“सर दूध का एक डिब्बा दे दीजिए , जब मैं बड़ी हो जाऊंगी आपके पैसे लौटा दूंगी l” – और फिर …
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सासुर पर जुल्म करने वाली बहू पर आया अल्लाह का दर्दनाक अजब फैसला
यह कहानी एक ऐसी लड़की की है, जिसने अपने जीवन के सबसे छोटे से पल में ही अपने हक़ और अपने अस्तित्व के लिए लड़ना शुरू कर दिया। यह कहानी है उस लड़की की, जो अपने छोटे से सपने, अपने छोटे से अधिकार और अपने जीवन की छोटी सी उम्मीद के लिए जद्दोजहद कर रही थी।
शाम का वक्त, सन्नाटा और एक छोटी सी आवाज़
शाम का समय था। सूरज की आखिरी किरणें धीरे-धीरे खिसक रही थीं। उस वक्त एक छोटी सी लड़की, जो शायद महज पाँच या छह साल की थी, अपने छोटे से कदमों से एक दुकान की ओर बढ़ रही थी। उसकी आंखें उस हल्की सी आशा से भरी थीं कि आज वह अपने पिता से एक छोटी सी चीज़ माँग सकेगी।
उसकी छोटी सी जुबान पर एक ही बात थी, “सर दूध का एक डिब्बा दे दीजिए, जब मैं बड़ी हो जाऊंगी तो पैसे लौटा दूंगी।”
उस छोटी सी लड़की की मासूमियत में एक गहरा दर्द समाया था। उसकी आँखों में उस दिन का सारा संघर्ष, उसकी सारी बेबसी और उसकी उस छोटी सी उम्मीद का संसार था।
उस शाम का दिल दहला देने वाला दृश्य
वह शाम, जब वह अपने पिता की दुकान के बाहर खड़ी थी, तो अचानक उसकी नजरें दुकान के अंदर घुसते ही एक अनजानी सी बेचैनी में बदल गईं। दुकान के बाहर खड़ी घंटी की आवाज़, “टिंग टिंग”, जैसे किसी जादू की झंकार हो।
उसकी आंखें उस आवाज़ की ओर गईं। लेकिन अंदर कोई नहीं था। बस हवा का झोंका, पुरानी दीवारों पर पड़े धूल के कण और उस खामोशी का सन्नाटा।
फिर अचानक, उसकी नन्ही आंखों ने नीचे देखा। उसकी नजरें उस फटे जूते, गंदी फराक और उलझे हुए बालों पर गईं। वह जैसे डरते-डरते दुकान में दाखिल हुई। उसकी आंखें उस दूध की कतार को निहार रही थीं, मानो वह किसी उम्मीद की किरण हो।
उसकी छोटी सी आवाज़ फिर से गूंजी, “सर बस एक दूध का डिब्बा दे दीजिए, जब मैं बड़ी हो जाऊंगी तो पैसे लौटा दूंगी।”
उसकी बात सुनकर, दुकान के मालिक का दिल भी टूट गया। उस पल, उसकी सारी दुनिया ही बदल गई।
सच्चाई का खुलासा और एक नई शुरुआत
वह लड़की, जिसका नाम था रिया, उस समय की सबसे छोटी और मासूम लड़की थी। उसकी बात सुनकर दुकान के मालिक का दिल पिघला। उसने सोचा, “यह तो बस एक छोटी सी बच्ची है, और यह तो अपने घर की बात बता रही है।”
लेकिन, धीरे-धीरे, उसकी आँखों में एक ऐसी छवि उभरने लगी, जो उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा सच साबित होने वाला था।
उसने पूछा, “बेटी, तुम्हारा घर कहां है? तुम्हारे मम्मी-पापा कहां हैं?”
रिया ने तुरंत कदम पीछे खींच लिए, जैसे किसी खतरे से डर रही हो। उसकी आवाज़ धीमी और कांपती हुई थी, “घर पास ही है सर। मेरी मम्मी बीमार है और दवा लेने के बाद उन्हें दूध देना होता है। पर घर में पैसे नहीं हैं।”
उसकी छोटी सी आंखें ठंडी और सूजी हुई थीं। उसकी कलाई पर एक पुराना निशान था, जो उसकी उस दर्दनाक कहानी का गवाह था।
मैंने उससे पूछा, “तुम्हारा नाम क्या है?”
