तलाकशुदा IPS पत्नी लिए पति ने दांव पर लगा दी अपनी जान, पूरी कहानी जानकर हर कोई रो पड़ा…
.
.
.
“तलाकशुदा IPS पत्नी के लिए पति ने अपनी जान दांव पर लगा दी — जब सच सामने आया तो हर आंख रो पड़ी”
मध्य प्रदेश का इंदौर शहर।
सुदामा नगर की वही शांत गलियां, जहां सुबह चाय की भाप और शाम को लौटते मजदूरों की थकान साथ-साथ बहती है। इसी इलाके में रहता था अमित मालवीय—एक साधारण इंसान। न कोई बड़ी ख्वाहिश, न किसी से शिकायत। प्राइवेट कंपनी की नौकरी, सीमित आमदनी और बस यही चाह कि जिंदगी बिना शोर-शराबे के निकल जाए।
अमित के लिए कामयाबी का मतलब बड़ा घर या मोटी गाड़ी नहीं था। उसके लिए कामयाबी थी—रात को सुकून की नींद और सुबह बिना डर के उठना।
इसी शहर में, कुछ ही किलोमीटर दूर, रहती थी निशा शर्मा।
निशा आम लड़की नहीं थी। उसकी आंखों में एक सपना था—वह सपना जो हर किसी में देखने की हिम्मत नहीं होती। वह सिविल सर्विस की तैयारी कर रही थी। घंटों किताबों में डूबी रहती, नोट्स बनाती, मॉक टेस्ट देती और कई बार थककर खिड़की से बाहर देखती हुई खुद से कहती—
“अगर मैं अफसर बनी, तो सिर्फ अपने लिए नहीं, समाज के लिए जियूंगी।”
अमित और निशा की शादी बहुत साधारण थी।
ना कोई बड़ा होटल, ना महंगी सजावट। बस परिवार के लोग, कुछ रिश्तेदार और दो लोगों का यह भरोसा कि वे साथ चलेंगे।
शादी के कुछ दिन बाद, एक रात जब घर की लाइट बुझ चुकी थी और बाहर सन्नाटा था, निशा ने हिम्मत जुटाकर अमित से पूछा—
“अगर मैं अफसर बन गई… और मेरा ओहदा तुमसे बड़ा हो गया… तो क्या तुम्हें बुरा लगेगा?”
अमित ने ज्यादा सोचा नहीं।
बस हल्की सी मुस्कान के साथ कहा—
“अगर मेरी पत्नी आगे बढ़ेगी, तो मैं खुद को दुनिया का सबसे कामयाब आदमी मानूंगा।”
उसी पल निशा ने सुकून की सांस ली।
उसे लगा—उसने अपने सपनों के लिए सही साथी चुना है।

संघर्ष के दिन
शादी के बाद दोनों एक छोटे से किराए के मकान में रहने लगे।
घर छोटा था, लेकिन सपने बड़े।
अमित सुबह ऑफिस चला जाता और निशा दिन-रात पढ़ाई में लगी रहती।
कई बार निशा की आंखें भर आतीं—डर लगता कि अगर मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिली तो?
