पति को ‘गार्ड’ समझकर किया अपमान, वो शहर का सबसे बड़ा अफसर निकला!

वर्दी के पीछे छुपा सच

प्रस्तावना

बनारस के पुराने मोहल्ले में शाम की धुंधलका फैल रही थी। शर्मा सदन के छोटे से किराए के घर में कलह का शोर था। काजल, अपने पति रोहन को मामूली गार्ड समझकर रोज अपमान करती थी। उसे शर्म आती थी कि उसका पति रातों को दूसरों के घरों के बाहर पहरा देता है। लेकिन एक दिन, पूरे शहर के सामने एक ऐसा सच उजागर हुआ जिसने काजल की दुनिया ही बदल दी। यह कहानी है भरोसे, त्याग और असली पहचान की।

पहला भाग: अपमान और तिरस्कार

काजल कमरे के कोने में बैठी थी, उसकी आंखों में आंसू थे और सामने कांच की टूटी चूड़ियां बिखरी थीं। दरवाजे पर रोहन खड़ा था, साधारण नीली वर्दी में, हाथ में सब्जी का थैला लिए। काजल ने ताने मारते हुए कहा, “कब तक रोहन? आखिर कब तक?” उसे अपने रिश्तेदारों के सामने झूठ बोलना पड़ता था कि उसका पति बैंक में क्लर्क है। उसे शर्म आती थी कि उसका पति एक गार्ड है।

रोहन ने शांत स्वर में कहा, “काजल, काम कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। मैं मेहनत की रोटी लाता हूं।” लेकिन काजल को उसकी बातें समझ नहीं आती थीं। वह अपने बहन के पति की कार, बंगले और ऐशो-आराम को देखकर खुद को अभागी समझती थी। उसने रोहन को ताना मारा, “मैंने तुमसे शादी करके अपनी जिंदगी बर्बाद कर ली।”

रोहन के दिल पर जैसे किसी ने पत्थर रख दिया हो। वह चाहता तो अभी सब बता सकता था कि वह कोई मामूली गार्ड नहीं, बल्कि भारत सरकार के खुफिया विभाग का सीनियर ऑफिसर है। लेकिन देश की सुरक्षा और काजल की जान की हिफाजत के लिए उसे यह कड़वा घूंट पीना पड़ रहा था।

दूसरा भाग: छुपा हुआ मिशन

रात को रोहन ने अपनी वर्दी की जेब से एक पुराना फोन निकाला। उसमें एक कोड टाइप किया। उधर से आवाज आई, “सर, टारगेट कंफर्म है। कल रात ग्रैंड होटल में बड़ी डील है। रेड करनी चाहिए?” रोहन ने सख्त आवाज में कहा, “नहीं, जल्दबाजी नहीं। वहां बहुत सारे सिविलियंस होंगे। मेरी पत्नी भी वहां होगी। रिस्क बहुत ज्यादा है। मैं खुद वहां मौजूद रहूंगा। बैकअप टीम होटल के बाहर स्टैंडबाय पर चाहिए।”

अगले दिन ग्रैंड होटल में काजल अपने रिश्तेदारों के बीच बैठी थी। उसने रोहन को आने से मना किया था, लेकिन दिल के किसी कोने में चाहती थी कि वह आए। तभी उसके अमीर मामा जी ने मजाक उड़ाया, “काजल बेटा, सुना है तेरे पतिदेव नहीं आए। क्या आज नाइट शिफ्ट है या गार्ड्स के साथ गेट पर खड़े हैं?” सब हंस पड़े। काजल का चेहरा शर्म से लाल हो गया।

तभी हॉल के दरवाजे से रोहन दाखिल हुआ। साधारण सफेद शर्ट और पैंट में। मिस्टर वर्मा ने फिर व्यंग्य किया, “लो भाई आ गया हमारा हीरो। गेट पर एंट्री रजिस्टर करवा के आए हो ना?” काजल ने शिकायत भरी नजरों से रोहन को देखा, “क्यों आए तुम? मुझे जलील करवाने?”

रोहन ने जेब से छोटी सी डिब्बी निकाली और काजल के हाथ में रख दी, “सालगिरह मुबारक हो काजल। कल रात देना भूल गया था।” डिब्बी में एक नाजुक सोने की चैन थी, जो उसने कई महीनों की तनख्वाह जमा करके खरीदी थी। हॉल में सन्नाटा छा गया।

तीसरा भाग: खतरे की रात

अचानक होटल की लाइटें बुझ गईं। अफरातफरी मच गई। जब लाइट आई तो हॉल का माहौल बदल चुका था। स्टेज पर चार लोग चढ़ गए, जिनका हावभाव संदिग्ध था। उन्होंने माइक छीन लिया, “कोई अपनी जगह से नहीं हिलेगा। होटल के सारे दरवाजे लॉक कर दिए गए हैं।” यह कोई डकैती थी, अमीर मेहमानों के गहने और होटल की तिजोरी में रखे कीमती सामान को चुराने का इरादा था।

