जब कचरा बिनने वाला लड़का चिल्लाया- मंत्री जी हटो इसका इंजन खराब है फिर…Aarzoo Voice

.
.

.

जब कचरा बिनने वाला लड़का चिल्लाया: मंत्री जी हटो, इसका इंजन खराब है!

सुबह के 6:00 बजे थे, और राजधानी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमेशा की तरह रौनक थी। टर्मिनल टू के बाहर हजारों लोगों की भीड़ थी। कुछ अपने अपनों से मिलने आए थे, तो कुछ विदाई देने। लेकिन आज का दिन खास था क्योंकि भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी, भारत एक्सप्रेस एयरवेज का नया गरुड़ 350 अपनी पहली इंटरनेशनल उड़ान भरने वाला था। टर्मिनल के बाहर बड़े-बड़े पोस्टर लगे थे, जो इस नए विमान का स्वागत कर रहे थे। “स्वागत है भारत एक्सप्रेस के नए युग में, भारत का सबसे आधुनिक और सुरक्षित विमान।” पोस्टर में चमचमाता हुआ सफेद और नीले रंग का विमान दिख रहा था, जिसके नीचे बड़े अक्षरों में लिखा था, “सुरक्षा हमारी प्राथमिकता, आपकी खुशी हमारा लक्ष्य।”

लेकिन इस चकाचौंध के ठीक पीछे, टर्मिनल के कूड़े के ढेर के पास, 11 साल का अर्जुन अपनी छोटी सी प्लास्टिक की बोतल और कागज के टुकड़े बिन रहा था। उसके कपड़े फटे और मैले थे, चेहरे पर धूल की परतें जमी हुई थीं। पैरों में पुराने फटे चप्पल थे, जिनका तला लगभग निकल चुका था। लेकिन उसकी आंखों में एक अलग सी चमक थी। वह सिर्फ कचरा नहीं बिन रहा था, बल्कि दूर रनवे पर खड़े विमानों को बड़े ध्यान से देख रहा था। हर बार जब कोई विमान टेक ऑफ करता या लैंड करता, अर्जुन अपना काम रोककर उसकी आवाज सुनता था।

अर्जुन के पास एक खास गुण था। वह विमानों की आवाज सुनकर बता सकता था कि इंजन में कोई समस्या है या नहीं। यह काबिलियत उसे अपने पिता से मिली थी। लेकिन वह अभी नहीं जानता था कि उसका पिता कौन है। 8 साल पहले की बात है। अर्जुन सिर्फ 3 साल का था जब वह अपने पिता के साथ इसी एयरपोर्ट में खो गया था। उसके पिता, कैप्टन विकास मेहता, भारत एक्सप्रेस एयरवेज के चीफ पायलट और इंजीनियर थे। उस दिन वह अर्जुन को एयरपोर्ट घुमाने लाए थे।

“देखो बेटा,” कैप्टन विकास ने छोटे अर्जुन को गोद में उठाकर विमान दिखाया था। “यह इंजन है। यह विमान का दिल है। जब यह सही तरीके से काम करता है, तो एक खास आवाज निकालता है। लेकिन अगर इसमें कोई खराबी हो, तो आवाज बदल जाती है। तुम्हें ध्यान से सुनना होगा।” उस दिन भीड़ में अर्जुन अपने पिता से बिछड़ गया था। तलाश के बावजूद वह नहीं मिला। कैप्टन विकास का दिल टूट गया था। वह रोज अर्जुन को ढूंढते रहे।

साल गुजरे, अर्जुन बड़ा हुआ लेकिन उसे अपना नाम तक याद नहीं था। महेश, एक दयालु आदमी, उसे अपना बेटा मानकर उसकी देखभाल करता था। अर्जुन उसे दादाजी कहकर बुलाता था। महेश उसे रोज इसी एयरपोर्ट के बाहर कचरा बिनने के लिए लाता था। अर्जुन सिर्फ इतना जानता था कि उसे विमान अच्छे लगते हैं और वह उनकी आवाज समझ सकता है। जब भी कोई विमान उड़ता या उतरता, अर्जुन खुशी से तालियां बजाता था।

