IPS प्रिया शर्मा क्यों झुक गई एक मामूली से पकौड़ा बेचने वाले के आगे..😱 फिर उसके बाद क्या हुआ..😰

सुबह के 7:00 बजे थे। धूप अभी भी हल्की थी और सड़कों पर हल्की चहल-पहल शुरू हो गई थी। एक साधारण गुलाबी रंग की साड़ी पहने हुई एक महिला धीमे कदमों से बाजार की तरफ जा रही थी। उसके चेहरे पर कोई खुशी नहीं थी, बल्कि कुछ गहरे विचार चल रहे थे। यह कोई और नहीं बल्कि जिले की आईपीएस अधिकारी प्रिया शर्मा थी। आज उन्होंने जानबूझकर अपनी वर्दी नहीं पहनी थी और एक आम महिला की तरह सज कर निकली थी। प्रिया के मन में आज कुछ खास था।

पिछले कुछ दिनों से उन्हें अपने ही विभाग के कुछ अधिकारियों की शिकायतें मिल रही थीं। लोग कह रहे थे कि थाने के इंस्पेक्टर और हवलदार गरीब दुकानदारों से पैसे वसूलते हैं और उनके साथ बदतमीजी करते हैं। प्रिया को यह बात बर्दाश्त नहीं हो रही थी। उन्होंने सोचा कि आज जाकर खुद से देखना चाहिए कि असल में क्या हो रहा है।

चलते-चलते उनकी नजर एक छोटी सी गुमटी पर पड़ी, जहां एक बुजुर्ग आदमी पकोड़े तल रहा था। वह करीब 60 साल का था। उसके बाल सफेद हो चुके थे और चेहरे पर झुर्रियां साफ दिख रही थीं। उसकी आंखों में एक अजीब सा डर दिख रहा था, जैसे वह हमेशा किसी बात से परेशान रहता हो। प्रिया के मन में आया कि क्यों न यहीं से कुछ खाया जाए और साथ ही इस बुजुर्ग से बात भी की जाए।

“चाचा जी, दो प्लेट पकोड़े दे दीजिए,” प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा। बुजुर्ग ने घबराहट के साथ उनकी तरफ देखा। उसने जल्दी-जल्दी गर्म तेल से पकोड़े निकाले और एक कागज की प्लेट में रखकर उनके हाथ में दे दिए। “मैडम जी, बस ₹10 दे दीजिए,” बुजुर्ग ने हकलाते हुए कहा। प्रिया ने देखा कि इस आदमी के हाथ कांप रहे हैं और वह बार-बार इधर-उधर देख रहा है, जैसे कोई उसे परेशान कर रहा हो।

“चाचा जी, आप ठीक तो हैं? आप बहुत परेशान लग रहे हैं,” प्रिया ने चिंता से पूछा। बुजुर्ग ने पहले तो मना कर दिया। फिर धीरे से बोला, “कुछ नहीं बेटी। बस वही पुराना काम का टेंशन है।” “क्या टेंशन है चाचा जी? अगर आपको कोई परेशानी है तो बताइए। शायद मैं कुछ मदद कर सकूं,” प्रिया ने हमदर्दी से कहा।

बुजुर्ग ने इधर-उधर देखा और फिर धीरे से बोला, “बेटी, थाने वाले परेशान करते हैं। हर हफ्ते आकर पैसे मांगते हैं। अगर नहीं दिए तो दुकान बंद करा देने की धमकी देते हैं। आज फिर आने वाले हैं और मेरे पास पैसे नहीं हैं।” प्रिया का खून खौल उठा। उन्हें समझ आ गया कि जो शिकायतें उनके पास आ रही थीं, वे सभी सच थीं। उन्होंने मन ही मन ठान लिया कि आज इन भ्रष्ट अधिकारियों को उनकी औकात दिखानी होगी।

“चाचा जी, आप घबराइए मत। मैं यहीं खड़ी हूं। देखते हैं कि कौन आपको परेशान करने की हिम्मत करता है,” प्रिया ने दृढ़ आवाज में कहा। बुजुर्ग ने हैरानी से उन्हें देखा। “अरे बेटी, तुम क्या कर सकोगी? वह तो पुलिस वाले हैं। मुझे छोड़कर चली जाओ। कहीं तुम्हें भी परेशानी ना हो जाए।” “नहीं चाचा जी, अब मैं यहां से नहीं जाऊंगी। देखती हूं कि किसकी कितनी ताकत है,” प्रिया ने कहा और वहीं एक तरफ खड़ी हो गई।

कुछ देर बाद वहां एक मोटरसाइकिल आई। उस पर दो लोग बैठे थे। एक हवलदार और एक कांस्टेबल। दोनों की वर्दी पहनी हुई थी, लेकिन उनके चेहरे पर अहंकार साफ दिख रहा था। वे मोटरसाइकिल से उतरे और सीधे पकोड़े वाली दुकान की तरफ गए। “अरे बुड्ढे, पैसे तैयार हैं या नहीं?” हवलदार रमेश ने गुस्से में कहा। बुजुर्ग के हाथ कांपने लगे। “साहब, इस हफ्ते बहुत कम कमाई हुई है। मेहरबानी करके अगले हफ्ते दे दूंगा।” “अगले हफ्ते की बात अगले हफ्ते कर। अभी पैसे निकाल वरना दुकान की छुट्टी हो जाएगी,” कांस्टेबल मुकेश ने धमकी दी।

प्रिया यह सब देख रही थी। उन्होंने आगे बढ़कर कहा, “माफ करिए, आप लोग किस बात के पैसे मांग रहे हैं?” हवलदार रमेश ने गुस्से से प्रिया की तरफ देखा। “तुम कौन होती हो बीच में बोलने वाली? चुपचाप खड़ी रहो वरना तुम्हें भी ले चलेंगे।” “मैं एक आम नागरिक हूं और मुझे यह जानने का पूरा हक है कि आप लोग इस बुजुर्ग से क्यों पैसे मांग रहे हैं? क्या कोई चालान काटा है? कोई फाइन है?” प्रिया ने साहस के साथ पूछा।

“अरे, तुझे समझ नहीं आता क्या? यहां हमारा राज्य चलता है। जो हम कहते हैं वही होता है। अब चुप हो जा वरना बुरा होगा,” रमेश ने गुस्से में कहा। “यह बिल्कुल गलत है। आप लोग अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इस तरह से किसी गरीब आदमी से पैसे वसूलना कानून के खिलाफ है,” प्रिया ने दृढ़ता से कहा।

हवलदार को अब और गुस्सा आ गया। उसने आगे बढ़कर प्रिया के कंधे पर हाथ रखा और धक्का देते हुए बोला, “बहुत बोल रही है तू। अब चुप हो जा वरना यहीं पकड़ कर ले चलूंगा।” प्रिया ने उसका हाथ झटक कर अलग किया। “आपको किसी महिला को छूने का कोई हक नहीं है। यह तो और भी बड़ा जुर्म है।” इतना कहते हुए हवलदार रमेश का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उसने प्रिया के गाल पर एक जोरदार तमाचा मारा।

तमाचा इतना जोर का था कि प्रिया लड़खड़ा गई लेकिन उन्होंने खुद को संभाल लिया। “बहुत हो गया। अब तुम्हारी सारी सीमा पार हो गई है,” प्रिया ने अपने गाल को सहलाते हुए कहा। “अरे वाह, अभी भी बोल रही है। देखते हैं कि कितना बोलती है,” कहकर हवलदार ने फिर से हाथ उठाया। लेकिन इस बार प्रिया तैयार थी। उन्होंने उसका हाथ पकड़ा और मरोड़ दिया।

हवलदार दर्द से चीख उठा। “छोड़ मेरा हाथ। तू जानती नहीं कि मैं कौन हूं,” रमेश चिल्लाया। “मैं अच्छी तरह जानती हूं कि तुम कौन हो। लेकिन तुम नहीं जानते कि मैं कौन हूं,” प्रिया ने गुस्से में कहा। कांस्टेबल मुकेश भी आगे बढ़ा और प्रिया को डराने की कोशिश करने लगा। “छोड़ उसका हाथ वरना बुरा होगा। हम दोनों मिलकर तुझे ऐसा सबक सिखाएंगे कि जिंदगी भर याद रहेगा।”

प्रिया ने हवलदार का हाथ छोड़ दिया और पीछे हट गई। “तुम लोगों ने आज तक कितने गरीबों को सताया है? कितने लोगों से गलत तरीके से पैसे वसूले हैं? अब तुम्हारा खेल खत्म होने वाला है।” “खेल खत्म? तेरा दिमाग खराब है क्या? हम यहां के राजा हैं। जो चाहे कर सकते हैं,” रमेश ने अहंकार से कहा। “राजा हो? बहुत अच्छा। तो फिर अब देखते हैं कि कौन किसका राजा है,” कहकर प्रिया ने अपने पर्स से अपना आईपीएस का पहचान पत्र निकाला और उनके सामने दिखाया। “मैं हूं आईपीएस प्रिया शर्मा। इस जिले की पुलिस अधीक्षक। अब बताओ कौन है यहां का राजा?”

