पति का अपमान पड़ा भारी| घमंडी पत्नी के साम्राज्य का अंत…
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पति का अपमान पड़ा भारी | घमंडी पत्नी के साम्राज्य का अंत…
सुबह की पहली किरण के साथ मेहरा विला में हलचल शुरू हो गई थी। लेकिन इस आलीशान बंगले की दीवारों में सुकून नहीं, सिर्फ अनाया मेहरा का खौफ गूंजता था। अनाया, जो अपनी खूबसूरती और अरबों के बिजनेस साम्राज्य के नशे में चूर थी, हर सुबह अपने पति आर्यन को नौकरों की तरह हुक्म देती।
“आर्यन, मेरी सैंडल पॉलिश हुई या नहीं?”
अनाया की तीखी आवाज़ सीढ़ियों से उतरी।
आर्यन, पिछले दो साल से अनाया का पति था, या यूं कहें कि उसके घर का कामकाज संभालने वाला पति। जल्दी से हॉल में आया। हाथों में काली पॉलिश लगी थी और चेहरे पर थकान थी।
“बस दो मिनट अनाया, वो जरा गंदी ज्यादा थी तो…”
आर्यन ने बात पूरी भी नहीं की थी कि अनाया ने उसके हाथ से सैंडल झटक ली।
“बहाने बस यही सीखा है तुमने इन दो सालों में। मेरे पिता ने एक अनाथ को अपनी बेटी का हाथ क्या दे दिया, तुमने तो खुद को इस घर का मालिक ही समझ लिया।”
आर्यन ने शांत स्वर में कहा,
“अनाया, मैं तुम्हारा पति हूं। कम से कम नौकरों के सामने तो मेरी इज्जत का ख्याल रखा करो।”
इज्जत…? अनाया जोर से हंसी।
“इज्जत कमाई जाती है आर्यन, खैरात में नहीं मिलती। तुम इस घर में सिर्फ इसलिए हो क्योंकि मेरे डैड को तुम्हारी सादगी पसंद आई थी। पर मेरे लिए तुम एक वेटर से बढ़कर कुछ नहीं हो। चलो अब खड़े क्या देख रहे हो? गाड़ी साफ करो। मुझे आज द लेजेंड्री ग्रुप के साथ मीटिंग के लिए निकलना है।”
आर्यन खामोश रहा। उसने पिछले दो सालों में हजारों अपमान सहे थे, सिर्फ इसलिए कि वह अनाया से सच्चा प्यार करता था और उसे उम्मीद थी कि एक दिन अनाया का दिल पिघलेगा।

पार्टी का अपमान
उसी शाम मेहरा विला में एक बड़ी पार्टी थी। अनाया ने आर्यन को मेहमानों को ड्रिंक सर्व करने का काम सौंप दिया था। आर्यन, जो एक बेहतरीन इंजीनियर रह चुका था, आज वेटर की वर्दी पहनकर ट्रे थामेगा था।
अनाया का दोस्त और बिजनेस राइवल सिद्धार्थ आर्यन के पास आया और जानबूझकर अपना पैर आगे कर दिया। आर्यन लड़खड़ाया और जूस का गिलास सिद्धार्थ के महंगे सूट और जूते पर गिर गया।
“तुम अंधे हो क्या?” सिद्धार्थ चिल्लाया।
अनाया दौड़कर वहां आई।
“क्या हुआ सिद्धार्थ?”
