रेलवे स्टेशन पर भिखारी की इंग्लिश सुनकर पुलिसकर्मी हैरान रह गया , भिखारी ने बताया सच ….

महाराष्ट्र के नागपुर रेलवे स्टेशन के एक प्लेटफार्म पर एक डस्टबिन रखा हुआ है। वहां चारों तरफ लोगों की भीड़ लगी हुई है और उस डस्टबिन के पास एक व्यक्ति खड़ा है। उसे देखकर लगता है कि वह कोई भिखारी है क्योंकि उसके लंबे-लंबे गंदे उलझे बाल और मैले-कुचले फटे पुराने कपड़े इस बात को साफ-साफ दर्शाते हैं। वह वहां इधर-उधर घूम रहा है या फिर डस्टबिन के अंदर से कुछ खाने का सामान ढूंढ रहा है।

वह डस्टबिन के अंदर से खाली बोतलें निकालता है और उनमें बचे हुए लिक्विड को पीने की कोशिश कर रहा है। इस पूरे दृश्य को एक रेलवे पुलिस का जवान दूर से देख रहा था, जिसकी ड्यूटी उसी प्लेटफार्म पर थी। जैसे ही वह व्यक्ति की यह हालत देखता है, वह रेलवे की कैंटीन पर जाता है और वहां से पानी की एक बोतल खरीदकर उस व्यक्ति को दे देता है।

अब वह व्यक्ति उस बोतल को लेकर पूरी बोतल एक साथ पी जाता है। पीने के बाद वह पुलिस के जवान का धन्यवाद करता है और कहता है, “थैंक यू सो मच, सर।” जैसे ही पुलिस वाला उसके मुंह से यह अंग्रेजी के शब्द सुनता है और इतने अच्छे लहजे में उसे बोलते हुए देखता है, वह हैरान रह जाता है और गहरी सोच में पड़ जाता है।

रणबीर का परिचय

पुलिस वाला सोचता है, “यह आदमी भिखारी नहीं हो सकता। शायद वह कोई सीबीआई अधिकारी है और किसी केस को सुलझाने के लिए इस तरह का भेष बनाए हुए हैं।” लेकिन जब वह उसके शरीर को ध्यान से देखता है तो प्रतीत होता है कि जैसे वह पिछले तीन-चार महीनों से भूखा है। इसके बाद वह अपने आप को रोक नहीं पाता और उस व्यक्ति से पूछता है, “अरे भाई, तुम हो कौन जो इतनी अच्छी अंग्रेजी बोल लेते हो?”

उस व्यक्ति ने अपना नाम बताया, “मेरा नाम रणबीर सिंह है और मैं फलानी जगह का रहने वाला हूं। मैंने ग्रेजुएशन कर रखी है और इसीलिए मैं इतनी अच्छी अंग्रेजी बोल सकता हूं।” यह सुनकर पुलिस वाला उससे पूछता है, “अगर तुमने ग्रेजुएशन की है और पढ़े-लिखे हो, तो फिर इस हालत में यहां क्यों हो?”

रणबीर ने जवाब दिया, “इसके पीछे एक लंबी कहानी है जिसे सुनाने में थोड़ा समय लगेगा।” यह सुनकर पुलिस वाला उसे स्टेशन के रेस्ट रूम में ले गया। वहां पहुंचने के बाद उसने रणबीर के लिए खाना मंगवाया और रणबीर बैठकर खाना खाने लगा। खाने के बाद पुलिस वाला बोला, “अगर तुम्हें फ्रेश होना है तो हो सकते हो। उसके बाद मैं तुम्हारी पूरी कहानी सुनना चाहूंगा।”

रणबीर की दुखद कहानी

रणबीर ने खाना खत्म किया और फिर अपनी कहानी शुरू की। उसने बताया, “हमारे परिवार में बस मैं और मेरी मां हैं। मेरे पिता का देहांत कई साल पहले किसी बीमारी के चलते हो गया था। और अब मैं ही अपनी मां का ख्याल रखता था। यह कहानी 2 साल पहले की है, यानी 2022 की, जब मैं अपनी मां के साथ गांव में रहता था। मैंने ग्रेजुएशन कर लिया था और मेरी मां मेरी शादी की राह देख रही थी। वे मन ही मन बहुत खुश थीं। सोचती थीं कि जब मेरी शादी होगी तो घर में एक बहू आ जाएगी और परिवार में एक सदस्य और बढ़ जाएगा।”

