शादी में मिला गिफ्ट… और पल में उजड़ गया पूरा घर | Soumya Sekhar Sahu Family Case

शेखर ने साइन किया, पार्सल उठाया, और रसोई में चला गया।
“रीमा, देखो कोई गिफ्ट आया है। शायद शादी का तोहफा।”
रीमा मुस्कराई, “किसने भेजा?”
“एस के सिन्हा नाम लिखा है, रायपुर से।”
“तुम जानते हो?”
“नहीं, शायद कोई जानता होगा।”

दादी भी उत्सुकता से पास आ गईं। शेखर ने पार्सल खोलना शुरू किया। हरे रंग के कागज में लिपटा डिब्बा, जिसमें सफेद धागा लटका था।
“लगता है कोई सरप्राइज है।”
शेखर ने धागा खींच लिया।

धमाका, चीखें और मातम

जैसे ही धागा खींचा, तेज धमाका हुआ। रसोई में धुआं, दीवारें टूट गईं, खिड़कियाँ बिखर गईं। शेखर, रीमा और दादी अधजली हालत में पड़े थे। पड़ोसियों ने आवाज सुनी, दौड़ पड़े।
“क्या हुआ?”
“गैस सिलेंडर फटा है?”
“जल्दी एंबुलेंस बुलाओ!”

फायर सर्विस, एंबुलेंस आई। डॉक्टरों ने दादी को मृत घोषित किया। शेखर की हालत बेहद गंभीर थी, रीमा 40% जली थी। अस्पताल में शेखर ने अंतिम सांस ली। रीमा को बचाने के लिए डॉक्टरों की टीम ने जी-जान लगा दी।

5. पुलिस जांच और भ्रम

पुलिस मौके पर पहुँची। पहले सबने सोचा गैस सिलेंडर फटा है। लेकिन बारूद की गंध, विस्फोट के निशान देखकर बम स्क्वाड बुलाया गया।
“यह पार्सल बम है!”
पुलिस ने जांच शुरू की। कूरियर ऑफिस, पार्सल भेजने वाला—एस के सिन्हा नाम फर्जी निकला। मीडिया ने गलती से नाम आर के शर्मा बता दिया, जो बाद में सुराग बना।

सीसीटीवी नहीं था। पुलिस ने परिवार, दोस्तों, पड़ोसियों से पूछताछ की।
“क्या किसी पर शक है?”
ममता ने बताया, “कॉलेज में अंग्रेजी शिक्षक पंजीलाल से कभी ईगो क्लैश हुआ था, लेकिन ऐसा कोई दुश्मनी नहीं थी।”

6. एकतरफा प्यार और धमकी

कुछ महीने पहले शेखर को एक अनजान नंबर से फोन आया था—
“तुम रीमा से शादी मत करो, वरना परिणाम भुगतने होंगे।”
पुलिस ने नंबर ट्रेस किया, लड़का रीमा से एकतरफा प्यार करता था।
“मैंने धमकी दी थी, लेकिन बम भेजने की हिम्मत नहीं है।”
लाइ डिटेक्टर टेस्ट पास किया, पुलिस ने छोड़ दिया।

7. समाज का दबाव और क्राइम ब्रांच की एंट्री

तीन हफ्ते बीत गए। पुलिस ने सौ से अधिक लोगों की जांच की, कोई सुराग नहीं मिला।
“पुलिस ने ठीक से जांच नहीं की!”
“सरकार नाकाम है!”
जनता और मीडिया की आलोचना बढ़ी। केस क्राइम ब्रांच को सौंपा गया। 250 सीसीटीवी कैमरों की जांच, लेकिन फिर भी केस आगे नहीं बढ़ा।

8. रहस्यमयी पत्र और नई दिशा

4 अप्रैल 2018, क्राइम ब्रांच के एएसपी को पत्र मिला—
“विस्फोट का कारण विश्वासघात और पैसे की हानि है। पूरे परिवार को मार देने से भी इसकी भरपाई नहीं होगी। जांच के नाम पर निर्दोष लोगों को परेशान ना करें।”

पत्र को फॉरेंसिक लैब भेजा गया, कोई फिंगरप्रिंट नहीं मिला।
“परिवार को पढ़ने दो।”
ममता ने पत्र बार-बार पढ़ा, “अंडरटेइंग” शब्द पर अटक गई।
“यह शब्द पंजीलाल अक्सर इस्तेमाल करता है।”

9. सच की परतें खुलती हैं

पुलिस ने पंजीलाल को फिर बुलाया।
“मुझे कुछ नहीं पता!”
“सच बोलो!”
“एक मास्क पहने व्यक्ति ने मुझे पत्र पोस्ट करने को मजबूर किया।”
पुलिस ने घर की तलाशी ली। पार्सल का डुप्लीकेट बिल मिला।
“अब बोलो!”
पंजीलाल टूट गया।
“मैंने ही किया।”

