10 साल बाद मां को रेड सिग्नल पर मिला अपना खोया हुआ बेटा | Rula Dene Wali Kahani
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गरीब लड़के ने करोड़पति की बेटी की जान बचाई, फिर लड़की ने जो किया… देखकर सब रो पड़े
मुंबई की रातें कभी सोती नहीं। मगर एक रात, जब पनवेल की तरफ जाने वाली सर्विस रोड पर एक कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई, तो वहाँ हर कोई चुप था। उस रात की कहानी बहुत कुछ बदलने वाली थी, क्योंकि यह सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं था, बल्कि एक जीवन का मोड़ था। यह कहानी है विक्रम और शिवानी की, एक गरीब लड़के और एक अमीर लड़की की, जो एक दूसरे से अनजान होते हुए भी एक-दूसरे की जिंदगी में उस वक्त आई जब सबसे ज्यादा जरूरत थी।
विक्रम का संघर्ष
विक्रम महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव से मुंबई आया था। जब वह छोटा था, तो उसके पिता की मृत्यु हो गई थी और उसे अपनी छोटी बहन पारुल का पालन-पोषण करना पड़ा। गांव में स्थिति बहुत खराब थी, इस कारण उसने मुंबई का रुख किया। शुरुआत में वह कंस्ट्रक्शन साइट्स पर मजदूरी करता था और रात को ढाबों पर काम करता था। उसकी जिंदगी बहुत साधारण थी, लेकिन उसमें एक खास बात थी – वह कभी हार नहीं मानता था। वह अपनी बहन के भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत करता था, और यही उसकी असली ताकत थी।
शिवानी का हादसा
एक दिन, जब विक्रम काम से लौट रहा था, उसने एक कार को सड़क किनारे टकराते देखा। उसे यह देखकर कोई हलचल महसूस हुई। उसने देखा कि एक लड़की बेहोश पड़ी थी। विक्रम बिना सोचे-समझे कार का शीशा तोड़ा और उसे बाहर निकाला। उस लड़की की सांस चल रही थी, लेकिन उसकी हालत गंभीर थी। विक्रम ने तुरंत एंबुलेंस को फोन किया और लड़की को अस्पताल भेज दिया। अस्पताल में, लड़की होश में आई, लेकिन वह विक्रम से नहीं मिल पाई क्योंकि वह बिना नाम बताए चला गया था। लड़की का नाम शिवानी था, जो एक बहुत अमीर परिवार की बेटी थी, और यह एक अजीब सा संयोग था कि विक्रम उसकी जान बचा पाया था।

शिवानी की जिद और विक्रम से मुलाकात
शिवानी को अपनी जान बचाने वाले लड़के का पता चलने की बहुत इच्छा थी। उसने उसे ढूंढने के लिए अपने स्तर पर जानकारी जुटाई। उसे पता चला कि वह लड़का विक्रम नाम का है, जो एक गरीब लड़का है और अपनी बहन के साथ रहता है। शिवानी ने विक्रम से मिलने का निर्णय लिया, और वह अस्पताल पहुंची। जब विक्रम ने शिवानी को देखा, तो वह चौंक गया। शिवानी ने कहा, “आपने मेरी जान बचाई।” विक्रम ने बस इतना कहा, “मुझे कुछ नहीं चाहिए, मैंने सिर्फ इंसानियत की मदद की।”
अमर खन्ना का बदलाव और ट्रस्ट की शुरुआत
विक्रम का यही काम शिवानी के पिता, अमर खन्ना, को चौंका दिया। अमर खन्ना ने सोचा था कि यह लड़का उनके परिवार की मदद करने के लिए केवल स्वार्थी है, लेकिन विक्रम ने उन्हें गलत साबित कर दिया। विक्रम ने उन्हें सिखाया कि इंसानियत सबसे बड़ी दौलत है। इसके बाद, अमर खन्ना ने एक ट्रस्ट शुरू किया जिसका उद्देश्य गरीब बच्चों की मदद करना था।
विक्रम और शिवानी की दोस्ती और संघर्ष
ट्रस्ट के जरिए विक्रम और शिवानी ने बच्चों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की शुरुआत की। धीरे-धीरे विक्रम ने यह साबित किया कि गरीबी इंसान को छोटा नहीं बनाती। उन्होंने अपनी मेहनत से कई बच्चों की जिंदगी बदल दी। एक दिन पारुल, विक्रम की बहन, ने विक्रम से पूछा, “भैया, क्या हम अब अमीर हो गए हैं?” विक्रम ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “नहीं, हम जिम्मेदार हो गए हैं।”
समाज में बदलाव और अमर का निर्णय
अमर खन्ना भी धीरे-धीरे बदलने लगे। उन्होंने अब सिर्फ पैसा कमाने पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि समाज की भलाई के लिए काम करने लगे। ट्रस्ट ने अपनी गतिविधियों को बढ़ाया और लोगों के बीच इंसानियत का संदेश फैलाने लगा। लेकिन इस दौरान अमर को कई आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उसके दोस्तों ने उसे बताया कि वह गलत कर रहा है और गरीबों की मदद करने से उसकी प्रतिष्ठा पर असर पड़ेगा। लेकिन अमर ने यह सब अनसुना किया और ट्रस्ट को आगे बढ़ाने का फैसला किया।
अंतिम परिणाम: इंसानियत की जीत
विक्रम ने सिखाया कि पैसा सब कुछ नहीं होता। शिवानी ने भी यह महसूस किया कि असली खुशी दूसरों की मदद करने में है। अमर ने अपनी बेटी को सही रास्ता दिखाया और विक्रम जैसे लड़के को अपनाया। ट्रस्ट की मदद से सैकड़ों बच्चों की जिंदगी बदली और समाज में इंसानियत की एक नई उम्मीद जगी।
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि इंसानियत सबसे बड़ी दौलत है, और यदि हम सही रास्ते पर चलते हैं, तो हम दुनिया में बदलाव ला सकते हैं। विक्रम और शिवानी ने यह साबित कर दिया कि जब हम अपनी मेहनत और दिल से मदद करते हैं, तो समाज बदल सकता है।
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