यह सुनते ही हवलदार और कांस्टेबल दोनों के होश उड़ गए। उनके चेहरे पीले पड़ गए और पसीना छूटने लगा। वे समझ गए कि आज वे बड़ी मुसीबत में फंस गए हैं। “मैडम, मैडम जी, हमें नहीं पता था,” हवलदार रमेश ने हकलाते हुए कहा। “क्या नहीं पता था? यह नहीं पता था कि मैं पुलिस अधिकारी हूं या यह नहीं पता था कि तुम गलत काम कर रहे हो?” प्रिया ने तेज आवाज में कहा।

“मैडम जी, बात यह नहीं है,” कांस्टेबल मुकेश ने बहाना बनाने की कोशिश की। “बस करो। अब कोई बहाना नहीं चलेगा। मैंने अपनी आंखों से देखा है कि तुम लोग इस बुजुर्ग महिला से एफआईआर दर्ज करने के लिए पैसे मांग रहे थे,” प्रिया ने कहा। हवलदार सुरेश अभी भी सदमे में था। वह कुछ बोलने की कोशिश कर रहा था लेकिन आवाज नहीं निकल रही थी।

“और तुम, हवलदार सुरेश, तुमने कहा था कि यहां तुम्हारा नियम चलता है। अब बताओ कौन सा नियम है जो तुम्हारा बनाया हुआ है?” प्रिया ने सुरेश से पूछा। “मैडम जी, मैडम जी, माफी चाहते हैं। हमसे गलती हुई है,” सुरेश ने गिड़गिड़ाते हुए कहा। “गलती? यह कोई छोटी-मोटी गलती नहीं है। तुम लोगों ने रिश्वत मांगी है। एक महिला पर हाथ उठाया है। गरीब दुकानदार को परेशान किया है। यह सब कानूनन जुर्म है,” प्रिया ने सख्त लहजे में कहा।

बुजुर्ग औरत जो अब तक चुप खड़ी थी, अचानक बोल उठी, “बेटी, यह लोग रोज ऐसा ही करते हैं। सिर्फ हमारे साथ नहीं बल्कि जो भी यहां आता है, उससे पैसे मांगते हैं।” प्रिया ने बुजुर्ग औरत की तरफ देखा। “मां जी, आप बिल्कुल सही कह रही हैं। अब इन लोगों को इसकी सजा मिलेगी।” “मैडम जी, हमें एक मौका दे दीजिए। हम आगे से ऐसा कभी नहीं करेंगे,” राजेश ने हाथ जोड़कर कहा।

“एक मौका? तुमने अब तक कितने गरीब लोगों को मौका दिया है? जब वे तुमसे गुहार लगाते थे कि हमारे पास पैसे नहीं हैं तो तुमने उन्हें मौका दिया था,” प्रिया ने सवाल किया। दोनों के पास कोई जवाब नहीं था। वे जानते थे कि उन्होंने गलत किया है और अब उसकी सजा भुगतनी पड़ेगी।

प्रिया ने अपने फोन से तुरंत अपने विश्वसनीय अधिकारियों को कॉल किया। “तुरंत यहां आइए। मुझे कुछ लोगों को गिरफ्तार करना है।” “मैडम जी, प्लीज हमें माफ कर दीजिए। हमारी नौकरी चली जाएगी। घर में बीवी बच्चे हैं,” राजेश ने हाथ जोड़कर कहा। “जब तुम गरीब लोगों से पैसे वसूल कर रहे थे तो क्या तुम्हें याद नहीं था कि उनके घर में भी बीवी बच्चे हैं? उन्हें भी अपने परिवार का पेट भरना है?” प्रिया ने जवाब दिया।

कुछ ही मिनटों में प्रिया की टीम वहां पहुंच गई। उसमें दो इंस्पेक्टर और चार कांस्टेबल थे। सभी को प्रिया पर पूरा भरोसा था। “इंस्पेक्टर साहब, इन दोनों को तुरंत गिरफ्तार कीजिए। भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और धमकी देने के आरोप में,” प्रिया ने आदेश दिया। “जी मैडम,” इंस्पेक्टर ने कहा और अपने साथियों को इशारा किया। राजेश और सुरेश को हथकड़ी लगा दी गई। वे अभी भी गिड़गिड़ा रहे थे लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था।

“मैडम जी, आखिरी बार माफ कर दीजिए,” राजेश ने कहा। “तुमने कभी किसी को आखिरी मौका दिया था? अब तुम्हें कानून के सामने जवाब देना होगा,” प्रिया ने कहा। दोनों को पुलिस वाहन में बिठाकर ले जाया गया। थाने में मौजूद अन्य कर्मचारी सब कुछ देख रहे थे लेकिन कोई कुछ नहीं बोल रहा था। सबको पता था कि अगर वे भी कोई गलत काम में शामिल हैं तो उनकी भी यही हालत होगी।

प्रिया ने बुजुर्ग औरत की तरफ देखा। “मां जी, अब आइए, आपका एफआईआर दर्ज करते हैं।” बिना किसी पैसे के बुजुर्ग औरत की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। “बेटी, तुमने हमारे लिए इतना कुछ किया। भगवान तुम्हारा भला करे।” “मां जी, यह मेरा फर्ज था। आप खुश रहिए। बस यही काफी है,” प्रिया ने जवाब दिया।

इस घटना की खबर जल्दी ही पूरे शहर में फैल गई। लोग प्रिया की तारीफ कर रहे थे। सोशल मीडिया पर उनकी फोटो और वीडियो वायरल हो गए। “जस्टिस फॉर ऑल” और “आईपीएस प्रिया शर्मा” जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कुछ दिनों बाद प्रिया के पास कई और शिकायतें आईं। लोगों का विश्वास पुलिस में वापस आ गया था। वे अब बिना डरे अपनी समस्याएं लेकर आ रहे थे।

एक दिन प्रिया के पास एक युवक आया। उसका नाम अमित था और वह एक छोटी सी साइबर कैफे चलाता था। “मैडम जी, मुझे आपसे मदद चाहिए,” अमित ने कहा। “हां भाई, बताइए क्या परेशानी है?” प्रिया ने पूछा। “मैडम, कुछ पुलिस वाले मेरी दुकान में आकर कहते हैं कि यहां गलत काम होता है। वे मुझसे हर महीने ₹5000 मांगते हैं। कहते हैं कि नहीं तो दुकान बंद करा देंगे,” अमित ने बताया।

प्रिया का गुस्सा फिर से भड़का। “कौन से पुलिस वाले आते हैं? उनके नाम पता हैं?” “जी मैडम, उनमें से एक का नाम सुभाष है। वह खुद को इंस्पेक्टर बताता है। दूसरा राम सिंह है, जो हवलदार है,” अमित ने नाम बताएं। प्रिया को यह सुनकर बहुत दुख हुआ। उन्हें लगा कि भ्रष्टाचार की समस्या बहुत गहरी है। “एक-दो लोगों को गिरफ्तार करने से यह खत्म नहीं होने वाली।”

“अमित भाई, आप घबराइए मत। अगली बार जब यह लोग आएं तो मुझे तुरंत फोन करिएगा। मैं इनसे निपटूंगी,” प्रिया ने आश्वासन दिया। “लेकिन मैडम, अगर उन्हें पता चल गया कि मैंने आपको बताया है तो वे मुझे और भी परेशान करेंगे,” अमित ने डरते हुए कहा। “कोई परेशान नहीं करेगा। मैं आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेती हूं,” प्रिया ने भरोसा दिलाया।

अगले दिन अमित का फोन आया। “मैडम, वे लोग आ गए हैं।” प्रिया तुरंत अपनी टीम के साथ वहां पहुंची। उन्होंने देखा कि दो पुलिस वाले अमित से जबरदस्ती पैसे मांग रहे हैं। “पैसे जल्दी निकाल वरना दुकान की छुट्टी हो जाएगी,” इंस्पेक्टर सुभाष धमकी दे रहा था। प्रिया ने अपनी टीम को इशारा किया और खुद साधारण कपड़ों में अंदर गई। “माफ करिए, यहां क्या हो रहा है?” प्रिया ने पूछा।