आज सुबह, अर्जुन रनवे के पास कचरा बीन रहा था जब उसकी नजर उस चमचमाते नए गरुड़ 350 पर पड़ी। विमान खूबसूरत लग रहा था, दो मंजिला विशालकाय जिसमें 350 यात्री बैठ सकते थे। इसके इंजन बहुत बड़े और शक्तिशाली थे। लेकिन जैसे ही उसने ध्यान से सुना, उसके चेहरे का रंग बदल गया। इंजन की आवाज सामान्य नहीं थी। यह “भूम” की जगह “भू-क्रक-क्र” कर रही थी। अर्जुन का दिल तेजी से धड़कने लगा। उसे अपने पिता की बात याद आई, जो उसके अवचेतन में कहीं दबी पड़ी थी।

यह आवाज खतरे का संकेत थी। उसने देखा कि इंजन के फैन ब्लेड के पास कुछ अजीब कंपन हो रहा था। वह नंगी आंखों से देख सकता था कि इंजन कवर में एक छोटी सी दरार थी। यह दरार छोटी लग रही थी, लेकिन अर्जुन जानता था कि 35,000 फीट की ऊंचाई पर यह छोटी दरार भयानक दुर्घटना का कारण बन सकती है।

अर्जुन भागकर रनवे की बाढ़ के पास गया। वहां एक सिक्योरिटी गार्ड राम सिंह खड़ा था। “अंकल, अंकल,” अर्जुन ने उसका हाथ पकड़कर कहा, “वह प्लेन, उसमें खराबी है। उसे उड़ने मत दो।” गार्ड ने अर्जुन को धक्का देकर हटा दिया। “भाग यहां से, गंदे लड़के। यहां तेरा काम नहीं है। कचरा बिनने आया है तो चुपचाप अपना काम कर।” लेकिन अर्जुन हार नहीं मानने वाला था। वह जानता था कि इस विमान में कुछ गड़बड़ है।

वह दौड़कर मुख्य टर्मिनल की तरफ गया। रास्ते में उसे एक सफाई कर्मचारी सुनील मिला, जो उसे पहचानता था। “अर्जुन बेटे, इतनी जल्दी में कहां जा रहा हो?” सुनील ने पूछा। “सुनील अंकल, वह प्लेन गरुड़ 350 में खराबी है। मुझे किसी को बताना है।” सुनील ने अर्जुन का हाथ पकड़ा। “बेटा, तू गलत जगह जा रहा है। आज बहुत बड़े लोग आए हैं। मंत्री जी भी आने वाले हैं। तू वहां नहीं जा सकता।”

“तो फिर मैं क्या करूं अंकल? मैं सच कह रहा हूं। प्लेन में इंजन की समस्या है।” सुनील ने सोचा। उसे लगता था कि यह बच्चा कुछ ज्यादा ही कल्पना कर रहा है। लेकिन अर्जुन की आंखों में जो डर और सच्चाई थी, वो उसे दिखी। “ठीक है बेटा। मैं तुझे चीफ इंजीनियर सुरेश कुमार जी के पास ले चलता हूं। लेकिन वहां चुपचाप रहना।”

टर्मिनल में आज खास चहल-पहल थी। मीडिया वाले, कैमरामैन और बड़े-बड़े अधिकारी मौजूद थे। क्योंकि आज सिविल एवीएशन मंत्री राजेश कुमार सिंह इस पहली उड़ान का उद्घाटन करने आने वाले थे। साथ में 15 अन्य वीआईपी भी इस फ्लाइट में सफर करने वाले थे।

भारत एक्सप्रेस एयरवेज के सीईओ अमित गुप्ता मीडिया को बाइट दे रहे थे। “यह भारतीय विमानन का एक ऐतिहासिक दिन है। हमारा नया गरुड़ 350 दुनिया के सबसे सुरक्षित विमानों में से एक है। इसकी हर जांच हो चुकी है। यह मेड इन इंडिया का बेहतरीन उदाहरण है।” कैमरा फ्लैश कर रहे थे। रिपोर्टर सवाल पूछ रहे थे।

“सर, इस विमान की खासियत क्या है?” एक रिपोर्टर ने पूछा। “देखिए, यह विमान पूरी तरह से भारतीय टेक्नोलॉजी से बना है। इसके इंजन में आधुनिक टेक है। यह 900 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें एआई बेस्ड सेफ्टी सिस्टम लगा है जो हर सेकंड विमान की जांच करता रहता है।”

