खून से रंगे रिश्ते: रायगढ़ का वो ‘सूप कांड’ जिसने भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को कर दिया कलंकित; सोनाली और स्नेहा की मौत का खौफनाक सच!
रायगढ़, महाराष्ट्र। क्या कोई भाई अपनी सगी बहनों की जान सिर्फ इसलिए ले सकता है क्योंकि उसे डर था कि शादी के बाद वे अपनी संपत्ति का हिस्सा ले जाएंगी? महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के भोंले गांव से आई यह खबर किसी भी इंसान की रूह कंपा देने के लिए काफी है। यह कहानी है सोनाली और स्नेहा की, जिन्होंने उस भाई के हाथ का बनाया ‘सूप’ पिया जिसे वे अपना रक्षक समझती थीं, लेकिन उन्हें क्या पता था कि वह सूप नहीं, उनकी मौत का प्याला था।
एक आदर्श परिवार और दुखों का आगाज़
रायगढ़ के भोंले गांव में शंकर मोहिते का परिवार अपनी सादगी और खुशहाली के लिए जाना जाता था। शंकर वन विभाग में क्लर्क थे। परिवार में पत्नी, दो बेटियां (सोनाली और स्नेहा) और एक बेटा (गणेश) था। 2017 में शंकर मोहिते के निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर चलाने की जिम्मेदारी अब बच्चों पर थी।
नियम के मुताबिक, पिता की जगह सरकारी नौकरी परिवार के एक सदस्य को मिलनी थी। बड़ी बेटी सोनाली (22) इसके लिए योग्य थी, लेकिन समाज और रिश्तेदारों की संकीर्ण सोच आड़े आ गई— “बेटी की शादी हो जाएगी तो वह पराया धन हो जाएगी, फिर घर कौन संभालेगा?” इसी सोच के चलते सोनाली का हक मारकर बेटे गणेश के बालिग होने का इंतजार किया गया।
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गणेश की नौकरी और छिपी हुई नफरत
2021 में गणेश मोहिते को वन विभाग में अपने पिता की जगह नौकरी मिल गई। घर की माली हालत सुधरने लगी, लेकिन गणेश के मन में एक ज़हरीला विचार जड़ें जमा रहा था। सोनाली (28) और स्नेहा (26) अब शादी के लायक हो चुकी थीं। गणेश को डर था कि अगर उनकी शादी हुई, तो पिता की जमीन और संपत्ति का हिस्सा उन्हें देना पड़ेगा। वह नहीं चाहता था कि उसकी बहनों की शादी हो।
अक्टूबर 2023: वो खौफनाक ‘सूप कांड’
16 अक्टूबर 2023 को पूरा परिवार एक रिश्तेदार के यहाँ से लौटा था। थकान मिटाने के बहाने गणेश ने रसोई में खुद सूप बनाया। उसने उस सूप में चूहे मारने वाला जहर (Rat Poison) मिला दिया। बहनों ने अपने भाई पर भरोसा कर वह सूप पी लिया।
कुछ ही घंटों बाद छोटी बहन स्नेहा की तबीयत बिगड़ने लगी। उसे अलीबाग के अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों को ‘फूड पॉइजनिंग’ का शक था, लेकिन विसरा रिपोर्ट ने चौंका दिया—शरीर में ज़हर के अंश थे।
अभी परिवार स्नेहा के गम से उबरा भी नहीं था कि 19 अक्टूबर को बड़ी बहन सोनाली की भी तबीयत वैसी ही बिगड़ने लगी। उसे पनवेल के एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ 30 अक्टूबर को उसने भी दम तोड़ दिया।

डिजिटल पदचिह्न: गूगल सर्च ने खोला राज
पुलिस को शुरू में रिश्तेदारों पर शक था, लेकिन जब उन्होंने घर के सदस्यों के मोबाइल खंगाले, तो हकीकत सामने आई। गणेश मोहिते के फोन की ब्राउज़र हिस्ट्री में पिछले कुछ हफ्तों में 53 बार जहर से संबंधित सर्च किए गए थे:
“इंसान को मारने के लिए कितना जहर चाहिए?”
“सूप में कौन सा जहर मिलाया जा सकता है?”
“जहर कितने दिनों में असर करता है?”
पुलिस ने जब गणेश की गाड़ी की तलाशी ली, तो उसमें चूहे मारने वाले जहर के पैकेट और खाली शीशियाँ बरामद हुईं। कड़ाई से पूछताछ करने पर गणेश टूट गया और अपना गुनाह कबूल कर लिया।
इंसानियत और रिश्तों का कत्ल
गणेश ने बताया कि उसने सिर्फ संपत्ति के लालच में अपनी दोनों बहनों को मार डाला। उसे अपनी बहनों की तड़प देखकर भी दया नहीं आई। जिस भाई की कलाई पर बहनें राखी बांधती थीं, उसी भाई ने उनके विश्वास का गला घोंट दिया।
निष्कर्ष: यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या आज के दौर में संपत्ति रिश्तों से बड़ी हो गई है? एक माँ ने पहले पति खोया, फिर दो जवान बेटियाँ और अब उसका बेटा जेल की सलाखों के पीछे है। सोनाली और स्नेहा की मौत उस संकीर्ण मानसिकता का नतीजा है जो बेटियों को ‘संपत्ति का वारिस’ नहीं बल्कि ‘बोझ’ मानती है।
मैं आपके लिए आगे क्या कर सकता हूँ? क्या आप संपत्ति उत्तराधिकार (Inheritance Laws) में बेटियों के कानूनी अधिकारों या फॉरेंसिक जांच में ‘डिजिटल एविडेंस’ के महत्व पर अधिक जानकारी चाहते हैं?
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