सुभाष ने गुस्से से प्रिया की तरफ देखा। “तुम कौन हो? यहां क्यों आई हो?” “मैं एक ग्राहक हूं। यहां इंटरनेट का काम करवाने आई हूं। लेकिन आप लोग यहां किस बात के पैसे मांग रहे हैं?” प्रिया ने पूछा। “यहां गलत काम होता है। इसीलिए इसे पेनल्टी देनी पड़ती है,” हवलदार राम सिंह ने झूठ बोला।

“कौन सा गलत काम और पेनल्टी किस कानून के तहत?” प्रिया ने सवाल किया। “तुझे इतने सवाल करने की क्या जरूरत है? अपना काम कर और यहां से चली जा,” सुभाष ने रुखाई से कहा। “नहीं, मुझे जानना है कि आप लोग किस अधिकार से इससे पैसे मांग रहे हैं,” प्रिया ने जिद की।

सुभाष को गुस्सा आ गया। “बहुत बोल रही है तू। चुप हो जा वरना अभी तुझे भी पकड़ कर ले जाएंगे।” “किस आरोप में पकड़ेंगे? मैंने कौन सा जुर्म किया है?” प्रिया ने चुनौती दी। “जुर्म बना देंगे। हमारे लिए कोई बड़ी बात नहीं,” राम सिंह ने धमकी दी। प्रिया मुस्कुराई। “मतलब आप झूठे मामले भी बनाते हैं।”

“हाँ, बनाते हैं। और अब तेरे साथ भी यही करेंगे,” सुभाष ने कहा और प्रिया के हाथ पकड़ने की कोशिश की। प्रिया ने झटके से अपना हाथ छुड़ाया। “बस, अब बहुत हो गया।” उन्होंने अपना आईपीएस का बैज निकाल कर दिखाया। “आईपीएस प्रिया शर्मा। अब बताइए, किसका राज कहां तक चलता है?”

राजेश वर्मा का चेहरा देखने लायक था। उसके होश उड़ गए थे और पसीना छूटने लगा था। हवलदार सुरेश भी अपनी जगह पर जड़ हो गया था। दोनों को समझ आ गया था कि आज वे बहुत बड़ी मुसीबत में फंस गए हैं। “मैडम, मैडम जी, हमें नहीं पता था,” हवलदार रमेश ने हकलाते हुए कहा। “क्या नहीं पता था? यह नहीं पता था कि मैं पुलिस अधिकारी हूं या यह नहीं पता था कि तुम भ्रष्टाचार कर रहे हो?” प्रिया ने तेज आवाज में कहा।

“मैडम जी, बात यह नहीं है। हमारा मतलब यह था,” राजेश ने बहाना बनाने की कोशिश की। “बस करो। अब कोई बहाना नहीं चलेगा। मैंने अपनी आंखों से देखा है कि तुम लोग इस बुजुर्ग महिला से एफआईआर दर्ज करने के लिए पैसे मांग रहे थे,” प्रिया ने कहा।

हवलदार सुरेश अभी भी सदमे में था। वह कुछ बोलने की कोशिश कर रहा था लेकिन आवाज नहीं निकल रही थी। “और तुम, हवलदार सुरेश, तुमने कहा था कि यहां तुम्हारा नियम चलता है। अब बताओ, कौन सा नियम है जो तुम्हारा बनाया हुआ है?” प्रिया ने सुरेश से पूछा। “मैडम जी, मैडम जी, माफी चाहते हैं। हमसे गलती हुई है,” सुरेश ने गिड़गिड़ाते हुए कहा। “गलती? यह कोई छोटी-मोटी गलती नहीं है। तुम लोगों ने रिश्वत मांगी है, झूठी धमकी दी है और एक गरीब महिला को न्याय से वंचित रखने की कोशिश की है। यह सब गंभीर अपराध है,” प्रिया ने समझाया।

बुजुर्ग औरत जो अब तक चुप खड़ी थी, अचानक बोल उठी, “बेटी, यह लोग रोज ऐसा ही करते हैं। सिर्फ हमारे साथ नहीं बल्कि जो भी यहां आता है, उससे पैसे मांगते हैं।” प्रिया ने बुजुर्ग औरत की तरफ देखा। “मां जी, आप बिल्कुल सही कह रही हैं। अब इन लोगों को इसकी सजा मिलेगी।” “मैडम जी, हमें एक मौका दे दीजिए। हम आगे से ऐसा कभी नहीं करेंगे,” राजेश ने हाथ जोड़कर कहा।

“एक मौका? तुमने अब तक कितने गरीब लोगों को मौका दिया है। जब वे तुमसे गुहार लगाते थे कि हमारे पास पैसे नहीं हैं तो तुमने उन्हें मौका दिया था,” प्रिया ने सवाल किया। दोनों के पास कोई जवाब नहीं था। वे जानते थे कि उन्होंने गलत किया है और अब उसकी सजा भुगतनी पड़ेगी।

प्रिया ने अपने फोन से तुरंत अपने विश्वसनीय अधिकारियों को कॉल किया। “तुरंत यहां आइए। मुझे कुछ लोगों को गिरफ्तार करना है।” “मैडम जी, प्लीज हमें माफ कर दीजिए। हमारी नौकरी चली जाएगी। घर में बीवी बच्चे हैं,” राजेश ने हाथ जोड़कर कहा। “जब तुम गरीब लोगों से पैसे वसूल कर रहे थे तो क्या तुम्हें याद नहीं था कि उनके घर में भी बीवी बच्चे हैं? उन्हें भी अपने परिवार का पेट भरना है?” प्रिया ने जवाब दिया।

कुछ ही मिनटों में प्रिया की टीम वहां पहुंच गई। उसमें दो इंस्पेक्टर और चार कांस्टेबल थे। सभी को प्रिया पर पूरा भरोसा था। “इंस्पेक्टर साहब, इन दोनों को तुरंत गिरफ्तार कीजिए। भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और धमकी देने के आरोप में,” प्रिया ने आदेश दिया। “जी मैडम,” इंस्पेक्टर ने कहा और अपने साथियों को इशारा किया। राजेश और सुरेश को हथकड़ी लगा दी गई। वे अभी भी गिड़गिड़ा रहे थे लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था।

“मैडम जी, आखिरी बार माफ कर दीजिए,” राजेश ने कहा। “तुमने कभी किसी को आखिरी मौका दिया था? अब तुम्हें कानून के सामने जवाब देना होगा,” प्रिया ने कहा। दोनों को पुलिस वाहन में बिठाकर ले जाया गया। थाने में मौजूद अन्य कर्मचारी सब कुछ देख रहे थे लेकिन कोई कुछ नहीं बोल रहा था। सबको पता था कि अगर वे भी कोई गलत काम में शामिल हैं तो उनकी भी यही हालत होगी।

प्रिया ने बुजुर्ग औरत की तरफ देखा। “मां जी, अब आइए, आपका एफआईआर दर्ज करते हैं।” बिना किसी पैसे के बुजुर्ग औरत की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। “बेटी, तुमने हमारे लिए इतना कुछ किया। भगवान तुम्हारा भला करे।” “मां जी, यह मेरा फर्ज था। आप खुश रहिए। बस यही काफी है,” प्रिया ने जवाब दिया।

इस घटना की खबर जल्दी ही पूरे शहर में फैल गई। लोग प्रिया की तारीफ कर रहे थे। सोशल मीडिया पर उनकी फोटो और वीडियो वायरल हो गए। “जस्टिस फॉर ऑल” और “आईपीएस प्रिया शर्मा” जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कुछ दिनों बाद प्रिया के पास कई और शिकायतें आईं। लोगों का विश्वास पुलिस में वापस आ गया था। वे अब बिना डरे अपनी समस्याएं लेकर आ रहे थे।

एक दिन प्रिया के पास एक युवक आया। उसका नाम अमित था और वह एक छोटी सी साइबर कैफे चलाता था। “मैडम जी, मुझे आपसे मदद चाहिए,” अमित ने कहा। “हां भाई, बताइए क्या परेशानी है?” प्रिया ने पूछा। “मैडम, कुछ पुलिस वाले मेरी दुकान में आकर कहते हैं कि यहां गलत काम होता है। वे मुझसे हर महीने ₹5000 मांगते हैं। कहते हैं कि नहीं तो दुकान बंद करा देंगे,” अमित ने बताया।

