26th January की परेड मै घुस आया आतंकी!😱फिर जो हुआ…
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26th January की परेड में घुस आया आतंकी! फिर जो हुआ…
“छोड़ो मुझे। मैं इस देश को मिट्टी में मिला दूंगा।”
“अरे चुप कर। तेरे जैसे बहुत आए हैं इस देश को मिटाने। लेकिन जब तक इस देश में हमारे जैसे फौजी हैं, किसी मां के लाल में इतनी हिम्मत नहीं कि इस देश पर अपनी मनमानी कर सके।”
यह आवाजें उस दिन दिल्ली के राजपथ पर गूंज रही थीं। 26 जनवरी की सुबह, जब सर्द हवाओं के बीच तिरंगे की खुशबू घुल रही थी, तो कोई भी नहीं जानता था कि उस हवा में मौत का एक अदृश्य पैटर्न भी तैर रहा है। उस दिन भारत की संप्रभुता और स्वतंत्रता के प्रतीक के तौर पर परेड का आयोजन हो रहा था, लेकिन उसमें एक खतरनाक साया छुपा था।
राजपथ के दोनों ओर लोग सुबह से ही जमा हो चुके थे। बच्चे छोटे-छोटे झंडे लहरा रहे थे, रंग-बिरंगे गुब्बारे आसमान में उड़ रहे थे और बुजुर्गों की आंखों में गर्व और नम चमक थी। वर्दीधारी जवानों की चाल में वही सख्त अनुशासन था, जो किसी भी राष्ट्र की रीढ़ कहलाता है। बैंड की धुनें गूंज रही थीं, ढोल नगाड़ों की थाप दिलों की धड़कनों से ताल मिलाकर गूंज रही थी। सब कुछ बिल्कुल वैसा ही था, जैसा हर साल होता है।
लेकिन इसी सामान्य दृश्य के भीतर एक असामान्य साया भी धीरे-धीरे अपनी जगह बना चुका था। वह आदमी भीड़ में एक आम दर्शक की तरह दिख रहा था। सादी जैकेट, ऊनी टोपी, गले में पहचान पत्र और चेहरे पर हल्की मुस्कान, कभी मोबाइल निकालकर फोटो लेने का नाटक करता, कभी आसपास खड़े लोगों से देशभक्ति की बातें करता। उसकी हिंदी में हल्का सा अलग लहजा था, लेकिन इतना नहीं कि किसी को शक हो।
भीड़ में वह घुल-मिल गया था, लेकिन उसकी हर 10 कदम पर निगाहें इधर-उधर घूमती थीं, जैसे किसी संकेत का इंतजार कर रही हो। उसकी धड़कनों की लय गर्मजोशी से नहीं, बल्कि ठंडी गणना से चल रही थी।
सुरक्षा व्यवस्था कई परतों में थी। मेटल डिटेक्टर, फेस स्कैन, सशस्त्र जवान, हर पास सत्यापित और हर चेहरा दर्ज। फिर भी वह आदमी भीतर तक पहुंच चुका था। क्योंकि भेष बदलने की कला, नकली दस्तावेज और भीड़ की मनोविज्ञान, इन तीनों का मेल अक्सर सबसे मजबूत घेरों को भी पार कर जाता है।
उसका असली नाम किसी बंद फाइल में कैद था, लेकिन आज वह एक झूठे नाम और झूठी पहचान के साथ खड़ा था। वह आदमी भीड़ में घुल-मिल चुका था, लेकिन उसकी आँखों में एक खतरनाक इरादा था।
मेजर विवान मल्होत्रा की घातक नज़रें
कुछ दूरी पर एक और आदमी था, मेजर विवान मल्होत्रा। सादे कपड़ों में, बिना किसी दिखावे के, देखने में आम नागरिक जैसा। लेकिन उसकी आँखें परेड नहीं, बल्कि लोगों को पढ़ रही थीं। वर्षों की ट्रेनिंग ने उसे सिखाया था कि खतरा कभी ढोल बजाकर नहीं आता। वह खामोशी ओढ़कर चलता है।
विवान की नजर उस आदमी पर टिक कर नहीं रुकी। बस एक पल के लिए ठहरी, जैसे किसी संगीत में अचानक बेसुरा सुर उभर आया हो। उसने नोटिस किया कि वह आदमी हर बार कैमरा उठाते समय आसपास की सुरक्षा पोस्ट की दिशा में एक झलक जरूर डालता है।