रणबीर ने आगे कहा, “एक दिन मैं अपने गांव से शहर गया। मेरा गांव शहर से लगभग 8 किमी दूर है। एक दिन मुझे घर के लिए कुछ सामान की जरूरत थी, तो मैं शहर के बाजार में एटीएम से पैसे निकालने गया। पैसे निकालने के बाद मैं अपने गांव लौटने के लिए किसी सवारी का इंतजार करने लगा। मैं गांव के रास्ते पर खड़ा था और किसी बाइक, ऑटो या कार का इंतजार कर रहा था। कई गाड़ियों को रुकने का इशारा किया लेकिन कोई नहीं रुका। तभी मुझे एक गाड़ी आती हुई दिखी, तो मैंने उसे हाथ देकर रुकने का इरादा किया। गाड़ी रुक गई और मैंने उनसे लिफ्ट मांगी। उन लोगों ने मुझे गाड़ी में बैठने का इशारा किया।”

गाड़ी में सफर

रणबीर ने आगे बताया, “जब मैं गाड़ी में बैठा तो मैंने देखा कि उसमें तीन लोग थे। वे एक अजीब भाषा में बात कर रहे थे जो ना हिंदी थी और ना ही अंग्रेजी। मुझे वह भाषा बिल्कुल समझ नहीं आ रही थी। वे बैठे-बैठे कुछ खा भी रहे थे और फिर उन्होंने खाने की चीज में से कुछ मेरी तरफ इशारा करते हुए मेरी ओर बढ़ाया। जैसे ही मैंने वह खाया, थोड़ी देर में मुझे अजीब सा महसूस होने लगा और फिर अचानक से मैं बेहोश होकर गया।”

“जब मेरी आंखें खुली तो मैंने खुद को एक गंदी और बदबूदार टॉयलेट में बंद पाया। वहां से बहुत ही बुरी दुर्गंध आ रही थी और मैं समझ नहीं पा रहा था कि मुझे कहां लाकर बंद कर दिया गया है। मेरे पास ना ही वह पैसे थे जो मैंने एटीएम से निकाले थे, ना मोबाइल फोन था और ना ही कोई पहचान पत्र। मैं घबरा कर चिल्लाने लगा, ‘मुझे बाहर निकालो। मैं यहां कहां बंद हूं?’ लेकिन कोई जवाब नहीं आया। जब मैंने और जोर से शोर मचाया, तो कुछ देर बाद एक व्यक्ति बाहर से आया। उसने दरवाजा खोला और मुझे देखते ही गुस्से में मुझ पर टूट पड़ा। उसने मुझ पर हमला किया और मुझे बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। वह तब तक मुझे मारता रहा जब तक कि मैं दर्द से बिलख नहीं लगा।”

खौफनाक अनुभव

रणबीर की आंखों में उस खौफनाक पल की छवि साफ झलक रही थी और पुलिस वाला उसकी कहानी सुनते हुए गंभीरता से सोच में पड़ गया था। “जब तक वह चुप नहीं हो जाता, रणबीर उससे बात करने की कोशिश करता रहता है। लेकिन वह व्यक्ति किसी ऐसी भाषा में बात कर रहा था जो रणबीर को बिल्कुल समझ में नहीं आ रही थी। रणबीर थक कर चुप हो जाता है। तब वह व्यक्ति दरवाजा बंद करके वहां से चला जाता है। अब रणबीर बहुत परेशान हो जाता है कि वह कहां है और ये लोग कौन हैं जिनकी भाषा भी वह नहीं समझ पा रहा।”

“वह इसी उलझन में था। तभी एक बार फिर से वही टॉयलेट का दरवाजा खुलता है। अब उस व्यक्ति के हाथ में एक इंजेक्शन था जिसे वह रणबीर को लगा देता है। जैसे ही उसे इंजेक्शन लगाया जाता है, रणबीर फिर से बेहोश हो जाता है। इस बार जब उसकी आंखें खुलती हैं तो शाम का समय हो चुका होता है और वह खुद को एक खाली से कमरे में बंद पाता है। भूख भी लग रही थी, तो वह दरवाजा बजाकर जोर-जोर से कहने लगता है, ‘मुझे भूख लगी है। खाने के लिए कुछ दे दो।’”

