IAS बनते ही पत्नी ने दिया तलाक़…फिर जो हुआ , इंसानियत रो पड़ी |
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“IAS बनते ही पत्नी ने दिया तलाक़… फिर जो हुआ, इंसानियत रो पड़ी”
यह कहानी एक छोटे से शहर इंदौर के एक साधारण आदमी अमन की है, जिसे अपने परिवार के लिए सब कुछ करने की आदत थी, और जो एक ऐसे संघर्ष का सामना करता है, जिसे किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। यह कहानी न सिर्फ उसकी मेहनत और संघर्ष की है, बल्कि प्यार, त्याग, और उम्मीद की भी है। यह एक यात्रा है उस आदमी की, जिसे जिंदगी ने एक झटका दिया, लेकिन उसने फिर भी हार नहीं मानी और आगे बढ़ता चला गया।
भाग 1: एक साधारण शुरुआत
अमन और रिया, दो लोग जो इंदौर शहर के किनारे बसे एक छोटे से मकान में रहते थे। दोनों की शादी को दो साल ही हुए थे। घर छोटा था, आमदनी सीमित थी, लेकिन उनके बीच का प्यार उन सारी कमियों को भुला देता था। अमन हर सुबह काम पर जाता, और रिया खिड़की से उसे जाते हुए देखती रहती थी। उसकी आंखों में एक अजीब सा यकीन होता जैसे वह अपनी दुनिया को दूर जाते देख रही हो।
अमन बहुत साधारण इंसान था। ना ज्यादा पढ़ाई की थी, ना कोई खास हुनर। बस एक सीधा-साफा दिल था। वह मानता था कि अगर घर में चैन है तो बाकी सब अपने आप संभल जाता है। उसकी दुनिया बस इतनी सी थी—रिया, घर और रोज की मेहनत। लेकिन रिया अमन से बिल्कुल अलग थी। उसकी आंखों में हमेशा एक अलग सी चमक रहती थी, जैसे वह सिर्फ रोज की जिंदगी जीने के लिए नहीं बनी थी। उसके भीतर कुछ करने की, कुछ बनने की एक अजीब सी बेचैनी थी।
भाग 2: रिया का सपना
रिया रात-रात भर किताबों में डूबी रहती। कभी पुराना पेपर हल करती, कभी नोट्स बनाती। उसके लिए सीखना और आगे बढ़ना जीने का मतलब था। अमन उसे चुपचाप देखता रहता था। कभी कुछ कहता नहीं था क्योंकि वह समझता था, सपने कभी रोके नहीं जाते, उन्हें बस पंख देना होता है। रिया ने कभी अमन से कुछ नहीं मांगा था, लेकिन उसकी खामोशी में ही सब कुछ था। वह जानती थी कि अमन उसके हर फैसले में साथ खड़ा रहेगा।
एक शाम अमन काम से लौटा तो रिया अभी भी किताबों में खोई हुई थी। उसने अचानक सिर उठाया और कहा, “मुझे प्रशासनिक सेवा परीक्षा देनी है। मैं अफसर बनना चाहती हूं।” उसकी आवाज में कोई डर नहीं था, बस एक पक्का इरादा था। अमन ने उसकी आंखों में देखा। कुछ पल रुका, फिर हल्की सी मुस्कान के साथ हां में सिर हिला दिया। जैसे मान लिया हो कि अब जिंदगी की दिशा तय हो चुकी है।

भाग 3: संघर्ष और त्याग
अब घर में नया सिलसिला शुरू हुआ। रिया की तैयारी के लिए किताबें आने लगीं, पुराने कागज, नोट्स, कोचिंग की फीस सब कुछ बढ़ने लगा। अमन की तनख्वाह उतनी नहीं थी कि इतना खर्च उठा सके। लेकिन उसने कभी रिया को यह महसूस नहीं होने दिया। पहले उसने अपने काम के घंटे बढ़ा दिए, फिर दूसरी जगह भी काम करने लगा, रात की पाली पकड़ ली ताकि थोड़ा ज्यादा पैसा आ सके। अमन रोज देर रात घर लौटता, थका हारा, लेकिन चेहरे पर कभी कोई शिकवा नहीं लाता था।
