आज इतनी बुरी हालत मे हैं गोपी बहू ! अंधेरे में कैसे जी रही हैं जिया? Where Is Gopi Bahu

भूमिका: मासूम चेहरा, बड़ा विवाद—सच क्या था?
टीवी की दुनिया में कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो कलाकार की पहचान को ही निगल लेते हैं। साथ निभाना साथिया की “गोपी बहू” उन्हीं में से एक थी—झुकी नज़रें, धीमी आवाज़, सिर पर पल्लू और दिल में डर। दर्शकों ने गोपी को केवल किरदार नहीं माना; उसे घर की बहू, बेटी, बहन—सब बना लिया।
इसीलिए जब 2012 में खबर आई कि जिया मानेक को रातों-रात शो से बाहर कर दिया गया है, तो सवाल उठना तय था—क्या वह वाकई “ट्रबल मेकर” थीं? क्या स्टारडम ने उन्हें घमंडी बना दिया? या फिर यह टीवी इंडस्ट्री की वह राजनीति थी जहाँ कलाकार की मेहनत से बड़ा चैनल का “कंट्रोल” होता है?
और फिर एक और परत—जब भारत में उनका करियर ठंडा पड़ने लगा, तो क्या सच में उन्हें इंडोनेशिया में वह सम्मान मिला जो अपने देश में नहीं मिला? और सबसे बड़ा, सबसे चौंकाने वाला मोड़—क्या सच है कि उन्होंने 2025 में अपने ऑन-स्क्रीन “देवर” (वरुण जैन) से बेहद निजी तरीके से शादी कर ली?
यह लेख उसी यात्रा का विस्तृत, पत्रकारिता-शैली में संकलन है—उपलब्ध सार्वजनिक जानकारियों, रिपोर्टेड घटनाओं और इंडस्ट्री में प्रचलित विवरणों के आधार पर।
महत्वपूर्ण अस्वीकरण: टीवी और सेलिब्रिटी दुनिया की कई बातें इंटरव्यू, मीडिया रिपोर्ट्स और “इंडस्ट्री सूत्रों” पर आधारित होती हैं। कुछ दावे पूर्णतः आधिकारिक दस्तावेज़ों से प्रमाणित नहीं होते। इसलिए जहां-जहां आवश्यक है, लेख “कथित/बताया जाता है/रिपोर्ट्स के मुताबिक” जैसी भाषा का उपयोग करता है।
1) अहमदाबाद की आम लड़की: शुरुआत ग्लैमर से नहीं, सपनों से हुई
जिया मानेक का जन्म 18 फरवरी 1986 को अहमदाबाद, गुजरात में हुआ। उनकी पृष्ठभूमि अक्सर एक मिडिल-क्लास गुजराती परिवार के रूप में वर्णित की जाती है—जहाँ सपने होते हैं, मगर उनके साथ सीमाएँ भी होती हैं।
बताया जाता है कि जिया ने मार्केटिंग और एडवरटाइजिंग की पढ़ाई की थी। यानी उनका रास्ता शुरुआत में किसी “फिल्मी परिवार” या “लॉन्च पैड” वाला नहीं था। अभिनय की दुनिया की तरफ उनका कदम धीरे-धीरे बढ़ा—पहले विज्ञापन, फिर छोटे मौके, और फिर मुंबई की वह भीड़, जहाँ हर चेहरा “अगला बड़ा स्टार” बनने की उम्मीद लेकर चलता है।
2) टीवी से पहले बॉलीवुड: एक छोटा रोल, बड़ी सीख
बहुत लोग भूल जाते हैं कि गोपी बहू बनने से पहले जिया ने फिल्मों में भी काम किया। 2010 की फिल्म “ना घर के ना घाट के” में—जिसमें ओम पुरी और परेश रावल जैसे अनुभवी कलाकार थे—जिया ने ओम पुरी की बेटी का किरदार निभाया।
