“मेरी पत्नी माँ की सेवा का नाटक करती रही… लेकिन बिना बताए मैने ऐसी चाल चली कि…
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“सच्चाई का कड़वा सच”
मेरे नाम अविनाश है, और मेरी जिंदगी एक समय पर बिल्कुल परफेक्ट लगती थी। मैं 32 साल का था और नोएडा की एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर मैनेजर था। अच्छी सैलरी, खुद का फ्लैट, एक प्यार करने वाली पत्नी और मेरे साथ मेरी बीमार मां रमा जी। लोग अक्सर कहते थे कि अविनाश तुम तो बहुत लकी हो, तुम्हारी जिंदगी सही चल रही है। और मैं भी यही मानता था। मैंने कभी इस बात की गहराई से नहीं सोचा था कि सब कुछ सही चल रहा है, लेकिन एक दिन मेरी जिंदगी ने एक ऐसा मोड़ लिया, जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
मेरी पत्नी रतिका, जो बाहर से हमेशा एक आदर्श पत्नी और बहू दिखती थी, मेरी मां की बहुत सेवा करती थी। मुझे हमेशा लगता था कि मेरी मां बहुत भाग्यशाली हैं, क्योंकि रतिका उनका इतना ख्याल रखती थी। उनके खाने-पीने से लेकर, दवाइयों तक, डॉक्टर के पास ले जाना और उनका ध्यान रखना — वह सब कुछ करती थी। मैं भी अपनी पत्नी की हर इच्छा पूरी करता था। महंगे कपड़े, गहने, जो भी वह चाहती, मैं बिना सोचे-समझे उसे खरीद लाता था।
लेकिन एक दिन मेरी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। उस दिन मैं ऑफिस से जल्दी घर लौट आया था, क्योंकि मेरी मीटिंग कैंसिल हो गई थी। जैसे ही मैं घर पहुंचा, मुझे अजीब सी आवाजें सुनाई दीं, जो मेरी मां के कमरे से आ रही थी। मैंने सोचा, शायद वह अपने कमरे में कुछ कर रही होंगी, लेकिन जब मैंने कमरे में कदम रखा, जो मैंने देखा, उसने मेरी रूह तक हिला दी।
शरुआत में सब कुछ ठीक था
रतिका, मेरी पत्नी, हमेशा मेरी मां की देखभाल करती थी। उसे ऐसा लगता था कि वह एक परफेक्ट बहू है और उसे यह दिखाने की कोई कसर नहीं छोड़ती थी। जब भी मैं घर पर होता, मुझे यह दृश्य बहुत सुकून देने वाला लगता था कि रतिका मेरी मां का इतना ख्याल रख रही है। मेरी मां की हालत खराब थी, उम्र के साथ उनकी सेहत और भी बिगड़ने लगी थी। डॉक्टर कहते थे कि उनकी उम्र 65 साल की है, लेकिन उनका शरीर बहुत कमजोर हो चुका था, जिससे वह ठीक से चल नहीं पाती थीं।
मैं अपने काम में इतना व्यस्त था कि मां को ज्यादा समय नहीं दे पाता था, लेकिन मुझे एक सुकून था कि रतिका उनकी पूरी देखभाल कर रही थी। रतिका खुद ही कहती थी कि मेरी मां को वह अपनी मां से भी ज्यादा प्यार करती है और उनका पूरा ध्यान रखेगी। मुझे कोई शक नहीं था, मुझे लगता था कि मैं बहुत लकी हूं कि मुझे ऐसी पत्नी मिली है।

शक की शुरुआत
2 साल तक सब कुछ ठीक चलता रहा। मां की हालत भी धीरे-धीरे खराब होती जा रही थी, लेकिन मैं इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देता था। मुझे रतिका के व्यवहार में कोई कमी नहीं दिखी, और मैं उसे खुश रखने के लिए उसके हर इच्छा को पूरा करता रहा। एक दिन मैंने उसे दिवाली पर सोने का हार गिफ्ट किया था, लेकिन फिर भी मुझे कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था। मेरी मां की तबियत में सुधार क्यों नहीं हो रहा था? क्या कोई कमी तो नहीं है? मैंने कभी खुद मां की रिपोर्ट्स पर ध्यान नहीं दिया था, न ही उन्हें डॉक्टर के पास जाकर दिखाया था। यह सब मैंने रतिका पर छोड़ दिया था।
