Badshah ne Rajkumari ki Shaadi Andhe Fakir se Kyun Kar Di? | Anokhi aur Majedar Kahani ? हिंदी कथ)
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बादशाह ने राजकुमारी की शादी अंधे फकीर से क्यों कर दी? | अनोखी और मजेदार कहानी
कहानी की शुरुआत
प्यारे दोस्तों, आज हम आपको एक ऐसा हैरान कर देने वाला कहानी सुनाने वाले हैं जिसे सुनकर आपकी आँखों में आंसू आ जाएंगे। यह कहानी है एक ऐसे बादशाह की जिसने अपनी ही खूबसूरत बेटी शहजादी रुक्सार की शादी एक लंगड़े और अंधे फकीर के साथ कर दी। लेकिन दोस्तों असली बात तो इसके बाद शुरू होती है क्योंकि जिस फकीर को सब लोग बेबस और कमजोर समझ रहे थे उसी फकीर ने आगे चलकर शहजादी रुक्सार के साथ ऐसा क्या किया कि पूरी कहानी ही पलट गई। आखिर एक बाप ने अपनी बेटी को ऐसी सजा क्यों दी और इसके पीछे क्या वजह थी? इस पूरी कहानी को सही से समझने के लिए हमारे साथ आखिर तक जरूर बने रहिएगा। तभी आपको हर राज पता चलेगा। तो चलिए दोस्तों कहानी शुरू करते हैं।
महल में खुशहाल दिन
एक खूबसूरत इलाके में एक बहुत बड़ा और शानदार महल था। उस महल में एक बेहद अमीर और ताकतवर बादशाह अपनी नेक बीवी बेगम फरीदा के साथ रहता था। बादशाह का नाम सुल्तान अजीजुद्दीन था और पूरे इलाके में उनकी बहुत इज्जत थी। बादशाह सुल्तान अजीजुद्दीन की पूरे इलाके में बहुत ज्यादा जमीनें थी। हजारों एकड़ जमीन पर उनका राज्य था। इलाके के सभी किसान बादशाह की जमीनों पर खेती किया करते थे।
बादशाह बहुत दयालु और न्यायप्रिय था। वह अपनी प्रजा का बहुत ख्याल रखता था। बादशाह की बीवी बेगम फरीदा बहुत ही नेक, रहम दिल और परहेजगार औरत थी। वह एक आदर्श बेगम थी जो अपने शौहर का बहुत सम्मान करती थी और अपने महल के नौकरों के साथ भी बेहद अच्छा सुलूक करती थी। बेगम फरीदा अपने घर के नौकरों को अपने साथ बैठाकर खाना खिलाया करती थी। वह किसी को भी छोटा या बड़ा नहीं समझती थी बल्कि सबको एक जैसा समझती थी। चाहे वह कोई भी हो सबके साथ प्यार और सम्मान से पेश आती थी।

बादशाह के महल में एक बूढ़ी मुलाजिम यानी बूढ़ी नौकरानी थी जो काफी उम्र की हो चुकी थी। उसका नाम बीबी ज़ैनब था। बीबी जैनब ने अपनी सारी उम्र बादशाह के महल में मुलाजमत की थी। बादशाह के महल के हर छोटे-बड़े सदस्य और नौकर सभी उनको अम्मा ज़ैनब के नाम से बुलाते थे। बेगम फरीदा ने कभी भी बीबी ज़ैनब को घर की मुलाजिम यानी नौकरानी नहीं समझा था।
बीबी ज़ैनब और बेगम फरीदा का रिश्ता
बेगम फरीदा हमेशा बीबी ज़ैनब को अपने घर की बड़ी बुजुर्ग समझती थी। बेगम फरीदा बीबी ज़ैनब के साथ अपने दिल की हर बात किया करती थी। एक दिन की बात है। बेगम फरीदा गर्भवती थी। वह बीबी ज़ैनब के पास बैठी हुई थी। बेगम फरीदा ने बीबी ज़ैनब से कहा, “अम्मा ज़ैनब, मेरे यहां जो भी बच्चा पैदा होने वाला है, मैं उसको जरूर हाफिज कुरान बनाऊंगी।”