उसने धीरे से कहा, “रिया।”
और फिर, जैसे उसकी आत्मा का एक हिस्सा फड़क रहा हो, उसने कहा, “मम्मी कहती है कि भगवान सबकी सुनता है। लेकिन आज, भगवान ने शायद हमारे घर की घंटी बंद कर दी है।”
उस एक वाक्य ने मेरे मन को झकझोर कर रख दिया।
उस रात का दर्दनाक सच
मैंने उस रात, उस छोटी सी लड़की को अपने हाथ में लिया और उसके चेहरे को देखा। उसकी आंखें उम्मीद से भरी थीं, लेकिन चेहरे पर दर्द और बेबसी की परतें थीं।
मैंने उसके हाथ में दूध का पैकेट बढ़ाया, लेकिन उसने हाथ नहीं बढ़ाया। उसकी जेब से एक ₹10 का नोट निकला, और उसने कहा, “सर, यह ले लीजिए। बाकी मैं बड़ी होकर दे दूंगी।”
उसकी आंखों में झूठ नहीं था। बस बेबसी थी।
मैंने मुस्कुरा कर कहा, “रिया, यह दूध तुम्हारी मम्मी के लिए मेरा तोहफा है। पैसे की कोई जरूरत नहीं।”
लेकिन वह जिद पर अड़ी रही, “नहीं सर। मेरी मम्मी कहती है कि किसी का बोझ नहीं बनना चाहिए।”
उस छोटी सी लड़की की बातों में एक परिपक्वता थी, जो उसकी उम्र से बहुत ऊपर थी।

वादा और एक नई उम्मीद
मैंने उसके सिर पर हाथ रखा और कहा, “चलो, एक वादा करते हैं। तुम पढ़ाई अच्छी करोगी, और जब तुम डॉक्टर बनोगी, तो मुझे याद करके एक चॉकलेट देना। बस इतना ही तुम्हारा भुगतान।”
उसकी आंखों में पहली बार बचपन की चमक झलकने लगी। वह दूध का पैकेट लेकर दौड़ती हुई दुकान से बाहर निकल गई।
लेकिन जाते-जाते उसने मुड़कर कहा, “धन्यवाद सर, आप भगवान जैसे हो।”
और वह गली के मोड़ पर आंखों से ओझल हो गई।
अगले दिन का अजीब मंजर
अगले दिन सुबह करीब 9 बजे, मेरी दुकान पर भीड़ लग गई। तभी गली के सिरे से एंबुलेंस का सायरन सुनाई दिया।
लोग दौड़ते हुए उस ओर जा रहे थे। मैं भी चिंतित होकर बाहर आया।
वह एंबुलेंस उस झुग्गी के बाहर खड़ी थी, जिससे रिया आई थी।
मोहल्ले वालों ने बताया, “वो रिया की माँ का हालत बहुत खराब हो गई थी। सुबह तक बच नहीं पाई।”
मेरे कानों में जैसे झनझनाहट हो गई।
वह रातभर अपने पति को जिंदा रखने के लिए संघर्ष कर रही थी। उसकी छोटी-सी बच्ची, रिया, उसकी आखिरी उम्मीद थी।
उस रात, उस घर में, उस छोटी सी बच्ची ने अपनी मां को आखिरी बार देखा।
मां का चेहरा शांत था, जैसे उसकी आत्मा अपने शरीर से निकल चुकी हो।
सच्चाई का खुलासा और न्याय
कुछ दिनों बाद, पता चला कि, रिया की मां का निधन जहर देकर किया गया था।
उसकी मौत के बाद, घर में हड़कंप मच गया।
सभी को पता चला कि, रिया का पिता, जो कि एक गरीब मजदूर था, उसकी हत्या कर दी गई थी।
उसकी मौत का राज, पूरे मोहल्ले में फैल गया।
यह कहानी हमें सिखाती है कि, सच्चाई कभी न कभी सामने आती है।
जो लोग अपने परिवार और समाज का विश्वास तोड़ते हैं, उनका अंत भी बुरा ही होता है।
अंत में: जीवन का पाठ
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि, सच्चाई और इंसानियत का रास्ता ही सही है।
कभी भी अपने छोटे से अधिकार को मत छोड़ो।
सच्चाई का साथ दो, और अपने परिवार और समाज के लिए अच्छा बनो।
क्योंकि, अंततः, ईमानदारी और अच्छाई ही जीतती है।
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धन्यवाद!
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