जिस सड़क निर्माण पर पति मजदूरी कर रहा था उसको बनवाने का टेंडर तलाकशुदा पत्नी के पास था फिर जो हुआ…

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“जिस सड़क निर्माण पर पति मजदूरी कर रहा था, उसे बनाने का टेंडर तलाकशुदा पत्नी के पास था, फिर जो हुआ…”

कहानी एक ऐसे युवक अनुराग की है, जो एक समय में अपने क्षेत्र का सबसे बड़ा व्यापारी था, लेकिन अपनी गलतियों के कारण एक मजदूर बनकर सड़क पर काम कर रहा था। वहीं लावण्या, उसकी पत्नी, जो कभी गरीब थी, आज एक बड़ी बिल्डर बन चुकी थी और उसी सड़क का निर्माण कर रही थी, जिस पर अनुराग मजदूरी कर रहा था।

भाग 1: अनुराग और लावण्या की मुलाकात

शहर से गांव को जोड़ने वाली उस नई सड़क पर सुबह से शाम तक धूल उड़ती रहती थी। जेसीबी मशीनें मिट्टी खोदती थीं, ट्रक गिट्टी गिराते थे, और मजदूर पसीने से तर होकर काम करते थे। इसी बीच, एक नौजवान अनुराग फावड़ा चला रहा था, उसके पुराने कपड़े, धूल से भरा चेहरा और हाथों में छाले थे। लेकिन उसकी आंखों में एक शांति थी, जैसे उसने अपनी किस्मत से समझौता कर लिया हो। कोई उसे डांट देता, तो चुप हो जाता, कोई गाली देता, तो मुस्कुरा देता। अनुराग किसी से उलझता नहीं था, लेकिन वह कभी किसी को अपनी परेशानी नहीं दिखाता था।

वहीं, एक दिन सड़क पर एक गाड़ी आई, जिसमें से चार शानदार गाड़ियां निकलीं। इन गाड़ियों से सूट-बूट पहने लोग उतरे। लावण्या, जो अब शहर की एक बड़ी बिल्डर बन चुकी थी, उनमें से एक थी। वह उसी सड़क का टेंडर लेकर आई थी, जिस पर अनुराग काम कर रहा था। जैसे ही उसकी नजर अनुराग पर पड़ी, वह चौंक गई। वह वही लड़का था, जिसे उसने कभी बहुत चाहा था। वही अनुराग, जो अब मजदूरी कर रहा था।

अनुराग ने लावण्या को देखा और उसकी आंखें मिलीं। उन दोनों की आंखों में एक-दूसरे के लिए पुराने रिश्ते की झलक थी, लेकिन अब दोनों की राहें अलग थीं। लावण्या के दिमाग में सवाल उठने लगे—यह लड़का यहां क्या कर रहा है? यह तो कभी बहुत अमीर था। आज यह मजदूरी क्यों कर रहा है? वहीं, अनुराग ने भी उसे देखा और उसकी यादों में खो गया। वही लड़की, जो कभी फटे कपड़ों में घर आती थी और अब वह करोड़ों की मालकिन बन चुकी थी।

भाग 2: पुरानी यादें और टूटे हुए रिश्ते

अनुराग और लावण्या की मुलाकात पुराने दिनों की यादें ताजा कर देती है। सात साल पहले, जब अनुराग की हार्डवेयर की दुकान चलती थी, तब उसकी जिंदगी में सब कुछ ठीक था। वह एक अच्छा व्यापारी था, जिसके पास पैसे और इज्जत थी। वहीं, लावण्या, जो एक गरीब परिवार से थी, अपनी कठिनाइयों से जूझ रही थी। अनुराग के पिता ने लावण्या को देखा और उसकी सादगी और संस्कारों से प्रभावित होकर उसकी शादी के लिए अनुराग से कह दिया था।

शादी के बाद, अनुराग और लावण्या की जिंदगी में खुशियों का दौर आया, लेकिन घर के सदस्य और रिश्तेदार हमेशा ताने मारते थे। लावण्या ने यह सब सहा, लेकिन एक दिन अनुराग की जिंदगी में श्रेया नाम की लड़की आई। श्रेया ने अनुराग से दोस्ती की और धीरे-धीरे उसे अपने प्रेम जाल में फंसा लिया। इस दौरान, लावण्या को महसूस होने लगा कि अनुराग में बदलाव आ रहा है।