नया कैद

उसकी आवाज सुनकर बाहर जो लोग उसे बंद करके रखे हुए थे, वे दरवाजा खोलते हैं। लेकिन जैसे ही वे कुछ कहते हैं, रणबीर उनकी भाषा नहीं समझ पाता और वे भी रणबीर की बात नहीं समझ पाते। इस वजह से वे लोग गुस्से में रणबीर को पीटने लगते हैं और उसका मुंह बंद कर देते हैं। रणबीर सहमा-सहमा चुपचाप कमरे में बैठा रहता है। थोड़ी देर बाद दरवाजा फिर खुलता है और उसके लिए थोड़ा सा खाना लाया जाता है। रणबीर उस खाने को खाता है, लेकिन उसे अंदर से बहुत डर लग रहा था।

वह बार-बार सोचता है कि वह आखिर कहां है और यहां कैसे पहुंच गया। रणबीर को सब कुछ किसी बुरे सपने जैसा लग रहा था। लेकिन जो कुछ भी उसके साथ हो रहा था, वह सब हकीकत थी। थोड़ी देर बाद एक बार फिर से दरवाजा खुलता है और वही व्यक्ति एक और इंजेक्शन लेकर रणबीर के पास आता है और उसे नशे का इंजेक्शन लगा देता है। इंजेक्शन लगते ही रणबीर पूरी तरह से बेहोश हो जाता है और कमरे के फर्श पर बेसुद पड़ा रहता है।

नया दिन, नया संघर्ष

अगली सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही कुछ लोग वहां आते हैं और रणबीर को जबरदस्ती उठाकर अपने साथ ले जाते हैं। वे उसे एक कंस्ट्रक्शन साइट पर ले जाते हैं जहां उसके जैसे कई और लोग भी मौजूद थे। वहां पहुंचने के बाद रणबीर को भी उन सबके साथ काम करना पड़ता है। उन लोगों की कड़ी निगरानी में सभी मजदूर काम कर रहे थे ताकि कोई भाग न सके।

रणबीर ने धीरे-धीरे यह समझ लिया कि वहां पर बाकी सभी लोग भी शायद इसी तरह से लाए गए थे। दिन में वह वहां मजदूरी करता और शाम होते ही उसे फिर से उसी कमरे में वापस लाकर एक और इंजेक्शन देकर सुला दिया जाता। इस तरह दिन पर दिन बीतने लगे। काम करते हुए रणबीर को लगभग 2 साल हो चुके थे और इस दौरान जो इंजेक्शन उसे दिए जा रहे थे, उनका असर अब कम होने लगा था।

आत्मसंघर्ष

2 साल के भीतर उसे यह समझ में आ गया था कि अगर वह चुपचाप और बिना किसी विरोध के काम करता रहे तो लोग उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देंगे। अब वह यह जान चुका था कि अगर वह शोर मचाएगा या विरोध करेगा तो ही उन लोग उसे पीटेंगे। इसलिए उसने चुपचाप उनके अनुसार काम करना शुरू कर दिया था और इसी वजह से लोग अब उस पर कम ध्यान देने लगे थे।

जैसे-जैसे इंजेक्शन का असर कम होने लगा, एक रात रणबीर की आंखें अचानक खुल जाती हैं। जब उसकी आंखें खुलती हैं तो वह देखता है कि जिस कमरे में उसे बंद किया गया था, उसका दरवाजा खुला हुआ था और बाहर लोग गहरी नींद में सोए हुए थे। यह अवसर देखकर रणबीर ने चुपके से वहां से निकलने का फैसला किया क्योंकि अब उन लोगों के पास और भी नए लोग थे जिन पर वे ज्यादा ध्यान दे रहे थे और उन्हें नियंत्रित करने में व्यस्त थे।

स्वतंत्रता की खोज

वे यह सोच रहे थे कि अब रणबीर उनके पास स्थाई रूप से रहेगा। लेकिन रणबीर ने इस मौके का फायदा उठाया और चुपके से वहां से भाग निकला। अब रणबीर सोचने लगा था कि वह कहां जाए क्योंकि उसे इस अजनबी जगह से कोई भी परिचित नहीं था। जैसे ही वह वहां से भागता है, वह पागलों की तरह इधर-उधर दौड़ने लगता है। लेकिन वह जगह उसे बिल्कुल भी परिचित नहीं लग रही थी। चारों ओर ऐसे बोर्ड दिख रहे थे जिन पर अजनबी भाषा लिखी हुई थी जिन्हें वह समझ नहीं पा रहा था।

