धर्मेंद्र के अंतिम संस्कार के दौरान हेमा मालिनी के साथ हुई बड़ी नाइंसाफी! Hema Malini ! Dharmendra
जब से यह खबर फैली कि धर्मेंद्र जी ने 89 साल की उम्र में अपनी आखिरी सांस ली है, तब से पूरे फिल्म इंडस्ट्री में एक अलग ही माहौल बन गया है। हर कोई गम में था। हर किसी की आंखों में आंसू थे और दिल में एक ही आवाज थी, “ही मैन चला गया।” इस दुखद घटना ने केवल देओल परिवार को ही नहीं, बल्कि पूरे देश को प्रभावित किया।
धर्मेंद्र का निधन
धर्मेंद्र जी का निधन मुंबई के ब्रिज कैंडी अस्पताल में हुआ। लंबे समय से बीमार चल रहे धर्मेंद्र की हालत पिछले कई दिनों से नाजुक बनी हुई थी। जब डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया, तो उनके परिवार के साथ-साथ बॉलीवुड के कई बड़े सितारे भी गम में डूब गए।
हेमा मालिनी की स्थिति
धर्मेंद्र जी के जाने के बाद, हेमा मालिनी का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। जब वह वहां पहुंचीं, जहां उनका सबसे प्यारा इंसान, उनका जीवन साथी, जा चुका था, तो उनकी स्थिति बेहद भावुक हो गई। जितने लोग उस ग्राउंड में मौजूद थे, सबकी निगाहें हेमा पर टिक गईं।
जैसे ही रिचुअल्स शुरू हुए, सबको अंदाजा हो गया कि आखिर किससे आगे बुलाया जाएगा। धर्मेंद्र जी की पहली पत्नी, प्रकाश कौर, अपने पूरे परिवार के साथ वहां मौजूद थीं। शादी का पहला हक हमेशा पहली पत्नी का होता है, और देओल परिवार की परंपराएं भी यही कहती हैं।
हेमा का दर्द
हेमा मालिनी जब ग्राउंड के अंदर पहुंचीं, तो उनके चेहरे पर आंसू थे। उनका दुपट्टा सिर पर था और वह कांपते हुए कदमों से आगे बढ़ रही थीं। लेकिन तभी उन्हें रोक दिया गया। पंडित जी ने जैसे ही कहा कि पत्नी आए रिचुअल्स के लिए, वैसे ही प्रकाश कौर को आगे कर दिया गया। उस पल हेमा मालिनी एकदम से ठहर गईं।
उन्होंने सोचा था कि भले ही परिवार ने कभी उन्हें पूरी तरह स्वीकार नहीं किया हो, लेकिन धर्मेंद्र की विदाई के वक्त शायद उन्हें पति का कर्तव्य निभाने दिया जाएगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। हेमा वहां खड़ी रोती रहीं, लेकिन कोई उन्हें पकड़ने नहीं आया।
परिवार का तनाव
ईशा देओल उनके पास खड़ी थी, लेकिन ईशा भी कुछ नहीं कर पा रही थी। वजह साफ थी। देओल परिवार का पुराना तनाव जो सालों से दबी आग की तरह जलता रहा है। चाहे मीडिया ने कुछ भी दिखाया हो, लेकिन सच्चाई यह है कि हेमा और देओल परिवार के बीच की दूरी कभी खत्म नहीं हुई।
हेमा मालिनी ने अपनी पूरी कोशिश की कि वह खुद को संभाल लें, लेकिन हालात ऐसे थे कि जैसे ही उन्होंने धर्मेंद्र जी का चेहरा देखा, वह फूटकर रोने लगीं। आसमान की तरफ देखते हुए जैसे भगवान से पूछ रही हों कि आखिर क्यों उनके साथ ऐसा होता है।
अंतिम विदाई का पल
जब धर्मेंद्र का पार्थिव शरीर सफेद कपड़े में ढका गया और उनके बेटे ने उन्हें आखिरी बार छुआ, तो बाहर मौजूद भीड़ ने रोना शुरू कर दिया। कुछ लोग “राम नाम सत्य है” के नारे लगा रहे थे, तो कुछ सिर्फ खामोश खड़े थे।