लेकिन हर बार अमित बिना भाषण दिए उसका हौसला बढ़ा देता।
उसने अपनी जरूरतें धीरे-धीरे कम कर दीं। नया मोबाइल टाल दिया। दोस्तों के साथ घूमना छोड़ दिया। यहां तक कि अपनी कई इच्छाएं भी दबा लीं ताकि निशा की कोचिंग, किताबें और टेस्ट सीरीज बिना रुकावट चल सकें।
मोहल्ले में लोग बातें करते—
“लड़की बहुत पढ़ रही है।”
“पति से आगे निकल जाएगी।”
“ऐसी शादियां ज्यादा दिन नहीं चलती।”
अमित सब सुनता था, लेकिन चुप रहता था।
उसे लगता था—रिश्ते जवाबों से नहीं, भरोसे से चलते हैं।
कामयाबी और दूरी
सालों की मेहनत के बाद वह दिन आया।
रिजल्ट घोषित हुआ और निशा का नाम चयनित उम्मीदवारों की सूची में था।
निशा IPS अधिकारी बन चुकी थी।
वह खुशी से रो पड़ी। आंखों में गर्व था, डर था और जिम्मेदारी का एहसास भी।
अमित ने उसे गले लगाकर बस इतना कहा—
“आज से तुम सिर्फ मेरी पत्नी नहीं हो… बल्कि पूरे देश की जिम्मेदारी हो।”
लेकिन उसी दिन दोनों को यह अंदाज़ा नहीं था कि यही कामयाबी उनके रिश्ते की सबसे कठिन परीक्षा बनने वाली है।
ट्रेनिंग, पोस्टिंग, नई जिम्मेदारियां—सब कुछ बहुत तेजी से बदलने लगा।
निशा अफसर बन गई और अमित… वही सादा इंसान रह गया।
फोन कॉल्स छोटी होने लगीं।
मैसेज सिर्फ जरूरी बातों तक सिमट गए।
वह अपनापन, जो कभी बातों में झलकता था, अब औपचारिकता में बदलने लगा।
यह कोई बड़ा झगड़ा नहीं था।
बस रोज-रोज की छोटी-छोटी चुप्पियां थीं, जो मिलकर एक बड़ी दीवार बनती जा रही थीं।
समाज ने भी अपना काम किया।
“अब तुम्हारा रुतबा बड़ा है।”
“पति तुम्हारे स्तर का नहीं रहा।”
“इतनी पावरफुल औरत के साथ साधारण आदमी कैसे निभाएगा?”
निशा इन बातों को अनदेखा करना चाहती थी, लेकिन कहीं न कहीं ये बातें उसके मन में घर करने लगीं।
तलाक — बिना शोर के
तलाक का फैसला अचानक नहीं हुआ।
लेकिन जब हुआ, तो बहुत शांत तरीके से।
ना कोई बड़ा हंगामा।
ना आरोप-प्रत्यारोप।
बस दो थके हुए लोग, जो यह मान चुके थे कि वे साथ रहते हुए भी अकेले हो गए हैं।
कागजों पर दस्तखत हुए।
रिश्ता कानूनी रूप से खत्म हो गया।
निशा ने सरकारी कागजों में अमित का नाम हटाकर अपने पिता का नाम लिखवा दिया।
यह गुस्से में नहीं था—बस उसे लगा कि अब उसे अकेले ही सब संभालना है।
बीमारी का हमला
तलाक के बाद निशा ने खुद को पूरी तरह काम में झोंक दिया।
ड्यूटी, मीटिंग्स, फील्ड विजिट—सब कुछ इतना ज्यादा हो गया कि उसे अपनी सेहत का ख्याल रखने का वक्त ही नहीं मिला।
धीरे-धीरे शरीर टूटने लगा।
थकान, सूजन और एक दिन अचानक ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगड़ गई।
रिपोर्ट आई—
दोनों किडनी फेल होने की कगार पर थीं।
डायलिसिस शुरू हुआ।
डॉक्टरों ने साफ कहा—
“ट्रांसप्लांट के बिना हालत संभलना मुश्किल है।”
परिवार में कोई डोनर मैच नहीं कर रहा था।
समय तेजी से निकल रहा था।
आखिरकार अखबार में एक सूचना छपी।
अखबार और फैसला
इसी सुबह इंदौर की एक चाय की दुकान पर अमित ने अखबार उठाया।
जैसे ही उसकी नजर उस नाम पर पड़ी—उसके हाथ कांप गए।
निशा शर्मा।
IPS अधिकारी।
किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत।
उस पल अमित ने कुछ नहीं सोचा।
ना तलाक याद आया।
ना दूरी।
बस इतना समझ आया—
उसे अस्पताल जाना है।
बिना नाम, बिना शर्त
अस्पताल पहुंचकर अमित ने खुद को परिचित नहीं कराया।
डॉक्टरों से सिर्फ एक सवाल पूछा—
“अगर डोनर मिल जाए, तो क्या वह ठीक हो जाएगी?”
