पत्नी की एक गलती की वजह से फौजी पति ने उठाया बड़ा कदम/अंजाम ठीक नहीं हुआ/

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पत्नी की एक गलती और फौजी पति का बड़ा कदम

यह कहानी एक ऐसे परिवार की है, जो प्यार, विश्वास और ग़लतफहमी के बीच में फंसकर टूट गया। यह एक पिता, एक बेटे और एक पत्नी के बीच के रिश्ते की कहानी है, जहाँ एक पत्नी की एक गलती के कारण परिवार में दरार आ जाती है। और इस गलती का परिणाम इतना भयंकर होता है कि किसी के लिए भी यह मान लेना मुश्किल होता है कि कोई ऐसा कदम उठा सकता है।

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के एक छोटे से गाँव बहादुरपुर में मोहर सिंह नामक किसान अपने परिवार के साथ रहता था। मोहर सिंह के पास आठ एकड़ जमीन थी, जिस पर वह खेती करता था। मोहर सिंह का जीवन साधारण था, लेकिन कुछ वर्षों पहले उसकी पत्नी की असामयिक मृत्यु ने उसे अकेला और उदास बना दिया। उसके दो बेटे थे— प्रताप और सुमेर। प्रताप, जो कि फौज में भर्ती हो चुका था, एक फौजी था और देश की सेवा कर रहा था। जबकि सुमेर, जो 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा था, एक होशियार और मेहनती लड़का था। मोहर सिंह ने अपने बड़े बेटे, प्रताप का रिश्ता एक लड़की संजना से तय कर दिया था और शादी के लिए दिन तय कर दिए थे।

शादी के बाद, प्रताप फौज की छुट्टी पर घर वापस लौटता है और संजना के साथ धूमधाम से शादी कर ली जाती है। दोनों के बीच समझदारी और प्रेम था, और दोनों एक खुशहाल जीवन जीने के लिए तैयार थे। हालांकि, कुछ समय बाद प्रताप को फिर से फौज में काम करने के लिए भेज दिया गया। प्रताप की अनुपस्थिति में संजना घर पर अकेली रह जाती है, जो उसे परेशान करने लगता है। धीरे-धीरे संजना को यह अकेलापन काफी अखरने लगता है और वह खुद को उबाऊ महसूस करने लगती है।

एक दिन, जब संजना का देवर सुमेर स्कूल जा रहा था, तो संजना की नीयत खराब हो गई और उसने अपने देवर को गलत रास्ते पर चलने के लिए उकसाया। संजना ने सुमेर को अकेले घर में काम करने के बहाने रखा, और धीरे-धीरे उसे अपने कमरे में बुलाया। जब सुमेर ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और संजना को मना किया, तो संजना का गुस्सा बढ़ गया। लेकिन सुमेर ने अपनी भाभी की बातों को नजरअंदाज किया और घर से बाहर चला गया।

संजना ने अपनी उस गलती को छुपाने की कोशिश की, लेकिन धीरे-धीरे उसके मन में यह ख्याल आने लगा कि वह किसी और के सहारे से अपना अकेलापन दूर कर सकती है। संजना का पड़ोसी सुरेश, जो ट्रक ड्राइवर था, एक दिन संजना के घर आया और दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। सुरेश और संजना का रिश्ते का सिलसिला बढ़ते-बढ़ते गलत रास्ते तक पहुँच गया, और दोनों के बीच कई बार आपत्तिजनक रिश्ते बने। यह रिश्ते तब तक चलने लगे जब तक संजना की संतुष्टि पूरी नहीं हो गई।

संजना और सुरेश की यह ग़लतफहमी धीरे-धीरे सुमेर के सामने आई। सुमेर ने अपनी भाभी को सुरेश के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा और उसे घर से बाहर निकाल दिया। उसने अपने भाई प्रताप से यह बात की, और प्रताप को यह समझने में देर नहीं लगी कि उसकी पत्नी गलत रास्ते पर चल पड़ी थी। प्रताप ने यह सब जानकर निर्णय लिया कि उसे इस ग़लत काम का जवाब देना होगा।

अक्तूबर 2025 में प्रताप घर वापस आया और उसकी नजरें उसकी पत्नी के साथ सुरेश के रिश्ते पर जा पड़ीं। प्रताप ने सब कुछ जानने के बाद यह तय किया कि वह अपनी पत्नी को सजा देगा। उसने रात के समय संजना को मारने की योजना बनाई। उसने अपनी पत्नी के मुंह पर कपड़ा बांधकर उसके गले को दबा दिया और उसे मौत के घाट उतार दिया।

अगली सुबह, मोहर सिंह ने अपने बेटे प्रताप और बहु संजना के कमरे का दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। मोहर सिंह और सुमेर ने दरवाजा तोड़कर अंदर देखा तो संजना की लाश पड़ी हुई थी और प्रताप उसके पास बैठा था। यह दृश्य देखकर सुमेर ने पुलिस को फोन किया, और पुलिस मौके पर पहुंची। प्रताप को गिरफ्तार किया गया और उसने पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी ने गलत रास्ता अपनाया था और उसके साथ सुरेश के रिश्ते के कारण उसने उसे मार डाला।

फौजी प्रताप का कदम जितना कठोर था, उतना ही दर्दनाक था। उसने अपनी पत्नी को एक ग़लत रास्ते पर चलने की सजा दी, लेकिन क्या यह कदम सही था या गलत? क्या परिवार में विश्वास को इस तरह से तोड़ा जा सकता था?

इस कहानी में हमें यह सिखने को मिलता है कि रिश्तों में विश्वास, ईमानदारी और जिम्मेदारी का बहुत महत्व है। कोई भी कदम उठाने से पहले हमें अपनी भावनाओं और निर्णयों पर गहराई से विचार करना चाहिए।

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