“देखो अनाया, तुम्हारे इस पति ने मेरा कीमती सूट खराब कर दिया। शायद इसे वेटर की ट्रेनिंग भी ठीक से नहीं मिली।”
अनाया का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उसने सबके सामने आर्यन को एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। सन्नाटा छा गया।
“इसके जूतों पर जो जूस गिरा है उसे अभी साफ करो। आर्यन घुटनों के बल बैठो और इसे पोंछो।”
आर्यन की आंखों में पहली बार आंसू नहीं बल्कि एक चिल्ला रही थी। उसने ट्रे जमीन पर रख दी।
“अनाया, आज तुमने सिर्फ मेरा अपमान नहीं किया, बल्कि उस पवित्र रिश्ते की हत्या कर दी है जिसे मैं निभाने की कोशिश कर रहा था।”
आर्यन की आवाज़ में एक अजीब सा ठहराव था।
“जुबान मत लड़ाओ। साफ करो इसे।”
अनाया ने फिर से हुक्म दिया।
आर्यन ने धीरे से अपने गले से वेटर वाली टाई निकाली और जमीन पर फेंक दी।
“आज से तुम्हारी गुलामी और यह रिश्ता दोनों खत्म। तुमने अपनी दौलत के घमंड में उस इंसान को खो दिया जिसने तुम्हारी आत्मा से प्यार किया था। याद रखना अनाया, वक्त बदलते देर नहीं लगती।”
आर्यन बिना पीछे मुड़े घर के मुख्य दरवाजे से बाहर निकल गया। पीछे अनाया चिल्लाती रही,
“जाओ और कभी वापस मत आना। कल तुम्हें तलाक के पेपर्स मिल जाएंगे।”
बाहर तेज बारिश हो रही थी। आर्यन भीगते हुए सड़क के मोड़ पर पहुंचा। जहां एक काली बुलेट प्रूफ कार खड़ी थी। एक आदमी कोट पहनकर बाहर निकला और आर्यन के सामने सिर झुकाया।
“सर, सब कुछ तैयार है। द लेजेंड्री ग्रुप अब आपके आदेश का इंतजार कर रहा है।”
आर्यन ने अपनी भीगी हुई शर्ट के बटन खोले और एक ठंडी मुस्कान के साथ कहा,
“मेहरा इंडस्ट्रीज का पतन आज से शुरू होता है। अनाया को लगने दो कि उसने एक वेटर को निकाला है। उसे नहीं पता कि उसने अपने मालिक को खो दिया है।”
साम्राज्य का पतन
रात का सन्नाटा मेहरा विला पर भारी पड़ रहा था। आर्यन के जाने के बाद अनाया को लगा था कि उसकी जिंदगी से कचरा साफ हो गया है। लेकिन उसे क्या पता था कि असली तूफान तो अभी शुरू हुआ है।
अगली सुबह जब अनाया अपने ऑफिस पहुंची तो वहां का नजारा बदला हुआ था। कर्मचारी काम करने के बजाय आपस में फुसफुसा रहे थे।
“क्या हो रहा है यहां?” अनाया चिल्लाई।
उसका सेक्रेटरी खन्ना दौड़ता हुआ आया।
“मैम, द लेजेंड्री ग्रुप ने ना केवल हमारी डील कैंसिल कर दी है, बल्कि उन्होंने मार्केट में हमारे सारे शेयर्स डंप कर दिए हैं। हमारी कंपनी की वैल्यू मिट्टी में मिल रही है।”
अनाया के होश उड़ गए।
“पर क्यों? उस ग्रुप का CEO है कौन? कल तक तो वह हमसे हाथ मिलाने को बेताब थे।”
“मैम, कोई नहीं जानता कि उनका CEO कौन है। वह हमेशा पर्दे के पीछे से काम करते हैं। पर अभी-अभी उनका एक मैसेज आया है। उन्होंने मेहरा इंडस्ट्रीज पर धोखाधड़ी का केस किया है और बैंक ने हमारे सारे अकाउंट्स फ्रीज कर दिए हैं।”
अभी अनाया यह सदमा झेल ही रही थी कि पुलिस की एक टीम ऑफिस में दाखिल हुई। उनके साथ सिद्धार्थ भी था, लेकिन इस बार उसके हाथों में हथकड़ियां थी।
“सिद्धार्थ यह क्या है?” अनाया ने चौंक कर पूछा।
सिद्धार्थ रोने लगा,
“अनाया मुझे बचा लो। लेजेंड्री ग्रुप ने मेरे सारे काले कारनामों की फाइल पुलिस को दे दी है। उन्होंने कहा है कि जो भी तुम्हारे करीब है वह बर्बाद हो जाएगा।”
शाम होते-होते अनाया मेहरा, जो शहर की क्वीन कहलाती थी, सड़क पर आ गई। मेहरा विला को सील कर दिया गया। उसके पिता मिस्टर मेहरा जो अस्पताल में भर्ती थे, इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाए और उनकी हालत और बिगड़ गई। अनाया के पास अब ना घर था ना पैसा।
आर्यन का बदला और रहम
तभी उसके फोन पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया,
“अपने कंपनी और अपने पिता की जान बचाना चाहती हो तो फौरन लेजेंड्री टावर्स के हेड ऑफिस पहुंचो।”
आवाज भारी और जानी पहचानी थी।
अनाया बदहवास होकर वहां पहुंची। विशाल ऑफिस के आखिरी केबिन में जब वो घुसी तो सामने की कुर्सी धीरे से घूमी। सामने आर्यन बैठा था। महंगा सूट, आंखों में आत्मविश्वास और चेहरे पर वही शांत मुस्कान।
“आर्यन, तुम यहां कैसे? यह सब क्या मजाक है?”