लेकिन सच्चाई यह थी कि इस विमान की जल्दबाजी में तैयारी हुई थी। कंपनी को मंत्री जी के प्रोग्राम के हिसाब से विमान तैयार करना पड़ा था। कुछ जरूरी जांचें अधूरी रह गई थीं। लेकिन कंपनी का प्रेशर था कि विमान समय पर तैयार होना चाहिए, नहीं तो करोड़ों रुपए का नुकसान होगा।

चीफ इंजीनियर सुरेश कुमार को भी कुछ शंकाएं थीं। वह पिछले 25 सालों से एवीएशन इंडस्ट्री में काम कर रहा था। उसका अनुभव कह रहा था कि कुछ गड़बड़ है। उसने सीईओ अमित गुप्ता से कहा था, “सर, मुझे लगता है हमें एक दिन और रुकना चाहिए। कुछ टेस्ट बाकी हैं। खासकर इंजन के फैन ब्लेड की जांच अधूरी है।” लेकिन अमित गुप्ता ने उसकी बात नहीं सुनी थी।

“देखिए सुरेश जी। मंत्री जी आ रहे हैं। मीडिया का पूरा सेटअप हो गया है। हमने करोड़ों रुपए इस इवेंट पर खर्च किए हैं। अब प्रोग्राम कैंसिल नहीं हो सकता। आप ज्यादा टेंशन ना लें। यह विमान पूरी तरह सेफ है।”

सुरेश कुमार चुप हो गया था। उसे अपनी नौकरी की चिंता थी। वह जानता था कि अगर उसने ज्यादा जिद की तो उसे निकाल दिया जाएगा। लेकिन उसका दिल कह रहा था कि कुछ गलत है। इसी वक्त सुनील अर्जुन को लेकर सुरेश कुमार के पास आया। “सर, यह बच्चा कह रहा है कि प्लेन में कोई खराबी है।”

सुरेश कुमार ने अर्जुन को देखा। एक गंदा मैला कुचैला बच्चा। उसने हंसकर कहा, “अरे भाई, यह बच्चा है। इसे क्या पता विमान के बारे में?” लेकिन अर्जुन आगे बढ़ा। उसकी आंखें चमक रही थीं। “अंकल, मैंने देखा है गरुड़ 350 के राइट इंजन में दरार है और इंजन से अजीब आवाज आ रही है।”

सुरेश कुमार का चेहरा गंभीर हो गया। यह बच्चा टेक्निकल टर्म्स का इस्तेमाल कर रहा था। “फैन ब्लेड के बारे में कैसे पता?” “मुझे पता है अंकल। मैं रोज यहां आता हूं। प्लेन देखता हूं। इनकी आवाज सुनता हूं। जब इंजन ठीक होता है तो फूम आवाज होती है, लेकिन उसमें क्रक क्रक आवाज आ रही है। यह खराब है।”

सुरेश कुमार का दिल धक्क से रह गया। वह जानता था कि क्रैकिंग साउंड का मतलब क्या होता है। “तुमने कहां सीखा यह सब?” अर्जुन ने सिर हिलाया। “मुझे याद नहीं, बस पता है।” सुरेश कुमार की शंकाएं और भी बढ़ गईं। उसने तुरंत अपनी टीम को बुलाया। “राज प्रदीप, तुम लोग तुरंत गरुड़ 350 के राइट इंजन को चेक करो। खासकर फैन ब्लेड को देखो।”

“लेकिन सर, हमने तो कल ही चेक किया था।” “मैंने कहा है तो करो। जल्दी करो।” इंजीनियर्स की टीम विमान की तरफ गई। 20 मिनट बाद वे वापस आए। उनके चेहरे पीले थे। “सर, बच्चा सही कह रहा था। राइट इंजन के फैन ब्लेड में हेयर लाइन क्रैक है। यह बहुत खतरनाक है।”

सुरेश कुमार के होश उड़ गए। “क्या यह कैसे हो सकता है? कल तो सब ठीक था।” “सर, लगता है रात के वक्त ग्राउंड टेस्टिंग के दौरान यह क्रैक डेवलप हुई है। अगर यह विमान उड़ता तो हाई एटीट्यूड पर प्रेशर के कारण यह क्रैक बढ़ जाती और पूरा इंजन ब्लास्ट हो जाता।”