एक न्यूकमर के लिए यह बहुत बड़ा मौका था। लेकिन दुर्भाग्य से फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली, और जिया का रोल भी व्यापक पहचान नहीं बना पाया। कई कलाकारों के लिए ऐसा मोड़ निर्णायक होता है—या तो वे टूट जाते हैं, या फिर दूसरा रास्ता ढूंढते हैं। जिया के लिए दूसरा रास्ता बना—टेलीविजन।
3) 3000 ऑडिशन और एक “परफेक्ट भोली बहू” की तलाश
साथ निभाना साथिया (2010) की कास्टिंग को लेकर एक चर्चित बात कही जाती है कि गोपी के रोल के लिए हज़ारों लड़कियों के ऑडिशन हुए—कई जगह यह संख्या 3000 तक बताई जाती है। मकसद था एक ऐसा चेहरा जो दर्शकों को यकीन दिला दे कि “इतनी भोली लड़की भी हो सकती है।”
मजेदार विरोधाभास यह था कि असल जिंदगी में जिया को “मॉडर्न”, कॉन्फिडेंट और चुलबुली कहा जाता है—जींस-टॉप, इंग्लिश, तेज़ ऊर्जा। लेकिन कैमरा ऑन होते ही उन्होंने ऐसी मासूमियत और बेचारगी दिखाई कि मेकर्स को वही चेहरा मिल गया जिसकी उन्हें तलाश थी।
इसके बाद जिया का “ट्रांसफॉर्मेशन” शुरू हुआ—
साड़ी का पल्लू सिर पर कैसे टिके
नज़रें कैसे झुकी रहें
आवाज़ की टोन कैसे धीमी और करुणामयी हो
बॉडी लैंग्वेज में डर और संकोच कैसे दिखे
जिया ने खुद को किरदार में झोंक दिया—और नतीजा आया तूफान की तरह।
4) 7 बजे का स्लॉट और TRP का जादू: गोपी बहू घर-घर में
2010 में जब शो का पहला एपिसोड आया, तो 7 PM का स्लॉट—जो आमतौर पर सबसे “हॉट प्राइम टाइम” नहीं माना जाता—देखते ही देखते एक आदत बन गया। लोग 7 बजने का इंतजार करने लगे।
गोपी बहू का असर इतना था कि कई दर्शकों ने “एक्टिंग” और “असल” के बीच की रेखा मिटा दी। कुछ महिलाओं के लिए गोपी आदर्श बहू थी; कुछ के लिए बेटी जैसी मासूम। इसी लोकप्रियता के साथ जिया बन गईं स्टार प्लस का सबसे बड़ा चेहरा।
लेकिन टीवी स्टारडम का एक नियम है—जितनी ऊँचाई, उतना दबाव।
5) चमक के पीछे का कड़वा सच: कम फीस, लंबी शिफ्ट, टूटता स्वास्थ्य
इस सफलता के पीछे एक हकीकत यह भी बताई जाती है कि जिया को उस दौर में इंडस्ट्री मानकों के हिसाब से कम फीस मिल रही थी—कई रिपोर्ट्स में ₹20–25 हजार प्रति दिन जैसी राशि का उल्लेख आता है (हालांकि यह आंकड़ा आधिकारिक रूप से पुष्टि-योग्य नहीं माना जा सकता)।
साथ ही, टीवी की डेली-प्रोडक्शन मशीन में कलाकारों के लिए 14–16 घंटे शूट सामान्य बात है। कथाओं में यह भी आता है कि जिया कई बार थकान/कमजोरी के कारण बीमार पड़ीं और फिर भी काम जारी रखना पड़ा।
यही वह बिंदु है जहाँ “ड्रीम जॉब” धीरे-धीरे “डिमांडिंग सर्वाइवल” में बदलता है।
6) “लैपटॉप धो दिया” और नियति का मीम: जो सीन बाद में इतिहास बन गया