धीरे-धीरे वह एक ट्रेन की पटरी के पास पहुंच जाता है। रणबीर ने देखा कि ट्रेन की पटरी पर चलने से शायद वह किसी स्टेशन तक पहुंच सकता है और वहां से कोई ट्रेन पकड़कर अपने इलाके तक जा सकता है। क्योंकि वह पढ़ा-लिखा था, उसे ट्रेन की पटरी का अनुसरण करने का ख्याल आया। वह पटरी के साथ चलता गया और आखिरकार एक स्टेशन तक पहुंच गया।

नागपुर रेलवे स्टेशन

स्टेशन पर पहुंचते ही उसे एहसास हुआ कि वह भारत के किसी दूसरे हिस्से में है। जहां की भाषा और बोली पूरी तरह से अलग थी। वहां के लोग भी उसे अजनबी लग रहे थे। स्टेशन पर भी उसे अपनी भाषा में कोई नहीं मिला और कोई भी उसकी बात नहीं समझ पा रहा था। यह देखकर रणबीर तय करता है कि वह यहां से ट्रेन पकड़कर अपने इलाके वापस जाने की कोशिश करेगा।

लेकिन रणबीर के पास पैसे नहीं थे और यह समस्या उसके लिए एक और बड़ी चुनौती बन गई थी क्योंकि बिना पैसे के वह रेल यात्रा कैसे कर सकता था। फिर भी उसने यह तय किया कि उसे इस खतरनाक जगह से निकलना होगा। वह जानता था कि अगर उन लोगों को यह पता चला कि वह भाग गया है तो वे उसे ढूंढने के लिए इधर-उधर जरूर आएंगे। अगर वे फिर से उसे पकड़ लेते तो उसके साथ क्या होगा, यह उसे बखूबी समझ में आ गया था।

सुरक्षा की प्राथमिकता

इसलिए उसने एक ट्रेन में चढ़ने का निर्णय लिया। ट्रेन में चढ़ने के बाद वह कई बार टॉयलेट में सोता और कभी सीट के नीचे, कभी कहीं और जैसे-तैसे सफर करता गया। जब भी उसे भूख लगती, वह किसी ना किसी स्टेशन पर उतरकर वहां के फूड स्टॉल से कुछ खाने का जुगाड़ कर लेता। वह खाना ढूंढता और खाता बिना किसी को यह एहसास होने दिया कि वह एक कष्टकारी स्थिति में है।

अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए रास्ता खोजते हुए धीरे-धीरे वह नागपुर रेलवे स्टेशन तक पहुंच जाता है। नागपुर रेलवे स्टेशन पर पहुंचने के बाद रणबीर को बहुत जोर की भूख लग रही थी। वह स्टेशन के पास एक डिब्बे के पास गया और उसमें से कुछ खाने की कोशिश करने लगा। डिब्बे में रखी कोल्ड ड्रिंक की बोतलें थीं जिन्हें उसने खोला और उनमें बची हुई कोल्ड ड्रिंक पीने की कोशिश की।

पुलिस का सहारा

यह देखकर एक रेलवे का जवान जो पास से गुजर रहा था, उसकी आंखों में आंसू आ गए। वह रणबीर से उसकी पूरी कहानी सुनता है और यह सुनकर उसे बहुत दुख हुआ क्योंकि रणबीर के साथ जो हुआ था, वह बहुत ही दर्दनाक था। रणबीर ने जब अपनी पूरी कहानी बताई तो पुलिस वालों को भी उसकी स्थिति को लेकर गहरी संवेदना हुई।

रेलवे पुलिस का जवान रणबीर से पूछता है, “क्या तुम्हें अपने घर का नंबर याद है?” रणबीर थोड़ी देर चुप रहता है। फिर वह बताता है, “मेरे घर पर मेरा फोन था। लेकिन उन लोगों ने वह फोन मुझसे छीन लिया था। अब मैं उस नंबर को याद नहीं कर सकता और मेरी मां भी अनपढ़ है तो वह भी मुझे उस नंबर को नहीं दिलवा सकती।”

