26 जनवरी के दिन विधायक के बेटे ने फौजी की बहन से बदतमीज़ी की 🇮🇳फिर फौजी ने जो किया सिस्टम कांप उठा

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26 जनवरी का दिन था। भारत का राष्ट्रीय उत्सव मनाने के लिए हर जगह तैयारियाँ हो रही थीं। एक छोटे से शहर में रीना नाम की एक लड़की अपने घर से स्कूल के लिए निकलने वाली थी। उसकी माँ ने उसे तिरंगे के महत्व के बारे में बताया था, कि यह सिर्फ एक कपड़ा नहीं है, यह हमारे देश के वीर शहीदों का खून है। रीना को अपनी मां की बातें याद आ रही थीं और वह तेजी से स्कूल के लिए निकल पड़ी।

“आज तिरंगा सिर्फ स्कूल में नहीं, दिल में भी लहराना है,” उसने अपने आप से कहा और सड़क पर दौड़ते हुए स्कूल की ओर बढ़ी।

रीना की जिंदगी बहुत साधारण थी। वह अपनी माँ के साथ रहती थी और उसका भाई सीमा पर तैनात था। उसकी माँ हमेशा उसे यही समझाती रहती कि तिरंगे का सम्मान करना जरूरी है क्योंकि यह हमारे शहीदों का प्रतीक है। आज भी, जैसे ही वह स्कूल के लिए जा रही थी, उसकी माँ ने उसे फिर से तिरंगे का महत्व समझाया था। रीना के लिए यह दिन खास था, क्योंकि आज उसका भाई भी बॉर्डर से घर लौटने वाला था।

वह स्कूल जाने की जल्दी में थी, लेकिन अचानक उसे अपने पुराने दोस्त समीर का सामना हुआ। समीर, जो एक दिन में बार-बार उसे परेशान करने आता था, आज भी रीना के पास आ खड़ा हुआ था। समीर की नजरों में एक अजनबी सी तीव्रता थी।

“रीना, तुम कितनी बार मुझसे भागोगी?” समीर ने कहा, और रीना को घेरने की कोशिश की।
“तुमसे प्यार करता हूँ, तुमसे शादी करनी है।” समीर का यह बयान रीना के लिए बहुत चौंकाने वाला था।

रीना ने तुरंत जवाब दिया, “तुम मुझे परेशान करना बंद करो, समीर। मैं तुमसे कभी भी शादी नहीं करूंगी।”
समीर ने यह सुनकर हंसी में बदलते हुए कहा, “अगर तुम नहीं मानी तो तुम्हें मैं मजबूर करूंगा।”

“समझ लो समीर, मैं तुम्हारे जैसे गुंडे से नहीं डरने वाली हूँ,” रीना ने अपना सिर गर्व से उठाया और कहा।

समीर ने गुस्से में आकर एक पत्थर उठाया और रीना की ओर फेंका। पत्थर रीना के माथे पर लगा और खून बहने लगा। लेकिन रीना ने दर्द को नजरअंदाज करते हुए समीर को सख्त लहजे में कहा, “तुमसे कुछ नहीं होगा, और याद रखना मैं किसी विधायक के बेटे से नहीं डरने वाली।”

सड़क पर यही दृश्य हो रहा था, तभी अचानक पुलिस और विधायक का बेटा अपने दोस्तों के साथ वहां आ पहुंचे। विधायक का बेटा एक घमंडी और अव्यवस्थित इंसान था, जिसने रीना को धमकी दी, “तुम्हें अब मेरी बात माननी पड़ेगी। तुम नहीं समझ रही हो, मैं विधायक का बेटा हूँ।”

रीना ने उसे चुनौती दी, “तुम जो कुछ भी हो, तुम मुझे धमकी नहीं दे सकते। तुम जिस घर में पैदा हुए हो, वो घर मेरे देश की इज्जत का मुकाबला नहीं कर सकता।”

विधायक के बेटे ने कहा, “तुम जैसी लड़की को क्या समझाऊं? मैं तुम्हें आज अपना रास्ता दिखा दूंगा।” वह और उसके दोस्त उसे पकड़कर अपनी हवेली की ओर ले जाने लगे, लेकिन रीना की स्थिति बद से बदतर हो रही थी।

लेकिन उस समय, अचानक एक आवाज आई। यह आवाज थी, एक फौजी की, जो सीमा पर तैनात था और हाल ही में छुट्टी पर वापस आ रहा था। वह फौजी कोई और नहीं, बल्कि रीना का भाई था। वह अपनी बहन को परेशान होते हुए देख नहीं सकता था। वह सैनिक की तरह अपने कदम बढ़ाता हुआ आया और विधायक के बेटे से कहा, “तुम समझते क्या हो? मैं तुम्हारे जैसे आदमी से डरने वाला नहीं हूँ।”

उस फौजी के कदमों की आवाज जैसे ही सुनाई दी, विधायक के बेटे की हिम्मत टूट गई। वह समझ चुका था कि अब वह किसी से कम नहीं है। यह सिर्फ एक बहन की रक्षा नहीं थी, यह देश की शान थी। उस फौजी ने विधायक के बेटे को उसी तरीके से सिखाया, जैसे उसने सीमा पर दुश्मन को सिखाया था। फौजी ने विधायक के बेटे से कहा, “तेरे जैसी हरकतों का अंजाम तुझे नहीं पता, लेकिन अब तुझे सबक सिखाना जरूरी है।”

फौजी ने उस दिन सिर्फ अपनी बहन की इज्जत नहीं बचाई, बल्कि उसने सिस्टम को भी यह साबित कर दिया कि भारत का सैनिक केवल सीमा पर ही नहीं, बल्कि अपनी बहन की रक्षा के लिए भी उतना ही संघर्ष करेगा। विधायक के बेटे और उसके गुंडों को वह सबक मिला, जो उन्हें पूरी जिंदगी याद रहेगा।

इस घटना के बाद, फौजी की बहन, रीना, और उसका भाई, दोनों खुशी-खुशी घर वापस लौटे। लेकिन यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई। विधायक का बेटा जो खुद को सबसे शक्तिशाली समझता था, आज सबके सामने नतमस्तक था।