माता पिता के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/S.P साहब के होश उड़ गए/

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राजकिशोर के परिवार की दर्दनाक दास्तान

राजस्थान के भरतपुर जिले के एक छोटे से गाँव रूपवास में राजकिशोर नाम का एक किसान अपने परिवार के साथ रहता था। उसके पास चार एकड़ उपजाऊ ज़मीन थी, जो गाँव के मुख्य सड़क के किनारे थी। राजकिशोर मेहनती था, अपनी ज़मीन पर खेतीबाड़ी करता, और परिवार का पालन-पोषण करता था। उसकी पत्नी रूपा देवी, दो बेटियाँ – बड़ी बेटी बुलबुल जो बारहवीं कक्षा में पढ़ती थी और छोटी बेटी महक जो दसवीं कक्षा में थी – सभी मिलकर एक सादा मगर खुशहाल जीवन जी रहे थे।

राजकिशोर अपनी ज़मीन को बेचने के लिए तैयार नहीं था। वह हमेशा सोचता था कि यह ज़मीन उसके पूर्वजों की निशानी है, जिसे वह किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहता। लेकिन उसकी ज़मीन के बढ़ते दामों ने गाँव के कई लोगों की नज़रें उस पर गड़ा दी थीं। खासकर गाँव का दबंग सरपंच शिवकुमार, जो किसी भी तरह राजकिशोर की ज़मीन हासिल करना चाहता था।

एक दिन, शिवकुमार राजकिशोर के खेत में आया और उसे ज़मीन बेचने के लिए मनाने लगा। राजकिशोर ने साफ़ मना कर दिया। शिवकुमार ने सोचा कि सीधी उंगली से घी नहीं निकलने वाला, तो उसने चालाकी से काम लेना शुरू किया। उसने राजकिशोर को अपने बेटे के जन्मदिन की पार्टी खेत में मनाने का बहाना बनाया, शराब मंगवाई और दोनों ने साथ बैठकर पीना शुरू किया। शराब के नशे में शिवकुमार ने राजकिशोर से पूछा – “अगर तुम किसी महिला के साथ वक्त बिताना चाहते हो तो मैं व्यवस्था कर सकता हूँ।” राजकिशोर नशे में राज़ी हो गया।

शिवकुमार ने गाँव की चरित्रहीन महिला निशा देवी को बुलाया, जो पैसे के लिए पुरुषों के साथ संबंध बनाती थी। निशा आई, और राजकिशोर के साथ कमरे में चली गई। दोनों ने अपनी मर्ज़ी से गलत संबंध बनाए। इसके बाद शिवकुमार ने निशा को पैसे दिए और कहा – “अब जब भी बुलाऊँगा, तुम्हें आना पड़ेगा।” धीरे-धीरे राजकिशोर शराब और निशा के साथ संबंधों का आदी हो गया।

कुछ समय बाद, राजकिशोर की बेटियाँ – बुलबुल और महक – अपने स्कूल जाती थीं, और घर पर राजकिशोर व रूपा अकेले रहते थे। एक दिन, शिवकुमार घर पर आया, रूपा देवी से मिला, और उसकी सुंदरता पर मोहित हो गया। रूपा भी गैर मर्दों में दिलचस्पी रखती थी। राजकिशोर शराब लेने चला गया, और उसी दौरान रूपा ने शिवकुमार को घर के अंदर बुला लिया। दोनों ने कमरे में जाकर गलत संबंध बनाए। बुलबुल जब स्कूल से जल्दी लौटी, तो उसने मां को संदिग्ध हालत में देखा, मगर कुछ नहीं कहा।

समय बीतता गया, और दोनों बेटियों के मन में अपने माता-पिता के प्रति गहरा अविश्वास पैदा हो गया। बुलबुल ने मां को शिवकुमार के साथ रंगे हाथ पकड़ा, और महक ने पिता को निशा के साथ देखा। दोनों को एहसास हुआ कि उनके माता-पिता गलत रास्ते पर हैं, और उनका जीवन बर्बाद हो रहा है।

एक दिन, राजकिशोर, रूपा और महक कपड़े खरीदने शहर गए, बुलबुल घर पर अकेली थी। शिवकुमार ने मौके का फायदा उठाया, घर आया, बुलबुल को अकेला पाकर उसके साथ जबरदस्ती की। धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो जान से मार देगा। बुलबुल डर गई, मगर जब मां-बाप लौटे, उसने सारी बात बता दी। लेकिन मां-बाप ने उसे चुप रहने को कहा – “अगर किसी को पता चला तो बदनामी होगी।”

बुलबुल और महक का दिल टूट गया। रात को दोनों ने फैसला किया कि अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे। बुलबुल ने तलवार, महक ने चाकू उठाया। दोनों ने अपने माता-पिता को सोते समय मार डाला। इसके बाद, वे शिवकुमार के घर गईं, उसे भी मार डाला। खून से लथपथ दोनों बहनें अपने चाचा संजय के पास पहुँचीं, और सबकुछ बता दिया।

संजय ने पुलिस को बुलाया। पुलिस आई, शव बरामद किए, और दोनों बहनों को गिरफ्तार कर लिया। जब एसपी साहब ने सारी कहानी सुनी, तो बोले – “काम तो सही किया, लेकिन कानून के दायरे से बाहर किया। सज़ा जरूर मिलेगी।”

गाँव में सनसनी फैल गई। लोग हैरान थे – क्या बेटियों ने सही किया या गलत? क्या ऐसे हालात में कानून से ऊपर उठना जायज़ है? यह सवाल सबके मन में था।

कहानी का सार
इस दर्दनाक घटना ने पूरे गाँव को हिला दिया। राजकिशोर की ज़मीन की लालच, शिवकुमार की हवस, रूपा और राजकिशोर की गलतियाँ – सबने मिलकर दो मासूम बेटियों को अपराध की राह पर धकेल दिया। क्या समाज, परिवार, या कानून – किसकी जिम्मेदारी थी कि इन बेटियों को बचाया जाता? क्या दोष केवल बेटियों का है, या पूरे सिस्टम का?

यह कहानी एक चेतावनी है – लालच, गलत संबंध, और पारिवारिक विघटन किस हद तक इंसान को गिरा सकते हैं, और कैसे मासूम बच्चे इसकी बलि चढ़ जाते हैं।

आपकी राय क्या है? क्या बुलबुल और महक ने सही किया? या उन्हें कानून के अनुसार सज़ा मिलनी चाहिए?