जिस पति के लिए बीवी ने रखा था करवाचौथ का ब्रत वो घर के सैप्टिक टैंक में था दफन

.

.

करवाचौथ की रात, सैप्टिक टैंक में दफन पति: लखनऊ के एक परिवार की दर्दनाक सच्चाई

प्रस्तावना

यह कहानी उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर की है, जहां करवाचौथ के पावन त्योहार पर एक पत्नी अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती रही, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि जिस पति के लिए वह व्रत रख रही है, वह उसी घर के सैप्टिक टैंक में दफन है। यह सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं, बल्कि रिश्तों, विश्वास, धोखे और समाज के बदलते चेहरे की सच्ची दास्तान है।

भाग 1: एक परिवार की शुरुआत

कहानी की शुरुआत होती है बलरामपुर जिले से, जहां रामजी, उनकी पत्नी सुलेचना और बेटा शिवा सक्सेना रहते थे। साल 2000 में एक सड़क हादसे में रामजी की मौत हो गई, सुलेचना मानसिक और शारीरिक रूप से बुरी तरह टूट गईं, और शिवा अकेला रह गया। कुछ साल बाद मां की भी मौत हो गई।

गांववालों ने शिवा को उसके मामा जनक राज के पास लखनऊ भेज दिया। जनक राज ने शिवा को अपने बेटे की तरह पाला, उसकी पढ़ाई-लिखाई कराई, नौकरी दिलवाई।

भाग 2: शादी और नए जीवन की उम्मीद

साल 2013 में शिवा की शादी मधु अस्थाना उर्फ डोली से हुई, जो वीरहाना इलाके की रहने वाली थी। दोनों ने हरिओम नगर में किराए का मकान लिया। शिवा प्राइवेट नौकरी करता था, मधु घर संभालती थी। कुछ ही समय बाद उनका पहला बच्चा हुआ, लेकिन दुर्भाग्यवश एक साल के भीतर उसकी मौत हो गई। फिर दूसरा बच्चा हुआ, उसका भी कुछ महीनों में निधन हो गया।

इन दुखों के बीच दोनों एक-दूसरे का सहारा बने रहे। शिवा ने मधु को समझाया कि जिंदगी में परेशानियां आती हैं, लेकिन उन्हें मिलकर सामना करना चाहिए।

भाग 3: मधु का काम और रिश्तों में बदलाव

मधु ने अपनी मौसी रंजना के घर जाकर लिफाफे बनाने का काम शुरू किया। मौसी का बेटा नीरज भी उसी काम में मदद करता था। मधु और नीरज के बीच बहन-भाई के रिश्ते के साथ-साथ दोस्ती भी गहरी हो गई। धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल गई।

शिवा की नौकरी के चलते वह कई-कई दिन घर से बाहर रहता था। मधु और नीरज का मिलना-जुलना बढ़ता गया।

भाग 4: वह रात जिसने सब बदल दिया

16 अक्टूबर 2016 की रात शिवा ने मधु से कहा कि वह काम के सिलसिले में बाहर जा रहा है और देर से लौटेगा। शिवा के जाते ही मधु ने नीरज को घर बुला लिया। दोनों रात भर साथ रहे।

लेकिन अचानक शिवा रात को घर लौट आया, और बिना किसी को बताए मुख्य द्वार फांदकर घर में घुस गया। उसने घर के अंदर कुछ अजीब आवाजें सुनीं। जब दरवाजा खोला, तो देखा कि उसकी पत्नी और नीरज आपत्तिजनक स्थिति में थे। गुस्से में आकर शिवा ने दोनों को थप्पड़ मारे, दोनों ने बचाव में शिवा का गला घोंटकर हत्या कर दी।

भाग 5: हत्या और लाश का ठिकाना

शिवा की हत्या के बाद दोनों घबरा गए। अगले दिन उन्होंने शिवा की लाश के तीन टुकड़े किए और घर के सैप्टिक टैंक में दफना दिया। करवाचौथ के दिन मधु ने पति के लिए व्रत रखा, पड़ोसियों को बताया कि शिवा नौकरी के सिलसिले में बाहर है।

दो हफ्ते बाद मधु ने मकान छोड़ दिया और दूसरी जगह रहने लगी। नीरज बेरोक-टोक उसके घर आता-जाता रहा।

भाग 6: परिवार का शक, पुलिस की जांच

शिवा का सगा भाई मोहित लगातार शिवा से संपर्क करने की कोशिश करता रहा, लेकिन नंबर बंद आता रहा। आखिरकार 12 नवंबर 2016 को मोहित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उसका जीजा कई दिनों से लापता है।

पहले पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन जब शिवा के मामा जनक राज ने भी शिकायत की, पुलिस ने जांच शुरू की। सूत्रों से पता चला कि मधु और नीरज ही मुख्य संदिग्ध हैं।

भाग 7: सच सामने आया

पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया। सख्ती से पूछताछ करने पर मधु ने सैप्टिक टैंक की तरफ इशारा किया। नगर निगम की टीम ने कई घंटे मशक्कत के बाद टैंक से शिवा की लाश के तीन टुकड़े बरामद किए।

नीरज पुलिस को चकमा देकर नाले में कूदकर भाग गया। उसकी मां रंजना ने बताया कि नीरज उसका गोद लिया बेटा है, असली बेटा नहीं। पुलिस ने मधु को गिरफ्तार कर लिया।

भाग 8: अदालत और सजा

मामला अदालत पहुंचा। चार्जशीट लगी, सुनवाई हुई। 19 जनवरी 2023 को अदालत ने मधु को उम्रकैद की सजा सुनाई और ₹35,000 का जुर्माना लगाया। नीरज अभी भी फरार है, पुलिस उसकी तलाश में है।

भाग 9: समाज के लिए सबक

यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि रिश्तों की सच्चाई, विश्वासघात और समाज की जागरूकता का संदेश है। करवाचौथ पर पति के लिए व्रत रखने वाली पत्नी ने उसी पति को मारकर सैप्टिक टैंक में दफना दिया।

रिश्तों में विश्वास जरूरी है, लेकिन आँख मूंदकर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है। समाज को सतर्क रहना चाहिए, पुलिस को संवेदनशील होना चाहिए और कानून को सख्ती से पालन करना चाहिए।

उपसंहार

लखनऊ की यह घटना हमें सिखाती है कि जीवन में सतर्कता बेहद जरूरी है। रिश्तों की परख, परिवार की सुरक्षा और समाज की जिम्मेदारी सबका साझा कर्तव्य है।

जिनके जन्मदिन हैं, उन्हें शुभकामनाएं। बाकी सभी को यह संदेश—सावधान रहें, सुरक्षित रहें। जय हिंद, जय भारत।

 

.

.