लेकिन फिर वह अपनी याददाश्त पर जोर डालता है और उसे अपने ससुराल के लड़के का नंबर याद आ जाता है। इस पर रेलवे पुलिस के जवान ने अपना फोन निकाला और उस नंबर को मिलाने की कोशिश की। जैसे ही वह नंबर डायल करता है, रात का समय हो चुका था और रणबीर के ससुराल के लड़के गौरव का फोन लगता है।

भाई से पुनर्मिलन

जब पुलिस वाला गौरव को फोन करता है, तो वह रणबीर सिंह के बारे में पूछता है। “क्या तुम इस आदमी को जानते हो?” गौरव जवाब देता है, “हां साहब, वह मेरा भाई है। लेकिन काफी दिनों से वह गायब था। हमने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी पुलिस में दी थी। अब आप उसके बारे में क्यों पूछ रहे हैं?”

पुलिस वाला बताता है, “यहां रेलवे स्टेशन पर हमें एक आदमी मिला है जो खुद को रणबीर सिंह बता रहा है।” इसके बाद पुलिस वाला फोन रणबीर को देता है ताकि वह गौरव से बात कर सके। रणबीर और गौरव की बात सुनकर दोनों को समझने में थोड़ा समय लगता है क्योंकि फोन पर बात करना कठिन था। तभी पुलिस वाला वीडियो कॉल करता है और वीडियो कॉल के जरिए दोनों भाई एक-दूसरे को देखते हैं।

भावुक क्षण

गौरव थोड़ी देर तक ध्यान से देखता है फिर धीरे-धीरे उसे पहचान में आता है कि यह वास्तव में उसका भाई रणबीर सिंह है। वह तुरंत पुलिस वालों को बताता है, “हां साहब, यह मेरा भाई रणबीर सिंह ही है।” इस पर दोनों भाई कुछ समय तक बातें करते हैं और इस बातचीत के दौरान रणबीर की आंखों से आंसू बहने लगते हैं। वहीं गौरव की आंखों में भी आंसू आ जाते हैं क्योंकि वह अपने भाई को इतने सालों बाद देखकर भावुक हो जाता है।

आंसू रणबीर और गौरव की आंखों से इस वजह से बह रहे थे कि 2 साल बाद वह व्यक्ति जिसे उनके परिवार ने मरा हुआ समझ लिया था, वापस लौट आया था। रणबीर को वापस पाकर उनका परिवार बहुत खुश था। अगले दिन पुलिस वाले रणबीर को उसके घर ले जाते हैं। जैसे ही वह अपने घर पहुंचता है और अपनी मां से मिलता है, उसकी मां उसे देखते ही फूट-फूट कर रोने लगती है और तुरंत उसे अपने गले से लगा लेती है।

परिवार का पुनर्मिलन

वह पुलिस वालों के पैरों में गिरकर कहती है, “साहब, आपका बहुत धन्यवाद कि आप मेरे बेटे को वापस ले आए।” इसके बाद वहां पर कुछ कागजी कार्रवाई की जाती है और जब वह पूरी हो जाती है तो रणबीर सिंह अपने घर में अपनी मां के साथ फिर से रहने लगता है। उसने अपनी जिंदगी को फिर से संजीवनी दी थी और अब वह अपने पुराने जीवन की ओर लौट आया था।

जैसे ही इस बात की खबर पूरे गांव में फैलती है, लोग उससे मिलने के लिए आने लगते हैं। सभी लोग यह जानने के लिए उत्सुक थे कि उसके साथ क्या हुआ था और वह किस तरह वहां से भागकर वापस आया। रणबीर अपनी पूरी कहानी गांव वालों को सुनाता है और बताता है कि कैसे उसे उन लोगों ने बंधक बना लिया था। किस तरह वह उनके जाल से निकलने में सफल हुआ और उसने अपना जीवन कैसे दोबारा शुरू किया।

सीख और चेतावनी

वह सभी को यह भी समझाता है कि कभी भी किसी अजनबी के जाल में ना फंसे और अपनी आंखें खुली रखें। वह अपने अनुभवों से सभी को सावधान करता और बताता है कि किसी भी परिस्थिति में अपनी उम्मीद नहीं खोनी चाहिए। रणबीर ने जब अपनी कहानी सुनाई तो वह सभी को यह सिखाते हुए कहता था, “अनजान गाड़ी में इस तरह से नहीं बैठना चाहिए। मैंने तो यह सोचा था कि मेरा गांव सामने ही है तो यह लोग मेरा क्या बिगाड़ सकते हैं? लेकिन उन लोगों ने मेरी जिंदगी के दो साल बर्बाद कर दिए जिनकी मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकता।”

