DM साहिबा और मंदिर का सेवक: 5 साल के वनवास के बाद पति-पत्नी का भावुक मिलन!
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DM साहिबा और मंदिर का सेवक: 5 साल के वनवास के बाद पति-पत्नी का भावुक मिलन!
अयोध्या नगरी त्रेता युग की स्मृतियों को अपने सीने में समेटे आज भी कलयुग में आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बनी हुई थी। यहाँ की हवाओं में आज भी राम का नाम गूंजता था, और यही कारण था कि शालिनी मिश्रा, अयोध्या की नई डीएम, का यहाँ तबादला हुआ। अयोध्या, जहाँ राम मंदिर की ऐतिहासिक महत्ता है, आज भी सभी धार्मिक स्थलों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
शाम ढल रही थी और सरयू के तट पर होने वाली आरती की गूंज दूर तक सुनाई दे रही थी। लेकिन उस वक्त वहाँ जो सबसे बड़ा शोर था, वह नवनिर्मित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के परिसर में था। मंदिर का शिखर लाखों दीपों की रोशनी से सोने की तरह दमक रहा था। हवाओं में चंदन, कपूर और गुलाब की मिलीजुली सुगंध तैर रही थी। श्रद्धालु मंदिर में प्रार्थना करने आ रहे थे। उनके कदमों की ध्वनि, मंत्रोच्चारण और घंटियों की आवाज़ इस धार्मिक स्थल को और भी अधिक पवित्र बना रही थी।
मंदिर के पश्चिमी द्वार के पास जहाँ श्रद्धालु अपने जूते चप्पल उतार कर कतार में लग रहे थे, वहाँ एक व्यक्ति खड़ा था। उसका नाम केशव था। उसकी उम्र करीब 35 साल रही होगी, लेकिन उसके चेहरे पर झुर्रियाँ समय से पहले ही आ चुकी थीं। शरीर कमजोर था और आँखों में एक गहरा खालीपन था। वह कोई मंदिर ट्रस्ट का कर्मचारी नहीं था। बस वह एक अघोषित सेवक था जो सुबह से लेकर शाम तक मंदिर प्रांगण की सफाई करता था। वह बुजुर्गों को सहारा देता था और बदले में जो प्रसाद मिलता, उसी से अपना पेट भरता था।
केशव की स्थिति देखकर कोई नहीं कह सकता था कि यह वही व्यक्ति है जो कभी इलाहाबाद विश्वविद्यालय का गोल्ड मेडलिस्ट हुआ करता था। उसकी आँखों में अब कोई उम्मीद नहीं थी, जैसे किसी गहरे समंदर में कोई लहर नहीं बची हो। लेकिन उसका मन शांत था, वो सिर्फ अपने काम में मग्न रहता था। वह किसी से बात नहीं करता था, जैसे दुनिया से पूरी तरह से कट चुका हो। उसकी स्थिति से यह भी नहीं समझ में आता था कि यह वही केशव है जिसने कभी अपनी ज़िंदगी के सपनों को अपनी पत्नी के लिए बलिदान कर दिया था।

तभी मंदिर परिसर में अचानक सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। वॉकी टॉकी पर आवाजें गूंजने लगीं। “वीआईपी मूवमेंट है। गेट नंबर तीन क्लियर करो। डीएम मैम आ रही हैं। रिपीट, डीएम मैम आ रही हैं।” पुलिसवालों ने डंडे फटकारते हुए भीड़ को किनारे करने का आदेश दिया। केशव जो सीढ़ियों के बीच में पोछा लगा रहा था, हड़बड़ाकर किनारे हटने की कोशिश करने लगा। एक हवलदार ने उसे धक्का देते हुए कहा, “ए भाई हटाओ यह सब। साहब लोग आ रहे हैं।”
