बच्चे को भिखारी समझा वह करोड़पति निकला उसके बाद जो हुआ…
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बच्चे को भिखारी समझा… लेकिन वह करोड़पति का बेटा निकला
सुबह का समय था। शहर अभी पूरी तरह जागा भी नहीं था, लेकिन स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में कामकाज शुरू हो चुका था। ग्राहक धीरे-धीरे अंदर आ रहे थे। कोई पैसे जमा कराने आया था, कोई निकालने, तो कोई नए खाते के लिए फॉर्म भर रहा था।
उसी भीड़ के बीच एक छोटा सा लड़का धीरे-धीरे अंदर आया।
उसकी उम्र करीब बारह साल रही होगी।
उसने पुराने और हल्के फटे हुए कपड़े पहन रखे थे। पैरों में घिसे हुए जूते थे और कंधे पर एक छोटी सी थैली टंगी हुई थी।
लेकिन उसकी आँखों में डर नहीं था।
बल्कि एक अजीब सा गर्व था।
वह सीधे बैंक के काउंटर तक पहुँचा और थैली को बहुत सावधानी से काउंटर पर रख दिया।
काउंटर के पीछे बैठी महिला कर्मचारी नीलिमा शर्मा ने चश्मा ठीक करते हुए उसकी तरफ देखा।
लड़के ने धीरे से कहा —
“मैडम… यह मेरी पूरी जमा पूंजी है। कृपया इसे मेरे खाते में जमा कर दीजिए।”
नीलिमा ने पहले थैली की तरफ देखा, फिर लड़के की तरफ।
उसके चेहरे पर तुरंत नापसंदगी का भाव आ गया।
जैसे उसके सामने कोई गंदी चीज आ गई हो।
उसने अपनी सहकर्मी रेखा मल्होत्रा की तरफ देखा और हल्की सी हंसी दबाते हुए बोली —
“अरे… यह देखो।”

फिर उसने लड़के से पूछा —
“नाम क्या है तुम्हारा?”
“अर्जुन…” लड़के ने धीरे से जवाब दिया।
“और यह पैसे कहाँ से आए?”
अर्जुन ने तुरंत कहा —
“मैडम, मैंने कमाए हैं।”
नीलिमा ने भौंहें चढ़ा लीं।
“कमाए हैं?”
रेखा हंस पड़ी।
“अरे वाह… छोटा सा बच्चा और इतनी बड़ी बात!”
नीलिमा ने थैली खोली।
अंदर बहुत सारे सिक्के और मुड़े हुए नोट थे।
कुछ दस रुपये के, कुछ बीस के, कुछ पचास के।
लेकिन सब मिलाकर रकम अच्छी खासी लग रही थी।
नीलिमा ने अचानक सख्त आवाज में पूछा —
“सच-सच बता… यह पैसे तूने चोरी किए हैं ना?”
यह सुनते ही अर्जुन का चेहरा सफेद पड़ गया।
उसकी आँखें फैल गईं।
“नहीं मैडम… कसम से नहीं।”
उसकी आवाज काँप रही थी।
“मैं रोज सुबह अखबार बाँटता हूँ… और शाम को चाय की दुकान पर काम करता हूँ।”
रेखा ने व्यंग्य से कहा —
“अरे सुनो सुनो… कितना मेहनती बच्चा है!”