काजल डर के मारे रोहन से चिपक गई, “रोहन, ये लोग कौन हैं? अब क्या होगा?” रोहन ने उसका हाथ कसकर पकड़ा, “घबराओ मत, जब तक मैं यहां हूं तुम्हें कुछ नहीं होगा।” काजल ने गौर किया कि रोहन की आंखों में अब लाचारी नहीं थी, बल्कि आत्मविश्वास की चमक थी।

तभी रोहन के फोन पर कोड रेड का मैसेज आया। उसने काजल का हाथ छोड़ा, “बाथरूम जा रहा हूं, यहीं रहना।” काजल को विश्वास नहीं हुआ, “इस वक्त तुम मुझे छोड़कर छिपने जा रहे हो। कायर कहीं के।” लेकिन हॉल के बाहर गलियारों में रोहन का असली रूप जाग चुका था।

चौथा भाग: असली हीरो की पहचान

होटल के सर्विस कॉरिडोर में रोहन ने अपनी चाल बदल ली। अब वह कंधे झुका गार्ड नहीं, बल्कि चीते जैसी फुर्ती वाला कमांडो था। उसने ब्लूटूथ डिवाइस ऑन किया, “कंट्रोल, यह ईगल है। होटल के अंदर छह घुसपैठिए हैं। उनके पास जैमर है। पुलिस बाहर ही रहे, अंदर आने की कोशिश ना करें। मैं इसे हैंडल कर रहा हूं।”

रोहन ने सबसे पहले होटल के पावर सप्लाई बॉक्स को ढूंढा। उसने उस हिस्से की लाइट फ्लक्चुएट करना शुरू कर दी जहां अपराधी खड़े थे। अपराधी कंफ्यूज हो गए। लीडर ने अपने एक साथी को बाहर भेजा। जैसे ही वह बाहर निकला, रोहन ने उसे बिजली की रफ्तार से जकड़ लिया। कमांडो दांव से वह आदमी बेहोश हो गया। एक-एक करके रोहन ने सभी अपराधियों को निष्क्रिय कर दिया।

हॉल के स्पीकर सिस्टम पर रोहन की आवाज गूंजी, “तुम्हारा खेल खत्म हो चुका है।” धुएं की आड़ में रोहन हॉल में दाखिल हुआ। मेहमानों को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, बस सायों की भागदौड़ महसूस हो रही थी। रोहन अपराधियों के पास जाता और अगले ही पल वे जमीन पर गिरे होते। कोई खूनखराबा नहीं, सिर्फ फुर्ती। दो मिनट में चार अपराधी जमीन पर पड़े थे। लीडर अकेला था।

लीडर ने लोहे की कुर्सी उठाकर रोहन पर वार करने की कोशिश की। रोहन ने एक हाथ से कुर्सी हवा में ही रोक ली और दूसरे हाथ से लीडर को धक्का दिया। लीडर गिर पड़ा और हिम्मत हार गया।

पांचवां भाग: सच का उजागर होना

लाइटें जल गईं। काजल ने देखा कि वह हीरो कोई और नहीं, उसका पति रोहन है। लेकिन यह वही रोहन नहीं था जो सब्जी का थैला लाता था। बाहर से पुलिस कमांडो की टीम दाखिल हुई। काजल को लगा पुलिस रोहन को पकड़ लेगी, लेकिन पुलिस कमिश्नर सबसे आगे आए। उन्होंने अपराधियों को गिरफ्तार करने का इशारा किया और फिर सीधे रोहन के पास गए। कमिश्नर ने रोहन को सैल्यूट किया, “जय हिंद सर। हमें खेद है कि हम देर से पहुंचे। आपने अकेले ही स्थिति संभाल ली। हमें हेड क्वार्टर से खबर मिल गई थी कि एजेंट डेल्टा यहां मौजूद है।”

काजल के कानों पर विश्वास नहीं हुआ। रोहन ने कमिश्नर का सैल्यूट स्वीकार नहीं किया, बस इशारा किया कि बात मत करो। लेकिन देर हो चुकी थी। हॉल का हर व्यक्ति और सबसे बढ़कर काजल यह देख चुकी थी।

छठा भाग: घर की चारदीवारी में तूफान

होटल से घर तक का रास्ता खामोशी में कटा। काजल ऑटो की पिछली सीट पर बैठी थी, मन अतीत की गलियों में भटक रहा था। उसे याद आया वह दिन जब रोहन ने अपनी घड़ी बेच दी थी, दवाइयों के लिए। वह रात जब बारिश में भीगते हुए रोहन मुस्कुराते हुए घर आया था। काजल को लगने लगा कि वह कितनी अंधी थी। जिसे वह कंजूसी समझती थी, वह दरअसल रोहन का त्याग था। जिसे वह कायरता समझती थी, वह उसका धैर्य था।

घर पहुंचते ही काजल ने दरवाजा बंद किया और सीधे रोहन के सामने खड़ी हो गई। “कौन हो तुम रोहन?” काजल ने धीमी आवाज में पूछा। “वो कमिश्नर तुम्हें सर क्यों कह रहा था? तुम गार्ड नहीं हो। है ना? तुम झूठ बोलते रहे। क्यों?”