यह मेरे दिल की बहुत बड़ी ख्वाहिश है कि मैं अपनी औलाद को हाफिज कुरान बनाऊं। मैं चाहती हूं कि मेरा बच्चा कुरान पाक की तालीम हासिल करें और एक नेक इंसान बने। बीबी जैनब ने मुस्कुराते हुए कहा, “बेगम साहिबा अल्लाह पाक आपकी यह ख्वाहिश जरूर पूरी करेगा। इंशा्लाह आपके घर में एक नेक औलाद आएगी जो कुरान पाक की हाफिजा होगी और आपके घर की रौनक बनेगी।”
फिर इसी तरह तेजी से वक्त गुजरता गया। पूरे गांव और इलाके में बहुत खुशहाली थी। हर कोई बादशाह सलामत और उनकी नेक बीवी को दिल से दुआएं दे रहा था। बादशाह और बेगम फरीदा में बहुत ज्यादा प्यार और मोहब्बत थी। अब बेगम फरीदा के प्रेग्नेंट हुए 9 महीने पूरे होने वाले थे। बादशाह और पूरे इलाके के लोग बादशाह सलामत की आने वाली औलाद को देखने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। महल में खुशियों की लहर थी। सभी नौकर और दरबारी नई शहजादी या शहजादे के आने की तैयारियों में लगे हुए थे।
बेगम फरीदा की मौत
इसी इंतजार में ऐसे ही उनकी जिंदगी हंसी-खुशी से बसर हो रही थी। फिर वह दिन आ गया जब बेगम फरीदा को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। महल में सबसे अच्छी दाइयां और हकीम बुलाए गए। पूरा महल बेचैनी में था। बादशाह महल के बाहर टहल रहे थे और अल्लाह से दुआ मांग रहे थे कि उनकी बीवी और बच्चा दोनों सलामत रहे। फिर 2 घंटे बाद एक दिन ऐसा आया कि बादशाह की जिंदगी में अंधेरा सा छा गया।
बेगम फरीदा ने एक बेहद खूबसूरत बेटी को जन्म दिया। बच्ची इतनी खूबसूरत थी कि जैसे चांद की परी हो। उसके चेहरे पर एक अजीब सा नूर था। मगर दोस्तों, जैसे ही उसने उस खूबसूरत बेटी को जन्म दिया, बेगम फरीदा ने अपनी आखिरी सांस ली और इस दुनिया को छोड़कर चली गई।
लेकिन वह खुद तो इस दुनिया से चली गई मगर बेगम फरीदा की मौत ने बादशाह को गहरे सदमे में डाल दिया था। बादशाह को यकीन ही नहीं हो रहा था कि उनकी प्यारी बीवी उन्हें छोड़कर चली गई। बेगम फरीदा की मौत की खबर महल से गांव के साथ-साथ आसपास के हर इलाके में फैल चुकी थी। सभी के दिलों में इस बात का बहुत सदमा लगा। लोग रो रहे थे। बेगम फरीदा इतनी नेक और दयालु थी कि हर किसी को उनसे मोहब्बत थी।
बादशाह और शहजादी रुक्सार की नफरत
मगर बादशाह के दिल में यह बात बैठ गई थी कि बेटी पैदा होते ही मेरी बीवी इस दुनिया से चली गई। अगर यह पैदा ना होती तो आज मेरी बीवी मेरी आंखों के सामने होती। मेरी बेटी पैदा होते ही अपनी मां को खा गई। बादशाह अपनी बीवी से बहुत मोहब्बत करता था। उसे अपनी बीवी का गम बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था।
बादशाह ने पहले दिन से अपनी बेटी की शक्ल नहीं देखी थी। वह दिल ही दिल में अपनी बेटी से नफरत करता था। बेगम फरीदा के इंतकाल के गम में उस मासूम सी बच्ची का नाम भी किसी ने नहीं रखा था। वह सिर्फ शहजादी रुक्सार थी। रुक्सार का मतलब होता है चेहरे वाली। बीबी जैनब ने काफी सोच विचार के बाद उस बच्ची का नाम रुक्सार रखा।