बहुत छोटा संकेत था, लेकिन संकेत ही था। विवान ने अपने कान के पीछे लगे माइक्रो ईयर पीस को हल्का सा छुआ, कोई आदेश नहीं दिया। बस एक सूचना सिस्टम में छोड़ी। “सेक्टर C4, तीसरी पंक्ति, सादी जैकेट।”
विवान जानता था कि सिस्टम हर इनपुट को तोलता है क्योंकि गलत अलार्म से बचना उतना ही जरूरी होता है, जितना सही अलार्म देना।

परेड का सिलसिला और संदेह की शुरुआत
परेड शुरू हुई। बैंड की धुन के साथ कदम ताल आगे बढ़ी। टैंकों की गड़गड़ाहट और मिसाइलों की झलक पर तालियां गूंज उठी। उसी शोर में वह आदमी धीरे-धीरे आगे खिसकने लगा। उसकी उंगलियां जैकेट की जेब में कुछ खोजती हुई सी लगीं। चेहरा शांत था, लेकिन आँखें तेज और सतर्क।
विवान ने जूते का फीता ठीक करने का नाटक किया और झुकते हुए सामने खड़े जवान को एक बहुत छोटा सा इशारा किया। इतना छोटा कि अगर कोई देख भी ले, तो समझ ना पाए।
एक संदेह और उसकी पुष्टि
तभी अचानक एक बच्चा रोने लगा। भीड़ में हल्की सी हलचल हुई। वह आदमी रुक गया और मुस्कुराते हुए बच्चे को चॉकलेट दे दी। आसपास के लोग पिघल गए। किसी ने कहा, “कितना अच्छा आदमी है!”
लेकिन विवान जानता था कि यही वह पल होता है जब संदेह सबसे पहले मरता है। उसकी नजर उस आदमी की कलाई पर गई। घड़ी की पट्टी पर एक छोटा सा उभार था, जो सामान्य नहीं लग रहा था।
मंच पर राष्ट्रगान की तैयारी शुरू हो चुकी थी, और समय तेजी से सिकुड़ रहा था। सिस्टम हरकत में आया। एक और सादे कपड़ों वाला जवान पास पहुंचा। रास्ता पूछने के बहाने बातचीत हुई। आवाज का उतार-चढ़ाव, शब्दों का चयन, आँखों की दिशा — सब रिकॉर्ड किया गया।
विवान का निर्णय और गिरफ्तारी
आदमी जवाब दे रहा था, लेकिन उसकी नजरें भीड़ में किसी तय बिंदु को लगातार खोज रही थी। विवान ने तय कर लिया कि अब इंतजार नहीं किया जा सकता। वह बेहद सहजता से आगे बढ़ा। ठीक उसी पल उस आदमी का हाथ जैकेट की जेब में चला गया और उसी सेकंड दो मजबूत हाथ उसके कंधों पर पड़े।
“भाई साहब, पहचान पत्र दिखाइए।” आवाज शांत थी, लेकिन उसमें कोई गुंजाइश नहीं थी। आदमी पलटा और एक सेकंड के लिए उसकी आँखों में वह झलक दिखी, जिसे कोई भी मास्क छुपा नहीं सकता।
सुरक्षा घेरा और पब्लिक को शांत करना
घबराहट के बावजूद, भीड़ को कुछ समझ नहीं आया। सवाल उठे, लेकिन सुरक्षा घेरा तुरंत सख्त हो गया। आसपास के लोगों को धीरे-धीरे पीछे हटाया गया, लेकिन परेड की धुन जारी रही क्योंकि देश की धड़कन को रुकने नहीं दिया जा सकता था।
आदमी ने हंसने की कोशिश की और पहचान पत्र बढ़ाया। कागज देखने में असली था, लेकिन विवान की नजर उस घड़ी पर टिकी थी।
“घड़ी उतारिए।” विवान ने कहा। पल भर की खामोशी छा गई। आदमी का हाथ कांपा। उसी पल एक और जवान आगे बढ़ा। सब कुछ सेकंडों में हुआ। घड़ी उतरी, पट्टी खुली और भीतर छिपा सच सामने आ गया।
अंतिम मुकाबला और सच्चाई का खुलासा
विवान ने गहरी सांस ली, लेकिन वह जानता था कि खेल अभी खत्म नहीं हुआ है। क्योंकि उसकी ट्रेनिंग साफ कहती थी कि अकेला मोहरा अक्सर ध्यान भटकाने के लिए होता है।
