प्रेग्नेंट महिला को बस में खड़े देख अपनी सीट दे दी थी ,कुछ साल बाद जो मिला वो कभी सोचा भी नहीं था

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यह कहानी एक साधारण आदमी की है, जो मुंबई जैसे बड़े शहर में अपनी किस्मत आज़माने आया था। मनोहर एक छोटे से गांव का लड़का था, जो मेहनत और संघर्ष से भरा हुआ था। उसकी ज़िंदगी में एक ऐसा पल आया, जो उसके भविष्य का निर्धारण कर गया। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि कभी-कभी छोटे अच्छे कर्म, जीवन में बड़े बदलाव ला सकते हैं।

मनोहर का जीवन संघर्ष से भरा हुआ था। वह अपने माता-पिता के साथ उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से मुंबई आया था, जहां उसने खुद को स्थापित करने की पूरी कोशिश की थी। लेकिन तीन साल हो गए थे, और वह अभी तक स्थिर नौकरी की तलाश में भटक रहा था। उसकी जिंदगी में हर दिन नए संघर्ष होते थे, लेकिन उसका हौसला कम नहीं हुआ था।

एक दिन, जब वह एक इंटरव्यू से वापस लौट रहा था, तो उसे मुंबई की भीड़-भाड़ वाली बस में एक गर्भवती महिला दिखी। वह महिला सीट के लिए इधर-उधर देख रही थी, लेकिन किसी ने भी उसकी मदद नहीं की। मनोहर, जो खुद थका हुआ था, अपने भीतर के अच्छे कर्म की आवाज सुनता है और वह अपनी सीट उस महिला को दे देता है। यह छोटी सी मदद उसकी जिंदगी बदलने वाली थी, इसका उसे अंदाजा नहीं था।

चार साल बाद, जब मनोहर फिर से एक इंटरव्यू के लिए जाता है, तो वह महिला उसी कंपनी में सीईओ के रूप में काम कर रही थी। वह महिला, जो अब प्रिया मल्होत्रा के नाम से जानी जाती है, मनोहर को पहचान जाती है और उसे बिना इंटरव्यू के ही नौकरी दे देती है। प्रिया बताती है कि वह दिन जब मनोहर ने अपनी सीट उसे दी थी, उस दिन उसने अपने मन में ठान लिया था कि अगर भविष्य में उसे कभी मनोहर की मदद करने का मौका मिला, तो वह जरूर करेगी।

इस घटना के बाद मनोहर की ज़िंदगी बदल जाती है। वह नौकरी में शानदार प्रदर्शन करता है, और धीरे-धीरे उसकी सैलरी बढ़ती जाती है। उसकी मेहनत और ईमानदारी को देखकर प्रिया और उसकी कंपनी के लोग भी प्रभावित होते हैं। मनोहर अब एक सफल और खुशहाल जीवन जी रहा था, लेकिन उसने अपनी जड़ों को कभी नहीं भुलाया।

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि नेकी का फल जरूर मिलता है, भले ही वह तुरंत न मिले। अच्छे कर्म कभी बेकार नहीं जाते और हमेशा सही समय पर हमें उनका फल मिलता है। मनोहर की तरह हमें भी अपनी अंतरात्मा की आवाज सुननी चाहिए और बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की मदद करनी चाहिए। छोटे अच्छे कर्म बड़े बदलाव ला सकते हैं, जैसे मनोहर की जिंदगी में आया।

आखिरकार, यह कहानी एक संदेश देती है कि जीवन में कठिनाइयाँ आ सकती हैं, लेकिन अगर हम सच्चे दिल से मेहनत करते हैं और दूसरों की मदद करते हैं, तो निश्चित रूप से हम सफलता हासिल करेंगे।