UP Shamli Triple Murder Case Update : बुर्का उतारने पर बेगम को मार डाला, कैमरे पर क्या बोला फारूक ?

परिचय
उत्तर प्रदेश के शामली जिले के गढ़ी दौलत गांव में हाल ही में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। एक व्यक्ति, फारुख, ने अपनी पत्नी और दो मासूम बेटियों की गोली मारकर हत्या की और उनकी लाशों को घर के आंगन में खुदवाए गए गहरे गड्ढे में दफना दिया। इस घटना के पीछे की वजह जितनी चौंकाने वाली है, उतनी ही समाज के भीतर छिपी कट्टर सोच को भी उजागर करती है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की गहन जांच जारी है।
घटना का विवरण
घटना का खुलासा तब हुआ जब गांव वालों को फारुख के घर से बदबू आने लगी और कई दिनों से उसकी पत्नी और बेटियां नजर नहीं आ रही थीं। पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद फारुख से पूछताछ की गई। शुरुआती जांच में फारुख ने बताया कि उसने अपनी पत्नी को इसलिए मार डाला क्योंकि वह बुर्का नहीं पहनती थी और बिना बुर्का पहने घर से बाहर जाती थी। यही नहीं, जब उसकी बेटियों ने अपनी मां को गोली लगते हुए देख लिया तो उसने उन्हें भी मौत के घाट उतार दिया।
फारुख ने हत्या के बाद लाशों को घर के आंगन में खुदवाए गए गहरे गड्ढे में दफना दिया और ऊपर से मिट्टी डालकर गड्ढे को भर दिया। पुलिस ने फारुख की निशानदेही पर गड्ढे से शवों को बरामद किया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
गांव वालों की प्रतिक्रिया
गांव के लोग फारुख को एक शांत और अपने काम से काम रखने वाला व्यक्ति मानते थे। गांव के एक निवासी राशिद ने बताया कि फारुख किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करता था, ढाबे पर रोटी बनाने का काम करता था और अपने परिवार के साथ ही रहता था। किसी ने कभी उसकी पत्नी या बच्चियों को बाहर नहीं देखा था। फारुख अपनी पत्नी को न तो मायके जाने देता था और न ही ससुराल वालों को अपने घर बुलाता था। घर में बाहर का ताला लगा रहता था, ताकि कोई अंदर न आ सके।
फारुख की मां की बात
फारुख की मां ने बताया कि उन्हें इस घटना का कोई अंदाजा नहीं था। उन्होंने कहा कि फारुख अपनी पत्नी को बाहर नहीं निकलने देता था, और बच्चों को भी स्कूल या मदरसे नहीं भेजता था। बच्चों के आधार कार्ड या फोटो भी नहीं बनवाए गए थे। मां ने कहा कि बहू और बच्चियां ठीक थीं, लेकिन फारुख की सोच बहुत संकुचित थी।
पुलिस जांच और आरोपी का बयान
शामली के एसपी एनपी सिंह ने बताया कि फारुख ने पूछताछ में पूरी घटना स्वीकार कर ली। उसने बताया कि उसकी शादी करीब 18 साल पहले मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर थाने के पास के गांव में हुई थी। उसके कुल पांच बच्चे हैं, जिनमें दो बेटे और तीन बेटियां थीं। फारुख ने बताया कि उसकी पत्नी उससे हमेशा झगड़ा करती थी कि वह उसे पर्दे में रखता है, बाहर नहीं जाने देता, बच्चों को पढ़ाई नहीं कराता, और उन्हें कैद करके रखा है।
एक महीने पहले उसकी पत्नी ने बुर्का और नकाब उतारकर खुले में जाने की जिद की, जिससे फारुख को बहुत बुरा लगा। उसने योजना बनाकर घर में शौचालय के बहाने गहरा गड्ढा खुदवाया और फिर हथियार का इंतजाम किया। घटना की रात उसने चाय बनाने के बहाने पत्नी को बुलाया और जब वह चूल्हे में आग जलाने लगी, तो पीछे से सिर में गोली मार दी। बड़ी बेटी ने आवाज सुनकर बाहर आकर देखा तो उसे भी गोली मार दी। छोटी बेटी को गला दबाकर मार डाला। तीनों शवों को बोरे में भरकर गड्ढे में दफना दिया और ऊपर से मिट्टी डाल दी।
आरोपी की मानसिकता और तालीबानी सोच
फारुख की सोच बेहद संकुचित और कट्टर थी। उसने स्वीकार किया कि उसे पत्नी का बिना बुर्का पहने बाहर जाना बर्दाश्त नहीं था। उसने बच्चों को भी स्कूल या मदरसे नहीं भेजा, ताकि उनकी फोटो न खिंचवानी पड़े और वे बाहर न जा सकें। यह सोच कहीं न कहीं तालीबानी विचारधारा को दर्शाती है, जिसमें महिलाओं को पर्दे में रखना, शिक्षा से वंचित रखना और उनकी स्वतंत्रता छीनना शामिल है।