प्रिया का गुस्सा फिर से भड़का। “कौन से पुलिस वाले आते हैं? उनके नाम पता हैं?” “जी मैडम, उनमें से एक का नाम सुभाष है। वह खुद को इंस्पेक्टर बताता है। दूसरा राम सिंह है, जो हवलदार है,” अमित ने नाम बताएं। प्रिया को यह सुनकर बहुत दुख हुआ। उन्हें लगा कि भ्रष्टाचार की समस्या बहुत गहरी है। “एक-दो लोगों को गिरफ्तार करने से यह खत्म नहीं होने वाली।”

“अमित भाई, आप घबराइए मत। अगली बार जब यह लोग आएं तो मुझे तुरंत फोन करिएगा। मैं इनसे निपटूंगी,” प्रिया ने आश्वासन दिया। “लेकिन मैडम, अगर उन्हें पता चल गया कि मैंने आपको बताया है तो वे मुझे और भी परेशान करेंगे,” अमित ने डरते हुए कहा। “कोई परेशान नहीं करेगा। मैं आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेती हूं,” प्रिया ने भरोसा दिलाया।

अगले दिन अमित का फोन आया। “मैडम, वे लोग आ गए हैं।” प्रिया तुरंत अपनी टीम के साथ वहां पहुंची। उन्होंने देखा कि दो पुलिस वाले अमित से जबरदस्ती पैसे मांग रहे हैं। “पैसे जल्दी निकाल वरना दुकान की छुट्टी हो जाएगी,” इंस्पेक्टर सुभाष धमकी दे रहा था। प्रिया ने अपनी टीम को इशारा किया और खुद साधारण कपड़ों में अंदर गई। “माफ करिए, यहां क्या हो रहा है?” प्रिया ने पूछा।

सुभाष ने गुस्से से प्रिया की तरफ देखा। “तुम कौन हो? यहां क्यों आई हो?” “मैं एक ग्राहक हूं। यहां इंटरनेट का काम करवाने आई हूं। लेकिन आप लोग यहां किस बात के पैसे मांग रहे हैं?” प्रिया ने पूछा। “यहां गलत काम होता है। इसीलिए इसे पेनल्टी देनी पड़ती है,” हवलदार राम सिंह ने झूठ बोला।

“कौन सा गलत काम और पेनल्टी किस कानून के तहत?” प्रिया ने सवाल किया। “तुझे इतने सवाल करने की क्या जरूरत है? अपना काम कर और यहां से चली जा,” सुभाष ने रुखाई से कहा। “नहीं, मुझे जानना है कि आप लोग किस अधिकार से इससे पैसे मांग रहे हैं,” प्रिया ने जिद की।

सुभाष को गुस्सा आ गया। “बहुत बोल रही है तू। चुप हो जा वरना अभी तुझे भी पकड़ कर ले जाएंगे।” “किस आरोप में पकड़ेंगे? मैंने कौन सा जुर्म किया है?” प्रिया ने चुनौती दी। “जुर्म बना देंगे। हमारे लिए कोई बड़ी बात नहीं,” राम सिंह ने धमकी दी। प्रिया मुस्कुराई। “मतलब आप झूठे मामले भी बनाते हैं।”

“हाँ, बनाते हैं। और अब तेरे साथ भी यही करेंगे,” सुभाष ने कहा और प्रिया के हाथ पकड़ने की कोशिश की। प्रिया ने झटके से अपना हाथ छुड़ाया। “बस, अब बहुत हो गया।” उन्होंने अपना आईपीएस का बैज निकाल कर दिखाया। “आईपीएस प्रिया शर्मा। अब बताइए, किसका राज कहां तक चलता है?”

राजेश वर्मा का चेहरा देखने लायक था। उसके होश उड़ गए थे और पसीना छूटने लगा था। हवलदार सुरेश भी अपनी जगह पर जड़ हो गया था। दोनों को समझ आ गया था कि आज वे बहुत बड़ी मुसीबत में फंस गए हैं। “मैडम, मैडम जी, हमें नहीं पता था,” हवलदार रमेश ने हकलाते हुए कहा। “क्या नहीं पता था? यह नहीं पता था कि मैं पुलिस अधिकारी हूं या यह नहीं पता था कि तुम भ्रष्टाचार कर रहे हो?” प्रिया ने तेज आवाज में कहा।

“मैडम जी, बात यह नहीं है,” कांस्टेबल मुकेश ने बहाना बनाने की कोशिश की। “बस करो। अब कोई बहाना नहीं चलेगा। मैंने अपनी आंखों से देखा है कि तुम लोग इस बुजुर्ग महिला से एफआईआर दर्ज करने के लिए पैसे मांग रहे थे,” प्रिया ने कहा।

हवलदार सुरेश अभी भी सदमे में था। वह कुछ बोलने की कोशिश कर रहा था लेकिन आवाज नहीं निकल रही थी। “और तुम, हवलदार सुरेश, तुमने कहा था कि यहां तुम्हारा नियम चलता है। अब बताओ, कौन सा नियम है जो तुम्हारा बनाया हुआ है?” प्रिया ने सुरेश से पूछा। “मैडम जी, मैडम जी, माफी चाहते हैं। हमसे गलती हुई है,” सुरेश ने गिड़गिड़ाते हुए कहा। “गलती? यह कोई छोटी-मोटी गलती नहीं है। तुम लोगों ने रिश्वत मांगी है, झूठी धमकी दी है और एक गरीब महिला को न्याय से वंचित रखने की कोशिश की है। यह सब गंभीर अपराध है,” प्रिया ने समझाया।

बुजुर्ग औरत जो अब तक चुप खड़ी थी, अचानक बोल उठी, “बेटी, यह लोग रोज ऐसा ही करते हैं। सिर्फ हमारे साथ नहीं बल्कि जो भी यहां आता है, उससे पैसे मांगते हैं।” प्रिया ने बुजुर्ग औरत की तरफ देखा। “मां जी, आप बिल्कुल सही कह रही हैं। अब इन लोगों को इसकी सजा मिलेगी।” “मैडम जी, हमें एक मौका दे दीजिए। हम आगे से ऐसा कभी नहीं करेंगे,” राजेश ने हाथ जोड़कर कहा।

“एक मौका? तुमने अब तक कितने गरीब लोगों को मौका दिया है। जब वे तुमसे गुहार लगाते थे कि हमारे पास पैसे नहीं हैं तो तुमने उन्हें मौका दिया था,” प्रिया ने सवाल किया। दोनों के पास कोई जवाब नहीं था। वे जानते थे कि उन्होंने गलत किया है और अब उसकी सजा भुगतनी पड़ेगी।

प्रिया ने अपने फोन से तुरंत अपने विश्वसनीय अधिकारियों को कॉल किया। “तुरंत यहां आइए। मुझे कुछ लोगों को गिरफ्तार करना है।” “मैडम जी, प्लीज हमें माफ कर दीजिए। हमारी नौकरी चली जाएगी। घर में बीवी बच्चे हैं,” राजेश ने हाथ जोड़कर कहा। “जब तुम गरीब लोगों से पैसे वसूल कर रहे थे तो क्या तुम्हें याद नहीं था कि उनके घर में भी बीवी बच्चे हैं? उन्हें भी अपने परिवार का पेट भरना है?” प्रिया ने जवाब दिया।

कुछ ही मिनटों में प्रिया की टीम वहां पहुंच गई। उसमें दो इंस्पेक्टर और चार कांस्टेबल थे। सभी को प्रिया पर पूरा भरोसा था। “इंस्पेक्टर साहब, इन दोनों को तुरंत गिरफ्तार कीजिए। भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और धमकी देने के आरोप में,” प्रिया ने आदेश दिया। “जी मैडम,” इंस्पेक्टर ने कहा और अपने साथियों को इशारा किया। राजेश और सुरेश को हथकड़ी लगा दी गई। वे अभी भी गिड़गिड़ा रहे थे लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था।

“मैडम जी, आखिरी बार माफ कर दीजिए,” राजेश ने कहा। “तुमने कभी किसी को आखिरी मौका दिया था? अब तुम्हें कानून के सामने जवाब देना होगा,” प्रिया ने कहा। दोनों को पुलिस वाहन में बिठाकर ले जाया गया। थाने में मौजूद अन्य कर्मचारी सब कुछ देख रहे थे लेकिन कोई कुछ नहीं बोल रहा था। सबको पता था कि अगर वे भी कोई गलत काम में शामिल हैं तो उनकी भी यही हालत होगी।

