पल्लवी की College दोस्तों ने पलटी कहानी, हुआ होश उड़ाने वाला खुलासा! dharamshala Pallavi Raging Case

भारत में हर साल लाखों छात्र उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज में दाखिला लेते हैं। यह समय उनके जीवन का एक नया अध्याय होता है, जहां वे अपने सपनों को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाते हैं। लेकिन कई बार, इस नए सफर की शुरुआत के साथ ही कुछ ऐसी घटनाएं होती हैं, जो उनके जीवन को गहरे जख्म दे जाती हैं। ऐसी ही एक दर्दनाक कहानी है धर्मशाला की 19 वर्षीय पल्लवी की, जिसने अपनी जिंदगी में कई सपने देखे थे, लेकिन रैगिंग, मानसिक दबाव और डर ने उसकी जिंदगी को खत्म कर दिया।
इस लेख में हम पल्लवी की जिंदगी, उसके संघर्ष और अंततः उसकी मौत के पीछे छिपे कारणों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यह कहानी न केवल दुखद है, बल्कि हमारे समाज और शिक्षा प्रणाली पर कई गंभीर सवाल भी खड़े करती है।
पल्लवी: एक होनहार छात्रा की कहानी
पल्लवी धर्मशाला की रहने वाली थी। वह एक होनहार और प्रतिभाशाली लड़की थी, जो डांसिंग, सिंगिंग और पेंटिंग में माहिर थी। स्कूल के दिनों में उसके टीचर उसकी खूब तारीफ करते थे। वह पढ़ाई में भी अव्वल थी और अपनी कड़ी मेहनत से हमेशा टॉप करती थी।
हालांकि, पल्लवी के घर का माहौल थोड़ा सख्त था। खासकर उसके पिता बहुत अनुशासनप्रिय और सख्त स्वभाव के थे। वह पढ़ाई और समय की पाबंदी को लेकर बहुत गंभीर थे। पल्लवी अपने पिता से डरती थी और अपने मन की बात उनसे कहने से कतराती थी।
पल्लवी की जिंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन 2024 में जब उसने धर्मशाला गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज में दाखिला लिया, तो उसकी जिंदगी में बदलाव आने शुरू हो गए।
रैगिंग: एक बुरे सपने की शुरुआत
कॉलेज के शुरुआती दिनों में पल्लवी बहुत खुश थी। नए दोस्त, नया माहौल और नए सपनों के साथ उसने कॉलेज की दुनिया में कदम रखा। लेकिन जल्द ही उसकी खुशी कड़वे अनुभवों में बदल गई।
कॉलेज में कुछ सीनियर लड़कियों ने पल्लवी को रैगिंग का शिकार बनाना शुरू कर दिया। शुरुआत में यह सब हल्के-फुल्के मजाक तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे यह गंभीर रूप लेने लगा। सीनियर लड़कियां उसे अकेले में रोककर तंग करतीं, उस पर हंसतीं और उसे डरातीं।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब एक दिन पल्लवी को इतनी बुरी तरह से परेशान किया गया कि उसे अस्पताल ले जाना पड़ा। डॉक्टरों ने साफ तौर पर कहा कि वह रैगिंग का शिकार हुई है। इसके बाद पल्लवी और उसके माता-पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पिता का फैसला: एक चूक जिसने सब कुछ बदल दिया
जब पल्लवी और उसके माता-पिता पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो पुलिस ने उनसे पूछा कि क्या वे इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई करना चाहते हैं। लेकिन पल्लवी के पिता ने यह कहते हुए मामला आगे बढ़ाने से मना कर दिया कि वह किसी का भविष्य खराब नहीं करना चाहते।
पुलिस ने उन्हें सलाह दी कि वे कॉलेज प्रिंसिपल से मिलें और उन्हें इस घटना की जानकारी दें। पल्लवी के माता-पिता ने यह सलाह मानी और कॉलेज प्रिंसिपल से मुलाकात की। प्रिंसिपल ने उन्हें आश्वासन दिया कि कॉलेज में एंटी-रैगिंग कमेटी बनी हुई है और आगे से ऐसी घटनाओं को नहीं होने दिया जाएगा।
पल्लवी का संघर्ष: अंदर ही अंदर टूटती एक लड़की
पल्लवी ने कॉलेज जाना जारी रखा, लेकिन वह अंदर ही अंदर टूट रही थी। उसके माता-पिता ने कई बार उसे अकेले में रोते हुए देखा, लेकिन जब भी उससे पूछा गया, तो वह बात को टाल देती।
सितंबर 2025 में, पल्लवी ने अपने पिता को फोन कर बताया कि कुछ लड़कियों ने उसे मारा और परेशान किया। यह सुनकर उसके पिता तुरंत उसे घर बुला लेते हैं। पल्लवी का भाई उसे कॉलेज से लेकर घर आता है। घर लौटने के बाद पल्लवी ने कहा कि वह अब कॉलेज नहीं जाना चाहती और कंप्यूटर कोर्स करना चाहती है। उसके पिता उसकी बात मान जाते हैं।
मानसिक दबाव और डर का असर
बाहर से सब कुछ सामान्य दिखने के बावजूद, पल्लवी के मन में गहरा डर बैठ चुका था। वह अक्सर अजीब बातें करती और कहती कि उसे मार दिया जाएगा।