10. अपराधी का मनोद्वंद्व और योजना

पंजीलाल, ज्योति विकास जूनियर कॉलेज में अंग्रेजी शिक्षक था। 2009 में प्रिंसिपल बना, 2017 में ममता को प्रिंसिपल बना दिया गया। अहंकार आहत हुआ, नफरत बढ़ी।
“ममता ने मेरी जिंदगी तबाह कर दी!”
उसने अपराध की किताबें पढ़ीं, फिल्में देखीं, सात महीने रिसर्च किया।
“कैसे मारूं?”
शादी के निमंत्रण के बहाने बम भेजने की योजना बनाई।

18 फरवरी को कॉलेज गया, फिर घर लौटकर फोन छोड़ दिया ताकि लोकेशन ट्रेस न हो। रायपुर गया, कूरियर ऑफिस में ऑटो ड्राइवर से पार्सल भेजवाने की कोशिश की, लेकिन वहां शक हुआ। फिर स्काई किंग कूरियर ऑफिस गया, जहाँ कोई सीसीटीवी नहीं था। फर्जी नाम से पार्सल भेजा।

शेखर की शादी में शामिल हुआ, शुभकामनाएं दीं। पार्सल 20 फरवरी को पहुँचा, लेकिन रिसेप्शन के कारण लौट गया। 23 फरवरी को डिलीवर हुआ।

11. अपराध के बाद की चालें

पार्सल बम के बाद, पंजीलाल ने शेखर के अंतिम संस्कार में भी भाग लिया।
“मैंने सबको धोखा दिया।”

12. अदालत का फैसला और न्याय की लंबी लड़ाई

24 अप्रैल 2018 को क्राइम ब्रांच ने पंजीलाल को गिरफ्तार किया। मुकदमा सात साल चला।
“क्या सच सामने आएगा?”
“क्या परिवार को न्याय मिलेगा?”
26 मई 2025 को पटनागढ़ की अदालत ने फैसला सुनाया—
“पंजीलाल मेहर को शेखर और उसकी दादी की हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई जाती है।”

13. रीमा की जिंदगी और परिवार का संघर्ष

रीमा, जिसने सपनों के साथ नया जीवन शुरू किया था, अब अकेली थी। उसका शरीर और मन दोनों घायल थे।
“क्यों मेरे साथ ऐसा हुआ?”
“क्या मेरी जिंदगी फिर कभी सामान्य हो पाएगी?”
ममता ने बेटे और मां दोनों को खो दिया।
“क्या मेरा परिवार फिर कभी मुस्करा पाएगा?”
रविंद्र कुमार साहू ने पत्नी, बेटे, मां और बहू के लिए जीना शुरू किया।
“हमें टूटना नहीं है। हमें लड़ना है।”

14. समाज, मीडिया और न्याय

मीडिया ने इस केस को देशभर में फैलाया।
“क्या हमारी न्याय व्यवस्था मजबूत है?”
“क्या अपराधी हमेशा पकड़े जाएंगे?”
पटनागढ़ का पार्सल केस भारतीय न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक मिसाल बन गया।

15. अपराध, ईर्ष्या और अहंकार का परिणाम

इस कहानी में सत्ता, लालच, ईर्ष्या और अहंकार ने एक परिवार की खुशियाँ छीन लीं।
अगर पंजीलाल ने सात महीने रिसर्च यह सोचने में बिताया होता कि एक अच्छा शिक्षक कैसे बना जाए, तो शायद उसकी जिंदगी और समाज दोनों बेहतर होते।
किसी के प्रति ईर्ष्या, प्रतिस्पर्धा और नफरत हमें अंधा बना देती है।
हमें अपने भीतर की बुरी आदतों को पहचानना चाहिए, उन्हें नकारना चाहिए, और मेहनत, प्रेम, और इंसानियत के रास्ते पर चलना चाहिए।

16. अंतिम संदेश

पटनागढ़ का पार्सल केस हमें सिखाता है कि अपराध चाहे कितना भी परफेक्ट लगे, एक दिन पकड़े ही जाते हैं।
कानून से बच भी जाएं, तो भगवान से नहीं बच सकते।
हमें अपने समाज को बेहतर बनाने के लिए केवल प्यार, सहयोग और मेहनत को अपनाना चाहिए।
ईर्ष्या और लालच की आग में किसी की जिंदगी न जलाएं।

रीमा ने अपने घावों को सहलाते हुए, एक बार फिर जीवन की ओर कदम बढ़ाया।
ममता ने अपने बेटे की याद को दिल में बसाकर, नए बच्चों को पढ़ाना जारी रखा।
रविंद्र कुमार ने पूरे परिवार को संभाला।
सुमन ने विदेश में रहकर भी परिवार के लिए हर संभव मदद की।

आज पटनागढ़ के लोग इस घटना को याद करते हैं, बच्चों को सिखाते हैं—
“सच्ची सफलता मेहनत, प्रेम और ईमानदारी से मिलती है।”

जय हिंद।