सुरेश कुमार अर्जुन के पास आया। उसकी आंखों में आंसू थे। “बेटे, तुमने हम सबकी जान बचाई है। तुम्हें कैसे पता चला?” अर्जुन ने मासूमियत से कहा, “अंकल, मुझे नहीं पता, बस आवाज से लगा। पापा कहते थे कि इंजन की आवाज बहुत कुछ बता देती है।”

सुरेश कुमार भागा हुआ अमित गुप्ता के पास गया। “सर, गरुड़ 350 उड़ नहीं सकता। इंजन में क्रैक है।” अमित गुप्ता का चेहरा लाल हो गया। “क्या बकवास कर रहे हो? मंत्री जी 10 मिनट में आने वाले हैं। सब तैयारी हो गई है।” “सर, मैं सच कह रहा हूं। अगर यह विमान उड़ा तो क्रैश हो जाएगा। 350 लोग मारे जाएंगे।”

“यह सब तुम्हारा वहम है। विमान बिल्कुल ठीक है।” “सर, एक 11 साल के बच्चे ने हमें बताया और हमने चेक किया है। क्रैक कंफर्म है।” अमित गुप्ता हैरान रह गया। “कौन सा बच्चा?” सुरेश कुमार ने अर्जुन को बुलाया। अमित गुप्ता ने अर्जुन को देखा। “एक छोटा सा मैला कुचैला लड़का। यह जोक है क्या? इस गंदे बच्चे की बात पर तुम विमान कैंसिल करने को कह रहे हो।”

इसी वक्त बाहर साइरेंस की आवाज आई। मंत्री जी का कॉर्नवॉय आ गया था। 15 काली चमचमाती एसयूवी, पुलिस एस्कॉट्स, ब्लैक कैट कमांडोज़ का पूरा सेटअप। मीडिया हड़बड़ाहट में अपने कैमरा सेटअप करने लगा। अमित गुप्ता ने सुरेश कुमार से कहा, “देखो, अब कुछ नहीं हो सकता। प्रोग्राम होगा, विमान उड़ेगा, यह फाइनल है।”

लेकिन अर्जुन यह सब सुन रहा था। उसे समझ आ गया कि यह लोग उसकी बात नहीं मानने वाले। उसका दिल धड़क रहा था। उसे लगा जैसे कोई बुरा सपना हो। उसने देखा कि मंत्री जी और उनके साथ आए वीआईपी लोग टर्मिनल में आ रहे हैं। सबके चेहरों पर खुशी है। वे सभी उस गरुड़ 350 में सवार होने वाले हैं, जो उड़ने के बाद क्रैश हो जाएगा।

अर्जुन का दम घुटने लगा। वह भागा हुआ बाहर आया। वहां उसे महेश मिला, जो उसे ढूंढ रहा था। “अर्जुन बेटा, कहां गया था? मैं तुझे ढूंढ रहा था।” “दादा जी, वह प्लेन गरुड़ 350 में खराबी है। बड़े-बड़े लोग बैठेंगे। मंत्री जी भी, लेकिन उसका इंजन खराब है। सब मर जाएंगे।”

महेश ने अर्जुन को गले लगाया। “बेटा, तू यह सब क्यों सोचता है? यहां बड़े-बड़े इंजीनियर हैं। वे गलत थोड़ी करेंगे।” “नहीं दादा जी, मैंने बताया है इंजीनियर अंकल को। उन्होंने चेक भी किया, लेकिन बड़े साहब नहीं मान रहे।” महेश समझ गया कि अर्जुन परेशान है।

“तो फिर हम क्या कर सकते हैं बेटा?” अर्जुन की आंखों में एक अजीब सा डिटरमिनेशन आया। “दादा जी, मुझे वहां जाना है। मंत्री जी से मिलना है।” “नहीं बेटा, वहां बहुत सिक्योरिटी है। तुझे अंदर नहीं जाने देंगे।”

“तो मैं बाहर से ही चिल्लाऊंगा। जब तक वे नहीं सुनेंगे।” अर्जुन महेश का हाथ छोड़कर टर्मिनल की तरफ दौड़ा। महेश भी उसके पीछे दौड़ा। “अर्जुन, रुक वापस आ।”

टर्मिनल के अंदर मंत्री राजेश कुमार सिंह का स्वागत हो रहा था। उनके गले में फूलों की माला पड़ी थी। मीडिया उनसे सवाल पूछ रहा था। “मंत्री जी, यह गरुड़ 350 भारतीय विमानन के लिए कितना महत्वपूर्ण है?”

