साधु समझा कमजोर लड़की, पर निकली खतरनाक IPS अफसर | Suspense Kahani

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शाम का वक्त था। सूरज ढल चुका था और शहर से बाहर जाती सुनसान सड़क पर हल्की-हल्की धुंध उतरने लगी थी। सड़क के दोनों ओर घना जंगल था, जहाँ दिन में भी कम ही लोग आते थे। उस रास्ते पर एक कार आकर रुकी। कार से एक युवती उतरी—साफ-सुथरे कपड़े, आत्मविश्वास भरा चेहरा, लेकिन चाल में हल्की-सी जल्दबाजी।

उसने घड़ी देखी और खुद से कहा,
“अभी मुझे घर जाने के लिए देर हो रही है। मैं चलती हूँ… हमारी फिर कभी मुलाकात होगी। जय हिंद, जय भारत।”

उसकी आवाज़ में दृढ़ता थी, जैसे यह शब्द केवल अभिवादन नहीं, बल्कि एक प्रतिज्ञा हों।

उसी सड़क के किनारे, थोड़ी दूर एक आदमी खड़ा था। उसने भगवा वस्त्र पहन रखे थे, गले में रुद्राक्ष की माला और हाथ में एक डंडा। देखने में वह एक साधु लगता था, लेकिन उसकी आँखों में साधु जैसी शांति नहीं, बल्कि शिकार ढूँढ़ते भेड़िये जैसी चमक थी।

वह बुदबुदाया,
“कब से सड़क पर अकेला खड़ा हूँ… कोई हसीन परी मिल जाए तो मज़ा आ जाए…”

जैसे ही उसकी नजर उस युवती पर पड़ी, उसके चेहरे पर कुटिल मुस्कान फैल गई।
“ये लो, कहा और आ गई…”

वह धीरे-धीरे उसके करीब आने लगा।


मुलाकात

“कहाँ से आ रही हो, मैडम? और मुझसे मिले बगैर जा रही हो?” उसने बनावटी नम्रता से पूछा।

लड़की ने शांत स्वर में कहा,
“एक जरूरी काम था। मीटिंग थी। अब घर जा रही हूँ।”

“कैसी मीटिंग?” वह मुस्कुराया, “एक मीटिंग मेरे साथ भी कर लो।”

लड़की ने सख्ती से कहा, “नहीं। मुझे जाने दो।”

वह अचानक आगे बढ़ा और उसका रास्ता रोक लिया।
“इतनी जल्दी क्या है? थोड़ा समय मेरे लिए भी निकाल लो…”

लड़की पीछे हटने लगी।
“देखो, तुम जो कर रहे हो वो गलत है। मुझे जाने दो, वरना तुम्हें इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा।”

वह हँस पड़ा।
“अंजाम? यहाँ जंगल में तेरा चीखना सुनने वाला कोई नहीं। कानून? कानून वही है जो मैं कहूँ।”

उसने अपनी झोली से एक बोतल निकाली।
“चलो, पहले भांग पीते हैं। एक मैं पियूँगा, एक तुम।”

“मैं नहीं पीती,” लड़की ने सख्ती से कहा।

उसने आँखें तरेरीं।
“आखिरी बार कह रहा हूँ—पी ले। नहीं तो ऐसा हाल करूँगा कि किसी को मुँह दिखाने लायक नहीं रहेगी।”

लड़की ने कुछ पल सोचा, फिर बोली,
“ठीक है… देती हूँ।”

उसने बोतल हाथ में ली, होंठों से लगाई, लेकिन असल में घूंट नहीं भरा। वह केवल दिखावा कर रही थी।

साधु मुस्कुराया।
“बहुत चटर-पटर कर रही थी। अब मज़ा आएगा…”


असली खेल

कुछ ही देर में वह उसे जंगल के अंदर अपनी झोपड़ी की ओर ले जाने लगा। रास्ता सुनसान था। हवा में अजीब-सी खामोशी थी।

“तूने मेरे साथ खेल खेलने की कोशिश की है,” वह गुर्राया, “अब तेरी सजा बढ़ गई है।”

लड़की बोली,
“तुम्हें अब भी मौका है। मुझे जाने दो। वरना तुम्हारी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।”

वह हँस पड़ा।
“मुझे पकड़ने वाला आज तक कोई नहीं हुआ। रात में साधु बनकर निकलता हूँ, दिन में गायब हो जाता हूँ। कई औरतों को यहाँ लाया हूँ। सुबह छोड़ देता हूँ। बदनाम होते हैं साधु-संत, और मैं बच जाता हूँ। समझी?”