गोपी बहू का “लैपटॉप धोने वाला” सीन—जो कहानी के हिसाब से मासूमियत और गलतफहमी का भावनात्मक क्षण था—बाद में पॉप कल्चर का सबसे बड़ा मीम बना।
जिया ने तब उसे गंभीरता और भावना से निभाया था। उन्हें क्या पता था कि सालों बाद यह दृश्य लोगों के लिए मज़ाक, गाना और वायरल ट्रेंड बन जाएगा—और उसी के साथ उनके करियर की दूसरी सांस भी।
7) 2012: चैनल वॉर और “झलक” ऑफर—यहीं से शुरू हुआ असली धमाका
2012 में टीवी इंडस्ट्री में TRP की जंग तेज़ थी। एक तरफ स्टार प्लस, दूसरी तरफ कलर्स—और कलर्स का बड़ा दांव था डांस रियलिटी शो झलक दिखला जा (सीजन 5)।
रिपोर्टेड घटनाओं के मुताबिक, जिया को झलक का ऑफर मिला—और उन्होंने हां कर दी। उनके लिए यह “आर्टिस्टिक एक्सप्लोरेशन” था:
“क्या गोपी बहू वाली छवि से बाहर निकलकर मैं डांस कर सकती हूँ? क्या मैं जिया बनकर मंच पर आ सकती हूँ?”
लेकिन स्टार प्लस/प्रोडक्शन हाउस का तर्क कथित तौर पर अलग था:
गोपी किरदार एक “कल्ट” बन चुका है। अगर दर्शक उसे दूसरे चैनल पर ग्लैमरस डांस करते देखेंगे, तो साथिया की इमेज प्रभावित होगी। इसी के साथ “एक्सक्लूसिविटी कॉन्ट्रैक्ट” की बात सामने आई।
यह विवाद धीरे-धीरे नियमों से निकलकर “ईगो बनाम ईगो” में बदल गया—एक तरफ चैनल का नियंत्रण, दूसरी तरफ कलाकार की स्वतंत्रता।
8) अल्टीमेटम और मानसिक दबाव: “या साथिया, या झलक”
वर्णन के अनुसार, जिया को अल्टीमेटम दिया गया—या तो साथिया चुनो, या झलक।
बाद के इंटरव्यूज़ में जिया ने तनाव, रोना, मानसिक दबाव और प्रोफेशनल मदद (जैसे साइकेट्रिस्ट) जैसी बातों का संकेत दिया—यह बताने के लिए कि विवाद सिर्फ करियर का नहीं, मानसिक सेहत का भी था।
फिर जिया ने वह कदम उठाया जो टीवी में कम लोग उठाते हैं—उन्होंने “ना” कहा। उन्होंने झलक छोड़ने से इनकार किया।
और यही इनकार उनकी कीमत बन गया।
9) 7 जून 2012: रातों-रात बाहर—“अनप्रोफेशनल” का टैग
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 7 जून 2012 को एक प्रेस रिलीज़/घोषणा के जरिए कहा गया कि जिया को शो से तुरंत प्रभाव से हटाया जा रहा है—कथित तौर पर ब्रीच ऑफ कॉन्ट्रैक्ट और अनप्रोफेशनल कंडक्ट के कारण।
टीवी इंडस्ट्री में “अनप्रोफेशनल” शब्द एक कलाकार के लिए सबसे भारी होता है, क्योंकि यह भविष्य की कास्टिंग पर सीधा असर डालता है।
कथा का सबसे भावनात्मक हिस्सा यही है—बताया जाता है कि जिया को न विदाई मिली, न टीम से आखिरी मुलाकात का अवसर। रातों-रात गोपी बहू बदल दी गई और देवोलीना भट्टाचार्य नई गोपी बनीं।
10) कास्ट का दर्द, फैंस का गुस्सा, और नई गोपी का कठिन स्वागत
कई जगह यह बात सामने आती है कि कोकिला बेन का किरदार निभाने वाली रूपल पटेल इस बदलाव से बहुत भावुक हुईं। बाद के पॉडकास्ट/बातचीत में उनके रोने और टूटने जैसी बातें कही जाती हैं।
