मां और बेटी दोनों ने नौकर संग किया कारनामा/पुलिस के होश उड़ गए/

“जोधपुर के खेतों में दबी सच्चाई”
भाग 1: गीता देवी की दुनिया
आज मैं आपको राजस्थान के जोधपुर जिले के पलासनी गाँव की एक ऐसी सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ, जो शायद आपके दिल को झकझोर दे।
इस गाँव में रहती थी गीता देवी, एक विधवा महिला।
सात साल पहले उसके पति की एक कार एक्सीडेंट में मौत हो गई थी।
पति के जाने के बाद गीता के जीवन में अंधेरा छा गया, लेकिन उसने हार नहीं मानी।
अपने परिवार की जिम्मेदारी खुद उठाई, अपनी बेटी मीनाक्षी को पढ़ाया, खेती-बाड़ी संभाली और समाज के तानों का सामना किया।
गीता के पास 12 एकड़ जमीन थी, और उसकी इकलौती बेटी मीनाक्षी देवी उसी खेत में काम करती थी।
गाँव के लोग अक्सर कहते—”बेटी हो तो मीनाक्षी जैसी, वरना ना हो।”
मीनाक्षी मेहनती थी, लेकिन उसकी उम्र 23 साल हो चुकी थी और शादी अब तक नहीं हुई थी।
भाग 2: सपनों की तलाश
मीनाक्षी का सपना था—वह किसी पुलिस वाले से शादी करेगी।
माँ गीता देवी लगातार ऐसे लड़के की तलाश करती, जो पुलिस विभाग में हो।
लेकिन गाँव में खेती-बाड़ी करने वाली लड़की को पुलिस वाला लड़का मिलना आसान नहीं था।
एक दिन गीता की पड़ोसन रेनू ने सलाह दी—”बेटी अब जवान हो चुकी है, जल्दी उसकी शादी कर दो।”
गीता बोली—”मीनाक्षी को पुलिस वाला ही चाहिए, लेकिन ऐसा लड़का नहीं मिल रहा।”
रेनू ने कहा—”लड़कियाँ खेती का काम छोड़ दें तो ही अच्छे रिश्ते आते हैं।”
गीता को ये बात पसंद आ गई।
उसने सोचा, अब खेत का काम किसी नौकर को दे दूँ, ताकि बेटी की शादी के लिए अच्छे रिश्ते आएं।
भाग 3: रौनक की एंट्री
गीता देवी पड़ोस के रौनक के घर गई।
रौनक गरीब परिवार का लड़का था, लेकिन खेती का काम जानता था।
गीता ने रौनक के माता-पिता से बात की, और रौनक को अपने खेत में काम करने के लिए रख लिया।
रौनक गीता को पसंद करता था, और गीता भी उसके व्यवहार से आकर्षित हो गई थी।
गीता ने रौनक को ₹13000 महीने की सैलरी देने का वादा किया।
अब मीनाक्षी ने भी खेत का काम छोड़ दिया, और माँ-बेटी दोनों खुश थीं।
लेकिन गीता के मन में कुछ और ही चल रहा था।
वो रौनक को सिर्फ नौकर नहीं, बल्कि अपने जीवन का साथी मानने लगी थी।
भाग 4: रिश्तों की उलझन
15 दिन बाद, मीनाक्षी ने माँ से कहा—”मुझे शहर जाकर कपड़े खरीदने हैं।”
गीता ने उसे ₹15000 दिए, और मीनाक्षी शहर चली गई।
इसी बीच रौनक घर आया।
गीता ने उसे घर बुलाया, दरवाज़ा बंद किया, और रौनक को एडवांस सैलरी के ₹13000 दिए।
साथ ही ₹7000 “अपनी खुशी” से दिए, और कहा—”आज तुम्हें मेरे साथ वक्त गुजारना पड़ेगा।”
रौनक भी तैयार हो गया।
दोनों ने अपनी रजामंदी से शारीरिक संबंध बनाए।
इसके बाद गीता ने उसे और पैसे दिए, और वादा किया कि हर महीने ऐसे ही पैसे मिलेंगे।
अब गीता को लगने लगा था कि उसे अपना जीवनसाथी मिल गया है।
अगर मीनाक्षी की जल्दी शादी हो जाए, तो वह पूरी जिंदगी रौनक के साथ खुशी से बिता सकती है।
भाग 5: मीनाक्षी की शादी
10 दिन बाद, रेनू ने गीता को बताया—”मीनाक्षी के लिए पुलिस में काम करने वाला अच्छा लड़का मिल गया है, नाम है संग्राम।”
गीता और रेनू संग्राम के घर गईं, बात पक्की हुई।
संग्राम के माता-पिता लालची थे, उन्होंने दहेज में बड़ी गाड़ी मांगी।
गीता ने सब स्वीकार कर लिया।
20 दिन बाद, धूमधाम से मीनाक्षी की शादी संग्राम से हो गई।
मीनाक्षी की शादी के बाद, उसके सपनों की हकीकत सामने आई।
पहली रात संग्राम उससे दूर रहा, तकिया लेकर दूसरे कमरे में सो गया।
मीनाक्षी ने सोचा—शायद पहली रात है, पति शर्मीला है।
लेकिन अगले कई दिन यही सिलसिला चलता रहा।
भाग 6: टूटे अरमान
10 दिन बाद, मीनाक्षी ने संग्राम से पूछा—”अगर तुम मुझसे दूर ही रहना चाहते थे, तो शादी क्यों की?”
