महिला ने एक गलत कदम उठाया और फिर उसका अंजाम ठीक नहीं हुआ/पुलिस भी सोचने पर मजबूर हुई/
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एक गलत कदम का अंजाम
भूमिका
कानपुर जिले के डेरापुर गांव में एक साधारण किसान अनिल कुमार अपनी पत्नी शोभा देवी के साथ रहता था। अनिल एक मेहनती व्यक्ति था, जो दिन-रात खेतों में काम करता था, लेकिन उसके मेहनत के बावजूद उसे अपनी मजदूरी का पूरा भुगतान नहीं मिलता था। यह स्थिति उसे बहुत परेशान करती थी। शोभा देवी, जो अपने पति से बेहद प्यार करती थी, हमेशा उसकी हिम्मत बढ़ाती थी। दोनों की शादी को दो साल हो चुके थे, लेकिन उनके कोई संतान नहीं थी। फिर भी वे एक-दूसरे के साथ खुश रहते थे।
परिवार की स्थिति
अनिल के माता-पिता कई साल पहले गुजर चुके थे, जिससे वह और शोभा अकेले पड़ गए थे। अनिल ने अपनी पत्नी से कहा, “शोभा, मुझे लगता है कि हमें कुछ बदलाव करना होगा। मुझे अपनी मेहनत का पूरा पैसा नहीं मिल रहा है।” शोभा ने सुझाव दिया, “तुम गांव के जमींदारों के खेत में काम करना छोड़ दो। किसी कारखाने में मेहनत मजदूरी का काम करो। वहां तुम्हें अच्छे पैसे मिलेंगे।”

अनिल ने अपनी पत्नी की बात मानी और एक कारखाने में नौकरी की तलाश करने लगा। वह अंततः एक कारखाने में काम करने लगा, जहां उसे हर महीने 14,000 रुपये मिलते थे। इससे उनका जीवन थोड़ा बेहतर हो गया, लेकिन शोभा का अंधविश्वास और तांत्रिकों पर विश्वास उनके लिए परेशानी का कारण बन गया।
अंधविश्वास का प्रभाव
शोभा देवी पढ़ी-लिखी नहीं थी, लेकिन उसमें अंधविश्वास कूट-कूट कर भरा हुआ था। वह अक्सर तांत्रिकों और बाबाओं की बातें सुनती थी और उन पर विश्वास करती थी। एक दिन, गांव में एक तांत्रिक आया, जिसने लोगों को अपनी जादुई शक्तियों से आकर्षित किया। शोभा ने तय किया कि उसे उस तांत्रिक से मदद लेनी चाहिए।
तांत्रिक से मुलाकात
शोभा देवी ने उस तांत्रिक से मिलने का निर्णय लिया। उसने अपने पति अनिल से कहा, “मुझे लगता है कि हमें इस तांत्रिक से मदद लेनी चाहिए। वह हमारी समस्याओं का समाधान कर सकता है।” अनिल ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन शोभा ने अपनी बात पर जोर दिया।
आखिरकार, शोभा ने तांत्रिक से मिलने का फैसला किया। वह तांत्रिक के पास गई और अपनी समस्याओं के बारे में बताया। तांत्रिक ने उसे आश्वासन दिया कि वह उसकी मदद करेगा, लेकिन इसके लिए उसे कुछ विशेष उपाय करने होंगे।
गलत कदम
तांत्रिक ने शोभा को बताया कि उसे अपने पति के लिए एक विशेष पूजा करनी होगी। उसने कहा, “तुम्हें सात नींबू लेकर उन्हें पानी में डालकर अपने पति को पिलाना होगा। इससे तुम्हारा पति तुम्हारे पास वापस आ जाएगा।” शोभा ने पूरी बात मान ली और तांत्रिक की सलाह पर अमल करने लगी।
जैसे-जैसे दिन बीतते गए, शोभा ने तांत्रिक की बातों को गंभीरता से लिया। उसने अनिल को नींबू का पानी पिलाना शुरू कर दिया। लेकिन अनिल पर इसका कोई असर नहीं हुआ। वह अपनी पुरानी आदतों में लिप्त रहा और आंचल देवी नाम की एक खूबसूरत महिला के साथ समय बिताने लगा।
आंचल देवी का प्रभाव
आंचल देवी, जो अनिल के पड़ोस में रहती थी, अनिल को देखकर आकर्षित हुई। उसने अनिल को अपने जाल में फंसाने का प्रयास किया। अनिल और आंचल के बीच दोस्ती बढ़ने लगी, और एक दिन अनिल ने आंचल के साथ गलत संबंध बना लिए। यह सब शोभा से छिपा हुआ था।
जब शोभा को पता चला कि उसका पति आंचल के साथ समय बिता रहा है, तो वह टूट गई। उसने सोचा कि तांत्रिक के उपायों का कोई असर नहीं हुआ और उसका पति किसी और के साथ चला गया। वह बहुत परेशान हो गई और अपने पति को वापस पाने के लिए desperate हो गई।
पुलिस की भूमिका
एक दिन, शोभा ने अपने पति को रोकने का फैसला किया। उसने पुलिस को बुलाने का निर्णय लिया। पुलिस ने अनिल को पकड़ लिया और उसे समझाने की कोशिश की। लेकिन अनिल ने पुलिस की बात नहीं मानी और आंचल के साथ भाग गया।
शोभा ने फिर से तांत्रिक से संपर्क किया। तांत्रिक ने उसे बताया कि उसे अपने पति को वापस पाने के लिए और भी उपाय करने होंगे। उसने शोभा को बताया कि उसे एक विशेष बलिदान देना होगा। शोभा ने सोचा कि यह उसकी आखिरी उम्मीद है और उसने तांत्रिक की बात मान ली।
अंतिम निर्णय
शोभा ने तांत्रिक की सलाह के अनुसार बलिदान देने का निर्णय लिया। उसने अपने पति को वापस पाने के लिए सब कुछ करने का निश्चय किया। लेकिन यह सब गलत था। तांत्रिक ने उसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया था।
शोभा ने अपनी जान जोखिम में डाल दी। उसने एक रात तांत्रिक के पास जाकर बलिदान देने का फैसला किया। लेकिन तांत्रिक ने उसे धोखा दिया और उसे मारने की कोशिश की।
निष्कर्ष
शोभा देवी की कहानी हमें यह सिखाती है कि अंधविश्वास और गलत कदम उठाने का क्या अंजाम हो सकता है। उसने अपने पति को पाने के लिए गलत रास्ता चुना और अंत में उसकी जान चली गई। यह कहानी हमें जागरूक करती है कि हमें अपने फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए और अंधविश्वास से दूर रहना चाहिए।
इस घटना ने पुलिस को भी सोचने पर मजबूर कर दिया कि कैसे लोग अंधविश्वास के चलते अपनी जान जोखिम में डालते हैं। समाज को इस प्रकार की घटनाओं से सीख लेनी चाहिए और अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता फैलानी चाहिए।
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