“यह मजाक नहीं अनाया, यह औकात का आईना है।”
आर्यन अपनी सीट से उठा।
“तुमने कहा था ना कि मैं वेटर से बढ़कर कुछ नहीं हूं। तो देखो, आज उसी वेटर ने तुम्हारा पूरा साम्राज्य एक झटके में खरीद लिया।”
आर्यन ने अपनी मेज पर रखी एक महंगी पेन उठाई और उसे घुमाते हुए बोला,
“जिस कुर्सी पर बैठकर तुम दूसरों की किस्मत का फैसला करती थी, आज उस कुर्सी की कीमत भी मैंने चुका दी है। तुम्हारी गाड़ियां, तुम्हारा बंगला, यहां तक कि जिस पेन से तुम घमंड में दस्तखत करती थी, अब उस पर मेरा हक है।”
अनाया की आंखों में खौफ था। उसने कांपती आवाज में कहा,
“तुमने यह सब बदला लेने के लिए किया? इतनी नफरत थी तुम्हारे अंदर?”
“नफरत नहीं अनाया, यह तो सिर्फ हिसाब है। तुमने मुझे शहर के सबसे अमीर लोगों के सामने वेटर बनाया था ना। आज देखो, पूरा शहर मुझे द लेजेंड्री किंग के नाम से जानता है और तुम मेरे सामने एक टूटे हुए कांच के टुकड़े जैसी खड़ी हो।”
अनाया का शरीर कांपने लगा। उसे अपनी हर ज्यादती याद आ रही थी। उसे महसूस हुआ कि पावर का नशा कितना खोखला होता है।
तभी उसके फोन पर अस्पताल से एक नोटिफिकेशन आया—उसका अहंकार पूरी तरह डह गया।
अनाया उसके पैरों में गिर गई,
“आर्यन मुझे माफ कर दो। मेरे डैड बहुत बीमार हैं। उन्हें ऑपरेशन की जरूरत है। मुझे पैसे चाहिए।”
आर्यन ने उसे ऊपर उठाया, लेकिन उसकी आंखों में अब प्यार नहीं, सिर्फ इंसाफ था।
“पैसे मिल जाएंगे अनाया। तुम्हारे पिता का इलाज भी सबसे अच्छे अस्पताल में होगा। लेकिन इसकी एक कीमत है।”
आर्यन ने एक कॉन्ट्रैक्ट उसकी ओर बढ़ाया।
“कैसा कॉन्ट्रैक्ट?”