उसने इयर पीस में कहा, “कोड एमबर, सभी सेक्टर स्कैन।” और उसी वक्त मंच पर तिरंगा ऊपर उठने लगा। हवा में गर्व की लहर दौड़ गई। लोग तालियां बजा रहे थे, लेकिन किसी को नहीं पता था कि उसी हवा में खतरा भी तैर रहा था और उसी हवा ने उसे दबा भी दिया था।
वह आदमी बेहद शांति से वहां से ले जाया गया, बिना किसी शोर के, बिना किसी चीख के। और परेड उसी लय में आगे बढ़ती रही, जैसे कुछ हुआ ही ना हो।
सुरक्षा और चुनौती का अंत
लेकिन विवान जानता था कि यह सिर्फ कहानी का पहला अध्याय था। सबसे शांत अध्याय क्योंकि असली तूफान हमेशा उसके बाद आता है।
विवान की ट्रेनिंग और अनुभव उसे लगातार सतर्क बनाए रखते थे। उसे पता था कि यह जो कुछ हुआ था, यह सिर्फ एक शुरुआत थी। आतंकवादियों का उद्देश्य सिर्फ भारत को कमजोर करना नहीं था, बल्कि वह दुनिया को यह संदेश देना चाहते थे कि किसी भी देश की सुरक्षा को तोड़ा जा सकता है। विवान को अब एहसास हो चुका था कि इस दिन की परेड केवल एक इन्फिल्ट्रेशन का हिस्सा थी, जो शिकार के रूप में हमारे राष्ट्र का आत्मविश्वास तोड़ने की कोशिश कर रही थी।
कमरे में अल्फा का खुलासा
सुरक्षा मुख्यालय में देर रात तक इंटेलिजेंस की बैठकें चल रही थीं। विवान ने अब उस संदिग्ध आदमी के सामने खड़े होकर सख्त सवाल करने की योजना बनाई थी। वह जानता था कि उसे या तो जवाब मिलेगा, या वह अगले हमले के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी हासिल कर सकेगा।
विवान ने कांच के कमरे में उस आतंकी को देखा। वह आदमी अब भी शांत था, जैसे कि उसने सब कुछ जान-बूझकर किया हो और अब उसे कोई पछतावा नहीं था। विवान ने अपनी आंखों में पूरी स्थिति का आकलन करते हुए कहा, “तुम भारत में एक बहुत बड़ा खेल खेलने आए थे।”
आतंकी ने सिर उठाया और मुस्कुराते हुए कहा, “हमारे लिए यह सिर्फ एक शुरुआत है। तुम इसे रोक सकते हो, लेकिन हम सब जगह हैं। कोई जगह अब सुरक्षित नहीं है।”
विवान ने उसकी मुस्कान की कोई परवाह नहीं की। “क्या तुमने सोचा था कि इस देश को डराया जा सकता है? क्या तुम जानते हो कि यह देश जितना तुम्हें कमजोर लगेगा, उतना मजबूत होता जाएगा?”
आतंकी ने सिर झुका लिया और फिर उसने धीरे-धीरे कहा, “हमारा उद्देश्य था एक संदेश देना, लेकिन आज तुमसे मिलकर मुझे लगता है कि तुम्हारा देश अजेय है।”
अगली चाल का पता चलता है
विवान जानता था कि अब जो बात इस आतंकी के मुंह से निकलेगी, वह उसे अगले कदम का संकेत देगी। उस आदमी ने फिर कुछ गहरी सांस ली और बोला, “हमारा असली उद्देश्य तो कुछ और था। हम चाहते थे कि हमारे साथ जो भी लोग हैं, वे हमारे द्वारा तय की गई दिशा में काम करें। हम तुमसे ज्यादा आंतरिक रूप से जुड़े हुए हैं, तुमसे ज्यादा अंदर तक घुसे हुए हैं।”
विवान को एहसास हुआ कि ये आतंकवादी केवल एक छोटे से दल का हिस्सा नहीं थे, बल्कि उनका नेटवर्क कहीं अधिक जटिल था, जो हमारे देश के अंदर कहीं गहरे बैठा था।
अल्फा का चेहरा और गहरी साजिश
विवान ने उस व्यक्ति से पूछा, “तुम किसके लिए काम करते हो? किसका आदेश था?”
