Amir Aurat Apne Beta ki Shaadi Ak Bhikhara Ladki Se Kyou Kar Di. Emotional story Hindi Urdu.

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मोहब्बत और इंसाफ की कहानी: अमीर औरत, भिखारी लड़की और एक बेटे की शादी

अध्याय 1: रुबीना की नई जिंदगी

मेरा नाम रुबीना है। मेरी शादी को अभी तीन ही महीने हुए थे कि मेरे शौहर का इंतकाल हो गया। अचानक आई इस मुसीबत ने मेरी पूरी दुनिया बदल दी। मैंने अपनी इद्दत के चार महीने अपने घर में गुजारे, हर दिन अल्लाह से दुआ की कि मेरा भविष्य बेहतर हो। चार महीने बाद मेरे मां-बाप मुझे लेने आए, लेकिन मैंने उनके साथ जाने से मना कर दिया। मैं नहीं चाहती थी कि वे मुझ पर और बोझ उठाएं। मेरे अब्बा जान के हालात अच्छे नहीं थे, उन्होंने बड़ी मुश्किल से मेरी शादी करवाई थी।

मेरे ससुराल वाले अमीर थे। मेरी सास के दो बेटे और एक बेटी थी। मेरे शौहर के इंतकाल के बाद मैं चाहती थी कि मेरी सास मेरी शादी मेरे देवर सरफराज से कर दे। मैं उनका दिल जीतने के लिए दिन-रात मेहनत करती थी—घर का सारा काम करती, रात को सोने से पहले उनके पैर दबाती। मेरी नंद शादीशुदा थी, अमीर घर में रहती थी, मायके कम आती थी। जब भी आती, मैं उसकी पसंद के खाने बनाती, बच्चों का ख्याल रखती। मेरी सास मुझसे बहुत खुश थी, मुझे बेटी की तरह मानती थी। मैं चाहती थी कि वह मुझे फिर से बहू बना लें।

अध्याय 2: उम्मीदें और सपने

मेरे देवर सरफराज लंदन में डॉक्टरी कर रहा था, उसके लौटने में तीन महीने रह गए थे। मैं खुश थी कि वह आएगा, शादी होगी, घर फिर से मेरा होगा। मैंने गरीबी में जिंदगी गुजारी थी, अब यह ऐशो-आराम छोड़ना नहीं चाहती थी। मेरा देवर खूबसूरत था, पढ़ा-लिखा था, खानदानी अमीरी थी। मैं जानती थी कि अगर सरफराज मुझसे शादी करेगा तो सबकुछ मेरा होगा। मेरी सास और ससुर अपने बेटे का कहना मानते थे। मेरा शौहर आम शक्ल-सूरत का था, ज्यादा पढ़ा-लिखा भी नहीं था। उसकी बीमारी के बारे में मेरी सास ने मेरे अब्बा से छुपाया था। शादी के तीन महीने बाद ही वह चल बसा।

मैंने पूरे साल अपने ससुरालवालों की सेवा की। लेकिन एक दिन मेरी सास ने कहा, “अब मैं अपने छोटे बेटे के लिए लड़की ढूंढूंगी और उसकी शादी कर दूंगी।” मेरा दिल टूट गया। मैंने उनके लिए नौकरानी बनकर मेहनत की थी, सब बेकार हो गया।

अध्याय 3: दरगाह में एक मुलाकात

एक दिन मैं और मेरी सास बीबी पाक दामन की दरगाह गए। वहां एक नौजवान भिखारी लड़की बैठी थी, जो नाबीना थी। मेरी सास उसके पास जाकर बैठ गई, बातें करने लगी, जैसे वह उसे पहले से जानती हो। सास उससे माफी मांग रही थी, उसे अपने साथ चलने के लिए कह रही थी। लड़की ने मना कर दिया, बोली, “मेरे साथ जो हुआ, वह आप ही की वजह से हुआ है। मैं आपको कभी माफ नहीं करूंगी।” मेरी सास रो-रो कर माफी मांग रही थी, कह रही थी, “अब तुम्हारी तमन्ना पूरी होगी, बस मेरे साथ चलो।”

मेरी सास उस अंधी भिखारी लड़की को अपने साथ घर ले आई। मैंने पूछा, “अम्मी जान, आप इसे क्यों लेकर आई हैं?” सास ने कहा, “मैं इसकी शादी अपने बेटे सरफराज से करूंगी।” मेरी तो पैरों तले जमीन ही निकल गई। मेरे सारे सपने टूट गए।

अध्याय 4: सवाल और सख्ती

मैं हैरान थी कि मेरी सास अपने डॉक्टर बेटे की शादी एक अंधी भिखारी लड़की से कैसे कर सकती है? मुझे लगा कि सरफराज तो इसे देखकर ठुकरा देगा, उसकी पसंद कोई और होगी। सरफराज लंदन से लौटा, सास ने शादी की तैयारी शुरू कर दी। सरफराज को शादी के बारे में बताया, लेकिन लड़की के बारे में नहीं बताया कि वह नाबीना है। मैंने कोशिश की कि सरफराज को सच बता दूं, लेकिन सास ने मना कर दिया।

निकाह के दिन सरफराज ने लड़की को देखा, बहुत खुश हुआ। मैं हैरान थी कि एक अंधी लड़की उसकी बीवी बनने जा रही है, फिर भी वह खुश है। निकाह हो गया, सरफराज अपनी बीवी का हाथ पकड़कर कमरे में चला गया। मेरी सास ने मुझसे कहा, “अब इन दोनों की जिम्मेदारी तुम्हारी है।” मुझे बहुत बुरा लगा—पहले सास की सेवा, अब देवरानी की नौकर बनना।