“अगले छह महीनों तक तुम मेरी पर्सनल अटेंडेंट बनकर मेरे घर में रहोगी। तुम्हें वही कपड़े पहनने होंगे जो मेरे घर के नौकर पहनते हैं। तुम्हें सुबह 5:00 बजे उठकर मेरे जूते पॉलिश करने होंगे। मेरे लिए खाना बनाना होगा और मेरी हर डांट खामोशी से सहनी होगी। अगर एक दिन भी तुमने नखरे दिखाए तो तुम्हारे पिता का इलाज उसी वक्त रोक दिया जाएगा।”
अनाया का कलेजा कांप उठा। जो हाथ कल तक हुक्म देते थे, आज उन्हें झाड़ू थामनी थी। लेकिन पिता की जान बचाने के लिए उसके पास कोई और रास्ता नहीं था। उसने कांपते हाथों से दस्तखत कर दिए।
आर्यन ने मुस्कुराते हुए फाइल बंद की,
“कल सुबह 6:00 बजे मेरी हवेली के बाहर झाड़ू मारते हुए मिलनी चाहिए। लेट मत होना। वेटर को इंतजार पसंद नहीं है।”
नवजीवन की शुरुआत
आर्यन के ऑफिस से बाहर निकलते समय अनाया के कदम लड़खड़ा रहे थे। कल तक जो लड़की मखमली कालीनों पर चलती थी, आज उसके पैरों तले जमीन खिसक चुकी थी। वो बदहवास होकर अपने उस बंगले पर पहुंची जो अब उसका नहीं रहा था। गेट पर तैनात गार्ड्स ने उसे अंदर जाने से रोक दिया।
“सॉरी मैम, अब यहां बिना इजाजत के आना मना है।”
गार्ड की आवाज में अब वह सम्मान नहीं था। अनाया ने एक ठंडी सांस ली और सड़क किनारे एक पुराने होटल के छोटे से कमरे में रात बिताई। पूरी रात उसे नींद नहीं आई। घड़ी की हर टिक-टिक उसे आर्यन की उस शर्त की याद दिला रही थी जो उसके वजूद को कुचलने वाली थी।
उसने अपनी महंगी साड़ियां और गहने एक तरफ रख दिए और एक साधारण सा सूती सूट निकाला। सुबह के 5:00 बजे ही वह तैयार होकर आर्यन की हवेली की ओर पैदल चल दी। जब वह हवेली के विशाल गेट पर पहुंची तो वहां एक गार्ड खड़ा था। उसने अनाया के हाथ में एक पुरानी झाड़ू थमा दी।
“सर का हुक्म है, कोना-कोना साफ होना चाहिए।”
अनाया का कलेजा मुंह को आ गया। लेकिन अस्पताल में लेटे अपने पिता का चेहरा याद करके उसने झाड़ू थाम ली। और शहर की सबसे बड़ी बिजनेस वूमन रही अनाया मेहरा, आज एक साधारण सा सूती सूट पहने आर्यन की विशाल हवेली के बगीचे में झाड़ू लगा रही थी। उसके कोमल हाथों में झाड़ू पकड़ने से छाले पड़ रहे थे। लेकिन डर और मजबूरी ने उसे रुकने नहीं दिया।
तभी आर्यन की बालकनी से आवाज गूंजी,
“कॉफी तैयार है या अभी सफाई ही चल रही है?”
अनाया चौंक कर ऊपर देखी। आर्यन हाथ में अखबार लिए खड़ा था। बिल्कुल वही नजारा था, बस किरदार बदल गए थे। अनाया रसोई में गई और कांपते हाथों से कॉफी बनाई। जब वो ट्रे लेकर आर्यन के कमरे में पहुंची तो आर्यन ने एक घूंट पिया और बोला,
“बकवास! क्या तुमने कभी ढंग से कोई काम किया भी है? इसमें शक्कर ज्यादा है। जाओ और दोबारा बनाओ और तब तक बनाती रहो जब तक मुझे पसंद ना आ जाए।”
आर्यन ने ठंडे स्वर में कहा। अनाया की आंखों में आंसू आ गए। उसे याद आया कि कैसे उसने आर्यन की कॉफी फेंक देती थी। आज आर्यन उसे शारीरिक चोट नहीं पहुंचा रहा था, लेकिन उसका स्वाभिमान हर पल लहूलुहान हो रहा था।
पार्टी में अपमान
शाम को हवेली में एक शानदार पार्टी का आयोजन था। आर्यन ने अनाया को आदेश दिया कि वह वेटर की ड्रेस पहने और मेहमानों को सर्व करें। अनाया का दिल तब बैठ गया जब उसने देखा कि मेहमानों में उसकी ही पुरानी किटी पार्टी वाली सहेलियां और बिजनेस पार्टनर मौजूद थे।