प्रिया ने बुजुर्ग औरत की तरफ देखा। “मां जी, अब आइए, आपका एफआईआर दर्ज करते हैं।” बिना किसी पैसे के बुजुर्ग औरत की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। “बेटी, तुमने हमारे लिए इतना कुछ किया। भगवान तुम्हारा भला करे।” “मां जी, यह मेरा फर्ज था। आप खुश रहिए। बस यही काफी है,” प्रिया ने जवाब दिया।

इस घटना की खबर जल्दी ही पूरे शहर में फैल गई। लोग प्रिया की तारीफ कर रहे थे। सोशल मीडिया पर उनकी फोटो और वीडियो वायरल हो गए। “जस्टिस फॉर ऑल” और “आईपीएस प्रिया शर्मा” जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कुछ दिनों बाद प्रिया के पास कई और शिकायतें आईं। लोगों का विश्वास पुलिस में वापस आ गया था। वे अब बिना डरे अपनी समस्याएं लेकर आ रहे थे।

एक दिन प्रिया के पास एक युवक आया। उसका नाम अमित था और वह एक छोटी सी साइबर कैफे चलाता था। “मैडम जी, मुझे आपसे मदद चाहिए,” अमित ने कहा। “हां भाई, बताइए क्या परेशानी है?” प्रिया ने पूछा। “मैडम, कुछ पुलिस वाले मेरी दुकान में आकर कहते हैं कि यहां गलत काम होता है। वे मुझसे हर महीने ₹5000 मांगते हैं। कहते हैं कि नहीं तो दुकान बंद करा देंगे,” अमित ने बताया।

प्रिया का गुस्सा फिर से भड़का। “कौन से पुलिस वाले आते हैं? उनके नाम पता हैं?” “जी मैडम, उनमें से एक का नाम सुभाष है। वह खुद को इंस्पेक्टर बताता है। दूसरा राम सिंह है, जो हवलदार है,” अमित ने नाम बताएं। प्रिया को यह सुनकर बहुत दुख हुआ। उन्हें लगा कि भ्रष्टाचार की समस्या बहुत गहरी है। “एक-दो लोगों को गिरफ्तार करने से यह खत्म नहीं होने वाली।”

“अमित भाई, आप घबराइए मत। अगली बार जब यह लोग आएं तो मुझे तुरंत फोन करिएगा। मैं इनसे निपटूंगी,” प्रिया ने आश्वासन दिया। “लेकिन मैडम, अगर उन्हें पता चल गया कि मैंने आपको बताया है तो वे मुझे और भी परेशान करेंगे,” अमित ने डरते हुए कहा। “कोई परेशान नहीं करेगा। मैं आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेती हूं,” प्रिया ने भरोसा दिलाया।

अगले दिन अमित का फोन आया। “मैडम, वे लोग आ गए हैं।” प्रिया तुरंत अपनी टीम के साथ वहां पहुंची। उन्होंने देखा कि दो पुलिस वाले अमित से जबरदस्ती पैसे मांग रहे हैं। “पैसे जल्दी निकाल वरना दुकान की छुट्टी हो जाएगी,” इंस्पेक्टर सुभाष धमकी दे रहा था। प्रिया ने अपनी टीम को इशारा किया और खुद साधारण कपड़ों में अंदर गई। “माफ करिए, यहां क्या हो रहा है?” प्रिया ने पूछा।

सुभाष ने गुस्से से प्रिया की तरफ देखा। “तुम कौन हो? यहां क्यों आई हो?” “मैं एक ग्राहक हूं। यहां इंटरनेट का काम करवाने आई हूं। लेकिन आप लोग यहां किस बात के पैसे मांग रहे हैं?” प्रिया ने पूछा। “यहां गलत काम होता है। इसीलिए इसे पेनल्टी देनी पड़ती है,” हवलदार राम सिंह ने झूठ बोला।

“कौन सा गलत काम और पेनल्टी किस कानून के तहत?” प्रिया ने सवाल किया। “तुझे इतने सवाल करने की क्या जरूरत है? अपना काम कर और यहां से चली जा,” सुभाष ने रुखाई से कहा। “नहीं, मुझे जानना है कि आप लोग किस अधिकार से इससे पैसे मांग रहे हैं,” प्रिया ने जिद की।

सुभाष को गुस्सा आ गया। “बहुत बोल रही है तू। चुप हो जा वरना अभी तुझे भी पकड़ कर ले जाएंगे।” “किस आरोप में पकड़ेंगे? मैंने कौन सा जुर्म किया है?” प्रिया ने चुनौती दी। “जुर्म बना देंगे। हमारे लिए कोई बड़ी बात नहीं,” राम सिंह ने धमकी दी। प्रिया मुस्कुराई। “मतलब आप झूठे मामले भी बनाते हैं।”

“हाँ, बनाते हैं। और अब तेरे साथ भी यही करेंगे,” सुभाष ने कहा और प्रिया के हाथ पकड़ने की कोशिश की। प्रिया ने झटके से अपना हाथ छुड़ाया। “बस, अब बहुत हो गया।” उन्होंने अपना आईपीएस का बैज निकाल कर दिखाया। “आईपीएस प्रिया शर्मा। अब बताइए, किसका राज कहां तक चलता है?”

राजेश वर्मा का चेहरा देखने लायक था। उसके होश उड़ गए थे और पसीना छूटने लगा था। हवलदार सुरेश भी अपनी जगह पर जड़ हो गया था। दोनों को समझ आ गया था कि आज वे बहुत बड़ी मुसीबत में फंस गए हैं। “मैडम, मैडम जी, हमें नहीं पता था,” हवलदार रमेश ने हकलाते हुए कहा। “क्या नहीं पता था? यह नहीं पता था कि मैं पुलिस अधिकारी हूं या यह नहीं पता था कि तुम भ्रष्टाचार कर रहे हो?” प्रिया ने तेज आवाज में कहा।

“मैडम जी, बात यह नहीं है,” कांस्टेबल मुकेश ने बहाना बनाने की कोशिश की। “बस करो। अब कोई बहाना नहीं चलेगा। मैंने अपनी आंखों से देखा है कि तुम लोग इस बुजुर्ग महिला से एफआईआर दर्ज करने के लिए पैसे मांग रहे थे,” प्रिया ने कहा।

हवलदार सुरेश अभी भी सदमे में था। वह कुछ बोलने की कोशिश कर रहा था लेकिन आवाज नहीं निकल रही थी। “और तुम, हवलदार सुरेश, तुमने कहा था कि यहां तुम्हारा नियम चलता है। अब बताओ, कौन सा नियम है जो तुम्हारा बनाया हुआ है?” प्रिया ने सुरेश से पूछा। “मैडम जी, मैडम जी, माफी चाहते हैं। हमसे गलती हुई है,” सुरेश ने गिड़गिड़ाते हुए कहा। “गलती? यह कोई छोटी-मोटी गलती नहीं है। तुम लोगों ने रिश्वत मांगी है, झूठी धमकी दी है और एक गरीब महिला को न्याय से वंचित रखने की कोशिश की है। यह सब गंभीर अपराध है,” प्रिया ने समझाया।

बुजुर्ग औरत जो अब तक चुप खड़ी थी, अचानक बोल उठी, “बेटी, यह लोग रोज ऐसा ही करते हैं। सिर्फ हमारे साथ नहीं बल्कि जो भी यहां आता है, उससे पैसे मांगते हैं।” प्रिया ने बुजुर्ग औरत की तरफ देखा। “मां जी, आप बिल्कुल सही कह रही हैं। अब इन लोगों को इसकी सजा मिलेगी।” “मैडम जी, हमें एक मौका दे दीजिए। हम आगे से ऐसा कभी नहीं करेंगे,” राजेश ने हाथ जोड़कर कहा।

“एक मौका? तुमने अब तक कितने गरीब लोगों को मौका दिया है। जब वे तुमसे गुहार लगाते थे कि हमारे पास पैसे नहीं हैं तो तुमने उन्हें मौका दिया था,” प्रिया ने सवाल किया। दोनों के पास कोई जवाब नहीं था। वे जानते थे कि उन्होंने गलत किया है और अब उसकी सजा भुगतनी पड़ेगी।

