नारायण सिंह डिलीवरी के बाद लाफ्टर शेफ्स पर लौटे, कहा ‘काजू हुआ किसमिस नहीं..’

हर रोज़ की भागदौड़ भरी जिंदगी में छोटे-छोटे पल ही असली खुशियों की वजह बनते हैं। कभी किसी दुकान पर ड्राई फ्रूट्स की खरीदारी, कभी दोस्तों के बीच हल्की-फुल्की नोकझोंक, कभी किसी पार्टी या वीडियो शूट की हलचल – ये सब मिलकर हमारी रोजमर्रा की कहानी को रंगीन बना देते हैं। आज हम आपको ऐसी ही एक हलचल भरी कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिसमें ड्राई फ्रूट्स का स्वाद, मिठाई की मिठास, दोस्तों की मस्ती और एक वीडियो शूट की गहमागहमी है।
शुरुआत: किसमिस, काजू और ड्राई फ्रूट्स की दुकान
कहानी की शुरुआत होती है एक छोटी सी बातचीत से – “नेक्स्ट टाइम किसमिस बाद में आएगा, एक दिन ड्राई फ्रूट्स का दुकान हो जाएगा, काजू नहीं लाए, काजू किधर है?”
यह संवाद उस आम भारतीय माहौल को दर्शाता है, जहां हर छोटी खरीदारी में भी एक कहानी छुपी होती है। किसमिस, काजू, बादाम – ये सिर्फ खाने की चीजें नहीं, बल्कि रिश्तों में मिठास घोलने वाले तत्व हैं। जब कोई कहता है “काजू नहीं लाए”, तो उसमें एक हल्की सी शिकायत, एक उम्मीद और एक अपनापन छुपा होता है।
इसी बातचीत में कहीं मेंट की बात भी आती है, यानी हर स्वाद का ख़्याल रखा जाता है। ड्राई फ्रूट्स की दुकान खोलने का सपना भी इसी माहौल की बानगी है – छोटे सपनों से बड़ी खुशियां पनपती हैं।
वीडियो शूट की गहमागहमी
अब कहानी आगे बढ़ती है वीडियो शूट की तरफ। “यह वीडियो मत बनाओ। ए अबेश पीछे कर। कोई धक्का धुक्की नहीं करेगा।”
वीडियो शूट का माहौल हमेशा थोड़ा तनावपूर्ण रहता है। हर कोई चाहता है कि उसका रोल सही तरीके से शूट हो, विजुअल्स अच्छे आएं, कोई गड़बड़ न हो। “भारती जी दुर्गेश को। मैं जाऊं आगे। ना, हां ऐसे ही रह, नीचे नीचे रहिए।”
यह संवाद बताता है कि सबकी अपनी-अपनी जगह है, अपनी-अपनी जिम्मेदारी है। कोई आगे बढ़ना चाहता है, कोई पीछे रहना चाहता है, कोई कैमरे के सामने आना चाहता है, कोई पीछे।
“ओ दुर्गेश भाई हटो यार मिलेगा, तुम क्या चाहते हो नहीं, ऐसा मत बोलो भाई।” – यह दोस्ती की हल्की तकरार है, लेकिन इसी में असली अपनापन है।
मिठाई के टाइम पर शूटिंग
“देख रहे हो रोल पूरा शूट नहीं किए, मिठाई के टाइम पे शूट कर रहे हो, ऐसा नहीं चलता भाई मैं बोल रहा हूं।”
भारतीय परिवारों में मिठाई का समय सबसे खास होता है। चाहे कोई त्यौहार हो, शादी हो या कोई पार्टी – मिठाई के बिना सब अधूरा है। और अगर उसी समय शूटिंग हो जाए तो थोड़ा नाराज होना लाजिमी है।
“ना मैं बोल दूंगा ऐसे नहीं चलता है, तुम्हारी तरफ बाइक नहीं है ना भाई ट्रेन से आना पड़ता है, बस से आना पड़ता है, लेट हो गया फर्स्ट टाइम आ भी रहा था तो जजमेंट नहीं था तो ले ठीक से।”
हर किसी की अपनी-अपनी परेशानी है – कोई बाइक से नहीं आ सकता, कोई ट्रेन या बस से आता है, कभी-कभी लेट हो जाता है, लेकिन फिर भी दोस्ती बनी रहती है।
फोटो, प्यार और ब्लेसिंग्स
“फोटो रमेश तुम पूरा तोड़ दोगे।”
फोटो खींचना भी एक कला है, और अगर कोई फोटो खराब कर दे तो हल्का-फुल्का मजाक बनता है।
“बहुत सारा प्यार देना, बहुत सारी ब्लेसिंग मामा भी अगर आप मानते हैं।”
यह संवाद रिश्तों की गहराई को दर्शाता है – प्यार, आशीर्वाद, मामा-मामी की पार्टी, सब कुछ एक साथ।
नाराजगी और दोस्ती का रंग
“ओके ओके नाराज किया है लड़की नहीं हुई हर्ष ने कहा है कि नेक्स्ट टाइम।”
कभी-कभी हल्की नाराजगी भी रिश्तों को मजबूत करती है। “नेक्स्ट टाइम” का वादा, फिर से मिलने की उम्मीद, फिर से मिठाई खाने का सपना – यही असली जिंदगी है।
सबको साथ लाने की कोशिश
“अरे मैडम मैडम, आइए साथ में करेंगे, सर पीछे, मिठाई, आप, मामा और मामी पार्टी करेंगे एले में आपको खुद आना है वहां।”