रतिका अक्सर मुझसे कहती थी, “अविनाश, मैं हर तरीके से मां की सेवा कर रही हूं, लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा। शायद मुझमें कोई कमी है।” यह सुनकर मुझे कुछ चिंता होती थी, लेकिन फिर भी मैं उसे समझाकर कहता था, “तुमने मां की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी, शायद उम्र का असर है।” लेकिन फिर भी कुछ ठीक नहीं था।
एक दिन का मोड़
एक दिन ऑफिस से जल्दी घर लौटने पर, मुझे कुछ अजीब सी आवाजें सुनाई दीं, जो मेरी मां के कमरे से आ रही थीं। मैं चुपचाप उनके कमरे की ओर बढ़ा और जो दृश्य मैंने देखा, उससे मेरी सांसें थम गईं। मेरी पत्नी रतिका, जो मुझे हमेशा अपनी आदर्श पत्नी लगती थी, मेरी मां के ऊपर चिल्ला रही थी। मां बिस्तर पर पड़ी हुई थीं, उनकी हालत बहुत खराब थी। रतिका गुस्से में चीख रही थी, “तू मर क्यों नहीं जाती? मुझसे तेरा बोझ नहीं उठाया जा रहा।”
यह सुनते ही मैं जैसे पत्थर का हो गया। मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि यह वही रतिका है, जो हमेशा मेरी मां का ख्याल रखती थी। यह सब देखकर मेरी आंखों में आंसू आ गए। मुझे महसूस हुआ कि यह सब एक झूठा नाटक था। रतिका मेरी मां को खत्म करना चाहती थी ताकि वह मेरी संपत्ति पर कब्जा कर सके। मैंने तुरन्त उसे पकड़कर कमरे से बाहर किया और अपनी मां को अस्पताल ले जाने के लिए गाड़ी में बैठाया।
सच्चाई का पर्दाफाश
रवि के दिल में एक गहरी चोट थी, लेकिन वह शांत रहा। उसने अपनी मां के इलाज के लिए पूरा ध्यान दिया। उसके बाद उसने जो कदम उठाया, उससे रतिका की पूरी सच्चाई सामने आ गई। रवि ने अमन, अपने कॉलेज के पुराने दोस्त, से मदद ली और वह अपने सभी संपत्ति की कागजात को अपनी मां के नाम करने में लगा। रतिका के पास अब कोई रास्ता नहीं था। वह सारी संपत्ति, बैंक अकाउंट, और गाड़ी, सब कुछ रवी की मां के नाम कर दिया।
इसके बाद रवि ने अपने दिमाग से काम लिया और रतिका को सबक सिखाने का फैसला किया। उसे अपनी संपत्ति से कुछ भी नहीं मिलेगा, और अगर वह कोर्ट में गई तो वह खुद को अकेला महसूस करेगी।
अंत में
कोर्ट में रतिका को झूठे आरोपों के कारण अपनी सारी उम्मीदें खोनी पड़ीं। रवि ने अपनी मां को पूरी तरह से सुरक्षित किया, और अब वह खुद को सच्चा बेटा महसूस करता था। रतिका के पास अब कुछ नहीं था, उसकी सारी योजनाएं विफल हो गईं। रवि ने अपनी मां को अपने घर में सुरक्षित किया, और वह अब खुश था कि उसने अपनी मां को सही रास्ते पर रखा।
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि कभी भी किसी को धोखा मत दो, और परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझो।
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