कं*डोम फटने से महिला और ट्रक ड्राइवर के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/पुलिस के भी होश उड़ गए/

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कंडोम फटने की अफ़वाह से फैली दहशत, अवैध संबंधों और गलतफहमी ने ली एक महिला की जान

प्रतापगढ़ की घटना ने उठाए कई गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य से जुड़े सवाल

प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश):
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। अवैध संबंधों, लालच, सामाजिक डर और एचआईवी/एड्स को लेकर फैली गलतफहमियों के चलते एक महिला की नृशंस हत्या कर दी गई। इस मामले में एक पड़ोसी व्यक्ति ने खुद पुलिस थाने जाकर आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ।

यह मामला केवल एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह समाज में यौन स्वास्थ्य, जागरूकता की कमी, और कानून के बजाय हिंसा को चुनने की मानसिकता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


मृतका का पारिवारिक और सामाजिक पृष्ठभूमि

मृतका रोशनी देवी प्रतापगढ़ जिले के पतनपुरी गांव की रहने वाली थी। उसके पति की कई वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी थी। वह अपने सात वर्षीय बेटे के साथ गांव के बाहर सड़क किनारे स्थित घर में रहती थी। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी। रोशनी के पास लगभग दो एकड़ जमीन थी और घर के साथ दो दुकानें भी थीं, जिनमें से एक दुकान में उसने कुछ समय पहले किराने का व्यवसाय शुरू किया था।

सड़क किनारे स्थित होने के कारण उसकी दुकान पर स्थानीय लोगों के साथ-साथ राहगीर और ट्रक चालक भी आते-जाते रहते थे। शुरुआती समय में दुकान से उसकी आमदनी ठीक-ठाक चलने लगी थी।


अकेलापन, आर्थिक दबाव और गलत फैसले

पुलिस जांच के अनुसार, पति की मृत्यु के बाद रोशनी देवी मानसिक रूप से काफी अकेलापन महसूस करने लगी थी। आर्थिक स्थिरता के बावजूद सामाजिक सहारे की कमी ने उसे कमजोर बना दिया। इसी दौरान उसकी मुलाकात एक ट्रक चालक राजकुमार से हुई, जो अक्सर उसी मार्ग से गुजरता था।

जांच में सामने आया कि समय के साथ दोनों के बीच अवैध संबंध बन गए। बाद में राजकुमार के माध्यम से अन्य लोग भी रोशनी के संपर्क में आए। यह सिलसिला धीरे-धीरे बढ़ता गया और रोशनी देवी गलत संगत और लालच के जाल में फंसती चली गई।


पड़ोसियों तक पहुंची भनक

कुछ समय बाद गांव में हलचल शुरू हुई। रोशनी देवी की आर्थिक स्थिति में अचानक सुधार और उसका व्यवहार लोगों को खटकने लगा। इसी दौरान उसकी पड़ोसन रजनी देवी को रोशनी ने कथित रूप से अपने अवैध संबंधों के बारे में बता दिया।

रजनी देवी ने इस गतिविधि से खुद को अलग रखा, लेकिन बाद में उसने यह बात अपने पति रणजीत सिंह को बता दी। यही सूचना आगे चलकर एक बड़े अपराध की वजह बनी।


बीमारी की जानकारी और बढ़ता डर

नवंबर 2025 में रोशनी देवी की तबीयत अचानक खराब होने लगी। चक्कर आना, कमजोरी और सांस फूलने जैसी शिकायतों के बाद वह शहर के एक अस्पताल में जांच के लिए गई। मेडिकल रिपोर्ट में उसके एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई।

डॉक्टरों ने उसे इलाज, सावधानी और नियमित दवाओं की सलाह दी। लेकिन सामाजिक डर और मानसिक दबाव के कारण रोशनी देवी पूरी तरह टूट गई। उसने यह जानकारी अपनी पड़ोसन रजनी देवी को दी, जिसने बाद में यह बात अपने पति रणजीत सिंह को बता दी।


गलतफहमी ने लिया हिंसक रूप

रणजीत सिंह, जिसने पहले रोशनी देवी के साथ संबंध होने की बात स्वीकार की है, इस जानकारी से बुरी तरह घबरा गया। बिना किसी चिकित्सीय सलाह और कानूनी प्रक्रिया को अपनाए, उसने यह मान लिया कि वह भी एचआईवी संक्रमित हो गया है।

हालांकि बाद में जांच में रणजीत सिंह के भी एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि एचआईवी संक्रमण का स्रोत तय करना इतना सरल नहीं होता और इसके लिए वैज्ञानिक जांच व समयरेखा की जरूरत होती है।

इसके बावजूद रणजीत सिंह ने गुस्से, डर और बदले की भावना में आकर एक खौफनाक कदम उठा लिया।


नृशंस हत्या और आत्मसमर्पण

23 नवंबर की शाम रणजीत सिंह ने धारदार हथियार से रोशनी देवी की उसके घर में हत्या कर दी। वारदात के समय घर में उसका बेटा मौजूद नहीं था। हत्या के बाद रणजीत सिंह सीधे नजदीकी पुलिस थाने पहुंचा और आत्मसमर्पण करते हुए अपना अपराध स्वीकार कर लिया।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया, पोस्टमार्टम कराया और आरोपी के खिलाफ हत्या (IPC 302) समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया।


पुलिस जांच और कानूनी स्थिति

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला बेहद संवेदनशील है। जांच में यह साफ हुआ है कि यह हत्या कानून के बाहर जाकर बदला लेने की मानसिकता का नतीजा है। आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया जारी है।

पुलिस का कहना है कि

“किसी बीमारी के शक या पुष्टि के आधार पर किसी की जान लेना कानूनन और नैतिक रूप से दोनों ही अपराध है।”


एचआईवी/एड्स को लेकर विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस मामले पर चिंता जताते हुए कहा कि समाज में आज भी एचआईवी/एड्स को लेकर भारी भ्रांतियां हैं।

डॉक्टरों के अनुसार:

एचआईवी छूने, साथ बैठने या बातचीत से नहीं फैलता

समय पर इलाज और दवाओं से संक्रमित व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है

संक्रमण का स्रोत तय करने के लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी होती है

डर और अफवाहें हिंसा को जन्म देती हैं


समाज के लिए सबक

यह घटना केवल एक महिला की हत्या नहीं, बल्कि सामाजिक असफलता की कहानी है—
जहां

अकेलेपन का इलाज संवाद से नहीं मिला

बीमारी का जवाब इलाज नहीं, हिंसा बना

कानून की जगह बदले ने ले ली

एक मासूम बच्चा अपनी मां से हमेशा के लिए वंचित हो गया।


निष्कर्ष

प्रतापगढ़ की यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि जागरूकता, शिक्षा और संवेदनशीलता की कमी किस तरह एक सामान्य स्थिति को भयावह अपराध में बदल सकती है। कानून किसी को भी अपने हाथ में न्याय लेने की अनुमति नहीं देता।

अब यह देखना होगा कि अदालत इस मामले में आरोपी को क्या सजा सुनाती है, लेकिन जो नुकसान हो चुका है, उसकी भरपाई संभव नहीं।