रोहन ने एक गहरी सांस ली। उसने कुर्सी खींची और काजल को बैठने का इशारा किया। अब और छिपाने का कोई मतलब नहीं था। “काजल, मैं गार्ड नहीं हूं।” उसने अपनी जेब से आईडी कार्ड निकाला, “रोहन मल्होत्रा, स्पेशल ऑपरेशंस विंग, इंटेलिजेंस ब्यूरो।” काजल ने कांपते हाथों से कार्ड उठाया।

सातवां भाग: सच्चाई और पछतावा

“मैं देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए काम करता हूं। दो साल पहले मैंने एक बड़े देशविरोधी नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। मेरी जान को खतरा था, लेकिन उससे भी ज्यादा खतरा मेरे परिवार को था। डिपार्टमेंट ने मुझे अंडरग्राउंड होने का आदेश दिया। मुझे अपनी पहचान मिटानी पड़ी। अगर किसी को भनक भी लग जाती तो वे लोग सबसे पहले तुम्हें निशाना बनाते। तुम्हें सुरक्षित रखने का तरीका था कि मैं एक मामूली आदमी बन जाऊं।”

काजल सन्न रह गई। उसे अपनी कही हुई बातों पर इतनी घिन आ रही थी कि वह रोहन का हाथ भी नहीं पकड़ पा रही थी। “तुमने मुझे बताया क्यों नहीं रोहन?” काजल रो पड़ी। “मैं तुम्हारी पत्नी हूं। क्या मुझे इतना भी हक नहीं था?”

“हक था,” रोहन ने उसका हाथ थाम लिया। “लेकिन सुरक्षा मेरी जिम्मेदारी थी। अगर तुम्हें पता होता तो तुम्हारे चेहरे का डर तुम्हें दुश्मनों के सामने बेनकाब कर देता। मैंने तुम्हारी नफरत बर्दाश्त कर ली क्योंकि मुझे तुम्हारा सुरक्षित रहना ज्यादा प्यारा था।”

काजल टूटकर रोहन के गले लग गई। “मुझे माफ कर दो रोहन। मैंने तुम्हें कितना जलील किया। मैंने तुम्हारी वर्दी को शर्मिंदगी समझा, जबकि वही वर्दी मेरा कवच थी।”

आठवां भाग: नई शुरुआत

अगले दिन सुबह शर्मा सदन के बाहर का नजारा बदल चुका था। मोहल्ले के लोग जो कल तक रोहन को चौकीदार कहते थे, आज हैरान होकर खिड़कियों से झांक रहे थे। घर के बाहर दो सरकारी गाड़ियां खड़ी थीं। मिस्टर वर्मा और बुआ गेट पर ही रुक गए। रोहन घर से बाहर निकला, अफसर की वर्दी में, कंधे पर सितारे चमक रहे थे। काजल उसके साथ थी, गर्व से उसका हाथ थामे।

मिस्टर वर्मा ने हकलाते हुए कहा, “अरे रोहन बेटा, तुम तो बड़े साहब निकले। हमें तो पता ही नहीं था।” रोहन ने बहुत शालीनता से कहा, “इंसान की पहचान उसके पद या पैसे से नहीं, उसके कर्म से होती है। जब मैं गार्ड था तब भी वही इंसान था जो आज हूं। फर्क सिर्फ आपकी नजरों में आया है। इज्जत वर्दी की नहीं, इंसान की कीजिए।”

मोहल्ले के लोग जो कल उसका मजाक उड़ाते थे, आज सम्मान से रास्ता छोड़ रहे थे। रोहन और काजल गाड़ी में बैठे। काजल ने रोहन के कंधे पर सिर रख दिया, “अब हम कहां जा रहे हैं?” “नई शुरुआत की तरफ,” रोहन मुस्कुराया।

उपसंहार

गाड़ी धूल उड़ाती हुई आगे बढ़ गई। लेकिन पीछे एक बहुत बड़ा सबक छोड़ गई। रोहन और काजल की कहानी हमें सिखाती है कि कभी भी किसी को उसके काम या कपड़ों से जज नहीं करना चाहिए। अक्सर खामोश रहने वाले लोग वह कर जाते हैं, जिनका शोर मचाने वालों को अंदाजा भी नहीं होता। एक रिश्ते में भरोसा और सम्मान पैसे से कहीं बढ़कर होता है।

अगर आप काजल की जगह होते और आपका जीवन साथी आपसे इतना बड़ा सच छिपाता, क्या आप उसे माफ कर पाते? हां या ना? अपना जवाब कमेंट में जरूर बताएं।