दूसरी तरफ देवोलीना के लिए यह स्थिति अजीब थी—एक आइकॉनिक किरदार में एंट्री, लेकिन दर्शकों का गुस्सा उनके सिर पर। उस समय सोशल मीडिया नई-नई ताकत बन रहा था और “We want Giaa back” जैसे ट्रेंड्स का जिक्र अक्सर किया जाता है।
लेकिन चैनल ने निर्णय नहीं बदला। संदेश साफ था—शो, कलाकार से बड़ा है।
11) झलक में संघर्ष: रीब्रांडिंग की कोशिश, पर जीत नहीं
जिया के लिए झलक अब केवल शो नहीं था—यह अस्तित्व की लड़ाई थी। उन्होंने अलग-अलग परफॉर्मेंस, ग्लैमरस अवतार और विविध डांस फॉर्म्स से यह साबित करने की कोशिश की कि वे सिर्फ “रोती बहू” नहीं हैं।
पर वे शो नहीं जीत पाईं और कुछ हफ्तों बाद एलिमिनेट हो गईं—कई कथाओं में “9वें स्थान” तक की बात आती है।
इससे आलोचकों को नया हथियार मिला—“कैरियर खत्म”, “ना घर का, ना घाट का।”
12) 2012 के बाद: सन्नाटा, कम काम, और “डिफिकल्ट” की छवि
विवाद के बाद अक्सर ऐसा होता है कि इंडस्ट्री में लोग दूरी बनाने लगते हैं—खासकर जब सामने बड़ा चैनल हो। कथित तौर पर कई प्रोड्यूसर्स ने जिया के साथ काम करने में हिचक दिखाई।
यही दौर उन्हें भावनात्मक रूप से भारी पड़ा—काम कम, कॉल्स कम, और साथ में लगातार चलती गॉसिप।
13) “जीनी और जुजू”: बहू से जादूगरनी—पर फिर वही कहानी?
जिया को फिर एक नया अवसर मिला—जीनी और जुजू, जो I Dream of Jeannie का भारतीय रूपांतरण माना जाता है। यहाँ जिया को एक शरारती, जादुई, आधुनिक किरदार मिला—जो उनकी पुरानी इमेज को तोड़ सकता था।
शो को शुरुआती अच्छा रिस्पॉन्स भी मिला, लेकिन फिर कथित खटपट, को-स्टार के साथ तनाव, सेट की गॉसिप—और अंततः जिया का शो छोड़ना। जिया के बयान/संकेतों के मुताबिक, उन्हें यह जानकर झटका लगा कि मेकर्स पीछे से रिप्लेसमेंट के ऑडिशन ले रहे थे। उन्होंने इसे आत्मसम्मान पर चोट माना।
और फिर—रिप्लेसमेंट (रूबिना दिलैक का नाम भी कथाओं में आता है)।
दो साल में दो बड़े शोज़ से निकलना—किसी भी कलाकार के लिए करियर पर गहरा दाग बन सकता है।
14) 2014–2016: जब दरवाज़े बंद हुए—और एक “खिड़की” खुली
जिया ने इस दौर में आध्यात्मिकता का सहारा लिया—ऐसा कथाओं में आता है। जब करियर ठहर जाता है, तो कई लोग खुद को रीबिल्ड करते हैं: स्किल्स, हेल्थ, माइंडसेट।
और फिर आया वह चमत्कार—इंडोनेशिया।
15) इंडोनेशिया: जहाँ गोपी बहू भारत से भी बड़ी स्टार बनी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, साथ निभाना साथिया इंडोनेशिया में डब होकर प्रसारित हुआ और जबरदस्त हिट रहा। वहाँ दर्शक गोपी बहू के दीवाने हो गए।
