ਦਿੱਲੀ ਏਅਰਪੋਰਟ ‘ਤੇ ਪੰਜਾਬੀ ਪਰਿਵਾਰ ਰੋਕਿਆ… ਬੱਚਿਆਂ ਕੋਲੋਂ ਜੋ ਨਿਕਲਿਆ — ਪੁਲਿਸ ਹੈਰਾਨ!

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दिल्ली एयरपोर्ट पर पंजाबी परिवार को रोका गया, पुलिस हैरान रह गई: एक सच्ची और प्रेरणादायक कहानी

यह कहानी एक पंजाबी परिवार की है, जिसने सिर्फ अपनी मेहनत और दिल से कमाए पैसे से दुनिया को दिखा दिया कि सच्ची अमीरी क्या होती है। यह परिवार एक यात्रा पर था, लेकिन दिल्ली एयरपोर्ट पर एक घटना घटी, जिसने न केवल इस परिवार को, बल्कि वहां मौजूद हर एक व्यक्ति को हैरान कर दिया।

कहानी की शुरुआत उस दिन से होती है जब ग़ुरप्रीत सिंह और उनकी पत्नी मनजीत कौर, और उनके दो बच्चे अमेरिका से दिल्ली आए थे। ग़ुरप्रीत और मनजीत, दोनों का ही बचपन और जीवन संघर्षों से भरा हुआ था। अमेरिका में रहने के बाद उन्होंने अपनी मेहनत से एक अच्छी जिंदगी बनाई थी, लेकिन उनके दिल में हमेशा एक सपना था – अपने बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ना, उन्हें अपने माता-पिता की जड़ों के बारे में बताना और उनके दिलों में पंजाब के लिए प्यार जगाना।

यह परिवार दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचा, जहां एक बेहद खास मौका था। बच्चे बेहद उत्साहित थे, क्योंकि वे अब अपनी भारतीय जड़ों से जुड़ने के लिए भारत आ चुके थे। वे पंजाब जाने की योजना बना रहे थे और अपने माता-पिता के सपने को पूरा करना चाहते थे। लेकिन एयरपोर्ट पर एक घटना ने इस परिवार के पूरे सफर को बदल दिया।

जब वे एयरपोर्ट के ग्रीन चैलन से पार कर रहे थे, कस्टम अधिकारियों को ब बच्चों के बैगों में कुछ संदेहास्पद वस्तुएं दिखाई दीं। अधिकारियों ने तुरंत परिवार को रुकने का इशारा किया और बैगों की जाँच शुरू कर दी। पूरी एयरपोर्ट का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। ग़ुरप्रीत सिंह को समझ नहीं आया कि बच्चों के बैगों में ऐसा क्या हो सकता है, जिससे उन्हें शक हो।

कस्टम अधिकारियों ने बच्चों के बैग स्कैन किए और देखते ही देखते उन बैगों में कुछ बहुत भारी चीजें दिखाई दीं। अधिकारी समझ गए कि इस बैग में कुछ ग़ैरकानूनी सामान हो सकता है, जैसे सोने की चीजें या महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स। हालांकि, ग़ुरप्रीत और उनकी पत्नी मनजीत ने कड़ी मेहनत से इसे साफ किया और कहा कि ये सामान उनके बच्चों द्वारा इकट्ठा किया गया था और वे सिर्फ अपने बचपन के सामान लेकर आए थे।

अधिकारी बैग खोलने के लिए इशारा करते हैं और जैसे ही बैगों की जाँच शुरू होती है, वहां से कुछ मिट्टी के बने हुए ग़ुलक और कुछ सिक्के निकलते हैं। यह देखकर अधिकारी भी हैरान हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि कुछ ग़ैरकानूनी सामान मिलेगा। लेकिन जैसे ही ग़ुलक से कुछ डॉलर और मोड़े हुए नोट निकलते हैं, पुलिस अधिकारी सोच में पड़ जाते हैं।

फिर एक चिट्ठी निकलती है, जो एक बच्चे के हाथ से लिखी हुई होती है। इस चिट्ठी में यह बताया गया था कि बच्चों ने अपनी जमा की हुई राशि को गरीब बच्चों की पढ़ाई में दान देने के लिए लाया था। वे कहते हैं कि उन्होंने पिछले दो सालों में अपनी जेम्बी खर्च नहीं की और इस पैसे को इकठ्ठा किया ताकि वे जरूरतमंद बच्चों की मदद कर सकें।

जैसे ही पुलिस ने यह चिट्ठी पढ़ी, वहां मौजूद सभी अधिकारी हैरान रह गए। उन्होंने अब इस परिवार को शक की नजर से देखना बंद कर दिया और सभी ने एक-दूसरे की ओर देखकर यह महसूस किया कि सच्ची अमीरी पैसा नहीं, बल्कि मानवता और दया में है। इसके बाद, कस्टम अधिकारियों ने इस परिवार को जाने दिया, लेकिन इस घटना ने हर किसी को एक सिख और दया का संदेश दिया।

ग़ुरप्रीत और मनजीत ने न केवल अपने बच्चों को बेहतर इंसान बनाने की कोशिश की, बल्कि उन्होंने यह भी दिखाया कि सच्ची खुशी और अमीरी किसी भी देश की सीमा से बाहर नहीं होती। उनके बच्चों ने बिना किसी दिखावे के यह क़दम उठाया और आज उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि अच्छाई और मदद से ही दुनिया को बदला जा सकता है।

यह घटना दिल्ली एयरपोर्ट के इतिहास में शायद दर्ज नहीं हुई होगी, लेकिन यहां मौजूद हर अधिकारी के दिल में यह हमेशा के लिए रह जाएगी। ग़ुरप्रीत और मनजीत के बच्चों ने यह साबित कर दिया कि जितना अमीर हम अपने दिल में होते हैं, उतना अमीर कोई नहीं हो सकता।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि छोटी-छोटी कोशिशें भी किसी की ज़िंदगी को बदल सकती हैं। सच्ची अमीरी किसी के पास कितने पैसे हैं, यह नहीं बल्कि उसके दिल में क्या है, यह है।

समाप्त