केशव ने सिर झुकाया और अपना कपड़ा समेट कर खंभे के पीछे छिपने की कोशिश की। उसे अधिकारियों या भीड़ से कोई डर नहीं था, लेकिन उसे अपनी पहचान छिपानी थी। वह दुनिया की नजरों से गायब रहना चाहता था। काले रंग की चमचमाती इनोवा कार मंदिर के वीआईपी गेट पर आकर रुकी। कार का सायरन बंद हुआ, और फिर अरदली दौड़कर दरवाजा खोलने के लिए गया। गाड़ी से एक महिला बाहर निकली। कड़क कॉटन की साड़ी पहने, सलीके से बंधे बाल, और आंखों पर चश्मा पहने हुए, वह किसी सशक्त अधिकारी की तरह दिख रही थी। वह कोई और नहीं, बल्कि अयोध्या की नई डीएम, शालिनी मिश्रा थी।
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शालिनी मिश्रा का चेहरा गंभीर था और उनकी आँखों में वह तेज था जो किसी को भी सहमने पर मजबूर कर दे। उनका हाल ही में अयोध्या में ट्रांसफर हुआ था और यह उनकी पहली औपचारिक विजिट थी। उनके पीछे एसपी, एसडीएम और मंदिर प्रशासन के लोग फाइलों के पुलिंदे के साथ चल रहे थे। शालिनी ने चलते हुए सख्त लहजे में सुरक्षा इंतजामों को दिशा-निर्देश दिए। उनकी आवाज में वह खनक थी, जो फैसले सुनाने की आदत में बसी हुई थी।
जैसे ही शालिनी मंदिर के खंभे के पास से गुज़री, उसकी नजर उस व्यक्ति पर पड़ी जो दीवार की तरफ मुंह किए खड़ा था। उसका दिल तेजी से धड़कने लगा। वह शख्स कोई और नहीं, बल्कि केशव था, शालिनी का वह पति जिसे उसने 5 साल पहले मरा हुआ समझा था। उसकी आँखों में एक गहरी पहचान थी। वह वही चाल, वही आत्मविश्वास था, जो उसने कभी अपनी जवानी में देखा था।
शालिनी की नज़रें थम गईं। वह जानती थी कि यह वही केशव है, जिसे दुनिया ने मृत मान लिया था। दिल का दर्द और अविश्वास दोनों एक साथ उमड़ आए। उसने तुरंत उस शख्स को देखने के लिए इशारा किया। “इधर देखो,” शालिनी ने पुलिसवालों से कहा, और एक सिपाही ने केशव को जबरदस्ती घुमा दिया।
केशव ने अपना चेहरा ढक लिया था, लेकिन शालिनी की आँखें उसकी पहचान की खोज कर रही थीं। शालिनी ने अपने हाथ से केशव का अंगूठा खींचकर उसके चेहरे से ढकने वाला कपड़ा हटा लिया। जैसे ही उसकी पहचान स्पष्ट हुई, शालिनी सन्न रह गई। सामने वह व्यक्ति खड़ा था, वह वही केशव था जिसे उसने 5 साल पहले खो दिया था।
शालिनी की आवाज में एक हल्की सी कंपकंपी थी, लेकिन दिल का दर्द साफ था। “तुम जिंदा हो?” उसकी आवाज में आंसुओं का सैलाब था। यह वही केशव था, जिसका उसने श्राद्ध किया था, जिसे उसने मृत मान लिया था।
केशव ने अपनी आँखें झुका लीं, लेकिन अब वह खामोश नहीं रह सकता था। उसने धीरे से जवाब दिया, “शालिनी, वह केशव मर चुका है, जो तुम्हारे सामने खड़ा है। वह सिर्फ एक सेवक है। भूल जाओ कि तुमने कुछ देखा।”
शालिनी का दिल भर आया, लेकिन उसने केशव से कहा, “कैसे भूल जाऊं? तुम मेरे पति हो, तुम्हारे बिना मैं क्या करती?” उसकी आँखों में गहरा प्यार था, लेकिन अब उसकी आँखों में एक कड़ा दर्द भी था। शालिनी ने अब पूरी दुनिया के सामने अपना दर्द और सत्य उजागर किया।
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