फौजी भाई ने पुलिस दरोगा को 4 गोलियां मारी/बहन के साथ हुआ था गलत/

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फौजी भाई की बदला

यह कहानी एक छोटे से गांव की है, जहां एक भाई अपनी बहन के लिए अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ा। यह कहानी प्रेम, सम्मान और बदले की है। एक ऐसी घटना जिसने न केवल एक गांव को हिलाकर रख दिया, बल्कि यह भी साबित किया कि कभी-कभी परिवार के लिए खड़ा होना जानलेवा भी हो सकता है।

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले का एक छोटा सा गांव था, जिसका नाम था भीमपुरा। यहां रहने वाला एक युवा फौजी, दिनेश कुमार, अपनी मेहनत और ईमानदारी के लिए जाना जाता था। दिनेश ने चार साल पहले सेना में भर्ती होने के बाद अपनी पूरी जिंदगी देश की सेवा में समर्पित कर दी थी। बचपन में ही उसके माता-पिता का निधन हो गया था, जिसके कारण सारी जिम्मेदारी उसे ही उठानी पड़ी थी। उसके परिवार में एक दादी, संतोष देवी, और एक बहन, कल्पना, थी। कल्पना ने अपनी 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की थी, लेकिन पढ़ाई में मन नहीं लगने के कारण उसने उसे बीच में ही छोड़ दिया और खेती में अपना हाथ आजमाने लगी थी।

कल्पना का अपना तीन एकड़ खेत था, जिसे वह बहुत मेहनत और लगन से संभालती थी। उसकी दादी संतोष देवी हमेशा उसे समझाती रहती थी कि खेतों में काम करते समय उसे बहुत सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि किसी से भी कोई गलत बात हो सकती थी। लेकिन कल्पना ने अपनी दादी को हमेशा यही जवाब दिया कि “मैं फौजी की बहन हूं, मुझे किसी से डरने की कोई जरूरत नहीं है।”

कभी-कभी कल्पना की एक सहेली, करुणा, भी उसकी मदद करने के लिए खेतों में आती थी। करुणा का घर भी गांव में था, और दोनों के बीच बहुत अच्छा रिश्ता था। एक दिन, 5 दिसंबर 2025 को, कल्पना अपने खेत में काम कर रही थी, और तभी करुणा का फोन आया। करुणा ने बताया कि आज उसका जन्मदिन है और शाम को उसके घर पर आना है। कल्पना ने वादा किया कि वह जरूर आएगी।

शाम को, कल्पना अपनी दादी से कहकर करुणा के घर चली गई। लेकिन जब वह करुणा के घर पहुंची, तो वहां सिर्फ करुणा का पिता, बलबीर, मौजूद था। बलबीर, जो कि एक पुलिस दरोगा था, शराब पी रहा था और जैसे ही उसकी नजर कल्पना पर पड़ी, उसके मन में गलत विचार आ गए। वह कल्पना को गलत तरीके से छूने की कोशिश करने लगा, जिससे कल्पना को गुस्सा आ गया और उसने बलबीर को दो थप्पड़ मार दिए। इस घटना के बाद, बलबीर ने कल्पना को धमकी दी कि वह उसे और उसकी दादी को बदनाम कर देगा।

कुछ दिनों बाद, बलबीर ने अपनी मंशा को पूरा करने के लिए योजना बनाई। वह और उसका नौकर, प्रवीण, एक दिन कल्पना को अकेला पाकर उसके साथ एक घिनौना काम करने वाले थे। बलबीर ने कल्पना को खेत में अकेला पाया और उसे पकड़कर गलत काम किया। यह सारी घटना कल्पना के लिए एक बड़ा सदमा थी, लेकिन उसने इसे चुपचाप सहन किया।

इसके बाद, कल्पना ने अपनी पूरी कहानी अपने भाई, दिनेश को बताई। दिनेश, जो सेना में था, अपनी बहन के साथ हुए इस अन्याय से गुस्से में था। वह अपने दोस्त शमशेर सिंह को फोन करके उसकी मदद मांगता है। शमशेर और दिनेश ने मिलकर बलबीर और प्रवीण को सबक सिखाने की योजना बनाई। 20 दिसंबर 2025 को, दिनेश और शमशेर ने बलबीर को उसके घर में घुसकर गोलियों से मार दिया। फिर वे प्रवीण को भी पकड़कर उसे गांव के चौराहे पर लाकर गोलियों से मार दिया।

यह घटना पूरे गांव में आग की तरह फैल गई। पुलिस ने दिनेश और शमशेर को गिरफ्तार किया, लेकिन गांव के लोग उनके इस कदम की सराहना कर रहे थे। उन्होंने बताया कि कैसे एक भाई ने अपनी बहन के लिए खुद को खतरे में डाला और बदला लिया। पुलिस ने दिनेश और शमशेर के खिलाफ चार्जशीट दायर की, लेकिन उनका दिल यह मानने को तैयार नहीं था कि उन्होंने गलत किया था।

दिनेश और शमशेर का विश्वास था कि उन्होंने जो किया, वह अपनी बहन के सम्मान और सुरक्षा के लिए सही था। लेकिन कानून ने उन्हें सलाखों के पीछे डाल दिया। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि कभी-कभी परिवार के लिए किए गए कड़े फैसले गलत भी हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत और सम्मान की लड़ाई में खड़ा होना कभी गलत नहीं हो सकता।

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