आतंकी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान फैली, लेकिन विवान ने देखा कि अब उसका आत्मविश्वास टूट चुका था। वह जानता था कि यह व्यक्ति अब घबराया हुआ था, क्योंकि उसने अपने सबसे बड़े रहस्य को उजागर कर दिया था।
आतंकी ने जवाब दिया, “हमारी आंतरिक साजिश बहुत बड़ी है, और हम बहुत शक्तिशाली हैं। वह शक्ति जो किसी सरकार के काबू में नहीं आ सकती। अब तुम इसे रोकने के लिए जो भी करोगे, हम तुमसे एक कदम आगे होंगे।”
विवान ने इयरपीस में कुछ कहा, और अचानक सभी के चेहरे पर जो निश्चिंतता दिख रही थी, वह घबराहट में बदल गई।
विवान की सूझबूझ और नए संकेत
विवान ने अपनी टीम को एक अलर्ट जारी किया। वह जानता था कि इस वक्त सबसे महत्वपूर्ण काम यह था कि वह इस व्यक्ति की पूरी जानकारी और साजिश को सार्वजनिक करें, ताकि देशभर में चेतावनी दी जा सके। लेकिन वह यह भी जानता था कि खतरा केवल इस एक आतंकी तक सीमित नहीं था।
विवान ने तुरंत अपने दल के अधिकारियों से संपर्क किया और बताया कि यह मामला एक और बड़े नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा, “इस समय हमें बाहरी ताकतों से लड़ने के बजाय हमारी आंतरिक सुरक्षा का मजबूत करना होगा।”
टाइमर का खतरा और उसे हल करना
विवान के निर्देशों पर टीम ने सेक्टर D को तुरंत स्कैन करना शुरू कर दिया। यह वही क्षेत्र था, जहां परेड की लाइव फीड जा रही थी। यह बेहद संवेदनशील था, क्योंकि अगर कुछ गलत होता तो पूरी दुनिया उसे लाइव देखती। विवान और उसकी टीम ने बिना किसी शोर-शराबे के सटीक योजना बनाई और उस युवक को पकड़ लिया, जो मीडिया स्टाफ जैसा दिखाई दे रहा था। उसकी आंखों में बुरा इरादा था।
जैसे ही विवान ने उस युवक को पकड़ लिया, उसकी नजरें अचानक बदलीं। एक छोटे से कैमरे से जो उपकरण निकला, वह बेहद खतरनाक था। विवान ने तुरंत बॉम्ब स्क्वाड को अलर्ट किया और उस उपकरण को निष्क्रिय करने का आदेश दिया।
सुरक्षा में अंतिम कदम
सभी जवानों ने मिलकर उस डिवाइस को निष्क्रिय किया और कोई भी अनहोनी नहीं होने दी। एक मिनट में वह खतरनाक उपकरण निष्क्रिय कर दिया गया था, और देशभर में किसी को भी इस हमले का अंदाजा नहीं हुआ।
सभी सुरक्षा एजेंसियां राहत की सांस ले रही थीं, लेकिन विवान की आँखों में अब भी एक सवाल था – क्या इस खतरनाक साजिश का अंत यहीं हुआ है? क्या अगला कदम कुछ और बड़ा था?
नई चाल और खतरे की गहरी साजिश
विवान मल्होत्रा ने अपनी पूरी टीम को सतर्क किया। अब वह जान चुका था कि यह खतरा सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि देशभर में कहीं न कहीं इस तरह की घटनाओं का दायरा फैल चुका था। वह समझ चुका था कि यह पूरी साजिश एक गहरी नेटवर्क की कड़ी थी, जो सिर्फ भारत को ही नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा को भी कमजोर करने के लिए बनाई गई थी।
विवान का दिमाग तेज़ी से काम कर रहा था। उसके सामने एक बड़ी चुनौती थी: इस आतंकवादी नेटवर्क को पूरी तरह से समाप्त करना। वह जानता था कि केवल इस एक आदमी को पकड़ने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि नेटवर्क के अंदर और भी लोग थे, जो अब तक छुपे हुए थे।
गहरी साजिश का खुलासा
विवान ने अपनी टीम के साथ मिलकर उस युवक से पूछताछ जारी रखी। इस बार, उसने आत्मविश्वास से भरकर, और भी कड़ी पूछताछ शुरू की।
“तुमसे हम क्या उम्मीद कर सकते हैं?” विवान ने उससे पूछा।
आतंकी ने धीमी आवाज में जवाब दिया, “हमारे पास सिर्फ एक मोहरा है। बाकी के लोग अभी अपनी जगहों पर हैं। हम हर जगह हैं।”
विवान को यह समझ में आ गया था कि यह एक पूरे संगठन का हिस्सा था, और यह सिर्फ एक साधारण हमला नहीं था, बल्कि एक बड़े ऑपरेशन का हिस्सा था।
“तुम क्या चाहते हो?” विवान ने अगला सवाल किया।