“ओह माय गॉड! अनाया…” तान्या ने जोर से चिल्लाते हुए कहा, “लड़कियों देखो, यह तो हमारी क्वीन अनाया मेहरा है। आज ट्रे पकड़ कर जूस पिला रही है।”
पूरी पार्टी में ठहाके गूंज उठे। अनाया की आंखों से आंसू गिर कर ट्रे पर पड़ने लगे।
“अरे रो क्यों रही हो डार्लिंग?” तान्या ने व्यंग किया, “सुना है तुम्हारे पिता की हालत बहुत खराब है और तुम आर्यन के टुकड़ों पर पल रही हो। चलो अब रोना बंद करो और मेरे सैंडल पर थोड़ी ड्रिंक गिरी है, उसे साफ करो।”
अनाया ने बेबसी में आर्यन की तरफ देखा। उसे उम्मीद थी कि शायद आर्यन उसे जिल्लत से बचा लेगा। लेकिन आर्यन दूर खड़ा शांत भाव से अपनी वाइन पी रहा था। वो चाहता था कि अनाया उस आग में जले जिसमें उसने आर्यन को 2 साल तक जलाया था।
अनाया जैसे ही घुटनों के बल बैठी और कांपते हाथों से तानिया के सैंडल पोंछने के लिए अपना रुमाल निकाला, तभी एक कड़क आवाज गूंजी,
“अनाया, रुको।”
अनाया चौंक कर ऊपर देखने लगी। आर्यन ने पलट कर तान्या की आंखों में देखा।
“तान्या, मेरे मेहमानों को जलील करना मेरी आदत नहीं है। लेकिन मेरे घर के स्टाफ को कौन सा काम कब करना है, यह सिर्फ मैं तय करता हूं। अनाया, ऊपर जाओ।”
अनाया बिना पीछे मुड़े तेजी से सीढ़ियों की तरफ भाग गई। उसे सैंडल साफ नहीं करनी पड़ी। लेकिन उसे एक पल के एहसास ने उसे अंदर तक झकझोड़ दिया था। उसे अपनी आंखों के सामने आर्यन का वो चेहरा याद आया जब उसने आर्यन के साथ यही सब किया था।
परिवर्तन की शुरुआत
देर रात जब सब मेहमान चले गए, अनाया हवेली के एक कोने में बैठकर फूट-फूट कर रो रही थी। वह पूरी तरह टूट चुकी थी। तभी उसे अपने पास किसी की मौजूदगी का एहसास हुआ। उसने नजरें उठाई तो सामने आर्यन खड़ा था। उसके हाथ में खाने की एक प्लेट थी।
“लो, खा लो। काम बहुत किया है आज तुमने।”
“तुम मुझसे नफरत करते हो ना? फिर खाना क्यों दे रहे हो?”
“सजा और जुल्म में फर्क होता है अनाया। मैं तुम्हें तुम्हारी गलती का एहसास दिला रहा हूं। तुम्हें भूखा मारना मेरा मकसद नहीं है।”
आर्यन ने कहा और वहां से जाने लगा। तभी अनाया के फोन पर एक मैसेज आया। वह अस्पताल से था।
“इमरजेंसी, मिस्टर मेहरा की हालत नाजुक है। फौरन अस्पताल पहुंचे और सर्जरी के लिए 20 लाख जमा करें।”
अनाया के हाथ से प्लेट गिर गई। वो चीखती हुई आर्यन के पीछे भागी और उसके पैर पकड़ लिए।
“आर्यन, प्लीज, मेरे डैड… वो मर जाएंगे। डॉक्टर ने पैसे मांगे हैं। मेरे पास कुछ नहीं है। सब तुमने छीन लिया है। प्लीज उनकी जान बचा लो। मैं तुम्हारी उम्र भर गुलामी करूंगी।”
उसकी चीखें हवेली की दीवारों से टकरा रही थी। अनाया फर्श पर गिरकर आर्यन के पैरों को अपने आंसुओं से भिगो रही थी।
“मुझे मार डालो। मुझे सड़कों पर भीख मांगने के लिए छोड़ दो। पर मेरे डैड को बचा लो। वो बेकसूर हैं। उनकी क्या गलती थी जो उन्हें ऐसी बेटी मिली।”
आर्यन खामोश खड़ा उसे देख रहा था। अनाया का चेहरा जो कभी घमंड से तमतमाया रहता था, आज पूरी तरह फीका पड़ चुका था। उसकी आंखों में अब बिजनेस की डील नहीं, बल्कि एक बेटी की तड़प थी।
आर्यन ने धीरे से अपना हाथ अपनी जेब में डाला और एक कागज निकाला। उसने वह कागज अनाया की ओर बढ़ाया।
“यह क्या है?”
