आज़मगढ़ में सनसनी: पत्नी की हत्या के आरोप में पति गिरफ्तार, अवैध संबंधों के शक ने लिया हिंसक मोड़

आज़मगढ़ (उत्तर प्रदेश)।
जिले के बुढ़नपुर गांव में नवंबर 2025 में घटी एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। आर्थिक तंगी, वैवाहिक अविश्वास और आपसी तनाव के बीच एक पति ने कथित रूप से अपनी पत्नी की हत्या कर दी। घटना के बाद आरोपी ने स्वयं थाने पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मृतका की पहचान 28 वर्षीय रेनू देवी के रूप में हुई है, जबकि आरोपी पति विजय कुमार (30 वर्ष) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने मामले में दो अन्य व्यक्तियों—गांव के एक दर्जी और एक किराना दुकानदार—को भी पूछताछ के बाद हिरासत में लिया है।


आर्थिक तंगी और पारिवारिक पृष्ठभूमि

बुढ़नपुर गांव का रहने वाला विजय कुमार एक स्थानीय कारखाने में दिहाड़ी मजदूर के रूप में कार्य करता था। उसकी मासिक आय लगभग 12 से 13 हजार रुपये बताई जाती है। परिवार में पत्नी रेनू देवी और पांच वर्षीय पुत्र शौर्य था। सीमित आय के कारण परिवार आर्थिक दबाव में रह रहा था।

करीबी सूत्रों के अनुसार, कुछ समय पहले विजय कुमार के कंधे में गंभीर चोट लग गई थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने उसे भारी काम से परहेज की सलाह दी थी। इसके बाद उसने गांव के एकमात्र दर्जी पन्ना सिंह की दुकान पर सिलाई का काम सीखना शुरू किया।

गांव के लोगों का कहना है कि आर्थिक संकट और भविष्य की अनिश्चितता के कारण पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था। हालांकि, यह तनाव किस हद तक पहुंच चुका था, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।


अवैध संबंधों का शक

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान यह बात सामने आई कि विजय कुमार को अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था। गांव के कुछ लोगों ने भी अनौपचारिक बातचीत में बताया कि दर्जी पन्ना सिंह का रेनू देवी के घर आना-जाना बढ़ गया था।

इसके अलावा, पास की किराना दुकान चलाने वाले युवक सचिन के साथ भी मृतका के संपर्क की बात सामने आई है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इन संबंधों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और कहा है कि “जांच जारी है, सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जाएगी।”


6 नवंबर की सुबह: घटना से पहले की परिस्थितियां

पुलिस के अनुसार, 6 नवंबर 2025 की सुबह विजय कुमार अपने काम पर गया था। दोपहर के समय वह किसी कारणवश घर लौटा। बताया जा रहा है कि वह अपना मोबाइल फोन घर पर भूल गया था और उसे लेने वापस आया।

जब वह घर पहुंचा, तो मुख्य दरवाजा बंद था। दरवाजा खुलवाने पर उसे घर के अंदर संदिग्ध स्थिति दिखाई दी। पुलिस के मुताबिक, विजय ने दावा किया है कि उसने अपनी पत्नी को दो अन्य व्यक्तियों के साथ आपत्तिजनक अवस्था में देखा।

इसी दौरान कहासुनी हुई और मामला हिंसक हो गया। आरोप है कि विजय कुमार ने पहले दोनों व्यक्तियों की पिटाई की, जो मौके से भागने में सफल रहे। इसके बाद उसने अपनी पत्नी के साथ क्रूरता की और अंततः गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।


आत्मसमर्पण और पुलिस कार्रवाई

घटना के लगभग एक घंटे बाद विजय कुमार स्वयं नजदीकी पुलिस थाने पहुंचा और पूरी घटना की जानकारी दी। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और रेनू देवी का शव बरामद किया। शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया।

थाना प्रभारी ने बताया, “आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार किया है। हमने उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। अन्य दो व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।”


गांव में सनसनी और चर्चा

घटना के बाद पूरे बुढ़नपुर गांव में सन्नाटा छा गया। ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ लोग इसे पारिवारिक विवाद का दुखद परिणाम बता रहे हैं, तो कुछ इसे कानून अपने हाथ में लेने की गंभीर गलती मान रहे हैं।

गांव के एक बुजुर्ग ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “झगड़े हर घर में होते हैं, लेकिन इस तरह हिंसा करना गलत है। कानून है, पंचायत है—बात सुलझाई जा सकती थी।”

वहीं, कुछ महिलाओं ने कहा कि “आर्थिक दबाव और आपसी अविश्वास ने इस परिवार को बर्बाद कर दिया।”


कानूनी पहलू

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पति को पत्नी के अवैध संबंधों का संदेह भी था, तब भी उसे कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं था। भारतीय कानून के तहत हत्या एक गंभीर अपराध है और इसके लिए कठोर सजा का प्रावधान है।

एक वरिष्ठ अधिवक्ता के अनुसार, “यदि आरोपी ने क्रोध में आकर यह कदम उठाया है, तो भी यह दंडनीय अपराध है। अदालत में यह देखा जाएगा कि घटना पूर्वनियोजित थी या अचानक उकसावे में हुई। लेकिन किसी भी परिस्थिति में हत्या को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।”


सामाजिक दृष्टिकोण

यह घटना कई सामाजिक प्रश्न भी खड़े करती है। ग्रामीण समाज में आर्थिक तंगी, बेरोजगारी और संचार की कमी अक्सर पारिवारिक तनाव को बढ़ा देती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैवाहिक विवादों में संवाद और परामर्श की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यदि समय रहते दोनों पक्ष किसी सामाजिक संस्था या परिवार के बुजुर्गों की मदद लेते, तो शायद यह दुखद घटना टल सकती थी।


बच्चे पर असर

सबसे चिंताजनक पहलू पांच वर्षीय मासूम शौर्य का भविष्य है। घटना के समय वह स्कूल गया हुआ था। अब उसकी परवरिश और देखभाल को लेकर परिवार और प्रशासन के सामने चुनौती खड़ी हो गई है।

बाल संरक्षण इकाई के एक अधिकारी ने बताया कि “बच्चे की काउंसलिंग कराई जाएगी। परिवार के नजदीकी रिश्तेदारों से संपर्क किया जा रहा है ताकि उसकी देखभाल सुनिश्चित की जा सके।”


आगे की जांच

पुलिस ने घटनास्थल से कुछ साक्ष्य जुटाए हैं। मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स, पड़ोसियों के बयान और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

दर्जी पन्ना सिंह और दुकानदार सचिन से पूछताछ जारी है। यदि उनके खिलाफ कोई आपराधिक भूमिका सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


निष्कर्ष

आज़मगढ़ की यह घटना केवल एक पारिवारिक त्रासदी नहीं, बल्कि सामाजिक और कानूनी व्यवस्था के लिए भी एक चेतावनी है। अविश्वास, आर्थिक दबाव और संवादहीनता ने एक परिवार को तोड़ दिया।

अब मामला अदालत में जाएगा, जहां तय होगा कि आरोपी को क्या सजा मिलती है। लेकिन इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी परिस्थिति में हिंसा समाधान नहीं हो सकती।

गांव में अभी भी इस घटना की चर्चा जारी है। लोग सवाल कर रहे हैं—क्या यह गुस्से का परिणाम था? क्या समय रहते कोई हस्तक्षेप होता तो जान बच सकती थी?

इन सवालों के जवाब भले ही अदालत दे, लेकिन एक मासूम बच्चे की जिंदगी पर पड़े इस गहरे घाव को भरना आसान नहीं होगा।