जब जवाब हां में मिला—
अमित ने टेस्ट करवाने का फैसला कर लिया।
रिपोर्ट आई—
मैच परफेक्ट था।
डॉक्टरों ने जोखिम समझाया।
जटिलताएं बताईं।
अमित ने सिर्फ एक शर्त रखी—
“मेरी पहचान उसे ना बताई जाए।”
ऑपरेशन और बलिदान
ऑपरेशन सफल रहा।
निशा की नई किडनी काम करने लगी।
लेकिन उसी अस्पताल के दूसरे वार्ड में अमित की हालत बिगड़ने लगी।
संक्रमण बढ़ गया।
शरीर साथ छोड़ने लगा।
अमित चुपचाप सब सहता रहा।
उसके चेहरे पर कोई शिकवा नहीं था।
आखिरकार…
उस मॉनिटर की लाइन सीधी हो गई।
सच का सामना
जब निशा को बताया गया कि उसका डोनर नहीं रहा—
और जब उसे उस कमरे में ले जाया गया—
तो सफेद चादर के नीचे अमित था।
निशा घुटनों के बल गिर पड़ी।
उसके होंठ कांपते हुए बोले—
“मैंने तुम्हें कागजों से हटा दिया था…
तुमने मुझे जिंदगी से नहीं हटाया।”
अंत नहीं, सीख
अमित चला गया।
लेकिन उसकी कुर्बानी निशा को जिंदगी भर बदल गई।
वह आज भी ड्यूटी करती है।
लेकिन अब हर फैसले से पहले रुकती है।
क्योंकि वह जान चुकी है—
सबसे बड़ा प्यार अक्सर चुप होता है।
सीख
रिश्ते कागजों से नहीं टूटते।
वे तब टूटते हैं जब हम चुप्पी को समझना छोड़ देते हैं।
अगर आपकी जिंदगी में कोई ऐसा इंसान है—
जो बिना बोले आपके लिए सब कुछ कर रहा है—
तो देर मत कीजिए।
कभी-कभी दूसरा मौका जिंदगी नहीं देती।
News
“50 लाख लेकर तलाक… फिर सड़क पर भीख! पति से मुलाकात ने बदल दी जिंदगी”😱
“50 लाख लेकर तलाक… फिर सड़क पर भीख! पति से मुलाकात ने बदल दी जिंदगी”😱 . . . “50 लाख…
जब एक आर्मी अफसर के साथ बदसلوकी हुई | आर्मी की एंट्री ने सब कुछ बदल दिया | New Hindi Moral Story
जब एक आर्मी अफसर के साथ बदसلوकी हुई | आर्मी की एंट्री ने सब कुछ बदल दिया | New Hindi…
11 साल का रिक्शावाला बच्चा जिसे पुलिस ने पीटा—पिता निकले हाईकोर्ट जज 😱 फिर जो हुआ 😱
11 साल का रिक्शावाला बच्चा जिसे पुलिस ने पीटा—पिता निकले हाईकोर्ट जज 😱 फिर जो हुआ 😱 . . ….
जिसे सब भिखारी समझ रहे थे… उसी कूड़ा बिनने वाले ने ठीक करदिया 500 करोड़ का रोबोट…?
जिसे सब भिखारी समझ रहे थे… उसी कूड़ा बिनने वाले ने ठीक करदिया 500 करोड़ का रोबोट…? . . ….
Gelin yılbaşında çocuklarıyla geldi. Eve kimse dönmedi…
Gelin yılbaşında çocuklarıyla geldi. Eve kimse dönmedi… . . . Gelin Yılbaşında Çocuklarıyla Geldi. Eve Kimse Dönmedi… Bölüm 1: Stanitsa’ya…
BU İKİZLER YETİMHANEDE, EFENDIM… DEDİ FAKİR ÇOCUK VE MİLYONER DONDU KALDI
BU İKİZLER YETİMHANEDE, EFENDIM… DEDİ FAKİR ÇOCUK VE MİLYONER DONDU KALDI . . . Bu İkizler Yetimhanede, Efendim… Dedi Fakir…
End of content
No more pages to load