फिर उसने अर्जुन को ऊपर से नीचे तक देखा।
“पहले अपनी हालत देख। फटे कपड़े, गंदे जूते… और कह रहा है कि इतने पैसे कमाए हैं।”
नीलिमा ने कुर्सी से पीछे हटते हुए कहा —
“मुझे तो साफ-साफ चोरी लग रही है।”
फिर उसने कहा —
“अभी पुलिस को बुलाती हूँ।”
अर्जुन के हाथ काँपने लगे।
उसकी आँखों में आँसू आ गए।
“मैडम प्लीज… मैंने सच में कुछ गलत नहीं किया।”
“मेरी नानी बीमार है… उनके इलाज के लिए पैसे जमा करने आया हूँ।”
लेकिन नीलिमा ने उसकी बात बीच में ही काट दी।
“बस… बहुत हो गया।”
“अगर तूने यहाँ से हिलने की कोशिश की तो सिक्योरिटी को बुला लूँगी।”
उसी समय पास खड़ा सिक्योरिटी गार्ड रामसिंह राठौर आगे आया।
लंबा चौड़ा आदमी।
हाथ में डंडा।
उसने अर्जुन को घूरते हुए कहा —
“क्या मामला है मैडम?”
नीलिमा ने कहा —
“यह लड़का चोरी के पैसे जमा करने आया है।”
रामसिंह ने अर्जुन को घूरा।
“तू यहाँ क्यों आया है?”
फिर उसने घमंड से कहा —
“यह बैंक अमीर लोगों के लिए है।”
“भिखारियों के लिए नहीं।”
यह सुनते ही अर्जुन के पीछे खड़ी उसकी नानी कमला देवी आगे आईं।
सत्तर साल की कमजोर बूढ़ी महिला।
उन्होंने हाथ जोड़कर कहा —
“बेटा… मेरे पोते को कुछ मत कहो।”
“यह सच कह रहा है।”
“इसने महीनों मेहनत करके यह पैसे जमा किए हैं।”
लेकिन रेखा हंस पड़ी।
“आंटी जी… आप भी ना।”
“बच्चों को झूठ बोलना सिखाती हो।”
फिर उसने कहा —
“अगर पुलिस से बचना है तो चुपचाप यहाँ से चले जाओ।”
अर्जुन का गला भर आया।
उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।
“मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है नानी?”
उसने धीरे से पूछा।
“मैंने तो कुछ गलत नहीं किया…”
बैंक के अंदर बैठे लोग यह सब देख रहे थे।
कुछ लोगों को बुरा लग रहा था।
लेकिन कोई आगे नहीं आया।
कोई आवाज नहीं उठी।
अर्जुन को अचानक बहुत प्यास लगी।
उसने पास रखे पानी के जग की तरफ कदम बढ़ाया।
लेकिन तभी रामसिंह ने उसका रास्ता रोक दिया।
“रुक!”
उसने डंडा उठाते हुए कहा —
“यह पानी ग्राहकों के लिए है।”
“तेरे जैसे गंदे बच्चों के लिए नहीं।”
अब अर्जुन खुद को रोक नहीं पाया।
वह जोर-जोर से रोने लगा।
कमला देवी ने उसे सीने से लगा लिया।
“चल बेटा… यहाँ से चलते हैं।”
दोनों धीरे-धीरे बैंक से बाहर निकल गए।
बाहर आकर अर्जुन फूट-फूट कर रोने लगा।
“नानी… मैंने क्या गलती की?”
“उन्होंने मुझे चोर क्यों कहा?”
कमला देवी की आँखों में भी आँसू आ गए।
“बेटा… गलती हमारी नहीं है।”
“गलती उन लोगों की है जो इंसान को उसके कपड़ों से पहचानते हैं।”
उन्हें क्या पता था…
कि बैंक के एक कोने में बैठा एक आदमी यह सब चुपचाप देख रहा था।
उसका नाम था विक्रम सिंह।
वह एक पत्रकार था।
उसने पूरी घटना अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर ली थी।
और उसे अभी तक यह अंदाजा भी नहीं था…
कि यह वीडियो कुछ ही घंटों में पूरे देश में तहलका मचाने वाला है।
और यह कहानी सिर्फ एक गरीब बच्चे की नहीं रहने वाली थी।
क्योंकि कुछ ही दिनों बाद दुनिया को पता चलने वाला था —
कि वही “भिखारी समझा गया बच्चा”…
असल में एक करोड़पति का खोया हुआ बेटा है।
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