प्रेम चोपड़ा के निधन की पूरी सच्चाई! Villain Prem Chopra Passed Away | Prem Chopra Death News

प्रस्तावना

बॉलीवुड की चमकती दुनिया में कई चेहरे आए और गए, लेकिन कुछ नाम ऐसे हैं जो अपनी छाप छोड़ जाते हैं। प्रेम चोपड़ा उन्हीं नामों में से एक हैं। पर्दे पर उनकी मौजूदगी ही दर्शकों को सन्नाटा में डाल देती थी। उनकी मुस्कान मासूम लगती थी, लेकिन उसमें छुपा डर लोगों के दिलों में घर कर जाता था। हाल ही में सोशल मीडिया पर उनके निधन की खबरें वायरल हुईं, जिसने उनके चाहने वालों को झकझोर दिया। लेकिन क्या सच में प्रेम चोपड़ा अब इस दुनिया में नहीं हैं? इस लेख में हम प्रेम चोपड़ा की जिंदगी, उनके संघर्ष, उपलब्धियों और अफवाहों की सच्चाई को विस्तार से जानेंगे।

अफवाहों की शुरुआत और सच्चाई

नवंबर की एक सुबह, जब मुंबई की ठंडक आम थी, प्रेम चोपड़ा के घर में अचानक सब कुछ बदल गया। 90 साल के हो चुके प्रेम चोपड़ा को सांस लेने में परेशानी, सीने में घबराहट और कमजोरी महसूस हुई। परिवार ने बिना देरी किए उन्हें अस्पताल पहुंचाया। जांच के बाद पता चला कि उनके दिल का वाल्व लगभग बंद हो चुका है। डॉक्टरों ने बताया कि इस उम्र में ओपन हार्ट सर्जरी बहुत बड़ा रिस्क है। परिवार चिंतित था, लेकिन डॉक्टरों ने एक नया तरीका सुझाया – बिना छाती खोले दिल में नया वाल्व डालना।

ऑपरेशन सफल रहा, लेकिन इसी दौरान सोशल मीडिया पर उनके निधन की अफवाहें फैल गईं। WhatsApp, Facebook, Instagram और YouTube पर श्रद्धांजलि संदेशों की बाढ़ आ गई। परिवार हैरान था, लेकिन प्रेम चोपड़ा ने खुद बालकनी में आकर वीडियो बनाया और कहा, “अरे भाई, मैं तो यहीं हूं। किसने कहा मैं मर गया?” इस वीडियो ने सारी अफवाहों की हवा निकाल दी।

प्रेम चोपड़ा का जन्म और बचपन

प्रेम चोपड़ा का जन्म 23 सितंबर 1935 को लाहौर, पाकिस्तान में हुआ था। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद उनका परिवार शिमला आ गया। उनके पिता रणबीर लाल एक कंपनी में अकाउंट ऑफिसर थे और माता रूपरानी चोपड़ा हाउसवाइफ थीं। प्रेम चोपड़ा छह भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर थे। उनकी मां का कैंसर के कारण निधन हो गया था, जिसके बाद प्रेम चोपड़ा ने अपनी छोटी बहन अंजू को अपनी बेटी मानकर पालन-पोषण किया।

शिक्षा और अभिनय की शुरुआत

प्रेम चोपड़ा ने अपनी प्राथमिक शिक्षा सीनियर सेकेंडरी स्कूल, शिमला से पूरी की और फिर पंजाब यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। कॉलेज के दिनों में वे नाटकों में हिस्सा लेते थे, जिससे उनकी अभिनय में रुचि बढ़ी। हालांकि उनके पिता चाहते थे कि वे डॉक्टर या आईएएस ऑफिसर बनें, लेकिन प्रेम चोपड़ा का दिल अभिनय में था। ग्रेजुएशन के बाद वे मुंबई आ गए हीरो बनने के सपने के साथ।

मुंबई में शुरुआती दिनों में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। फिल्मों में काम नहीं मिलने पर उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया में न्यूज़पेपर सर्कुलेशन का काम शुरू किया। इसी दौरान ट्रेन में यात्रा करते हुए उनकी मुलाकात एक अजनबी से हुई, जिसने उन्हें रंजीत स्टूडियो ले जाकर पंजाबी फिल्म “चौधरी करन सिंह” में पहला मौका दिलाया। इस फिल्म के लिए उन्हें ₹2500 मिले और फिल्म बनने में तीन साल लगे।