“देखिए, यह मेक इन इंडिया का सबसे अच्छा उदाहरण है। हमारे देश के इंजीनियर्स ने इसे बनाया है। यह दुनिया के सबसे एडवांस्ड विमानों में से एक है।” अमित गुप्ता भी खुश था। उसे लग रहा था कि सब कुछ प्लान के अनुसार हो रहा है।

सुरेश कुमार एक कोने में चुपचाप खड़ा था। उसका दिल बार-बार कह रहा था कि यह गलत है। लेकिन वह कुछ नहीं कर सकता था। अचानक बाहर से एक तेज आवाज आई। “मंत्री जी, मंत्री जी, रुक जाइए। प्लेन उड़ाने मत दीजिए।”

यह अर्जुन की आवाज थी। उसने टर्मिनल के बाहर से पूरी ताकत से चिल्लाया था। अंदर सब ने सुना। मंत्री जी ने पूछा, “यह कौन चिल्ला रहा है?” सिक्योरिटी चीफ ने रेडियो पर पूछा, “कोई बच्चा है सर, हैंडल कर रहे हैं।”

बाहर दो सिक्योरिटी गार्ड्स अर्जुन को पकड़ने के लिए दौड़े, लेकिन अर्जुन फुर्तीला था। “मंत्री जी, गरुड़ 350 का इंजन खराब है। सब लोग मर जाएंगे। प्लीज रुक जाइए।” अंदर मंत्री जी परेशान हो गए। “यह कैसी आवाज आ रही है? कोई बच्चा परेशान कर रहा है?”

“सर, कोई पागल बच्चा है? आप टेंशन ना लें। अभी हैंडल हो जाएगा।” लेकिन सुरेश कुमार को लगा कि यह अर्जुन की आवाज है। वह जानता था कि वह बच्चा सच कह रहा है। उसने हिम्मत जुटाई। “सर, एक मिनट रुकिए। यह बच्चा सच कह रहा है।”

अमित गुप्ता गुस्से से बोला, “तुम चुप रहो। मंत्री जी को परेशान ना करो।” बाहर अर्जुन अभी भी चिल्ला रहा था। अब कुछ लोग उसके आसपास जमा हो गए थे। “यह क्या कह रहा है? कोई पागल लड़का है। इसे पकड़ो कोई।”

लेकिन महेश ने अर्जुन को बचाया। “यह मेरा पोता है। यह पागल नहीं है। यह सच कह रहा है।” कुछ लोगों ने महेश से पूछा, “क्या बात है? यह क्यों चिल्ला रहा है?” महेश ने कहा, “यह कहता है कि विमान में खराबी है। इंजन ठीक नहीं है।”

लोग हैरान हुए। “एक छोटा बच्चा इंजन के बारे में कैसे जान सकता है?” इसी वक्त कुछ एयरपोर्ट एंप्लाइज भी वहां आए। उनमें सुनील भी था। “अरे, यह तो वही बच्चा है जो सुरेश सर के पास गया था।”

“क्या बात है? यह बच्चा सच कह रहा है। इसने बताया था कि गरुड़ 350 के इंजन में क्रैक है। सुरेश सर ने चेक कराया तो सच में क्रैक मिली।” यह बात सुनकर भीड़ में हलचल मच गई। “क्या इसने सच में क्रैक डिटेक्ट की?” “हां। लेकिन सीईओ साहब नहीं मान रहे।”

“अरे, यह तो बहुत गंभीर बात है। अगर क्रैक है तो विमान क्रैश हो जाएगा।” अब भीड़ बढ़ने लगी। लोग चिल्लाने लगे। “विमान रोको। बच्चा सच कह रहा है। मंत्री जी को बताओ।”