लड़की की आँखों में हल्की-सी चमक आई।
“अच्छा… तो तुम इतने ताकतवर हो?”

“तेरी जैसी दस गाड़ियों की सर्विसिंग कर चुका हूँ,” वह शेखी बघारते हुए बोला। “मुझे पकड़ने वाला कौन है?”

लड़की मुस्कुराई।
“सच में? कोई नहीं पकड़ सकता?”

“कोई नहीं!” उसने जोर से कहा।

उसी क्षण जंगल में हल्की-सी सीटी की आवाज गूँजी। साधु चौंका।

लड़की ने जेब से छोटा-सा उपकरण निकाला—एक रिकॉर्डिंग डिवाइस।
“तुम्हारी सारी बातें रिकॉर्ड हो चुकी हैं,” उसने शांत स्वर में कहा।

साधु का चेहरा उतर गया।
“ये… ये क्या है?”

लड़की ने अपनी जैकेट की जेब से एक बैज निकाला और सामने दिखाया।
“मैं आईपीएस अधिकारी अदिति राणा हूँ। पिछले छह महीने से तुम्हारी तलाश थी।”

साधु पीछे हटने लगा।
“न… नहीं… ये झूठ है…”

“तुमने कई महिलाओं के साथ अपराध किया। धार्मिक वेशभूषा का इस्तेमाल कर उन्हें फँसाया। आज तुम्हारा खेल खत्म।”

अचानक चारों ओर से पुलिस की गाड़ियाँ आ गईं। हथियारबंद पुलिसकर्मी बाहर निकले।

“इसे गिरफ्तार करो,” अदिति ने आदेश दिया।

दो सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया। वह छटपटाने लगा।
“मुझे छोड़ दो! मैं बाबा हूँ!”

अदिति ने सख्त आवाज में कहा,
“नकली बाबा। कानून से बड़ा कोई नहीं।”


सच का खुलासा

थाने में पूछताछ के दौरान उसने कबूल किया कि वह दूसरे राज्य से भागकर यहाँ आया था। उसने जानबूझकर साधु का रूप धारण किया ताकि लोग शक न करें। वह सुनसान सड़क पर खड़ा रहता और अकेली महिलाओं को फँसाकर जंगल में ले जाता।

उसकी गिरफ्तारी की खबर पूरे शहर में फैल गई। कई पीड़ित महिलाओं ने आगे आकर बयान दिया।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अदिति ने कहा,
“अपराधी चाहे किसी भी वेश में हो, कानून से नहीं बच सकता। महिलाओं की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।”

पत्रकारों ने पूछा,
“मैडम, आपको डर नहीं लगा?”

अदिति मुस्कुराई।
“डर तो उसे लगना चाहिए जो अपराध करता है।”


संदेश

कुछ दिनों बाद वही सड़क फिर शांत थी। लेकिन अब वहाँ पुलिस की नियमित गश्त शुरू हो चुकी थी। जंगल के पास चेतावनी बोर्ड लगा दिया गया था।

अदिति अपनी जीप में बैठी उस रास्ते से गुजरी। उसने आसमान की ओर देखा और धीमे से कहा,
“जय हिंद।”

उसके चेहरे पर संतोष था। उसने साबित कर दिया था कि कमजोर दिखने वाला हर व्यक्ति कमजोर नहीं होता। कभी-कभी शिकार समझी जाने वाली लड़की ही सबसे खतरनाक शिकारी निकलती है—जो अपराधी को उसके ही जाल में फँसा लेती है।

और उस नकली साधु की कहानी एक चेतावनी बन गई—
धर्म का चोला पहनकर किया गया पाप भी कानून की पकड़ से नहीं बच सकता।


समाप्त।