शहजादी रुक्सार की परवरिश बीबी जैनब के हवाले कर दी गई ताकि उसकी परवरिश हो सके। बेगम फरीदा के इंतकाल के गम में शहजादी रुक्सार की परवरिश बड़े अच्छे तरीके से की जा रही थी। मगर दोस्तों, बादशाह तो अपनी बेटी को मनहूस, नहसबत और बदकिस्मत कहता था।
शहजादी रुक्सार का हौसला
शहजादी रुक्सार ने अपनी सास के साथ रहते हुए बहुत अच्छे गुण सीखे थे। वह दिल से बहुत नेक और धार्मिक लड़की थी। उसके दिल में कभी भी किसी के प्रति नफरत या गुस्सा नहीं था। वह समझती थी कि उसके बाप की नफरत का कोई ठिकाना नहीं है। मगर उसने कभी अपनी उम्मीद नहीं छोड़ी।
शहजादी रुक्सार को हमेशा अपनी कड़ी मेहनत और परिवार के लिए खुश रहने की प्रेरणा अपनी सास से ही मिली थी। बीबी जैनब ने हमेशा उसे बताया था कि अल्लाह के रास्ते पर चलने वाला कभी हारता नहीं है।
बादशाह की जिंदगी और रुक्सार का रिश्ता
समय के साथ शहजादी रुक्सार जवान हो गई और उसकी सास ने उसकी शादी के लिए अच्छे रिश्ते तलाशने शुरू कर दिए। वह जानती थी कि अगर रुक्सार को एक अच्छा जीवन साथी मिल जाए, तो उसकी जिंदगी बदल सकती है। शहजादी रुक्सार के साथ उसकी कड़ी मेहनत और लगन ने उसे एक नई पहचान दिलाई।
दूसरी तरफ, बादशाह के दिल में गहरी नफरत और पछतावा था। वह अब भी अपनी बेटी से नफरत करता था और उसकी शादी के लिए किसी लंगड़े और अंधे फकीर को तलाश रहा था। दोस्तों, यही वह मोड़ था जब बादशाह को अपनी गलती का एहसास हुआ।
अंधे फकीर से शादी का फैसला
एक दिन, बादशाह ने अपने सैनिकों से कहा कि मुझे मेरी बेटी के लिए एक अंधे और लंगड़े फकीर का रिश्ता चाहिए। यह सुनकर सभी दरबारी हैरान रह गए। वे सोचने लगे कि बादशाह अपनी बेटी को इतनी बुरी तरह क्यों समझता है।
फिर एक दिन बादशाह ने अपने सैनिकों को भेजकर उस अंधे फकीर से शहजादी रुक्सार का रिश्ता तय करवा दिया। शहजादी रुक्सार ने इस शादी को मंजूर किया क्योंकि वह जानती थी कि उसकी कड़ी मेहनत और अपने परिवार के लिए प्यार के बाद यह उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा कदम था।
शहजादी रुक्सार का नया जीवन
जब शहजादी रुक्सार ने इस अंधे फकीर से शादी की, तो उसकी जिंदगी बदल गई। उसके साथ बुरा व्यवहार करने वाले उसके बाप ने अपने फैसले से कभी नहीं सोचा था कि उसकी बेटी कभी अपनी मेहनत से एक नई पहचान बनाएगी।
लेकिन दोस्तों, यह कहानी एक संदेश देती है कि जो इंसान सच्चाई, मेहनत और इमानदारी के रास्ते पर चलता है, उसकी मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। अल्लाह हमेशा उसे वह हासिल करता है जो उसकी मेहनत और परिश्रम का फल होता है।
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