाथ मारा। “चुप रहिए। यह थाना है या अड्डा। जनता से रिश्वत लेते हो, बाजार में मारते हो और फिर हंसते भी हो।”
गुप्ता सिंह पसीनापसीना हो गया। “मैडम, यह सब झूठ बोल रहा है।” लेकिन डीएम मैडम चिल्लाईं, “झूठ! वीडियो में साफ दिख रहा है कि तुम थप्पड़ मार रहे हो। क्या यह झूठ है?” फिर उन्होंने महिला सब इंस्पेक्टर को आदेश दिया, “अभी के अभी एसएचओ और दरोगा को सस्पेंड करो।”
डीएम मैडम ने आदेश दिया, “तुम्हें अभी की अभी सस्पेंड किया जाता है।” दोस्तों, यह वीडियो केवल मनोरंजन के उद्देश्य से बनाई गई थी। यह कोई सच्ची घटना नहीं है। और हां दोस्तों, मुझे पूरी उम्मीद है कि यह वीडियो आपको जरूर पसंद आई होगी। इसलिए वीडियो के लिए एक लाइक तो बनता है। ऐसी ही और वीडियो देखने के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें और वीडियो को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूलें।
तो दोस्तों, मिलते हैं अगली वीडियो में एक नई कहानी के साथ।
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