“Ek aurat aur kachray mein milay masoom bachay ki dil dehla dene wali kahani 😲 | Islamic Story

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एक औरत और कचरे में मिले मासूम बच्चे की दिल दहला देने वाली कहानी 😲 | इस्लामिक स्टोरी

कहानी की शुरुआत

एक दिन का वक्त था और समीना तेज कदमों से अपने घर की तरफ जा रही थी। दोपहर की धूप और गांव पर छाया सन्नाटा उसके दिल को अजीब सुकून दे रहा था। अचानक किसी सुनसान जगह से बच्चे के रोने की मध्यम लेकिन दिल दहला देने वाली आवाज आई। समीना चौंक कर रुक गई। उसने आवाज की तरफ नजर दौड़ाई और देखा कि वह कचरे के ढेर की तरफ से आ रही थी। दिल में बेचैनी के साथ वह आगे बढ़ी और हैरत से उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं।

कचरे के बीच एक टोकरी पड़ी थी और उसके अंदर एक मासूम सा बच्चा जोर-जोर से रोता जा रहा था। समीना की हैरत की इंतहा ना रही। उसने इर्दगिर्द देखा। हर तरफ सन्नाटा छाया हुआ था। कोई इंसान नजर नहीं आ रहा था। दिल में खौफ और तशवीश के साथ वह फौरन आगे बढ़ी और बच्चे को अपनी गोद में उठा लिया। उसके चेहरे पर परेशानी की लकीरें साफ दिखाई दे रही थीं। यह मासूम नन्हा सा बच्चा यहां अकेला और लावारिस पड़ा हुआ था। यह सोचकर उसके दिल में दर्द उठा।

ना जाने कौन उसे यहां छोड़कर चला गया था और यह कितना छोटा है। अफसोस और मोहब्बत के जज्बे के साथ समीना सर हिलाती हुई घर की तरफ चल पड़ी। उसकी आँखों में ममता की चमक थी और दिल में बच्चे के लिए बेपनाह शफकत जागी हुई थी। बच्चा बेहद खूबसूरत था। शायद चंद दिनों का ही होगा। वह घर के सहन में दाखिल हुई तो उसका 5 साल का बेटा फराज स्कूल का काम करते हुए बैठा था। समीना ने फौरन बच्चे को अपनी गोद में लेकर फीडर के साथ दूध पिलाना शुरू कर दिया।

फराज हैरत से बोला, “अम्मा, यह बच्चा कौन है? यह कहां से आया?” समीना ने बच्चे की तरफ मोहब्बत भरी नजर से देखते हुए मुस्कुरा कर कहा, “बेटा, आज से यह तुम्हारा भाई है।”

फराज की आँखों में नागवारी की लहर दौड़ गई और वह बोला, “अम्मा, यह मेरा भाई नहीं है। मुझे ऐसा भाई नहीं चाहिए।” समीना ने खामोशी से उसे देखा। फराज के अल्फाज दिल को चुभ रहे थे। मगर उसके चेहरे पर सोच की गहरी परछाइयाँ लहराने लगीं। वह जानती थी कि इस मासूम बच्चे को, जिसे वह अब अपने दिल से लगा चुकी थी, कभी भी लावारिस नहीं छोड़ सकती।

गांव में खबर फैलना

शाम तक पूरे गांव में खबर फैल गई कि समीना को एक बच्चा कचरे में मिला है। अगली सुबह समीना घर से बाहर निकली और सब लोगों से मुखातिब होकर बुलंद आवाज में बोली, “यह बच्चा आज से मेरा है। इसका नाम हमजा है और यह मेरा बेटा है। कोई नहीं कह सकता कि यह कचरे से मिला है।”

गांव वालों ने उसके बुलंद हौसले और आला जाफी को सराहा और कहा कि समीना वाकई एक नेक और अच्छी खातून है। समीना बच्चे को घर ले आई। वह एक बीवी औरत थी जिसके शौहर का इंतकाल चंद साल पहले हो चुका था। शौहर ने अपने पीछे कई जमीनें छोड़ी थी जिनसे काफी अच्छी आमदनी होती थी। समीना और उसका बेटा फराज एक खुशहाल जिंदगी गुजार रहे थे। शौहर की कमी दिल को महसूस तो होती थी, मगर अपने बेटे के लिए वह अपनी जिंदगी को जीती रही थी।

यूँ हमजा और फराज एक ही घर में पलने लगे। मगर फराज हमेशा हमजा को खेलख में मारता और कभी भी उसे अपना भाई तस्लीम नहीं कर सका। समीना अक्सर फराज को समझाती, “वह तुम्हारा भाई है। उसे प्यार करो।” मगर फराज के दिल में हमजा के लिए कोई नरम गोशा नहीं था।