वह डरता था कि कहीं उसकी कमजोरी रिया के सपने को कमजोर न कर दे। इसलिए हर बार हंसता हुआ आता और पूछता, “पढ़ाई कैसी चल रही है?” रिया बस मुस्कुरा देती। दोनों जानते थे कि यह सफर आसान नहीं है, लेकिन अगर किसी का साथ है तो सब संभव है।
भाग 4: बड़े फैसले और त्याग
महीने गुजरते गए, खर्चे और बढ़ने लगे। अमन ने चुपचाप एक बड़ा फैसला लिया। अपने पिता की दी हुई छोटी सी जमीन बेच दी। उसे लगा, “जमीन तो फिर मिल जाएगी, लेकिन रिया का सपना अगर टूट गया तो मैं खुद को कभी माफ नहीं कर पाऊंगा।” रिया को जब पता चला तो उसकी आंखों में आंसू आ गए। लेकिन अमन ने उसका हाथ पकड़कर कहा, “तुम सिर्फ पढ़ो, बाकी सब मैं संभाल लूंगा।”
इस बीच मोहल्ले में बातें भी बढ़ने लगीं। लोग ताने मारते कि पत्नी अफसर बनेगी और पति मजदूरी करेगा। अमन सब सुनता लेकिन घर में कभी कुछ नहीं कहता। उसने ठान लिया था कि रिया के मन में कभी कोई शक ना आए। वह सारे ताने अपने भीतर समेट लेता और चुपचाप आगे बढ़ता रहता।
भाग 5: परीक्षा और सफलता का दिन
तैयारी के दो साल बीत गए, रिया की परीक्षा का दिन आ गया। अमन ने उसे तैयार किया, खुद हाथ से नाश्ता बनाया। रिया जाने लगी तो अमन ने कहा, “जाओ और जीत कर आओ, मुझे तुम पर पूरा यकीन है।” रिया बिना कुछ बोले निकल गई। उस दिन अमन ने काम पर जाने की बजाय घर में रहकर दुआएं मांगी। उसे पता था कि आज का दिन उनकी जिंदगी बदल देगा। बस वह यही चाहता था कि रिया की मेहनत रंग लाए।
महीनों का इंतजार खत्म हुआ। परीक्षा के नतीजे आने वाले थे। अमन और रिया दोनों बेचैन थे, लेकिन किसी ने अपनी बेचैनी जाहिर नहीं की। अमन रोज की तरह काम पर जाता और रिया घर में इंतजार करती रहती। दोनों जानते थे कि अब जो भी होगा, वह उनकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल देगा।
भाग 6: सफलता और उसके बाद का दुख
एक सुबह रिया का फोन बजा। वह नंबर था जिसका इंतजार था। उसके हाथ काम पर थे, लेकिन दिल तेजी से धड़कने लगा। उसने फोन उठाया और सुना। परिणाम आ गया था। रिया ने प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास कर ली थी। वह अब एक अफसर बनने वाली थी। उस पल रिया के मुंह से कोई आवाज नहीं निकली। बस आंसू बहने लगे। खुशी के आंसू थे या राहत के, यह वह खुद भी नहीं जानती थी। बस इतना पता था कि सालों की मेहनत रंग लाई थी।
अमन उस वक्त काम पर था। रिया ने तुरंत उसे फोन लगाया। फोन उठते ही रिया ने सिर्फ इतना कहा, “हो गया।” अमन समझ गया। उसके चेहरे पर एक चौड़ी सी मुस्कान आ गई। उसने कहा, “मुझे पता था, मुझे पता था तुम कर लोगी।” उस दिन अमन ने जल्दी काम छोड़ दिया और घर आ गया। घर पहुंचते ही उसने रिया को गले लगा लिया। दोनों देर तक बस ऐसे ही खड़े रहे। कोई बोला नहीं, शब्दों से ज्यादा वह खामोशी कह रही थी।