बॉलीवुड करियर की शुरुआत

बॉलीवुड में प्रेम चोपड़ा ने अपनी फिल्मी करियर की शुरुआत 1960 में सुनील दत्त की फिल्म “हम हिंदुस्तानी” से की। इसके बाद 1962 में “मैं शादी करने चला” और “डॉ विद्या” जैसी फिल्मों में काम किया। 1964 में “वो कौन थी?” में मनोज कुमार के साथ उनकी एक्टिंग ने सबका ध्यान खींचा। मनोज कुमार ने अपनी अगली फिल्म “शहीद” में उन्हें सुखदेव का रोल ऑफर किया।

1965 से 1967 के दौरान उन्होंने “निशान”, “पूनम की रात”, “मेरा साया” और “तीसरी मंजिल” जैसी हिट फिल्मों में काम किया। 1967 में “उपकार” के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह फिल्मों पर ध्यान केंद्रित किया। 60 और 70 के दशक में वे “उपकार”, “दो रास्ते”, “बॉबी”, “कटी पतंग”, “त्रिशूल” और “दुनिया” जैसी फिल्मों में नेगेटिव और पॉजिटिव किरदारों में नजर आए।

उपलब्धियां और सम्मान

प्रेम चोपड़ा ने छह दशक के अपने करियर में 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। 1978 में “दो अनजाने” के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। 2000 में जी सिने लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, 2019 में स्क्रीन लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड और 2023 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। उनकी फिल्मों के डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर हैं, जैसे – “प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा”।

विवाद और चर्चाएं

बॉलीवुड में प्रेम चोपड़ा का नाम कभी किसी बड़ी कंट्रोवर्सी में नहीं आया, लेकिन 2016 में टीवी शो “कॉमेडी नाइट्स बचाव” में एक्ट्रेस तनिष्ठा चटर्जी के साथ हुए नस्लभेद के विवाद में उनका नाम चर्चा में आया। तनिष्ठा ने शो पर अपने रंग को लेकर मजाक उड़ाए जाने पर नाराजगी जताई, लेकिन प्रेम चोपड़ा ने इसे पब्लिसिटी स्टंट बताया और कहा कि हर किसी को खुद पर हंसना आना चाहिए।

एक और चर्चित घटना सायरा बानो के साथ जुड़ी है। 1970 में “पूरब और पश्चिम” की शूटिंग के दौरान सायरा बानो को चोट लग गई थी और अगले दिन उन्होंने प्रेम चोपड़ा को सीन में इतना जोर से थप्पड़ मारा कि सेट पर सन्नाटा छा गया। बाद में दोनों ने इस घटना को भूलकर आगे बढ़ गए।

निजी जीवन

प्रेम चोपड़ा पर्दे पर भले ही विलेन की भूमिका निभाते रहे हों, लेकिन असल जिंदगी में वे बेहद सादगी पसंद और पारिवारिक इंसान हैं। 1919 में उनकी शादी राज कपूर की साली उमा कपूर से हुई थी। उनके तीन बेटियां हैं – रकिता चोपड़ा, पुनीता चोपड़ा और प्रेरणा चोपड़ा। रकिता की शादी स्क्रीन राइटर राहुल नंदा से, पुनीता की शादी सिंगर विकास भल्ला से और प्रेरणा की शादी अभिनेता शर्मन जोशी से हुई है। प्रेम चोपड़ा के छह नाती-नातिन भी हैं।

बदलता समय और प्रेम चोपड़ा का नजरिया

समय के साथ बॉलीवुड बदला, नए चेहरे आए और पुराने सितारों के लिए जगह कम होने लगी। प्रेम चोपड़ा के पास बड़े बैनर की फिल्में कम होने लगीं, रोल छोटे होते गए। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। वे कहते हैं, “पछतावे से बड़ी कोई बीमारी नहीं होती।” आज भी वे अपने घर की बालकनी में खड़े होकर जिंदगी को नए नजरिए से देखते हैं।

प्रेरणा और सबक

प्रेम चोपड़ा की कहानी सिर्फ एक अभिनेता की नहीं, बल्कि एक इंसान की है जिसने हालात से लड़ना सीखा। उन्होंने पर्दे पर जितने विलेन निभाए, उससे कहीं बड़ा किरदार असल जिंदगी में निभाया – बिना शिकायत किए, बिना शोर मचाए। उनका सबसे बड़ा डायलॉग है – “आगे वही है जो भगवान लिखेगा और जब तक लिखा है तब तक जीना है।”

निष्कर्ष

प्रेम चोपड़ा की जिंदगी एक मिसाल है कि शोहरत आएगी, जाएगी, नाम बनेगा, मिटेगा, लेकिन इंसान अगर भीतर से मजबूत है तो वह हर हाल में खड़ा रहता है। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि अफवाहों पर भरोसा करने से पहले सच्चाई जानना जरूरी है। प्रेम चोपड़ा आज भी हमारे बीच हैं, और उनके जीवन से हर कोई प्रेरणा ले सकता है।

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