संग्राम ने कहा—”यह शादी मैंने नहीं, मेरे माता-पिता ने जबरदस्ती करवाई है।”
मीनाक्षी ने पूछा—”ऐसी कौन सी बात है?”
संग्राम ने अपनी सच्चाई बताई—”एक साल पहले एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें मेरे प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोट आ गई थी। अब मैं पति-पत्नी वाला रिश्ता नहीं निभा सकता।”
मीनाक्षी दुखी हो गई।
उसने अपनी माँ को सब बता दिया।
गीता भी परेशान थी, लेकिन बेटी को मायके बुला लिया।
भाग 7: अकेलापन और लालच
मीनाक्षी मायके में रहने लगी।
एक दिन, माँ गीता पड़ोसियों के घर गई थी, और मीनाक्षी घर में अकेली थी।
रौनक घर आया, मीनाक्षी ने उसे देखा और सोचा—”पति तो सुख नहीं दे सकता, क्यों न नौकर को ही अपना सहारा बना लूं।”
मीनाक्षी ने रौनक को खेत में बुलाया।
खेत में दोनों मिले, और अपनी रजामंदी से संबंध बनाए।
अब दोनों का रिश्ता गहरा हो चुका था।
एक पड़ोसी संजीव कुमार ने इन्हें खेत के कमरे से बाहर निकलते देख लिया।
संजीव ने सोचा—अगर यह बात माँ को बता दी तो लड़की की बदनामी हो जाएगी।
संजीव ने किसी को कुछ नहीं बताया।
भाग 8: रिश्तों की परतें
अब जब भी मीनाक्षी को वक्त मिलता, वह रौनक के साथ समय बिताती थी।
इधर, गीता भी अपनी बेटी के मौसी के घर जाने का इंतजार करती थी, ताकि वह रौनक के साथ समय बिता सके।
एक दिन मीनाक्षी मौसी के घर चली गई।
गीता ने रौनक को रात में घर बुलाया।
रौनक आया, गीता ने उसे शक्तिवर्धक टेबलेट मिलाकर दूध पिलाया, ताकि रात “अच्छी” बीते।
लेकिन रौनक की तबीयत बिगड़ने लगी।
उसके दिल की धड़कनें तेज हो गईं, और एक घंटे बाद वह बेहोश होकर मर गया।
भाग 9: छुपाने की कोशिश और सच का उजागर होना
गीता डर गई।
उसने रौनक की लाश को घर के आंगन में दफनाने का फैसला किया।
रात में गड्ढा खोदा, लाश को दफनाने लगी।
इसी बीच, पड़ोसी मदन खेत से लौट रहा था।
उसने गीता को लाश दफनाते देख लिया, शोर मचाया, पड़ोसी इकट्ठा हुए।
पुलिस बुलाई गई।
रौनक की लाश मिली, गीता देवी को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस स्टेशन में गीता ने अपना जुर्म कबूल लिया।
उसके खिलाफ चार्जशीट दायर हो गई।
भाग 10: समाज, सवाल और संदेश
अब गाँव में चर्चा थी—
“क्या गीता देवी ने सही किया?”
“क्या मीनाक्षी की शादी का सच छुपाना ठीक था?”
“क्या लालच और अकेलापन इंसान को इतना बदल सकता है?”
फेसबुक पर भी यही सवाल उठे—
“अगर आपके साथ ऐसा होता तो आप क्या करते?”
“क्या समाज को ऐसे मामलों में और संवेदनशील होना चाहिए?”
भाग 11: सबक और सोच
दोस्तों, इस कहानी का उद्देश्य किसी को दुख पहुँचाना नहीं है।
यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है—
क्या अकेलापन और सामाजिक दबाव इंसान को गलत रास्ते पर ले जा सकता है?
क्या रिश्तों की सच्चाई छुपाना सही है?
क्या समाज को ऐसे मुद्दों पर खुलकर बात करनी चाहिए?
गीता देवी, मीनाक्षी, रौनक, संग्राम—हर किरदार हमें इंसान की कमजोरियों, इच्छाओं और समाज की कठोरता का आईना दिखाते हैं।
उपसंहार: जागरूकता और इंसानियत
कानून ने गीता को सजा दी, लेकिन सवाल यह है कि क्या समाज ने अपनी जिम्मेदारी निभाई?
क्या रिश्तों में ईमानदारी, संवेदनशीलता और संवाद होना जरूरी नहीं है?
दोस्तों, अगर यह कहानी आपके दिल को छू गई हो, तो कमेंट में जरूर बताएं—
क्या गीता देवी का फैसला सही था?
क्या मीनाक्षी को सच छुपाना चाहिए था?
क्या रौनक की मौत का जिम्मेदार सिर्फ गीता है या समाज भी?
मिलते हैं अगली सच्ची, सोच बदलने वाली कहानी के साथ।
तब तक के लिए—जय हिंद, वंदे मातरम।
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