भाग 7: बदलती राहें और अंत
लेकिन जैसे ही रिया ने अफसर बनना शुरू किया, उनकी दुनिया बदलने लगी। ट्रेनिंग के दौरान, रिया का व्यवहार बदलने लगा। वह अब पहले जैसी नहीं थी। फोन पर बात करने का समय कम होने लगा, और जवाब छोटे और औपचारिक होने लगे। अमन समझ रहा था, लेकिन कुछ कहता नहीं था। उसे लगता था शायद काम का दबाव है, नई जिम्मेदारी है, सब ठीक हो जाएगा।
लेकिन धीरे-धीरे फर्क और साफ होने लगा। रिया की बातों में अब वह पुराना प्यार नहीं था। बस एक रस्म अदायगी थी। अमन रात को सोने से पहले फोन करता, लेकिन रिया अक्सर व्यस्त होती। कभी मीटिंग तो कभी कोई और काम।
अमन ने सोचा शायद उसकी वजह से रिया परेशान होती है, शायद उसके फोन उसके काम में दखल देते हैं। इसलिए उसने खुद को रोक लिया। लेकिन रात को जब अकेला होता तो सारी यादें सामने आ जातीं। वे दिन जब रिया उसके साथ थी। जब दोनों साथ सपने देखते थे।
भाग 8: तलाक का फैसला और जीवन की सच्चाई
कुछ महीनों बाद रिया की पोस्टिंग इंदौर में हो गई। अमन को लगा अब सब पहले जैसा हो जाएगा, लेकिन रिया ने आते ही साफ कह दिया कि वह सरकारी आवास में रहेगी। उसने कहा, “अमन अब मेरी पोस्ट के हिसाब से मुझे एक अलग तरह के माहौल में रहना होगा। सरकारी आवास में सुविधाएं हैं और वहां का माहौल मेरे काम के लिए बेहतर है।”
अमन ने कुछ नहीं कहा, बस चुपचाप हां में सिर हिला दिया। उसे लगा शायद यह भी जरूरी है, शायद काम की मांग है। लेकिन दिल के किसी कोने में एक दर्द उठने लगा, जो उसने दबा दिया और वह अपने पैतृक घर में रहने लगा। रिया सरकारी आवास में शिफ्ट हो गई, और अब वह उस पुराने छोटे से घर में नहीं आती थी। अमन अकेला रह गया।
आखिरकार, एक दिन रिया ने तलाक का फैसला लिया। उसने कहा, “अमन, मैं अब इस रिश्ते को आगे नहीं बढ़ाना चाहती।” अमन ने गहरी सांस ली, उसने कहा, “अगर तुम्हें यही लगता है कि यह सही है, तो मैं कभी रुकावट नहीं बनूंगा।”
अमन ने रिया को समझा और खुद को अकेला छोड़ दिया। उसने कहा, “तुम अपनी जिंदगी जियो, मैं अपनी जियो।”
निष्कर्ष
इस कहानी ने हमें यह सिखाया कि जीवन में अगर हमें प्यार और साथ का सच्चा अहसास हो, तो हम किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हैं। कभी-कभी हमें अपने रिश्तों को समय देना पड़ता है, लेकिन अगर हमारी राहें अलग हो जाती हैं, तो हमें उसे समझकर छोड़ना भी चाहिए। अमन ने अपना सब कुछ रिया के लिए दिया, लेकिन जब रिया ने उससे दूर जाने का फैसला लिया, तो अमन ने उसे पूरी तरह से माफ किया। यह कहानी हमें सिखाती है कि असली प्यार वही है जो बिना किसी शर्त के दिया जाता है।
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