वह यह भी बताता है कि कैसे उसने बिना सोचे समझे उस गाड़ी में चढ़ने का निर्णय लिया और इस वजह से उसे 2 साल तक दर्द और संघर्ष का सामना करना पड़ा। पुलिस वाले भी उससे और जानकारी लेने के लिए पूछताछ करते हैं। यह जानने की कोशिश करते हैं कि वह कहां गया था और वह जगह कैसी थी।

पुलिस की कार्रवाई

हालांकि रणबीर को ज्यादा कुछ याद नहीं था। जो कुछ भी उसे याद था, उसने पुलिस को बताया। पुलिस इस केस को सुलझाने में लगी हुई थी और उनका उद्देश्य था कि वे यह पता करें कि क्या और लोग भी उन लोगों के द्वारा बंदी बनाकर रखे गए थे। अगर ऐसा था तो वे उन लोगों को भी छोड़ा सकें।

इस दौरान पुलिस की कार्रवाई चल रही थी और रणबीर सिंह अपनी मां के साथ अपने घर में हंसी-खुशी रह रहा था। वह अब अपनी कहानियां सबको सुनाया करता था और हर कहानी में एक बड़ी सीख छिपी होती थी।

निष्कर्ष

तो दोस्तों, यह थी कहानी रणबीर सिंह की, जो 2 साल पहले अपने गांव के पास के शहर से अपहरण कर लिया गया था और 2 साल बाद अपने परिवार के पास वापस लौटा। यह कहानी ना केवल रणबीर की दुखद यात्रा की है बल्कि यह भी सिखाती है कि कभी भी किसी अजनबी पर विश्वास नहीं करना चाहिए और हमेशा सचेत रहना चाहिए।

रणबीर सिंह की कहानी एक सख्त चेतावनी देती है कि हमें कभी भी अनजान लोगों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। खासकर जब बात हमारी सुरक्षा की हो। अगर रणबीर सिंह उस दिन उस अनजान व्यक्ति के साथ गाड़ी में नहीं बैठता, तो उसकी जिंदगी के दो साल बर्बाद नहीं होते।

यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि जीवन में कभी भी सतर्क रहना चाहिए और किसी भी स्थिति में अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। पुलिस वालों ने भी रणबीर की मदद की और उनका साहस व समर्पण सराहनीय था। उन्होंने ना केवल रणबीर को सुरक्षित घर भेजने में मदद की बल्कि यह सुनिश्चित किया कि इस प्रकार की घटनाओं को भविष्य में रोका जा सके।

आपसे बस यह कहूंगा कि इस तरह की कहानियां सुनाकर हम किसी को परेशान नहीं करना चाहते बल्कि हमारा उद्देश्य यही है कि आप इनसे कुछ सीखें और अपने जीवन में लागू करें। हर कहानी के पीछे कोई संदेश छिपा होता है और रणबीर की कहानी भी हमें यह सिखाती है कि किसी भी अजनबी से बचना और अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना कितना जरूरी है।

ध्यान रखें, दर्शकों, कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ यात्रा नहीं करें और हमेशा सतर्क रहें। इस कहानी को सुनाने का मेरा उद्देश्य बिल्कुल भी किसी को परेशान करना, भावनाओं को आहत करना या दिल को दुखाना नहीं था। मेरा उद्देश्य तो आपको जागरूक, सचेत और अलर्ट करना था ताकि आप जिंदगी में किसी भी खतरे से बच सकें और सुरक्षित रह सकें।

इस पूरी कहानी को देखकर आपका मन निश्चित ही सोचने पर मजबूर हो गया होगा। जीवन में कभी भी किसी अनजान व्यक्ति से रिश्ते नहीं बनाएं और हमेशा अपनी सुरक्षा का ख्याल रखें। तो दर्शकों, यह थी हमारी आज की कहानी। आप सभी को कैसी लगी? कमेंट बॉक्स के माध्यम से हमें जरूर बताएं।

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