प्रिया ने अपने फोन से तुरंत अपने विश्वसनीय अधिकारियों को कॉल किया। “तुरंत यहां आइए। मुझे कुछ लोगों को गिरफ्तार करना है।” “मैडम जी, प्लीज हमें माफ कर दीजिए। हमारी नौकरी चली जाएगी। घर में बीवी बच्चे हैं,” राजेश ने हाथ जोड़कर कहा। “जब तुम गरीब लोगों से पैसे वसूल कर रहे थे तो क्या तुम्हें याद नहीं था कि उनके घर में भी बीवी बच्चे हैं? उन्हें भी अपने परिवार का पेट भरना है?” प्रिया ने जवाब दिया।

कुछ ही मिनटों में प्रिया की टीम वहां पहुंच गई। उसमें दो इंस्पेक्टर और चार कांस्टेबल थे। सभी को प्रिया पर पूरा भरोसा था। “इंस्पेक्टर साहब, इन दोनों को तुरंत गिरफ्तार कीजिए। भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और धमकी देने के आरोप में,” प्रिया ने आदेश दिया। “जी मैडम,” इंस्पेक्टर ने कहा और अपने साथियों को इशारा किया। राजेश और सुरेश को हथकड़ी लगा दी गई। वे अभी भी गिड़गिड़ा रहे थे लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था।

“मैडम जी, आखिरी बार माफ कर दीजिए,” राजेश ने कहा। “तुमने कभी किसी को आखिरी मौका दिया था? अब तुम्हें कानून के सामने जवाब देना होगा,” प्रिया ने कहा। दोनों को पुलिस वाहन में बिठाकर ले जाया गया। थाने में मौजूद अन्य कर्मचारी सब कुछ देख रहे थे लेकिन कोई कुछ नहीं बोल रहा था। सबको पता था कि अगर वे भी कोई गलत काम में शामिल हैं तो उनकी भी यही हालत होगी।

प्रिया ने बुजुर्ग औरत की तरफ देखा। “मां जी, अब आइए, आपका एफआईआर दर्ज करते हैं।” बिना किसी पैसे के बुजुर्ग औरत की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। “बेटी, तुमने हमारे लिए इतना कुछ किया। भगवान तुम्हारा भला करे।” “मां जी, यह मेरा फर्ज था। आप खुश रहिए। बस यही काफी है,” प्रिया ने जवाब दिया।

इस घटना की खबर जल्दी ही पूरे शहर में फैल गई। लोग प्रिया की तारीफ कर रहे थे। सोशल मीडिया पर उनकी फोटो और वीडियो वायरल हो गए। “जस्टिस फॉर ऑल” और “आईपीएस प्रिया शर्मा” जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कुछ दिनों बाद प्रिया के पास कई और शिकायतें आईं। लोगों का विश्वास पुलिस में वापस आ गया था। वे अब बिना डरे अपनी समस्याएं लेकर आ रहे थे।

एक दिन प्रिया के पास एक युवक आया। उसका नाम अमित था और वह एक छोटी सी साइबर कैफे चलाता था। “मैडम जी, मुझे आपसे मदद चाहिए,” अमित ने कहा। “हां भाई, बताइए क्या परेशानी है?” प्रिया ने पूछा। “मैडम, कुछ पुलिस वाले मेरी दुकान में आकर कहते हैं कि यहां गलत काम होता है। वे मुझसे हर महीने ₹5000 मांगते हैं। कहते हैं कि नहीं तो दुकान बंद करा देंगे,” अमित ने बताया।

प्रिया का गुस्सा फिर से भड़का। “कौन से पुलिस वाले आते हैं? उनके नाम पता हैं?” “जी मैडम, उनमें से एक का नाम सुभाष है। वह खुद को इंस्पेक्टर बताता है। दूसरा राम सिंह है, जो हवलदार है,” अमित ने नाम बताएं। प्रिया को यह सुनकर बहुत दुख हुआ। उन्हें लगा कि भ्रष्टाचार की समस्या बहुत गहरी है। “एक-दो लोगों को गिरफ्तार करने से यह खत्म नहीं होने वाली।”

“अमित भाई, आप घबराइए मत। अगली बार जब यह लोग आएं तो मुझे तुरंत फोन करिएगा। मैं इनसे निपटूंगी,” प्रिया ने आश्वासन दिया। “लेकिन मैडम, अगर उन्हें पता चल गया कि मैंने आपको बताया है तो वे मुझे और भी परेशान करेंगे,” अमित ने डरते हुए कहा। “कोई परेशान नहीं करेगा। मैं आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेती हूं,” प्रिया ने भरोसा दिलाया।

अगले दिन अमित का फोन आया। “मैडम, वे लोग आ गए हैं।” प्रिया तुरंत अपनी टीम के साथ वहां पहुंची। उन्होंने देखा कि दो पुलिस वाले अमित से जबरदस्ती पैसे मांग रहे हैं। “पैसे जल्दी निकाल वरना दुकान की छुट्टी हो जाएगी,” इंस्पेक्टर सुभाष धमकी दे रहा था। प्रिया ने अपनी टीम को इशारा किया और खुद साधारण कपड़ों में अंदर गई। “माफ करिए, यहां क्या हो रहा है?” प्रिया ने पूछा।

सुभाष ने गुस्से से प्रिया की तरफ देखा। “तुम कौन हो? यहां क्यों आई हो?” “मैं एक ग्राहक हूं। यहां इंटरनेट का काम करवाने आई हूं। लेकिन आप लोग यहां किस बात के पैसे मांग रहे हैं?” प्रिया ने पूछा। “यहां गलत काम होता है। इसीलिए इसे पेनल्टी देनी पड़ती है,” हवलदार राम सिंह ने झूठ बोला।

“कौन सा गलत काम और पेनल्टी किस कानून के तहत?” प्रिया ने सवाल किया। “तुझे इतने सवाल करने की क्या जरूरत है? अपना काम कर और यहां से चली जा,” सुभाष ने रुखाई से कहा। “नहीं, मुझे जानना है कि आप लोग किस अधिकार से इससे पैसे मांग रहे हैं,” प्रिया ने जिद की।

सुभाष को गुस्सा आ गया। “बहुत बोल रही है तू। चुप हो जा वरना अभी तुझे भी पकड़ कर ले जाएंगे।” “किस आरोप में पकड़ेंगे? मैंने कौन सा जुर्म किया है?” प्रिया ने चुनौती दी। “जुर्म बना देंगे। हमारे लिए कोई बड़ी बात नहीं,” राम सिंह ने धमकी दी। प्रिया मुस्कुराई। “मतलब आप झूठे मामले भी बनाते हैं।”

“हाँ, बनाते हैं। और अब तेरे साथ भी यही करेंगे,” सुभाष ने कहा और प्रिया के हाथ पकड़ने की कोशिश की। प्रिया ने झटके से अपना हाथ छुड़ाया। “बस, अब बहुत हो गया।” उन्होंने अपना आईपीएस का बैज निकाल कर दिखाया। “आईपीएस प्रिया शर्मा। अब बताइए, किसका राज कहां तक चलता है?”

राजेश वर्मा का चेहरा देखने लायक था। उसके होश उड़ गए थे और पसीना छूटने लगा था। हवलदार सुरेश भी अपनी जगह पर जड़ हो गया था। दोनों को समझ आ गया था कि आज वे बहुत बड़ी मुसीबत में फंस गए हैं। “मैडम, मैडम जी, हमें नहीं पता था,” हवलदार रमेश ने हकलाते हुए कहा। “क्या नहीं पता था? यह नहीं पता था कि मैं पुलिस अधिकारी हूं या यह नहीं पता था कि तुम भ्रष्टाचार कर रहे हो?” प्रिया ने तेज आवाज में कहा।

“मैडम जी, बात यह नहीं है,” कांस्टेबल मुकेश ने बहाना बनाने की कोशिश की। “बस करो। अब कोई बहाना नहीं चलेगा। मैंने अपनी आंखों से देखा है कि तुम लोग इस बुजुर्ग महिला से एफआईआर दर्ज करने के लिए पैसे मांग रहे थे,” प्रिया ने कहा।

हवलदार सुरेश अभी भी सदमे में था। वह कुछ बोलने की कोशिश कर रहा था लेकिन आवाज नहीं निकल रही थी। “और तुम, हवलदार सुरेश, तुमने कहा था कि यहां तुम्हारा नियम चलता है। अब बताओ, कौन सा नियम है जो तुम्हारा बनाया हुआ है?” प्रिया ने सुरेश से पूछा। “मैडम जी, मैडम जी, माफी चाहते हैं। हमसे गलती हुई है,” सुरेश ने गिड़गिड़ाते हुए कहा। “गलती? यह कोई छोटी-मोटी गलती नहीं है। तुम लोगों ने रिश्वत मांगी है, झूठी धमकी दी है और एक गरीब महिला को न्याय से वंचित रखने की कोशिश की है। यह सब गंभीर अपराध है,” प्रिया ने समझाया।