एक दिन लावण्या ने जब अनुराग का फोन देखा, तो उसने पाया कि वह श्रेया से बात कर रहा था। यह देख लावण्या का दिल टूट गया। वह घर से निकल पड़ी और अकेली गांव वापस लौट आई। वहीं, अनुराग ने जल्दबाजी में श्रेया से दूसरी शादी कर ली। लेकिन श्रेया का असली चेहरा जल्द ही सामने आ गया। वह लालची थी, नशे की आदी थी और उसने अनुराग की सारी संपत्ति बेच दी। अंत में, अनुराग की दुकान, गोदाम और जमीन सब बिक गए, और वह सड़क पर आ गया।

भाग 3: लावण्या की मेहनत और सफलता

लावण्या ने हार नहीं मानी। उसने कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करना शुरू किया। वह अपनी मेहनत से बड़ी बिल्डर बन गई। एक दिन, राजेंद्र वर्मा नाम के एक मालिक ने उसे अपना वारिस बनने का प्रस्ताव दिया। लावण्या ने उसकी मदद से सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ। वहीं, अनुराग मजदूरी करते हुए अपनी गलतियों का पछतावा कर रहा था। उसे एहसास हुआ कि उसने लावण्या को बहुत दुख दिया है।

वह सड़क पर काम करता हुआ, अक्सर लावण्या को याद करता। उसे समझ में आ गया था कि उसने जो खोया, वह कभी वापस नहीं मिल सकता। लेकिन फिर भी, वह चाहता था कि लावण्या उसे माफ कर दे।

भाग 4: एक नई शुरुआत

एक दिन लावण्या ने अनुराग को देखा और उसे बताया कि उसने उसे माफ कर दिया है, लेकिन अब वह उसे अपना नहीं सकती। उसने अनुराग से कहा कि वह अब खुद को माफ करे और अपनी जिंदगी को फिर से सही रास्ते पर ले आए। लावण्या ने अनुराग को अपनी कंपनी में नौकरी दी और उसे फिर से खड़ा किया। वह जानती थी कि अनुराग में वह काबिलियत है, जो एक दिन उसे फिर से ऊंचाई पर ले जा सकती थी।

अनुराग ने मेहनत की और खुद को साबित किया। वह कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर बन गया। लेकिन श्रेया, जो एक बार अनुराग की जिंदगी में थी, अब भी वापस आई और उसकी जिंदगी को फिर से तहस-नहस करने की कोशिश की। उसने अपनी चाल चली, लेकिन अनुराग ने उसे सबक सिखाया और उसे बेनकाब कर दिया।

भाग 5: बदलती हुई जिंदगी

लावण्या की कंपनी के खिलाफ श्रेया ने कई साजिशें रचाई, लेकिन अनुराग ने साबित किया कि सच्चाई हमेशा जीतती है। लावण्या के ऑफिस में एक बड़ा तूफान आया, लेकिन आखिरकार, श्रेया की साजिश का पर्दाफाश हुआ और वह गिरफ्तार हो गई। लावण्या और अनुराग की जिंदगी फिर से पटरी पर आ गई, लेकिन अब दोनों अलग थे। लावण्या ने कहा कि वह अब अपने लिए जीना चाहती है, और अनुराग ने इसे समझा।

कुछ महीने बाद, उसी सड़क पर उद्घाटन समारोह हुआ, जहां कभी अनुराग मजदूरी कर रहा था। अब वह उसी सड़क को गर्व से देख रहा था, जहां उसकी जिंदगी ने एक नई दिशा पाई थी।

कहानी का संदेश

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में कभी भी किसी से घमंड नहीं करना चाहिए। वक्त हमेशा बदलता है और हमें अपनी गलतियों से सीखकर आगे बढ़ना चाहिए। अनुराग और लावण्या की कहानी यह दिखाती है कि माफी से ज्यादा बड़ी कोई चीज नहीं होती, और मेहनत और ईमानदारी से किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है।