यह आवाजें अंदर तक पहुंची। मंत्री जी परेशान हो गए। “यह क्या हो रहा है? बाहर इतना शोर क्यों है?” मीडिया वाले भी सतर्क हो गए। कुछ कैमरामैन बाहर की तरफ गए। उन्होंने देखा कि एक छोटा सा बच्चा बार-बार चिल्ला रहा है और भीड़ उसकी सुन रही है।

एक रिपोर्टर ने अर्जुन के पास जाकर माइक लगाया। “बेटा, तुम क्या कह रहे हो? विमान में क्या खराबी है?” अर्जुन ने सांस लेकर कहा, “दीदी, गरुड़ 350 के राइट इंजन में क्रैक है। फैन ब्लेड के पास अगर यह उड़ेगा तो क्रैश हो जाएगा। सभी लोग मर जाएंगे।”

रिपोर्टर हैरान रह गई। “तुम्हें कैसे पता?” “मैंने आवाज सुनी है। क्रक क्रक आवाज आ रही है। यह अच्छी नहीं है।” रिपोर्टर ने तुरंत अपने कैमरामैन को इशारा किया। यह ब्रेकिंग न्यूज़ थी।

“यह 11 साल का बच्चा क्लेम कर रहा है कि गरुड़ 350 में टेक्निकल फॉल्ट है। इसके अनुसार इंजन में क्रैक है।” ये न्यूज़ तुरंत लाइव टीवी पर आ गई। अंदर टर्मिनल में भी टीवी स्क्रीन पर यह न्यूज़ दिखी। मंत्री जी ने देखा, “यह क्या हो रहा है? यह बच्चा कौन है?”

अमित गुप्ता की सांस फूलने लगी। “सर, यह कोई कांस्पिरेसी है। विरोधी पार्टी की चाल है। हमारे प्रोग्राम को बर्बाद करने के लिए इस बच्चे को भेजा है।” लेकिन सुरेश कुमार आगे आया। “नहीं सर, यह बच्चा सच कह रहा है। मैंने खुद चेक कराया है। इंजन में हेयर लाइन क्रैक है।”

मंत्री जी का चेहरा गंभीर हो गया। “क्या? आप कंफर्म कर रहे हैं?” “जी सर। यह बच्चा हमें बताने आया था। पहले हमने इसकी बात नहीं सुनी। लेकिन जब चेक किया तो क्रैक मिली।”

अमित गुप्ता घबरा गया। “सर, यह सब कंफ्यूजन है। विमान बिल्कुल सेफ है।” मंत्री जी गुस्से से बोले, “तुम लोग क्या कर रहे हो? अगर विमान में फॉल्ट है तो मुझे पहले क्यों नहीं बताया?”

सुरेश कुमार ने कहा, “सर, मैंने बताना चाहा लेकिन सर यह सब एग्जाजरेशन है।” अमित गुप्ता ने बीच में कहा, “बाहर अब मीडिया का पूरा सर्कस लग गया था। ज्यादा कैमरा आ गए थे। अर्जुन को घेर कर सवाल पूछे जा रहे थे।”

“बेटा, तुमने इंजीनियरिंग कहां से सीखी?” अर्जुन ने मासूमियत से कहा। “मुझे नहीं पता। बस आवाज से लगता है।” “तुम्हारे मम्मी पापा क्या करते हैं?” “मुझे याद नहीं। मैं खो गया था।” महेश ने बताया, “यह 8 साल से मेरे साथ है। मैंने इसकी देखभाल की है।”

विकास ने महेश के हाथ पकड़े। “आपने मेरे बेटे की जान बचाई है। मैं आपका जीवन भर कर्जदार रहूंगा।” विकास ने अर्जुन को उठाया। “बेटा, अब तुम कभी मुझसे अलग नहीं होगे। और हां, तुमने आज जो किया है, वह जिंदगी भर याद रखा जाएगा। तुम सच में हीरो हो।”

अर्जुन ने अपने पिता को गले लगाया, और उसकी आंखों में आंसू थे। उसे समझ आ गया था कि उसकी आवाज ने कितनी बड़ी जान बचाई थी। उस दिन, एक कचरा बिनने वाले लड़के ने साबित कर दिया कि सच्ची श्रद्धा और साहस से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है।

जय माता दी!