हमजा की मेहनत और फराज की बेरुखी

वक़्त यूं गुजरता गया, फराज और हमजा दोनों ही गांव के स्कूल में पढ़ने जाते थे। हमजा बचपन से ही जहीन था और खूब मेहनत और लगन के साथ पढ़ता था। वह हमेशा अपनी किताबों में खोया रहता और दूसरों की मदद करता। वहीं, फराज का ध्यान कभी पढ़ाई में नहीं था, वह अक्सर खेल में व्यस्त रहता और अपनी माँ से बात करता था। समीना को यह देखकर दुःख होता था कि उसका बेटा फराज, जिसे वह बहुत प्यार करती थी, कभी हमजा को अपना भाई नहीं मानता था।

समीना का त्याग और फराज की जिद

एक रोज समीना घर के सहन में बैठी सब्जी काट रही थी। धूप हल्की सी नरम थी और गांव का माहौल पुरसुकून था। अचानक हमजा रोता हुआ उसके पास आया। 7 साल का हमजा को रोते देखकर समीना का दिल जैसे धड़कना बंद हो गया। उसने फौरन उसे गोद में उठाया और प्यार से पूछा, “क्या हुआ है? क्यों रो रहे हो हमजा?”

हमजा आंसू पोंछते हुए बोला, “अम्मा, क्या मैं आपका बेटा नहीं हूं? फराज भैया कहते हैं कि मैं कचरे में से मिला हूं और मैं गंदा हूं।”

यह सुनकर समीना का दिल एक लम्हे के लिए टूट सा गया। मगर फौरन उसने अपने बेटे को गले लगाया। उसके बालों को सहलाया और मोहब्बत भरी आवाज में कहा, “नहीं मेरी जान, तुम तो मेरे बेटे हो। तुम बहादुर, प्यारे और फरमाबरदार हो।”

हमजा की आँखों में आंसू थे, मगर उसके होठों पर हल्की सी मुस्कुराहट भी नमूदार हो गई। वह जान चुका था कि उसकी माँ के दिल में उसके लिए बेपनाह मोहब्बत है और यही मोहब्बत उसके दिल में सुकून पैदा कर रही थी।

फराज का अहम निर्णय और हमजा का संघर्ष

वक्त के साथ फराज और हमजा दोनों बड़े हो गए। फराज ने जिद करके उसे शहर की एक बड़ी यूनिवर्सिटी में दाखिला दिलवा दिया, जिसके लिए उसे अपनी एक जमीन भी बेचनी पड़ी। समीना खामोश रही। अपने बेटे की तालीम के आगे वह सब कुछ बर्दाश्त कर सकती थी। हमजा ने गांव में रहकर जमीनों और खेतीबाड़ी की जिम्मेदारी संभाली। हमजा निहायत ही रहमदिल और फरमाबरदार बेटा था।

वह गांव के मामलात संभालता, खेतों की देखभाल करता और हर महीने शहर में फराज को एक अच्छी खासी रकम भेज देता ताकि फराज आला तालीम हासिल कर सके। समीना अपने बेटे की इस मोहब्बत और जिम्मेदारी को देखकर दिल ही दिल में दुआ करती रहती और यही मोहब्बत और कुर्बानी गांव के इस छोटे से घर को खुशियों से भर देती।

फराज और हमजा के रिश्ते में बदलाव

यह भी मामूल का ही दिन था। थका हुआ हमजा जैसे ही घर में दाखिल हुआ, सामने समीना मुस्कुराते हुए खड़ी मिली। हमजा फौरन आगे बढ़ा। झुककर समीना के हाथ चूम लिए और दिल से कहा, “अम्मा, समीना ने मुस्कुरा कर अपने बेटे की तरफ देखा। वह वही नरम दिल और फरमाबरदार बच्चा था जो आज जवान होकर भी अपनी मोहब्बत और अदब में कभी कमी ना लाया था।

हमजा समीना के पास बैठ गया और पूछने लगा, “अम्मा आपने अपनी दवाइयां वक्त पर तो खाई है ना?” समीना ने सर हिलाकर मुस्कुरा दिया और यूं घंटों हमजा उनके पास बैठा रहता। बातें करता और उनकी खिदमत करता।

नजमा की गलतियाँ और फराज की सच्चाई

एक रोज जब हमजा घर आया तो उसने देखा कि समीना बेहद परेशान है। वह फोन पर शायद फराज से बात कर रही थी। जैसे ही फोन कट हुआ समीना की आँखों से आंसू बहने लगे। हमजा फौरन पूछ बैठा, “क्या हुआ है अम्मा आप रो क्यों रही हैं? क्या कह रहे थे फराज भाई?”

