Dharmendra ने अपनी वसीयत मे ऐसा क्या दिया hema malini,Prakash kaur को कि हैरान हुई पूरी deol family
धर्मेंद्र के जाने के बाद देओल परिवार की विरासत: एक नई शुरुआत या बिखराव?
धर्मेंद्र जी के निधन के बाद, उनके परिवार की स्थिति और विरासत को लेकर कई प्रश्न उठ खड़े हुए हैं। क्या सच में देओल परिवार में दरारें आ गई हैं? क्या 450 करोड़ की संपत्ति प्रकाश कौर और हेमा मालिनी के बीच नई समस्याएं पैदा करेगी? आइए, इस लेख में हम इन सवालों की गहराई में उतरते हैं और समझते हैं कि धर्मेंद्र जी के जाने के बाद उनके परिवार में क्या चल रहा है।
धर्मेंद्र जी का अंतिम सफर
24 नवंबर 2025 को जब यह खबर आई कि बॉलीवुड का शेर, धर्मेंद्र जी अब हमारे बीच नहीं रहे, तो मानो समय थम सा गया। उनका अंतिम संस्कार जल्दी और साधारण तरीके से किया गया, जो कई लोगों के लिए आश्चर्यजनक था। आमतौर पर, जब इतने बड़े सितारे दुनिया छोड़ते हैं, तो उनकी अंतिम यात्रा में राजकीय सम्मान होता है। लेकिन धर्मेंद्र जी के साथ ऐसा नहीं हुआ।
उनकी अंतिम यात्रा में केवल परिवार के सदस्य मौजूद थे और फैंस का गुस्सा सोशल मीडिया पर देखने को मिला। लोग सनी और बॉबी को ट्रोल करने लगे, यह कहते हुए कि उन्होंने अपने पिता को ठीक से विदा नहीं किया।
परिवार का निजी दर्द
इस जल्दबाजी के पीछे का कारण था देओल परिवार का निजी दर्द। निधन से कुछ दिन पहले धर्मेंद्र जी का एक वीडियो लीक हुआ था, जिसमें वह बेसुध थे और प्रकाश कौर उनके पास रो रही थीं। इस वीडियो ने परिवार को अंदर तक तोड़ दिया था। यही वजह थी कि सनी और बॉबी ने फैसला किया कि अब और तमाशा नहीं होगा, सब कुछ निजी होगा।
ताज लैंड्स एंड में श्रद्धांजलि
धर्मेंद्र जी के निधन के तीन दिन बाद, 27 नवंबर को देओल परिवार ने एक आयोजन किया जिसे उन्होंने “सेलिब्रेशन ऑफ लाइफ” का नाम दिया। बांड्रा के ताज लैंड्स एंड होटल में एक अजीब सी खामोशी थी, लेकिन हवाओं में धर्मेंद्र जी की यादें तैर रही थीं।
सनी और बॉबी ने मेहमानों का स्वागत हाथ जोड़कर किया। सलमान खान भी वहां पहुंचे और सनी को गले लगाते हुए आंसू बहाने लगे। यह पल बेहद भावुक था, और वहां मौजूद हर शख्स का दिल भर आया।

हेमा मालिनी की अनुपस्थिति
इस आयोजन में एक चेहरा नदारद था—हेमा मालिनी। जब पूरी दुनिया धर्मेंद्र जी को श्रद्धांजलि दे रही थी, उनकी दूसरी पत्नी वहां मौजूद नहीं थीं। इस बात ने गॉसिप के गलियारों में हलचल मचा दी। क्या सनी ने उन्हें बुलाया नहीं? क्या अब भी सौतनों का आमना-सामना नहीं हो सकता?
सच यह है कि यह कोई झगड़ा नहीं बल्कि एक अघोषित मर्यादा थी जिसे दोनों परिवारों ने पिछले 45 सालों से निभाया है। ताज लैंड्स एंड का आयोजन प्रकाश कौर और उनके बेटों ने किया था। ऐसे में हेमा मालिनी ने वहां ना जाकर एक समझदारी और गरिमापूर्ण फैसला लिया।
व्यक्तिगत प्रार्थना सभा
हेमा जी ने अपने पति की अंतिम विदाई को तमाशा नहीं बनने दिया। उन्होंने अपने जूहू स्थित बंगले पर एक अलग निजी प्रार्थना सभा रखी थी। वहां माहौल बहुत ही निजी और भावुक था। इस सभा में ईशा देओल के पूर्व पति भारत तख्तानी भी पहुंचे, जिन्होंने पुरानी कड़वाहट को भुलाकर अपनी सासू मां और पूर्व पत्नी के साथ खड़े होकर एक बड़ा संदेश दिया कि रिश्ते टूट सकते हैं, लेकिन इंसानियत और परिवार का मोह नहीं छूटता।
संपत्ति का बंटवारा
धर्मेंद्र जी के निधन के बाद, उनके विशाल आर्थिक साम्राज्य का बंटवारा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति लगभग 335 से 450 करोड़ के बीच मानी जाती है। इसमें शामिल हैं जूहू का बंगला, लोनावाला का फार्म हाउस, और पंजाब में फैले उनके रेस्टोरेंट।
अब सवाल यह है कि इस संपत्ति का बंटवारा कैसे होगा? अगर धर्मेंद्र ने कोई वसीयत नहीं छोड़ी, तो संपत्ति प्रकाश कौर और हेमा मालिनी के बच्चों के बीच बराबर बांटी जाएगी।
पारिवारिक समीकरण
धर्मेंद्र की दो शादियां बॉलीवुड की सबसे चर्चित दास्तानों में से एक रही हैं। 1954 में प्रकाश कौर से विवाह करने के बाद, 1980 में उन्होंने हेमा मालिनी से शादी की। इस शादी ने उस समय काफी विवाद खड़ा किया था।
कानून की नजर में, ईशा और अहाना को अपने पिता की संपत्ति में उतना ही हक है जितना सनी और बॉबी को। लेकिन असली जिंदगी कानून की किताबों जितनी सीधी नहीं होती। हेमा मालिनी ने हमेशा एक गरिमापूर्ण दूरी बनाए रखी है और कई इंटरव्यू में कहा है कि उन्हें धर्मेंद्र की संपत्ति या पैसे से कोई लालच नहीं है।
ईशा और अहाना का भविष्य
ईशा देओल ने हाल ही में अपने पति भरत तख्तानी से तलाक लिया है। एक सिंगल मदर के तौर पर जिंदगी को नई शुरुआत देना आसान नहीं होता। ऐसे समय में पिता का साया उठ जाना उनके लिए और भी दर्दनाक है।
धर्मेंद्र ने शायद अपनी बेटियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कोई खास वसीयत लिखी हो। कहा जा रहा है कि उन्होंने अपनी लिक्विड एसेट्स का एक बड़ा हिस्सा अपनी बेटियों के नाम कर दिया हो।
निष्कर्ष
धर्मेंद्र जी का जाना केवल एक युग का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत का संकेत भी है। उनके परिवार में जो तनाव और दूरियां हैं, वे केवल संपत्ति के बंटवारे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह रिश्तों की जटिलता और भावनाओं का भी मामला है।
क्या धर्मेंद्र जी की विरासत को संभालने में देओल परिवार सफल होगा? या फिर पुराने घाव और दबे हुए दर्द बाहर आएंगे? आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन एक बात तय है कि धर्मेंद्र जी की यादें और उनका प्यार हमेशा उनके परिवार और फैंस के दिलों में जीवित रहेगा।
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