पति को ड्राइवर समझ ताने मारती थी — जब हेलिकॉप्टर से उतरा, तो होश उड़ गए|

छद्मवेशी सम्राट: अपमान की राख से उपजा साम्राज्य

अध्याय 1: मुंबई की सुबह और तीखे ताने

मुंबई की भागती-दौड़ती जिंदगी में सुबह का कोहरा अभी छंटा भी नहीं था कि उपनगरीय इलाके की एक आलीशान दिखने वाली कॉलोनी के एक फ्लैट में तानों का शोर गूंजने लगा।

“अरे ओ निठल्ले! मेरी बेटी के टुकड़ों पर पलने वाले ड्राइवर! अभी तक गाड़ी साफ नहीं की?” यह आवाज शर्मिला की थी, जो अनन्या की मां और अभिनव की सास थी।

अभिनव, जो अपनी पुरानी घिसी हुई चप्पलें पहन रहा था, चुप रहा। उसने अपनी फटी हुई कमीज की आस्तीन ऊपर चढ़ाई और बाल्टी उठाकर नीचे की ओर चल दिया। उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी, जैसी किसी गहरी झील के ऊपर होती है, जबकि नीचे कोई भयंकर तूफान छिपा हो।

ऊपर बालकनी में खड़ी अनन्या, जो ‘सिंह इंडस्ट्रीज’ की प्रबंध निदेशक (MD) थी, अपने हाथ में कॉफी का मग लिए नफरत भरी नजरों से अभिनव को देख रही थी। 2 साल पहले उसके दादाजी ने अपनी वसीयत में एक शर्त रखी थी—यदि अनन्या अभिनव से शादी करती है, तभी उसे पूरी संपत्ति मिलेगी। अनन्या ने दौलत के लिए शादी तो कर ली, लेकिन अभिनव को कभी पति का दर्जा नहीं दिया। उसके लिए अभिनव बस एक मुफ्त का ड्राइवर और नौकर था।

अध्याय 2: चप्पलों का अपमान और गार्ड की हंसी

“अभिनव, 9:00 बजे बोर्ड मीटिंग है। गाड़ी गेट पर लगाओ और ध्यान रहे, आज दफ्तर के अंदर मत आना। मुझे शर्म आती है यह बताते हुए कि तुम मेरे पति हो,” अनन्या ने अपनी सैंडल पहनते हुए ठंडे लहजे में कहा।

अभिनव ने केवल सिर झुकाया। “जी मैम।”

रास्ते भर अनन्या अपने फोन पर बिजनेस ईमेल देखती रही। उसने एक बार भी अभिनव की ओर नहीं देखा। ऑफिस के गेट पर पहुँचते ही सुरक्षा गार्ड ने गाड़ी रोकी।

“ओए ड्राइवर! गाड़ी पार्किंग में लगा और बाहर टपरी पर बैठकर चाय पी। अंदर साहबों की मीटिंग है,” गार्ड ने अभिनव की घिसी हुई चप्पलों को देखकर उपहास उड़ाया।

अनन्या गाड़ी से उतरी और गार्ड से बोली, “रामू, इसे अंदर मत आने देना। यह सिर्फ मेरा ड्राइवर है।”

अभिनव ने अनन्या का टिफिन थामे बाहर धूप में इंतजार किया। उसके पास एक पुराना टूटा हुआ फोन था, जिस पर एक मैसेज आया: ‘टाइगर, सारा जाल बिछा दिया गया है। बस आपके आदेश का इंतजार है।’ अभिनव की आँखों में एक क्षण के लिए बिजली सी चमकी और फिर वह सामान्य हो गया।

अध्याय 3: वह रहस्यमयी कॉल

उसी रात, जब पूरा घर सो रहा था, अभिनव चुपके से बालकनी में गया। उसने अपनी जेब से एक दूसरा फोन निकाला—एक ऐसा डिवाइस जो दुनिया के किसी भी रडार में नहीं आ सकता था।