यह संवाद बताता है कि हर कोई चाहता है कि सब साथ रहें, सब मिलकर पार्टी करें, मिठाई बांटें, खुशियां साझा करें।
रंग-बिरंगी दुनिया और टेक्नोलॉजी
“कलर, कौन पहुंचता है? iPhone 17 है।”
टेक्नोलॉजी भी अब हमारे हर पल में शामिल हो गई है। नए-नए फोन, नए-नए कैमरे, हर कोई चाहता है कि उसकी फोटो सबसे अच्छी आए, वीडियो सबसे अच्छा बने।
दोस्ती, मस्ती और भारतीय परिवार की झलक
पूरी कहानी में बार-बार दोस्ती, मस्ती, हल्की तकरार, मिठाई की मिठास, ड्राई फ्रूट्स की खरीदारी, वीडियो शूट की हलचल, फोटो खींचने की कोशिश, नाराजगी – सब कुछ एक साथ चलता है।
भारतीय समाज की यही खूबसूरती है – छोटे-छोटे पल, छोटी-छोटी बातें, हल्की तकरार, गहरी दोस्ती, रिश्तों की मिठास।
हर कोई चाहता है कि उसकी बात मानी जाए, उसकी पसंद की चीज आए, उसकी फोटो अच्छी आए, उसकी नाराजगी दूर हो, सब साथ मिलकर पार्टी करें, मिठाई बांटें, खुशियां साझा करें।
निष्कर्ष
इस हलचल भरी कहानी में एक बात साफ है – जिंदगी की असली मिठास रिश्तों में है। कभी-कभी किसमिस, काजू, मिठाई, फोटो, वीडियो शूट, नाराजगी, दोस्ती, मामा-मामी की पार्टी – ये सब मिलकर जिंदगी को रंगीन बना देते हैं।
अगर आप भी ऐसी ही मस्ती, दोस्ती और मिठास भरे पलों को जीना चाहते हैं, तो अपने दोस्तों और परिवार के साथ वक्त बिताइए, छोटी-छोटी बातों में खुशियां तलाशिए, नाराजगी को प्यार से दूर कीजिए, और हर पल को यादगार बना दीजिए।
क्या आपके दोस्तों के साथ भी ऐसी ही मस्ती होती है? क्या आपके परिवार में भी मिठाई के समय कोई वीडियो शूट या फोटो का झगड़ा होता है? अपनी कहानी कमेंट में जरूर लिखिए।
News
उस दिन के बाद ऑफिस का पूरा माहौल बदल गया। अब कोई भी किसी की औकात या कपड़ों से तुलना नहीं करता था। सब एक-दूसरे की मदद करने लगे। अर्जुन सबसे प्रेरणा देने वाला इंसान बन गया। रिया भी अब पूरी तरह बदल चुकी थी। वह विनम्रता से छोटे काम करने लगी और धीरे-धीरे सबका विश्वास जीतने की कोशिश करने लगी।
चायवाले से मालिक तक: इंसानियत की असली पहचान सुबह-सुबह जयपुर शहर की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी के ऑफिस के गेट…
रिया फूट-फूट कर रो पड़ी। उसके सारे सपने, घमंड और अभिमान पल भर में टूट गए थे। बाकी सभी कर्मचारी भी कांप गए। सब सोचने लगे, “हे भगवान, हमने भी कल उस चायवाले की हंसी उड़ाई थी। अब अगर मालिक को याद आ गया तो हमारी भी छुट्टी हो जाएगी।”
चायवाले से मालिक तक: इंसानियत की असली पहचान सुबह-सुबह जयपुर शहर की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी के ऑफिस के गेट…
दूसरे दिन का माहौल चायवाले से मालिक तक: इंसानियत की असली पहचान
चायवाले से मालिक तक: इंसानियत की असली पहचान सुबह-सुबह जयपुर शहर की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी के ऑफिस के गेट…
चायवाले से मालिक तक: इंसानियत की असली पहचान
चायवाले से मालिक तक: इंसानियत की असली पहचान सुबह-सुबह जयपुर शहर की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी के ऑफिस के गेट…
I gave a drenched old man shelter in my home. The next morning, he offered to buy my house for $1. “I’m not joking,” he said. “I can’t explain, but you need to leave it immediately.”
I gave a drenched old man shelter in my home. The next morning, he offered to buy my house for…
शीर्षक: “शिखर पर अहंकार नहीं, इंसानियत टिकती है”
शीर्षक: “शिखर पर अहंकार नहीं, इंसानियत टिकती है” सुबह के दस बजे थे। शहर के सबसे आलीशान रेस्टोरेंट “एमराल्ड टैरेस…
End of content
No more pages to load