अनाया ने कांपते हाथों से उसे लिया। वह सिटी हार्ट हॉस्पिटल की रसीद थी। उस पर लिखा था—
“मिस्टर मेहरा के ऑपरेशन और दवाइयों का पूरा खर्च ₹ लाख प्राप्त हुआ। आर्यन सिंह।”
अनाया की आंखें फटी की फटी रह गई।
“तुमने यह पहले ही कर दिया। पर क्यों? मैं तो तुम्हारे साथ इतना बुरा किया था।”
आर्यन ने एक लंबी सांस ली और खिड़की की तरफ मुड़ गया।
“अनाया, मेरी लड़ाई तुम्हारे अहंकार से थी। तुम्हारे बीमार पिता से नहीं। मैं इतना गिरा हुआ इंसान नहीं हूं कि अपने बदले के लिए किसी की जान ले लूं।”
अनाया दौड़कर आर्यन के सामने आई।
“कहां से लाते हो इतनी बड़ी सोच? मैंने तुम्हें वेटर बनाया। तुम्हें सबके सामने थप्पड़ मारा और तुमने मेरी दुनिया उजड़ने से बचा ली।”
आर्यन ने उसकी आंखों में देखा,
“इंसानियत इसी को कहते हैं अनाया। जिस दिन तुम दूसरों के दर्द को अपना समझोगी, उस दिन तुम्हें असली अमीरी समझ आएगी।”
नई सीख, नया जीवन
अगले कुछ दिन अनाया के लिए एक नई सीख की तरह थे। वह अभी भी आर्यन के घर में काम कर रही थी। लेकिन अब उसके मन में नफरत नहीं, बल्कि गहरा सम्मान था।
एक दोपहर जब आर्यन अपने ऑफिस में काम कर रहा था, अनाया ने देखा कि वह बहुत तनाव में है। एक बहुत बड़ी बिजनेस डील उसके हाथ से निकल रही थी। अनाया, जो बिजनेस की बारीकियों को बहुत अच्छे से जानती थी, बिना डरे आर्यन के केबिन में गई।
“आर्यन, अगर तुम इस क्लाइंट को उनके पिछले प्रोजेक्ट्स की खामियों के बारे में बताओ और उन्हें एक बेहतर बैकअप प्लान दो, तो वह डील पक्की हो जाएगी। मैं उस क्लाइंट को जानती हूं। उसे सुरक्षा पसंद है, पैसा नहीं।”
आर्यन ने चौंक कर अनाया को देखा। उसने अनाया के मशवरे पर काम किया और शाम तक वह अरबों की डील आर्यन की झोली में थी।
शाम को आर्यन ने अनाया को अपने पास बुलाया। उसकी मेज पर वही 6 महीने वाला गुलामी का कॉन्ट्रैक्ट रखा था।
“यह क्या है आर्यन?”
आर्यन ने अपनी जेब से एक लाइटर निकाला और उस कागज को आग लगा दी।
“देखते ही देखते वह एग्रीमेंट राख में बदल गया। तुम अब आजाद हो अनाया। तुम अपने घर वापस जा सकती हो। तुम्हारे पिता अब ठीक हैं और मैंने मेहरा विला के कागजात भी तुम्हारे नाम वापस कर दिए हैं।”
अनाया की आंखों में खुशी के बजाय दुख था।
“तुम मुझे निकाल रहे हो?”