समाज में कट्टरता और महिलाओं की स्थिति
यह घटना समाज में मौजूद कट्टरता और महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण सोच को उजागर करती है। ऐसे मामलों में अक्सर देखा जाता है कि महिलाएं अपने पहनावे, शिक्षा, और स्वतंत्रता को लेकर अत्याचार का शिकार होती हैं। फारुख की पत्नी ने खुले में जाने और बच्चों को पढ़ाने की इच्छा जताई थी, जिससे फारुख को अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा पर खतरा महसूस हुआ और उसने इतना बड़ा कदम उठा लिया।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
पुलिस ने फारुख को गिरफ्तार कर लिया है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार और कारतूस कैराना के एक व्यक्ति से खरीदे गए थे, जिसकी तलाश की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या में कोई और शामिल था या नहीं, क्योंकि अकेले इतने बड़े गड्ढे को खोदना और शवों को दफनाना संभव नहीं लगता।
पीड़ित परिवार की स्थिति
फारुख की मां और अन्य परिजन सदमे में हैं। उन्होंने बताया कि फारुख ने पिछले कुछ समय से उनसे भी बातचीत बंद कर दी थी। बच्चों को न तो स्कूल भेजता था और न ही किसी से मिलने देता था। परिवार में तनाव और अलगाव की स्थिति थी। मां ने कहा कि बहू और बच्चियां बिल्कुल ठीक थीं, लेकिन फारुख की कट्टर सोच ने सबकुछ खत्म कर दिया।
सामाजिक और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण
इस घटना के पीछे मनोवैज्ञानिक कारण भी हैं। फारुख का व्यवहार असामान्य और मानसिक रूप से अस्वस्थ प्रतीत होता है। उसकी सोच में कट्टरता, असुरक्षा, और सामाजिक प्रतिष्ठा को लेकर डर साफ झलकता है। समाज में ऐसे लोगों की संख्या कम नहीं है, जो अपनी सोच और मान्यताओं के चलते परिवार के सदस्यों पर अत्याचार करते हैं।
महिलाओं के अधिकार और शिक्षा की जरूरत
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा और स्वतंत्रता की रक्षा करना बेहद जरूरी है। समाज में महिलाओं को पर्दे में रखने, उनकी शिक्षा रोकने और स्वतंत्रता छीनने जैसी सोच पर रोक लगानी होगी। सरकार और समाज को मिलकर ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और महिलाओं को जागरूक करना चाहिए।
मीडिया की भूमिका
मीडिया ने इस घटना को प्रमुखता से उठाया है, जिससे समाज में जागरूकता बढ़ी है। मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे मामलों को उजागर करे और समाज को सोचने पर मजबूर करे कि आखिर ऐसी घटनाएं क्यों होती हैं और उन्हें कैसे रोका जा सकता है।
निष्कर्ष
शामली के गढ़ी दौलत गांव की यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज में मौजूद कट्टरता और महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण सोच का आईना है। फारुख की सनकी सोच ने उसकी पत्नी और दो मासूम बच्चियों की जान ले ली। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है। समाज को ऐसी सोच के खिलाफ जागरूक होना होगा, महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करनी होगी, और शिक्षा तथा स्वतंत्रता को बढ़ावा देना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।
अंत में, यह घटना एक चेतावनी है कि समाज में कट्टरता और संकुचित सोच कितनी घातक हो सकती है। हमें अपने आसपास ऐसी सोच को पहचानना, उसका विरोध करना और महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने की दिशा में काम करना होगा।
(यह लेख शामली की घटना पर आधारित है, जिसमें फारुख ने अपनी पत्नी और दो बेटियों की हत्या कर दी। पुलिस जांच जारी है। समाज में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए शिक्षा, जागरूकता और कानून का पालन जरूरी है।)
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