“हाँ अकरम, विंसेंट की हर हरकत पर नजर रखो। वह सिंह इंडस्ट्रीज को निगलना चाहता है, उसे लगने दो कि वह जीत रहा है। कल सुबह मैं ‘सफायर’ होटल आ रहा हूँ, तैयारी पूरी रखना,” अभिनव की आवाज अब वह दबी-कुचली नहीं थी। उसकी आवाज में वह अधिकार था जो राजाओं के पास होता है।

अगली सुबह अभिनव ने अनन्या से झूठ बोला कि वह बीमार है और गाड़ी नहीं चला पाएगा। वह अपनी पुरानी साइकिल उठाकर मुंबई के सबसे महंगे फाइव स्टार होटल ‘सफायर’ की ओर निकल पड़ा।

होटल के गेट पर दरबान ने उसे रोक लिया। “ए भिखारी! यहाँ से भाग, यह होटल तेरे पूरे खानदान की कीमत से ज्यादा महंगा है।”

तभी वहां अभिनव की पुरानी प्रेमिका वैभवी अपने अमीर बॉयफ्रेंड रॉकी के साथ उतरी। “अरे देखो रॉकी, यह तो अभिनव है! बेचारा आज भी चप्पलें घिस रहा है। अनन्या ने शायद इसे घर से निकाल दिया।”

रॉकी ने हंसते हुए एक 10 रुपये का सिक्का अभिनव की ओर फेंका। “जा बेटा, वड़ा पाव खा ले।”

अभिनव ने वह सिक्का उठाया और मुस्कुराकर अपनी जेब में रख लिया। तभी एक काली लिमोजिन रुकी और उसमें से अकरम उतरा, जो उस होटल का मालिक था। जैसे ही अकरम की नजर अभिनव की उंगली में पहनी उस अंगूठी पर पड़ी जिस पर ‘ताज’ का निशान था, उसके पसीने छूट गए।

अकरम दौड़कर आया और सबके सामने अभिनव के पैरों में गिर पड़ा। “माफ कर दीजिए टाइगर! मैंने आपको पहचाना नहीं।”

वैभवी और रॉकी के चेहरे का रंग उड़ गया। अकरम, जो मुंबई के आधे होटलों का मालिक था, इस ‘भिखारी’ के पैरों में क्यों था?

अध्याय 4: सिंह इंडस्ट्रीज पर संकट

इधर अनन्या की कंपनी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। एक वायरल वीडियो ने पूरी मार्केट में तहलका मचा दिया। वीडियो में अनन्या नशे की हालत में एक क्लब में नाचती दिख रही थी। यह वीडियो पूरी तरह से ‘डीप फेक’ (AI द्वारा निर्मित) था, जिसे विंसेंट और रॉकी ने मिलकर बनाया था।

अनन्या के शेयर 50% गिर गए। बोर्ड के सदस्यों ने उसे हटाने की मांग की। अनन्या के ऑफिस में हंगामा मच गया। “अनन्या मैम, हमारा दिवाला निकल जाएगा! निवेशक अपना पैसा वापस मांग रहे हैं,” चिराग, उसका बिजनेस पार्टनर चिल्लाया।

तभी अभिनव टिफिन लेकर वहां पहुँचा। “मैम, आपका खाना।”

“निकल जाओ यहाँ से!” अनन्या रोते हुए चिल्लाई। “सब बर्बाद हो गया और तुम्हें खाने की पड़ी है? तुम्हारे जैसे अनपढ़ ड्राइवर को क्या पता कि इज्जत क्या होती है!”

अभिनव ने शांति से अपना फोन निकाला। “मैम, मुझे 2 मिनट दीजिए। शायद मैं कुछ कर सकूँ।”

चिराग हंसा, “तू क्या करेगा? इंटरनेट बंद करवाएगा?”