समीना ने आह भर कर कहा, “फराज ने शहर में एक लड़की से शादी कर ली है। कह रहा था कि हम दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे और निकाह कर लिया है। मैंने जो ख्वाब उसके बारे में देखे थे, वह सब टूट गए।”

हमजा के दिल में उदासी ने जगह बना ली। लेकिन उसने फौरन अपनी मां को तसल्ली देते हुए कहा, “अम्मा फिक्र ना करें। भाई को तो आप जानती हैं ना वह थोड़े जिद्दी हैं और अलग मिजाज के हैं। फिक्र ना करें। जब दुल्हन को लेकर आएंगे तब आप सारे अरमान पूरे कर लीजिएगा।”

समीना ने मुस्कुराते हुए अपने फरमाबरदार बेटे को देखा। दिल में सुकून और फक्र का एहसास जाग उठا। यह बेटा वाकई उसका सबसे बड़ा सहारा और प्यार भरा तोहफा था।

फराज की गलतियाँ और उसकी सजा

कुछ दिनों के बाद फराज अपनी नई बीवी नजमा के साथ घर आया। समीना ने मुस्कुराते हुए बेटे और बहू का इस्तकबाल किया मगर नजमा के चेहरे पर खुशी का कोई आसार नहीं थे। वह सीधी अंदर कमरे में चली गई। समीना ने खामोशी इख्तियार कर ली। नजमा ने समीना को मुंह तक नहीं लगाया और हर बात पर चीखती चिल्लाती रही। “मैं तुमसे खिदमत नहीं कर सकती। तुम और तुम्हारा वह बेटा बस खाते ही हो। मेरा शौहर ही है जो सारे काम करता है।”

समीना खामोश हो गई। वह ना बहू से बहस करना चाहती थी और ना अपने बेटे के घर में इंतशार देखना चाहती थी। मगर क्या वह जानती थी कि उसकी बहू उसके और हमजा के खिलाफ एक खतरनाक मंसूबा बना चुकी है।

हमजा और फराज की मुलाकात

एक दिन हमजा को फराज से मिलने का मौका मिला। वह अपनी मां के पास गया और उससे पूछा, “अम्मा, अब हम क्या करेंगे?” समीना ने घबरा कर सर उठाया। कहो बेटे क्या बात है?

फराज ने रुकते हुए कहा, “अम्मा, सारी जमीनें और जायदाद मेरी है। हमजा का इसमें कोई हिस्सा नहीं है। वह आपको कचरे से मिला था।”

यह सुनकर समीना का दिल एक लम्हे के लिए टूट सा गया। मगर फौरन उसने अपने आप को संभाला। उसकी आवाज में मीठी सख्ती थी जब उसने कहा, “तुम किस अंदाज से हमजा के बारे में बात कर रहे हो? मैंने तुम्हें बचपन से यही सिखाया है कि वह तुम्हारा भाई है। तुम बार-बार यह क्यों कहते हो कि वह कचरे से मिला है। कभी सोचा है उसके दिल पर तुम्हारे अल्फाज का क्या असर होता होगा। वह तुम्हें कितनी इज्जत देता है, कितना एहतराम करता है।”

फराज के चेहरे पर गुस्सा फैल गया। मुंह संगीन अंगूठे मुट्ठी में मजबूती से भरे कर उसने कदम उठाया और कमरे की तरफ चला गया। वह अपनी मां के ऐसे जवाब का इंतजार नहीं कर रहा था।

अंतिम शब्द

हमजा ने फराज के हाथ मजबूती से थाम लिए और बोला, “भाई, मैं आपसे सच्चे दिल से माफ करता हूं। मगर अम्मा अब इस दुनिया में नहीं है। वो हमें छोड़कर चली गई हैं।”

हमजा ने कहा, “मां की दुआएं हैं। सब कुछ वो करती हैं जो मां-बाप से दुआएं लेते हैं। उनकी दुनिया और आखिरत दोनों ही संवर जाती हैं।”

फराज ने हमजा के कदमों में गिरकर माफी मांगी। वह रोते हुए कहने लगा, “हमजा मुझे माफ कर दो। मैंने बहुत गुनाह किए हैं। खुदा के लिए मुझे अम्माओं के पास ले चलो। मुझे उनसे माफी मांगनी है।”

हमजा ने उसे सहारा दिया और घर से बाहर ले आया। उस रोज गांव के लोगों ने एक अजीब मंजर देखा। वह हमजा जो कभी कचरे में मिला था। आज मां की दुआओं से एक अजीम इंसान बन चुका था। और वो अपने भाई को इज्जत और मोहब्बत के साथ निसाब के लिए ले जा रहा था। वही भाई जिसने कभी उसे अपना भाई नहीं समझा था।

लोगों ने उस दिन समझा कि रिश्ते सिर्फ खून से नहीं बनते। मोहब्बत से बनते हैं। हमजा और समीना का रिश्ता मोहब्बत का था। ऐसा मिसाली रिश्ता जो शायद ही किसी और का हो। वफाए खून में नहीं मोहब्बतों में होती हैं।