अध्याय 5: सास का सच

मैंने सास से बात करने का फैसला किया। पूछा, “आप कब तक मुझे नौकरानी बनाकर रखेंगी?” सास ने मुझे पास बुलाया, बोली, “मैं तुम्हें बताती हूं कि वह लड़की कौन है।” मुझे उनकी बातें सुनने का दिल नहीं था, लेकिन मजबूरी थी।

सास ने बताया, “जब सरफराज लंदन नहीं गया था, यह लड़की हमारे मोहल्ले में रहती थी। सरफराज उसे पसंद करता था, कई बार बोला कि रिश्ता लेकर उसके घर जाओ। लेकिन मैं अमीर खानदान में शादी करना चाहती थी। मैंने लड़की के मां-बाप से कहा कि अपनी बेटी को मेरे बेटे से दूर रखें, वरना अच्छा नहीं होगा। मैंने उन्हें बेइज्जत किया। लड़की की मां रोती रही, बोली, ‘हम गरीब हैं, लेकिन इज्जत वाले हैं।’ मैंने धमकी दी। सरफराज को पता चला, वह मुझसे बात नहीं करता था।”

अध्याय 6: मोहब्बत का दर्द

सरफराज ने रजिया से मिलने की जिद की, मैंने मना किया, बोली, “उसकी नजर तुम्हारी दौलत पर है।” सरफराज ने मेरी बात नहीं मानी, रजिया से मिलने गया, लौटकर कमरे में खुद को बंद कर लिया, खाना नहीं खाया। उसकी हालत बिगड़ती गई। मैं फिर रजिया के घर गई, कहा, “शहर छोड़ दो, जितने पैसे चाहिए ले लो।” रजिया ने कहा, “मैं आपके बेटे से कभी नहीं मिलूंगी, हम शहर छोड़ देंगे।”

उस रात रजिया का परिवार शहर छोड़ गया। सरफराज की हालत और बिगड़ गई। वह बेहोश होकर गिर गया, अस्पताल में भर्ती हुआ, होश आने पर बोला, “अम्मी, मुझे रजिया से मिलवा दो।” मैंने कहा, “ठीक हो जाओ, मैं रिश्ता लेकर जाऊंगी।”

सरफराज ठीक हुआ, रजिया को ढूंढने गया, लेकिन वह कहीं नहीं मिली। छह महीने तक तलाश की, फिर हार मान ली। उसने फैसला किया कि वह मुल्क छोड़ देगा, कभी वापस नहीं आएगा। मैं बहुत पछताई कि मैंने उसकी खुशियां बर्बाद कर दीं।

अध्याय 7: पछतावा और दुआ

सरफराज लंदन चला गया। मैंने रजिया की तलाश जारी रखी, उसके रिश्तेदारों से पूछा, लेकिन कोई खबर नहीं मिली। हर जुमा रात बीबी पाक दामन की दरगाह पर जाकर दुआ करती थी कि मेरे बेटे की खुशियां लौट आएं।

एक दिन मेरी दुआ कबूल हो गई—मुझे रजिया दरगाह पर बैठी मिली। मैंने उसे घर ले आई। रजिया ने बताया, “शहर छोड़ते वक्त एक्सीडेंट हुआ, मां-बाप की मौत हो गई, मैं नाबीना हो गई।” मैं बहुत रोई, क्योंकि यह सब मेरी वजह से हुआ था।

अध्याय 8: नया फैसला

मैंने फैसला किया कि अब रजिया की शादी सरफराज से करूंगी। सरफराज लौटकर आया, रजिया को देखकर बहुत खुश हुआ। उसकी खुशी देखकर मुझे सुकून मिला। मेरे पास दौलत थी, ऐश था, लेकिन बेटे की खुशी सबसे ज्यादा थी।

मैंने रुबीना से कहा, “बेटी, मुझे पता है तुम्हारे दिल में क्या था। लेकिन मैं मजबूर थी। अगर तुम शादी करना चाहती हो तो बता दो, मैं तुम्हारे लिए अच्छा रिश्ता ढूंढूंगी। सरफराज की खुशी सिर्फ रजिया के साथ है।”

मैंने दौलत के दो हिस्से किए—एक हिस्सा रुबीना का, एक सरफराज का। रुबीना ने कहा, “मैं अपनी जिंदगी आपके साथ ही गुजारूंगी। जितनी खुशी मुझे मिली है, वह बहुत है।”

अध्याय 9: इंसानियत की जीत

रुबीना ने देवरानी रजिया का ख्याल रखना शुरू किया। उसकी आंखें नहीं थीं, लेकिन रुबीना ने उसे कभी यह एहसास नहीं होने दिया। दोनों बहनों जैसी हो गईं। सरफराज ने कहा, “यह वही रजिया है जिसे मैं बहुत मोहब्बत करता था। आज अल्लाह का शुक्र है कि वह मुझे मिल गई।”

सरफराज के दोस्त डॉक्टर्स थे, बोले, “रजिया को लंदन लेकर आओ, ऑपरेशन करवाएंगे, उसकी आंखें वापस आ जाएंगी।” यह सुनकर सबको बहुत खुशी हुई।

अंतिम दृश्य: खुशी और सीख

रजिया का ऑपरेशन हुआ, उसकी आंखों की रोशनी वापस आ गई। सब खुश थे। रुबीना, सरफराज, रजिया और सास-ससुर ने मिलकर खुशगवार जिंदगी गुजारनी शुरू कर दी।

सीख