बुजुर्ग औरत जो अब तक चुप खड़ी थी, अचानक बोल उठी, “बेटी, यह लोग रोज ऐसा ही करते हैं। सिर्फ हमारे साथ नहीं बल्कि जो भी यहां आता है, उससे पैसे मांगते हैं।” प्रिया ने बुजुर्ग औरत की तरफ देखा। “मां जी, आप बिल्कुल सही कह रही हैं। अब इन लोगों को इसकी सजा मिलेगी।” “मैडम जी, हमें एक मौका दे दीजिए। हम आगे से ऐसा कभी नहीं करेंगे,” राजेश ने हाथ जोड़कर कहा।

“एक मौका? तुमने अब तक कितने गरीब लोगों को मौका दिया है। जब वे तुमसे गुहार लगाते थे कि हमारे पास पैसे नहीं हैं तो तुमने उन्हें मौका दिया था,” प्रिया ने सवाल किया। दोनों के पास कोई जवाब नहीं था। वे जानते थे कि उन्होंने गलत किया है और अब उसकी सजा भुगतनी पड़ेगी।

प्रिया ने अपने फोन से तुरंत अपने विश्वसनीय अधिकारियों को कॉल किया। “तुरंत यहां आइए। मुझे कुछ लोगों को गिरफ्तार करना है।” “मैडम जी, प्लीज हमें माफ कर दीजिए। हमारी नौकरी चली जाएगी। घर में बीवी बच्चे हैं,” राजेश ने हाथ जोड़कर कहा। “जब तुम गरीब लोगों से पैसे वसूल कर रहे थे तो क्या तुम्हें याद नहीं था कि उनके घर में भी बीवी बच्चे हैं? उन्हें भी अपने परिवार का पेट भरना है?” प्रिया ने जवाब दिया।

कुछ ही मिनटों में प्रिया की टीम वहां पहुंच गई। उसमें दो इंस्पेक्टर और चार कांस्टेबल थे। सभी को प्रिया पर पूरा भरोसा था। “इंस्पेक्टर साहब, इन दोनों को तुरंत गिरफ्तार कीजिए। भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और धमकी देने के आरोप में,” प्रिया ने आदेश दिया। “जी मैडम,” इंस्पेक्टर ने कहा और अपने साथियों को इशारा किया। राजेश और सुरेश को हथकड़ी लगा दी गई। वे अभी भी गिड़गिड़ा रहे थे लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था।

“मैडम जी, आखिरी बार माफ कर दीजिए,” राजेश ने कहा। “तुमने कभी किसी को आखिरी मौका दिया था? अब तुम्हें कानून के सामने जवाब देना होगा,” प्रिया ने कहा। दोनों को पुलिस वाहन में बिठाकर ले जाया गया। थाने में मौजूद अन्य कर्मचारी सब कुछ देख रहे थे लेकिन कोई कुछ नहीं बोल रहा था। सबको पता था कि अगर वे भी कोई गलत काम में शामिल हैं तो उनकी भी यही हालत होगी।

प्रिया ने बुजुर्ग औरत की तरफ देखा। “मां जी, अब आइए, आपका एफआईआर दर्ज करते हैं।” बिना किसी पैसे के बुजुर्ग औरत की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। “बेटी, तुमने हमारे लिए इतना कुछ किया। भगवान तुम्हारा भला करे।” “मां जी, यह मेरा फर्ज था। आप खुश रहिए। बस यही काफी है,” प्रिया ने जवाब दिया।

इस घटना की खबर जल्दी ही पूरे शहर में फैल गई। लोग प्रिया की तारीफ कर रहे थे। सोशल मीडिया पर उनकी फोटो और वीडियो वायरल हो गए। “जस्टिस फॉर ऑल” और “आईपीएस प्रिया शर्मा” जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कुछ दिनों बाद प्रिया के पास कई और शिकायतें आईं। लोगों का विश्वास पुलिस में वापस आ गया था। वे अब बिना डरे अपनी समस्याएं लेकर आ रहे थे।

एक दिन प्रिया के पास एक युवक आया। उसका नाम अमित था और वह एक छोटी सी साइबर कैफे चलाता था। “मैडम जी, मुझे आपसे मदद चाहिए,” अमित ने कहा। “हां भाई, बताइए क्या परेशानी है?” प्रिया ने पूछा। “मैडम, कुछ पुलिस वाले मेरी दुकान में आकर कहते हैं कि यहां गलत काम होता है। वे मुझसे हर महीने ₹5000 मांगते हैं। कहते हैं कि नहीं तो दुकान बंद करा देंगे,” अमित ने बताया।

प्रिया का गुस्सा फिर से भड़का। “कौन से पुलिस वाले आते हैं? उनके नाम पता हैं?” “जी मैडम, उनमें से एक का नाम सुभाष है। वह खुद को इंस्पेक्टर बताता है। दूसरा राम सिंह है, जो हवलदार है,” अमित ने नाम बताएं। प्रिया को यह सुनकर बहुत दुख हुआ। उन्हें लगा कि भ्रष्टाचार की समस्या बहुत गहरी है। “एक-दो लोगों को गिरफ्तार करने से यह खत्म नहीं होने वाली।”

“अमित भाई, आप घबराइए मत। अगली बार जब यह लोग आएं तो मुझे तुरंत फोन करिएगा। मैं इनसे निपटूंगी,” प्रिया ने आश्वासन दिया। “लेकिन मैडम, अगर उन्हें पता चल गया कि मैंने आपको बताया है तो वे मुझे और भी परेशान करेंगे,” अमित ने डरते हुए कहा। “कोई परेशान नहीं करेगा। मैं आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेती हूं,” प्रिया ने भरोसा दिलाया।

अगले दिन अमित का फोन आया। “मैडम, वे लोग आ गए हैं।” प्रिया तुरंत अपनी टीम के साथ वहां पहुंची। उन्होंने देखा कि दो पुलिस वाले अमित से जबरदस्ती पैसे मांग रहे हैं। “पैसे जल्दी निकाल वरना दुकान की छुट्टी हो जाएगी,” इंस्पेक्टर सुभाष धमकी दे रहा था। प्रिया ने अपनी टीम को इशारा किया और खुद साधारण कपड़ों में अंदर गई। “माफ करिए, यहां क्या हो रहा है?” प्रिया ने पूछा।

सुभाष ने गुस्से से प्रिया की तरफ देखा। “तुम कौन हो? यहां क्यों आई हो?” “मैं एक ग्राहक हूं। यहां इंटरनेट का काम करवाने आई हूं। लेकिन आप लोग यहां किस बात के पैसे मांग रहे हैं?” प्रिया ने पूछा। “यहां गलत काम होता है। इसीलिए इसे पेनल्टी देनी पड़ती है,” हवलदार राम सिंह ने झूठ बोला।

“कौन सा गलत काम और पेनल्टी किस कानून के तहत?” प्रिया ने सवाल किया। “तुझे इतने सवाल करने की क्या जरूरत है? अपना काम कर और यहां से चली जा,” सुभाष ने रुखाई से कहा। “नहीं, मुझे जानना है कि आप लोग किस अधिकार से इससे पैसे मांग रहे हैं,” प्रिया ने जिद की।

सुभाष को गुस्सा आ गया। “बहुत बोल रही है तू। चुप हो जा वरना अभी तुझे भी पकड़ कर ले जाएंगे।” “किस आरोप में पकड़ेंगे? मैंने कौन सा जुर्म किया है?” प्रिया ने चुनौती दी। “जुर्म बना देंगे। हमारे लिए कोई बड़ी बात नहीं,” राम सिंह ने धमकी दी। प्रिया मुस्कुराई। “मतलब आप झूठे मामले भी बनाते हैं।”

“हाँ, बनाते हैं। और अब तेरे साथ भी यही करेंगे,” सुभाष ने कहा और प्रिया के हाथ पकड़ने की कोशिश की। प्रिया ने झटके से अपना हाथ छुड़ाया। “बस, अब बहुत हो गया।” उन्होंने अपना आईपीएस का बैज निकाल कर दिखाया। “आईपीएस प्रिया शर्मा। अब बताइए, किसका राज कहां तक चलता है?”

