प्रिंसिपल के लडके ने एक गरीब घर की लड़की को बीच रोड पर किया बेइज्जत फिर जो हुआ उसे आगे देखें

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💔 प्रिंसिपल के लड़के ने एक गरीब घर की लड़की को बीच रोड पर किया बेइज्जत | फिर जो हुआ…

 

I. पहली बार छेड़खानी और धमकी

 

कहानी शुरू होती है एक गरीब घर की लड़की अंजली से, जो अपनी सहेली के साथ कॉलेज जा रही है। अंजली के पास साइकिल है, लेकिन वह सादगी से जीवन जीती है।

कॉलेज जाते समय, एक महँगी बाइक पर सवार लड़का, रंजीत सिंह, उन्हें रोकता है। रंजीत कॉलेज के प्रिंसिपल का बेटा है और पूरे इलाके में अपनी बदतमीज़ी और घमंड के लिए जाना जाता है।

रंजीत, अंजली से बदतमीज़ी करते हुए कहता है: “और मैडम, कहाँ जा रही हो? चलो मेरी बाइक पे बैठो, मैं तुम्हें पहुँचा दूँगा।

अंजली गुस्से में जवाब देती है: “ये क्या बदतमीज़ी है? तुम समझते क्या हो अपने आप को?

रंजीत का अहंकार भड़क उठता है। वह अंजली को धमकाता है: “तू नहीं जा रही तो अपनी सहेली को भेज दे। मेरी जान, इसे रानी बना दूँगा।

अंजली पलटवार करती है: “तू मुझे अभी जानता नहीं, मैं कौन हूँ। मैं तुझे ऐसा सबक सिखाऊँगी, घर तक की याद आ जाएगी।

रंजीत अपनी शक्ति का रौब दिखाता है: “तू भी अभी मुझे जानती नहीं। मैं कौन हूँ। मैं कॉलेज का प्रिंसिपल का लड़का हूँ। मैं जिस पे नज़र डालता हूँ, उसे मैं अपना बना लेता हूँ।

अंजली और उसकी सहेली, हिम्मत दिखाकर रंजीत को दूर भगा देती हैं, लेकिन रंजीत जाते-जाते धमकाता है: “आज तो बच गई। कल देखूँगा, साली, कल कहाँ जाएगी।

II. प्रिंसिपल से शिकायत और बदले की आग

 

अंजली सीधे कॉलेज पहुँचकर, प्रिंसिपल के ऑफिस में जाती है। प्रिंसिपल उसके पिता की तरह हैं और अंजली को बेटी जैसा मानते हैं।

अंजली प्रिंसिपल से शिकायत करती है: “प्रिंसिपल सर, तुम्हारे लड़के रंजीत सिंह ने मेरे साथ और मेरी सहेली के साथ बदतमीज़ी की और जब हमने कुछ कहा, तो हमारे साथ हाथापाई की और न जाने क्या-क्या बोला।

प्रिंसिपल को बहुत गुस्सा आता है कि उनके ही बेटे ने उनके कॉलेज की बच्चियों से ऐसी बदतमीज़ी की। वह अंजली को भरोसा दिलाते हैं: “बेटा, तुम घर जाओ। मैं उसे देखूँगा।

प्रिंसिपल, घर जाकर रंजीत को खूब डांटते हैं और उसकी इस हरकत के लिए उसे सबक सिखाने की धमकी देते हैं। रंजीत, जिसे आज तक किसी ने आवाज़ नहीं उठाई थी, वह इस अपमान से बदले की आग में जलने लगता है।

अगले दिन अंजली और उसकी सहेली बाज़ार से घर का राशन लेने जा रही होती हैं। अंजली की माँ उसे समझाती हैं कि गाँव का माहौल खराब है, इसलिए सहेली को साथ लेकर जाना।

जैसे ही वे बाज़ार में पहुँचती हैं, रंजीत और उसके दोस्त उनका रास्ता रोकते हैं। रंजीत, अंजली से पूछता है: “ओए मैडम इधर आ। तू समझती क्या है अपने आप को? तूने मेरे पिताजी से क्या बोला?