धर्मेंद्र का अंतिम दर्शन करने के लिए सिर्फ आम फैंस ही नहीं बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े सितारे भी पहुंचे। अमिताभ बच्चन से लेकर जितेंद्र तक सबका यही कहना था कि धर्मेंद्र जैसा दिल वाला इंसान हमने कभी नहीं देखा।
हेमा की दूरी
हेमा मालिनी को वहां रहने भी नहीं दिया गया। वह आगे बढ़ना चाहती थीं, आखिरी बार छूना चाहती थीं, लेकिन उन्हें सिर्फ दूर से देखने का हक मिला। जैसे वह कोई मेहमान हो, कोई बाहरी हो, कोई जिनका वहां कोई स्थान ही ना हो।
हेमा मालिनी वहीं खड़ी रोती रहीं। लेकिन हर ओर से एक ही आवाज आ रही थी कि रिचुअल्स पहली पत्नी ही करेगी। इस वजह से हेमा चुपचाप बस देखती रह गईं।
बॉलीवुड की प्रतिक्रिया
इस घटना ने पूरे बॉलीवुड को हिला दिया। सभी ने देखा कि हेमा मालिनी को जिस तरह से दूर रखा गया, वह बिल्कुल भी ठीक नहीं था। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने लिखा कि चाहे पहली पत्नी हो या दूसरी, इंसानियत के नाते दोनों ही पत्नियों का हक बराबर होना चाहिए था।

परिवार की नई शुरुआत
हेमा मालिनी ने धीरे-धीरे वहां से हटना शुरू किया। ईशा उनकी बाह पकड़ कर उन्हें सहारा दे रही थी। कैमरे उनकी तरफ घूम रहे थे। सबकी निगाहें उन पर थीं, लेकिन हेमा ने सिर झुकाकर दुपट्टा पूरा चेहरा ढक लिया और कार में जाकर बैठ गई।
गाड़ी के अंदर बैठते ही वह जोर से रो पड़ी। ऐसा लग रहा था जैसे वह चिल्लाकर अपने दर्द को बाहर निकालना चाहती हों। लेकिन बाहर सिर्फ सन्नाटा था।
प्रकाश कौर का समर्थन
दूसरी तरफ, प्रकाश कौर अपने बेटों सनी और बॉबी देओल के साथ रिचुअल्स पूरा कर रही थीं। देओल परिवार एकजुट खड़ा था। प्रकाश कौर बार-बार अपने बेटों को देख रही थीं, जैसे उन्हें यकीन दिला रही हों कि अब सबकी जिम्मेदारी उन पर ही है।
एक नई पहचान
धर्मेंद्र जी के जाने के बाद, सनी देओल ने अपनी मां और हेमा के बीच की दूरियों को खत्म करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा, “हम सब मिलकर पापा की यादों को जिंदा रखेंगे।” इस दिन ने सभी को एकजुट कर दिया और परिवार की कड़वाहट को खत्म कर दिया।
निष्कर्ष
इस कहानी ने हमें यह सिखाया कि कभी-कभी हालात, गलतफहमियां और दर्द इंसान को अलग कर देते हैं। लेकिन जब सच सामने आता है, तो दिल की गांठ खुद-ब-खुद खुल जाती है। धर्मेंद्र जी की विदाई ने यह साबित कर दिया कि रिश्तों की अहमियत क्या होती है।
आज हर कोई यही कह रहा है कि अलविदा धर्मेंद्र, आप हमेशा हमारे हीरो रहेंगे। आपकी फिल्में, आपका अंदाज और आपकी इंसानियत हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगी।
आपकी राय इस बारे में क्या है? क्या आप मानते हैं कि सच्चाई इंसान के दिल को बदल सकती है? अपनी राय नीचे कमेंट में जरूर बताएं।
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