2016 में जब जिया जकार्ता गईं, तो कथाओं के अनुसार एयरपोर्ट पर हजारों की भीड़, पोस्टर्स, चीखें—यह सब देखकर वे दंग रह गईं। यह उनके लिए “रीबर्थ” जैसा था: जिस इंडस्ट्री ने उन्हें साइडलाइन किया, उसके बाहर की दुनिया ने उन्हें सुपरस्टार ट्रीटमेंट दिया।
उन्होंने इंडोनेशिया में इवेंट्स ही नहीं किए, बल्कि वहाँ के शोज़ में काम भी किया—जैसे Gara Gara Duyung (जलपरी वाला किरदार) आदि। वे जज बनीं, परफॉर्मेंस दीं, और आर्थिक रूप से मजबूत हुईं।
यह बिंदु जिया की कहानी का सबसे बड़ा संदेश है: टैलेंट को बॉर्डर नहीं बांध सकते।
16) 2020: “रसोड़े में कौन था?”—मीम बना वरदान
लॉकडाउन के दौरान यशराज मुखाटे का बनाया मीम/म्यूजिक रीमिक्स—“रसोड़े में कौन था?”—इतना वायरल हुआ कि गोपी और कोकिला फिर से पॉप कल्चर में लौट आए।
जो लोग जिया को भूल चुके थे, उन्होंने भी अचानक पूछना शुरू किया—“गोपी बहू अब कहाँ हैं?”
जिया ने इस ट्रेंड को अपनाया, एंजॉय किया, और खुद भी अपनी मौजूदगी दिखाई। यह समझदारी थी—क्योंकि आज के मीडिया में वायरल मोमेंट को संभालना भी एक कला है।
17) 2021: “तेरा मेरा साथ रहे”—कमबैक की कोशिश, पर कहानी पुरानी पड़ गई
वायरल फेम को कैश-इन करने के लिए 2021 में तेरा मेरा साथ रहे (Star Bharat) आया। जिया और रूपल पटेल की जोड़ी ने दर्शकों को उम्मीद दी कि “पुराना जादू लौटेगा।”
लेकिन शो नहीं चला। कारणों में एक तर्क यह रहा कि 2010 की कहानी/टेम्पलेट को 2021 में बेचना मुश्किल था। जिया अब 20 साल की डरी-सहमी लड़की नहीं थीं; उनके चेहरे पर मैच्योरिटी थी। दर्शक बदल चुका था। शो कुछ महीनों में बंद हो गया।
करियर को शायद बड़ा फायदा नहीं मिला—लेकिन पर्सनल लाइफ में उन्हें कुछ ऐसा मिला जिसने सबको चौंका दिया।
18) सबसे बड़ा “राज़”: सेट पर दोस्ती, फिर प्यार—और देवर से शादी?
जिया का नाम समय-समय पर अलग-अलग एक्टर्स के साथ जोड़ा गया—अंकित बाथला, निशांत मल्कानी वगैरह—पर जिया ने अक्सर इन्हें “जस्ट फ्रेंड्स” कहकर टाल दिया।
फिर खबर आई कि उन्हें सही इंसान उसी फ्लॉप शो के सेट पर मिला—और ट्विस्ट यह कि वह हीरो नहीं था, बल्कि ऑन-स्क्रीन देवर।
यह व्यक्ति थे वरुण जैन, जिन्हें कई लोग दिया और बाती हम के किरदार (मोहित राठी) से भी पहचानते हैं (जैसा वायरल नैरेशन में कहा जाता है)।
कथा यह कहती है कि दोनों ने अपना रिश्ता बेहद सीक्रेट रखा—यहाँ तक कि सेट के लोगों को भी भनक नहीं लगी।
19) 21 अगस्त 2025: इंस्टाग्राम पोस्ट और “भूत शुद्धि विवाह” की शांत रस्म
फिर आया 21 अगस्त 2025—जब जिया और वरुण की शादी की तस्वीरें सामने आईं।
कोई भव्य रिसेप्शन नहीं
कोई मीडिया कवरेज नहीं