अंजली पलटकर जवाब देती है: “अभी तो तेरे पिताजी से ही बोला है। अगर तू ज़्यादा औकात से बाहर गया, तो तेरी शिकायत पुलिस तक पहुँचा दूँगी।

रंजीत अपने दोस्तों के सामने अपमानित महसूस करता है। उसका दोस्त रंजीत को भड़काता है: “यार, तेरी तो इंसल्ट कर गई लड़की।

रंजीत गुस्से में कहता है: “इसने मेरी मेरे दोस्तों के सामने इतनी बड़ी इंसल्ट करी है, इसका एग्ज़ाम इसे भुगतना पड़ेगा।

III. बीच रोड पर बदतमीज़ी और एफआईआर का फैसला

 

कुछ देर बाद, रंजीत फिर अंजली के पास आता है और कहता है: “ज़्यादा होशियार बनती है तू। क्या बोल रही है? तूने मेरे दोस्तों के सामने मेरी इंसल्ट की। अब देखता हूँ तू कहाँ जाएगी।

अंजली फिर भी नहीं डरती और उसे सबक सिखाने की बात कहती है। रंजीत गुस्से में अंजली को पकड़ लेता है और बीच रोड पर उसके साथ बदतमीज़ी करता है, उसे धमकाता है और उसे अपनी औकात दिखाता है।

रंजीत के दोस्त भी उसका साथ देते हैं, और वे मिलकर अंजली को बेइज्जत करने की कोशिश करते हैं। अंजली रोते हुए घर पहुँचती है और अपनी माँ से कहती है:

प्रिंसिपल का लड़का बहुत बदतमीज़ होता जा रहा है। उसने कल भी मुझे छेड़ा और जब मैंने उसके पिताजी से कही, तो उसने आज फिर मुझे घेरा और बोला कि तूने मेरे पिताजी से कही और मेरे साथ फिर बदतमीज़ी।

अंजली की माँ भी बहुत गुस्सा होती हैं: “बिल्कुल बेटा! नहीं तो उसकी हरकत बढ़ ही जाएगी। वो ऐसे मानने वाला नहीं है।

अंजली फ़ैसला करती है: “एफआईआर दर्ज करवा कर ही रहूँगी। कुछ भी हो जाए, उसे जेल भिजवाना ही है।

माँ उसे पूरा समर्थन देती हैं: “हाँ माँ! मैं उसको अंदर करवा के ही खाना खाऊँगी आज।

IV. सबक: गुंडागर्दी का नतीजा

 

अंजली अगले दिन सीधे पुलिस स्टेशन जाती है। रिपोर्ट पहले से ही तैयार है।

अंजली पुलिस इंस्पेक्टर को बताती है: “सर, मुझे प्रिंसिपल के लड़के के खिलाफ़ एफआईआर दर्ज करानी है। सामने उसने मेरे साथ बदतमीज़ी की। और बोला, जा तुझे जो करना है कर ले। उस साले की इतनी हिम्मत किसी की लड़की को छेड़े।

इंस्पेक्टर मामले की गंभीरता को समझते हैं। वे तुरंत रंजीत को उसके कॉलेज से गिरफ्तार करने का आदेश देते हैं।

पुलिस, रंजीत को कॉलेज से उठा लाती है। वह बहुत हैरान और डरा हुआ है।

इंस्पेक्टर रंजीत को डांटते हैं: “क्यों रे! ज़्यादा गुंडागर्दी देता है?

अंजली, रंजीत को पुलिस स्टेशन में देखती है। वह डर के मारे काँप रहा है।

अंजली इंस्पेक्टर से कहती है: “इंस्पेक्टर साहब, उसे ले जाओ।

रंजीत चिल्लाता है: “मुझे छोड़ो।

अंजली उसे देखकर कहती है: “अब इसकी निकलेगी सारी अकड़। अब पता चलेगा लड़की को छेड़ने का नतीजा।

रंजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया जाता है और उसे सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है। अंजली ने अपनी हिम्मत और सही समय पर आवाज़ उठाने से न सिर्फ़ अपनी इज़्ज़त बचाई, बल्कि प्रिंसिपल के बिगड़े बेटे को उसकी गुंडागर्दी का सही सबक भी सिखाया।

इस कहानी का सबक यह है कि शक्ति या पद से कोई बड़ा नहीं होता। आत्मसम्मान और साहस ही असली ताकत है।

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