अभिनव ने एक नंबर डायल किया। “अकरम, पूरे देश का इंटरनेट अगले 2 घंटे के लिए ‘मेंटेनेंस’ पर डाल दो। वह वीडियो हर सर्वर से डिलीट होना चाहिए। और हां, रॉकी के सारे बैंक अकाउंट फ्रीज करवा दो।”

हॉल में सन्नाटा छा गया। 5 मिनट के भीतर पूरे देश में इंटरनेट ठप हो गया। न्यूज़ चैनलों पर ब्रेकिंग न्यूज़ आने लगी—’भारत में डिजिटल ब्लैकआउट’। 2 घंटे बाद जब इंटरनेट वापस आया, तो वह वीडियो इंटरनेट के इतिहास से मिट चुका था।

अध्याय 5: टाइगर की वापसी

अनन्या और उसके कर्मचारी हैरान थे। तभी पुलिस और साइबर सेल के अधिकारी विक्की को घसीटते हुए अंदर लाए। “मैम, इस लड़के ने रॉकी के कहने पर वह वीडियो बनाया था।”

रॉकी का फोन आया, वह अब गिड़गिड़ा रहा था। “अनन्या, मुझे बचा लो! मेरा सारा बिजनेस डूब गया, मेरे अकाउंट फ्रीज हो गए हैं। कोई अज्ञात शक्ति मुझे बर्बाद कर रही है!”

अभिनव ने फोन झपट लिया। “रॉकी, वह ‘अज्ञात शक्ति’ मैं हूँ। जिसे तुमने कल 10 रुपये का सिक्का दिया था।”

फोन दूसरी तरफ से गिर गया।

अनन्या के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। “अभिनव… तुम कौन हो?”

अभिनव ने अपनी जेब से एक दस्तावेज निकाला। वह ‘अहो कॉरपोरेशन’ का मालिक था—वही कंपनी जो सिंह इंडस्ट्रीज की असली निवेशक थी।

“मैं टाइगर हूँ, अनन्या। भारत की अर्थव्यवस्था का वह खिलाड़ी जिसे कोई नहीं देख सकता। तुम्हारे दादाजी मेरे पिता के परम मित्र थे। उन्होंने तुम्हारी रक्षा का वचन मुझसे लिया था। मैंने ड्राइवर का रूप इसलिए लिया ताकि मैं देख सकूँ कि क्या तुम मुझे बिना पैसे और रुतबे के प्यार कर सकती हो।”

शर्मिला (सास) जो वहीं खड़ी थी, फूट-फूट कर रोने लगी। “बेटा, मुझे माफ कर दो! मैंने तुम्हें क्या-कुछ नहीं कहा।”

अभिनव ने अपनी सास के पैर छुए। “मां, आपने जो किया वह एक मां की चिंता थी। मुझे कोई गिला नहीं।”

अनन्या ने अभिनव का हाथ थाम लिया। उसकी आँखों में पश्चाताप के आंसू थे। “अभिनव, मैंने तुम्हें हर कदम पर जलील किया। क्या तुम मुझे कभी माफ कर पाओगे?”

अभिनव ने मुस्कुराते हुए अनन्या के माथे को चूमा। “प्यार में माफी नहीं होती अनन्या, सिर्फ समर्पण होता है। मैं कल भी तुम्हारा ड्राइवर था, और आज भी तुम्हारी जिंदगी की गाड़ी का ड्राइवर हूँ। बस अब गंतव्य बदल गया है।”

अध्याय 6: एक नई शुरुआत

अगले दिन मुंबई के अखबारों में हेडलाइन थी—’सिंह इंडस्ट्रीज का रहस्यमयी तारणहार’। रॉकी और विंसेंट सलाखों के पीछे थे।

अनन्या और अभिनव अब एक साथ ऑफिस जाते हैं, लेकिन अभिनव आज भी सादगी पसंद करता है। वह आज भी कभी-कभी वही पुरानी चप्पलें पहनता है, ताकि उसे याद रहे कि इंसान की कीमत उसके जूतों से नहीं, उसके चरित्र से होती है।

अकरम और शहर के बड़े-बड़े बिजनेसमैन आज भी अभिनव के एक कॉल का इंतजार करते हैं। लेकिन अभिनव के लिए सबसे बड़ी जीत उसकी पत्नी का वह प्यार था, जिसे उसने अपनी ‘छिपी हुई ताकत’ से हासिल किया था।

शिक्षा: किसी की सादगी को उसकी कमजोरी समझने की भूल न करें। अक्सर शांत दिखने वाले समुद्र के नीचे ही सबसे कीमती मोती और सबसे विशाल तूफान छिपे होते हैं।