बस एक शांत, आध्यात्मिक शादी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शादी कोयंबटूर (तमिलनाडु) स्थित ईशा फाउंडेशन/सद्गुरु आश्रम में हुई और इसे “भूत शुद्धि विवाह” जैसी आध्यात्मिक प्रक्रिया कहा गया। तस्वीरों में जिया सुनहरी दक्षिण भारतीय साड़ी में और वरुण पीले कुर्ते में दिखे।
उन्होंने कैप्शन में कुछ ऐसा लिखा—“हम दो दोस्त थे, आज पति-पत्नी हैं”—और कमेंट सेक्शन बंद कर दिया, संभवतः ट्रोलिंग से बचने के लिए।
यह जिया की पर्सनैलिटी के अनुरूप भी लगता है—वे अक्सर ग्लैमर से ज्यादा “प्राइवेसी” चुनती दिखाई देती हैं।
20) 2026 की शुरुआत: कम काम, पर सुकून—और एक नई तरह की सफलता
आज (या हाल की सार्वजनिक धारणा के अनुसार) जिया मुंबई की टीआरपी रेस से दूर, तुलनात्मक रूप से सुकून में हैं। काम भले कम हो, लेकिन सोशल मीडिया—ब्रांड्स, इवेंट्स, अपीयरेंस—उनका एक मजबूत माध्यम बन चुका है।
उनकी कहानी एक सीधी लाइन नहीं, बल्कि उतार-चढ़ाव से भरी यात्रा है:
3000 ऑडिशन पार करके स्टारडम
चैनल से टकराव और भारी नुकसान
विदेश में दूसरी जिंदगी और सम्मान
मीम के जरिए पुनर्जन्म
एक फ्लॉप कमबैक
और अंत में निजी जीवन का स्थिर अध्याय—शादी
निष्कर्ष: 2012 में सही कौन था—चैनल या कलाकार?
यह सवाल अब भी बहस पैदा करता है:
क्या स्टार प्लस/प्रोडक्शन का निर्णय सही था क्योंकि कॉन्ट्रैक्ट और ब्रांड इमेज का मामला था?
या जिया का स्टैंड सही था क्योंकि कलाकार को अपनी पहचान बनाने और दूसरे प्रोजेक्ट्स करने का अधिकार होना चाहिए?
सच्चाई यह है कि टीवी इंडस्ट्री में “पावर” अक्सर असमान होती है। चैनल के पास प्लेटफॉर्म होता है, कलाकार के पास चेहरा और मेहनत। जब दोनों की शर्तें टकराती हैं, तो सबसे ज्यादा चोट अक्सर कलाकार की छवि को लगती है—क्योंकि “डिफिकल्ट” का ठप्पा मिनटों में लग जाता है, उतरने में साल लगते हैं।
जिया मानेक की कहानी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सिर्फ “गोपी बहू” की कहानी नहीं—यह टीवी इंडस्ट्री के सिस्टम, कंट्रोल, ब्रांडिंग, और कलाकार की आज़ादी के संघर्ष की कहानी है।
पाठकों के लिए सवाल (आपकी राय)
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क्या 2012 में चैनल का “एक्सक्लूसिविटी” वाला रुख जायज़ था?
क्या एक कलाकार को रियलिटी शो जैसे प्रोजेक्ट्स करने की आज़ादी मिलनी चाहिए, भले ही वह किसी आइकॉनिक किरदार से जुड़ा हो?
आपकी फेवरेट गोपी बहू कौन—जिया मानेक या देवोलीना भट्टाचार्य?
अगर आप चाहें, तो मैं इसी लेख को न्यूज़पेपर-स्टाइल (हेडलाइन + डेक + बाईलाइन + इनसाइडर टोन), या YouTube डॉक्यूमेंट्री स्क्रिप्ट (वॉइसओवर + म्यूजिक क्यू + कट्स) के फॉर्मेट में भी बदल सकती हूँ।
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