“नहीं, मैं तुम्हें तुम्हारी इज्जत वापस दे रहा हूं। तुमने अपनी सजा पूरी कर ली है। तुमने साबित कर दिया कि तुम बदल चुकी हो।”
अनाया ने कागज की राख को देखा और फिर आर्यन को,
“आर्यन, मुझे वह घर और दौलत अब नहीं चाहिए। मुझे वह इंसान चाहिए जो जमीन पर रहकर भी आसमान से ऊंचा दिल रखता है। क्या तुम मुझे अपनी कंपनी में एक जूनियर मैनेजर के तौर पर काम करने का मौका दोगे? मैं अपनी मेहनत से अपना मुकाम फिर से पाना चाहती हूं।”
आर्यन के चेहरे पर पहली बार एक सच्ची और खिली हुई मुस्कान आई।
“मेहनत का रास्ता कठिन होता है, मिस मेहरा। मैं तैयार हूं।”
समापन—सम्मान और प्यार
दो साल बाद लेजेंड्री ग्रुप के विशाल कॉन्फ्रेंस हॉल में तालियों की गूंज सुनाई दे रही थी। आज कंपनी की एनुअल जनरल मीटिंग थी। मंच पर कंपनी के CEO आर्यन सिंह खड़े थे। लेकिन सबका ध्यान उस महिला पर था जिसने पिछले एक साल में अपनी मेहनत से पूरी इंडस्ट्री को हैरान कर दिया था।
“और अब मैं इस साल के बेस्ट एंप्लई ऑफ द ईयर का अवार्ड देना चाहूंगा हमारी सीनियर मैनेजर को, जिन्होंने जीरो से शुरुआत की और आज हमारी कंपनी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है—मिस अनाया मेहरा।”
अनाया, जो अब पहले की तरह महंगे नहीं बल्कि एक शालीन फॉर्मल सूट में थी, मंच पर आई। उसके चेहरे पर अब घमंड की जगह एक सुकून भरी मुस्कान और आंखों में चमक थी। अवार्ड लेते समय उसकी नजरें नीचे बैठी पहली कतार में पड़े अपने पिता मिस्टर मेहरा पर पड़ी। वह व्हील चेयर पर थे, लेकिन उनकी आंखों में अपनी बेटी के लिए गर्व के आंसू थे।
अनाया ने माइक लिया और कहा,
“यह अवार्ड मेरी कामयाबी का नहीं, बल्कि मेरी उस हार का है जिसने मुझे इंसान बनना सिखाया। शुक्रिया आर्यन, मुझे मेरी औकात दिखाने के लिए नहीं, बल्कि मुझे मेरी अहमियत समझाने के लिए।”
पार्टी खत्म होने के बाद आर्यन कॉफी के दो मग लेकर आया। उसने एक मग अनाया की तरफ बढ़ाया।
“इस बार कॉफी मैंने बनाई है, आर्यन।”
आर्यन ने शरारत से कहा, “और शक्कर भी उतनी ही है जितनी तुम्हें पसंद है।”
अनाया ने एक घूंट पिया और मुस्कुरा दी।
“यह दुनिया की सबसे अच्छी कॉफी है।”
दोनों कुछ देर चुपचाप शहर की लाइटों को देखते रहे। फिर अनाया ने धीरे से पूछा,
“आर्यन, तुमने मुझे उस दिन माफ क्यों किया? तुम चाहते तो मुझे पूरी जिंदगी के लिए बर्बाद कर सकते थे।”
आर्यन ने अनाया की आंखों में देखा,
“क्योंकि नफरत को नफरत से नहीं, सिर्फ प्यार और गरिमा से ही जीता जा सकता है। मैं तुम्हें हराना नहीं चाहता था, अनाया। मैं उस पुरानी अनाया को मिटाकर इस नई अनाया को वापस लाना चाहता था, जिससे मुझे कभी प्यार हुआ था।”
अनाया की आंखों में नमी आ गई।
“क्या अब भी उस प्यार के लिए कोई जगह बाकी है?”
आर्यन ने धीरे से अनाया का हाथ अपने हाथ में लिया,
“जगह तो हमेशा से थी, बस उस पर घमंड की धूल जमी थी। अब रास्ता साफ है।”
आज उसके पास करोड़ों की दौलत भले ही पहले जैसी ना हो, लेकिन उसके पास वह सुकून था जो दुनिया का कोई भी बैंक बैलेंस नहीं खरीद सकता था। उसने मन ही मन सोचा,
“वक्त और किस्मत का पहिया जरूर घूमता है, पर जो इंसान जमीन से जुड़ा रहता है उसे गिरने का डर नहीं होता।”
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