आतंकी हंसा और फिर एक गहरी सांस ली। “हम चाहते हैं कि तुम डर जाओ। तुमसे उम्मीद है कि तुम हमें रोक सकोगे, लेकिन जब हम चाहते हैं, हम तुम्हारी दुनिया को पलट सकते हैं।”
विवान ने बारीकी से उसकी आंखों में देखा, जैसे वह किसी गहरे रहस्य को जानने की कोशिश कर रहा हो।
“तुम्हारा असली उद्देश्य क्या है?” विवान ने पूछा।
आतंकी ने कुछ पल चुप रहकर कहा, “हम चाहते हैं कि इस देश का विश्वास टूट जाए। हमें यह दिखाना है कि कोई भी सुरक्षा तंत्र किसी भी समय भंग हो सकता है।”
विवान ने उसकी बातों को सुना और फिर तेजी से आगे बढ़ते हुए उससे कहा, “तुम्हारी योजना कभी सफल नहीं हो सकती। क्योंकि हम तैयार हैं, और इस देश का आत्मविश्वास कभी टूटने नहीं पाएगा।”
सीक्रेट ऑपरेशन और नए इंटेल
विवान और उसकी टीम को अब समझ आ चुका था कि इस आतंकवादी नेटवर्क का हिस्सा बनने वाले लोग कई स्थानों पर छुपे हुए हैं। एक और बड़ी चुनौती यह थी कि देशभर में एक साथ कई जगहों पर संभावित हमले हो सकते थे।
विवान ने इंटेलिजेंस से संपर्क किया और सारे प्रमुख स्थानों पर गहरी निगरानी रखने का आदेश दिया। एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल्स, और अन्य प्रमुख सेंसिटिव स्थानों पर सुरक्षा को बढ़ा दिया गया।
विवान की टीम ने इंटेलिजेंस डेटा के आधार पर कुछ संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक किया और पाया कि एक और प्रमुख व्यक्ति, जो इस ऑपरेशन का अहम हिस्सा था, अभी भी देश में ही मौजूद था। विवान ने इसे एक सीक्रेट ऑपरेशन बना दिया और उस संदिग्ध के स्थान का पता लगाने के लिए अपनी टीम को भेजा।
नई गिरफ्तारी और नेटवर्क का पर्दाफाश
विवान की टीम ने अंततः उस संदिग्ध को पकड़ लिया। वह व्यक्ति एक बड़े आतंकवादी नेटवर्क का मास्टरमाइंड था, जो अब तक अपने हमलों को बहुत सावधानी से अंजाम दे रहा था। यह गिरफ्तारी एक बड़ी सफलता थी, क्योंकि इससे पूरे आतंकवादी नेटवर्क का खुलासा हुआ।
विवान ने उसके सामने बैठकर उससे सवाल किया, “तुम्हारा असली उद्देश्य क्या है? अब यह सब कैसे खत्म होगा?”
आतंकी ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुमने बहुत समय पहले हमारे दिमाग को समझ लिया था। अब हम तुमसे एक कदम आगे हैं। हम तुम्हें कभी नहीं जीतने देंगे।”
विवान ने अपनी टीम को तुरंत अलर्ट कर दिया और कहा, “अब कोई भी हमला नहीं होगा। हमें हर कदम पर सावधानी बरतनी होगी।”
आखिरी साजिश और देश की सुरक्षा
विवान और उसकी टीम ने अंततः देशभर में फैले इस नेटवर्क को नष्ट कर दिया। हर स्थान पर आतंकवादियों की गिरफ्तारी की गई, और जो बचे हुए थे, उन्हें पूरी तरह से बेनकाब कर दिया गया।
इस दौरान, विवान ने खुद को बिल्कुल शांत रखा। उसे एहसास था कि देश की सुरक्षा को बनाए रखने के लिए कभी-कभी आपको अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है।
एक दिन, जब विवान अपने मुख्यालय से बाहर निकला, तो उसे दिल्ली की सड़कों पर एक अलग ही दृश्य दिखाई दिया। तिरंगा लहरा रहा था, और लोगों की आँखों में गर्व था। यह सब विवान को यह एहसास दिलाता था कि उसकी मेहनत और सूझबूझ ने आज देश को सुरक्षित बना दिया था।
निष्कर्ष और भविष्य की तैयारियां
विवान मल्होत्रा जानता था कि सुरक्षा की लड़ाई कभी खत्म नहीं होती। यह एक लंबा और कठिन रास्ता है, जिसमें हर दिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन एक बात वह जानता था – जब तक देश में ऐसे जवान हैं, जिनमें देश के प्रति वफादारी और जिम्मेदारी की भावना है, कोई भी आतंकवाद या खतरा भारत की शांति और सुरक्षा को भंग नहीं कर सकता।
अब, भारत सुरक्षित था, और विवान जानता था कि अगले किसी खतरे का सामना करने के लिए उसे हमेशा तैयार रहना होगा।
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