पल्लवी की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। उसे कई अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन उसकी मानसिक हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। डॉक्टरों ने इसे मानसिक दबाव और ट्रॉमा का मामला बताया।
पल्लवी की सहेली का खुलासा
पल्लवी की सहेली ने बताया कि वह लंबे समय से दबाव में थी। उसने कई बार कहा था कि कॉलेज में कुछ ऐसा हुआ है, जो उसे अंदर से तोड़ रहा है। लेकिन वह अपने पिता से यह बात कहने से डरती थी।
पल्लवी का फोन और बड़े खुलासे
पल्लवी के पिता को उसके फोन से कुछ वीडियो और मैसेज मिले, जिनमें वह प्रोफेसर अशोक का नाम ले रही थी। एक वीडियो में वह कहती है कि अशोक सर ने उसके साथ गलत हरकतें कीं। लेकिन दूसरे वीडियो में वह कहती है कि अशोक सर ने कभी कुछ गलत नहीं किया।
पल्लवी की मौत और सवाल
26 दिसंबर 2025 को, लंबी लड़ाई के बाद पल्लवी ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया।
सवाल जो अब भी बाकी हैं
पल्लवी की मौत ने कई सवाल खड़े किए हैं:
क्या रैगिंग की शिकायत को गंभीरता से लिया गया?
क्या पेरेंट्स को अपने बच्चों के साथ सख्ती के बजाय दोस्ताना रवैया अपनाना चाहिए?
क्या कॉलेज प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाई?
निष्कर्ष
पल्लवी की कहानी हमारे समाज और शिक्षा प्रणाली के लिए एक आईना है। यह हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम अपने बच्चों को वह माहौल दे रहे हैं, जिसमें वे खुलकर अपने डर और समस्याओं को साझा कर सकें।
यह जरूरी है कि रैगिंग जैसी घटनाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं और बच्चों को यह भरोसा दिलाया जाए कि वे हर मुश्किल में अपने माता-पिता के पास आ सकते हैं।
पल्लवी भले ही अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी कहानी हमें यह सिखाती है कि बच्चों की भावनाओं और समस्याओं को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक हो सकता है।
आपकी क्या राय है? क्या पेरेंट्स को अपने बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार करना चाहिए? क्या रैगिंग के खिलाफ और सख्त कदम उठाने की जरूरत है? अपनी राय हमें कमेंट्स में जरूर बताएं।
News
उस दिन के बाद ऑफिस का पूरा माहौल बदल गया। अब कोई भी किसी की औकात या कपड़ों से तुलना नहीं करता था। सब एक-दूसरे की मदद करने लगे। अर्जुन सबसे प्रेरणा देने वाला इंसान बन गया। रिया भी अब पूरी तरह बदल चुकी थी। वह विनम्रता से छोटे काम करने लगी और धीरे-धीरे सबका विश्वास जीतने की कोशिश करने लगी।
चायवाले से मालिक तक: इंसानियत की असली पहचान सुबह-सुबह जयपुर शहर की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी के ऑफिस के गेट…
रिया फूट-फूट कर रो पड़ी। उसके सारे सपने, घमंड और अभिमान पल भर में टूट गए थे। बाकी सभी कर्मचारी भी कांप गए। सब सोचने लगे, “हे भगवान, हमने भी कल उस चायवाले की हंसी उड़ाई थी। अब अगर मालिक को याद आ गया तो हमारी भी छुट्टी हो जाएगी।”
चायवाले से मालिक तक: इंसानियत की असली पहचान सुबह-सुबह जयपुर शहर की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी के ऑफिस के गेट…
दूसरे दिन का माहौल चायवाले से मालिक तक: इंसानियत की असली पहचान
चायवाले से मालिक तक: इंसानियत की असली पहचान सुबह-सुबह जयपुर शहर की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी के ऑफिस के गेट…
चायवाले से मालिक तक: इंसानियत की असली पहचान
चायवाले से मालिक तक: इंसानियत की असली पहचान सुबह-सुबह जयपुर शहर की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी के ऑफिस के गेट…
I gave a drenched old man shelter in my home. The next morning, he offered to buy my house for $1. “I’m not joking,” he said. “I can’t explain, but you need to leave it immediately.”
I gave a drenched old man shelter in my home. The next morning, he offered to buy my house for…
शीर्षक: “शिखर पर अहंकार नहीं, इंसानियत टिकती है”
शीर्षक: “शिखर पर अहंकार नहीं, इंसानियत टिकती है” सुबह के दस बजे थे। शहर के सबसे आलीशान रेस्टोरेंट “एमराल्ड टैरेस…
End of content
No more pages to load