राजेश वर्मा का चेहरा देखने लायक था। उसके होश उड़ गए थे और पसीना छूटने लगा था। हवलदार सुरेश भी अपनी जगह पर जड़ हो गया था। दोनों को समझ आ गया था कि आज वे बहुत बड़ी मुसीबत में फंस गए हैं। “मैडम, मैडम जी, हमें नहीं पता था,” हवलदार रमेश ने हकलाते हुए कहा। “क्या नहीं पता था? यह नहीं पता था कि मैं पुलिस अधिकारी हूं या यह नहीं पता था कि तुम भ्रष्टाचार कर रहे हो?” प्रिया ने तेज आवाज में कहा।

“मैडम जी, बात यह नहीं है,” कांस्टेबल मुकेश ने बहाना बनाने की कोशिश की। “बस करो। अब कोई बहाना नहीं चलेगा। मैंने अपनी आंखों से देखा है कि तुम लोग इस बुजुर्ग महिला से एफआईआर दर्ज करने के लिए पैसे मांग रहे थे,” प्रिया ने कहा।

हवलदार सुरेश अभी भी सदमे में था। वह कुछ बोलने की कोशिश कर रहा था लेकिन आवाज नहीं निकल रही थी। “और तुम, हवलदार सुरेश, तुमने कहा था कि यहां तुम्हारा नियम चलता है। अब बताओ, कौन सा नियम है जो तुम्हारा बनाया हुआ है?” प्रिया ने सुरेश से पूछा। “मैडम जी, मैडम जी, माफी चाहते हैं। हमसे गलती हुई है,” सुरेश ने गिड़गिड़ाते हुए कहा। “गलती? यह कोई छोटी-मोटी गलती नहीं है। तुम लोगों ने रिश्वत मांगी है, झूठी धमकी दी है और एक गरीब महिला को न्याय से वंचित रखने की कोशिश की है। यह सब गंभीर अपराध है,” प्रिया ने समझाया।

बुजुर्ग औरत जो अब तक चुप खड़ी थी, अचानक बोल उठी, “बेटी, यह लोग रोज ऐसा ही करते हैं। सिर्फ हमारे साथ नहीं बल्कि जो भी यहां आता है, उससे पैसे मांगते हैं।” प्रिया ने बुजुर्ग औरत की तरफ देखा। “मां जी, आप बिल्कुल सही कह रही हैं। अब इन लोगों को इसकी सजा मिलेगी।” “मैडम जी, हमें एक मौका दे दीजिए। हम आगे से ऐसा कभी नहीं करेंगे,” राजेश ने हाथ जोड़कर कहा।

“एक मौका? तुमने अब तक कितने गरीब लोगों को मौका दिया है। जब वे तुमसे गुहार लगाते थे कि हमारे पास पैसे नहीं हैं तो तुमने उन्हें मौका दिया था,” प्रिया ने सवाल किया। दोनों के पास कोई जवाब नहीं था। वे जानते थे कि उन्होंने गलत किया है और अब उसकी सजा भुगतनी पड़ेगी।

प्रिया ने अपने फोन से तुरंत अपने विश्वसनीय अधिकारियों को कॉल किया। “तुरंत यहां आइए। मुझे कुछ लोगों को गिरफ्तार करना है।” “मैडम जी, प्लीज हमें माफ कर दीजिए। हमारी नौकरी चली जाएगी। घर में बीवी बच्चे हैं,” राजेश ने हाथ जोड़कर कहा। “जब तुम गरीब लोगों से पैसे वसूल कर रहे थे तो क्या तुम्हें याद नहीं था कि उनके घर में भी बीवी बच्चे हैं? उन्हें भी अपने परिवार का पेट भरना है?” प्रिया ने जवाब दिया।

कुछ ही मिनटों में प्रिया की टीम वहां पहुंच गई। उसमें दो इंस्पेक्टर और चार कांस्टेबल थे। सभी को प्रिया पर पूरा भरोसा था। “इंस्पेक्टर साहब, इन दोनों को तुरंत गिरफ्तार कीजिए। भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और धमकी देने के आरोप में,” प्रिया ने आदेश दिया। “जी मैडम,” इंस्पेक्टर ने कहा और अपने साथियों को इशारा किया। राजेश और सुरेश को हथकड़ी लगा दी गई। वे अभी भी गिड़गिड़ा रहे थे लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था।

“मैडम जी, आखिरी बार माफ कर दीजिए,” राजेश ने कहा। “तुमने कभी किसी को आखिरी मौका दिया था? अब तुम्हें कानून के सामने जवाब देना होगा,” प्रिया ने कहा। दोनों को पुलिस वाहन में बिठाकर ले जाया गया। थाने में मौजूद अन्य कर्मचारी सब कुछ देख रहे थे लेकिन कोई कुछ नहीं बोल रहा था। सबको पता था कि अगर वे भी कोई गलत काम में शामिल हैं तो उनकी भी यही हालत होगी।

प्रिया ने बुजुर्ग औरत की तरफ देखा। “मां जी, अब आइए, आपका एफआईआर दर्ज करते हैं।” बिना किसी पैसे के बुजुर्ग औरत की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। “बेटी, तुमने हमारे लिए इतना कुछ किया। भगवान तुम्हारा भला करे।” “मां जी, यह मेरा फर्ज था। आप खुश रहिए। बस यही काफी है,” प्रिया ने जवाब दिया।

इस घटना की खबर जल्दी ही पूरे शहर में फैल गई। लोग प्रिया की तारीफ कर रहे थे। सोशल मीडिया पर उनकी फोटो और वीडियो वायरल हो गए। “जस्टिस फॉर ऑल” और “आईपीएस प्रिया शर्मा” जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कुछ दिनों बाद प्रिया के पास कई और शिकायतें आईं। लोगों का विश्वास पुलिस में वापस आ गया था। वे अब बिना डरे अपनी समस्याएं लेकर आ रहे थे।

एक दिन प्रिया के पास एक युवक आया। उसका नाम अमित था और वह एक छोटी सी साइबर कैफे चलाता था। “मैडम जी, मुझे आपसे मदद चाहिए,” अमित ने कहा। “हां भाई, बताइए क्या परेशानी है?” प्रिया ने पूछा। “मैडम, कुछ पुलिस वाले मेरी दुकान में आकर कहते हैं कि यहां गलत काम होता है। वे मुझसे हर महीने ₹5000 मांगते हैं। कहते हैं कि नहीं तो दुकान बंद करा देंगे,” अमित ने बताया।

प्रिया का गुस्सा फिर से भड़का। “कौन से पुलिस वाले आते हैं? उनके नाम पता हैं?” “जी मैडम, उनमें से एक का नाम सुभाष है। वह खुद को इंस्पेक्टर बताता है। दूसरा राम सिंह है, जो हवलदार है,” अमित ने नाम बताएं। प्रिया को यह सुनकर बहुत दुख हुआ। उन्हें लगा कि भ्रष्टाचार की समस्या बहुत गहरी है। “एक-दो लोगों को गिरफ्तार करने से यह खत्म नहीं होने वाली।”

“अमित भाई, आप घबराइए मत। अगली बार जब यह लोग आएं तो मुझे तुरंत फोन करिएगा। मैं इनसे निपटूंगी,” प्रिया ने आश्वासन दिया। “लेकिन मैडम, अगर उन्हें पता चल गया कि मैंने आपको बताया है तो वे मुझे और भी परेशान करेंगे,” अमित ने डरते हुए कहा। “कोई परेशान नहीं करेगा। मैं आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेती हूं,” प्रिया ने भरोसा दिलाया।

अगले दिन अमित का फोन आया। “मैडम, वे लोग आ गए हैं।” प्रिया तुरंत अपनी टीम के साथ वहां पहुंची। उन्होंने देखा कि दो पुलिस वाले अमित से जबरदस्ती पैसे मांग रहे हैं। “पैसे जल्दी निकाल वरना दुकान की छुट्टी हो जाएगी,” इंस्पेक्टर सुभाष धमकी दे रहा था। प्रिया ने अपनी टीम को इशारा किया और खुद साधारण कपड़ों में अंदर गई। “माफ करिए, यहां क्या हो रहा है?” प्रिया ने पूछा।

सुभाष ने गुस्से से प्रिया की तरफ देखा। “तुम कौन हो? यहां क्यों आई हो?” “मैं एक ग्राहक हूं। यहां इंटरनेट का काम करवाने आई हूं। लेकिन आप लोग यहां किस बात के पैसे मांग रहे हैं?” प्रिया ने पूछा। “यहां गलत काम होता है। इसीलिए इसे पेनल्टी देनी पड़ती है,” हवलदार राम सिंह ने झूठ बोला।

Play video :