छत्तीसगढ़ का यह मामला शायद कभी नहीं खुल पाता अगर पुलिस ईमानदारी से काम नहीं करती ||

संगीता और दिनेश: एक अधूरी प्रेम कहानी का खौफनाक अंत
दोस्तो, अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं ज्यादातर उत्तर प्रदेश की घटनाओं के बारे में ही क्यों बताता हूँ? क्या दूसरे राज्यों में ऐसी घटनाएं नहीं होतीं? घटनाएं हर जगह होती हैं, लेकिन जब तक मुझे सटीक जानकारी नहीं मिलती, मैं आपके सामने नहीं आता। आज की घटना छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले की है, जहाँ अपराधियों ने बड़ी शातिरता दिखाई, लेकिन पुलिस की मेहनत ने उन्हें सलाखों के पीछे पहुँचा दिया।
खेत में मिला रहस्यमयी कंका/ल
तारीख थी 22 जनवरी, 2026। सुबह के करीब 9:00 बजे का समय था। कांकेर के पखांजुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत ‘बड़े कापसी’ गाँव की रहने वाली रन्नूबाई उसीडी अपने खेतों में फसल देखने गई थीं। अचानक उनकी नजर एक ऐसी चीज़ पर पड़ी जिसे देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। खेत में एक मानव शरी/र का कंका/ल पड़ा हुआ था।
रन्नूबाई डर के मारे गाँव की ओर भागीं और लोगों को खबर दी। देखते ही देखते पूरा गाँव वहाँ इकट्ठा हो गया। पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस जब मौके पर पहुँची, तो कंका/ल की हालत ऐसी थी कि यह भी पता नहीं चल पा रहा था कि यह किसी महिल/ा का है या पुरु/ष का। हालांकि, पास ही में एक सलवार-सूट और चप्पलें मिलीं, जिससे पुलिस ने अंदाजा लगाया कि यह किसी युवती की दे/ह हो सकती है। पुलिस ने कंका/ल को कब्जे में लेकर पोस्टमा/र्टम के लिए भेज दिया।
शिनाख्त और डीएनए टेस्ट
दो दिन बाद पोस्टमा/र्टम रिपो/र्ट आई, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए। रिपो/र्ट के अनुसार, यह कंका/ल एक 20-25 साल की लड़की का था, जिसकी गला दबाकर ह/त्या की गई थी। पुलिस ने गाँव में पड़ताल शुरू की तो पता चला कि मुकेश उसीडी की 22 वर्षीय बेटी ‘संगीता’ पिछले डेढ़ महीने से लापता है।
मुकेश ने बताया कि संगीता 16 नवंबर, 2025 की शाम घर से निकली थी और फिर कभी वापस नहीं आई। पुलिस ने सच्चाई जानने के लिए कंका/ल का डीए/नओ टेस्ट संगीता के पिता से मैच करवाया, जो पूरी तरह मैच हो गया। अब यह साफ था कि वह कंका/ल संगीता का ही था।
कॉल डिटेल्स और मुख्य आरोपी
पुलिस ने संगीता के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल्स निकालीं। उसमें एक नंबर ऐसा था जिससे संगीता पिछले कई सालों से लगातार बात कर रही थी। यहाँ तक कि जिस शाम वह घर से निकली, आखिरी कॉल भी उसी नंबर पर था। वह नंबर ‘दिनेश गुग्गा’ (21 वर्ष) का था, जो पास के ही शाह डूगरी गाँव में रहता था और कॉलेज का छात्र था।
पुलिस ने दिनेश को उसके घर से गिरफ्ता/र किया। शुरुआत में उसने पुलिस को खूब घुमाया और कहा कि वह किसी संगीता को नहीं जानता। लेकिन जब पुलिस ने कॉल डिटेल्स के सबूत उसके सामने रखे और कड़ाई से पूछताछ की, तो वह टूट गया और अपना जु/र्म कबूल कर लिया।
प्यार, धोखा और शारीरि/क शो/षण
दिनेश ने बताया कि 3 साल पहले उसकी और संगीता की दोस्ती हुई थी, जो बाद में प्रेम प्रसं/ग में बदल गई। दोनों अक्सर फोन पर बात करते और छिप-छिपकर मिलते थे। दिनेश ने शादी का वादा करके संगीता के साथ कई बार शारीरि/क संबं/ध भी बनाए थे।
जब भी संगीता शादी का दबाव डालती, दिनेश पढ़ाई या नौकरी का बहाना बनाकर बात टाल देता। हकीकत यह थी कि दिनेश कभी उससे शादी करना ही नहीं चाहता था; वह सिर्फ उसके शरी/र का इस्तेमा/ल कर रहा था। जब संगीता को शक हुआ, तो उसने दिनेश को धमकाया कि अगर उसने शादी नहीं की, तो वह उस पर केस दर्ज करा देगी और उसकी जिंदगी बर्बा/द कर देगी।
ह/त्या की खौफनाक साजिश
संगीता की धमकियों से डरकर दिनेश ने उसे रास्ते से हटाने का फैसला किया। उसने इस साजि/श में अपने दो दोस्तों—समनदीप पन्ना (20 वर्ष) और एक नाबालिग लड़के को शामिल किया।
16 नवंबर, 2025 की शाम को दिनेश ने संगीता को गाँव के बाहर खेत में मिलने बुलाया। संगीता हमेशा की तरह उस पर भरोसा करके चली गई। वहाँ दिनेश के दोनों दोस्त पहले से झाड़ियों में छिपे थे। जब संगीता वहाँ पहुँची, तो दिनेश ने फिर से उसे शादी न करने की बात समझानी चाही, लेकिन जब वह नहीं मानी और बहस बढ़ गई, तो दिनेश ने इशारा कर दिया।
दिनेश ने संगीता के हाथ पकड़े, समनदीप ने उसका मुँह दबाया और नाबालिग दोस्त ने उसका गला तब तक दबाए रखा जब तक उसकी सा/ंसे नहीं रुक गईं। ह/त्या के बाद उन्होंने पहचान छिपाने के लिए उसके कपड़े उतारकर दूर फें/क दिए और संगीता का मोबाइल लेकर स्विच ऑफ कर दिया।
कर्मों का फल
डेढ़ महीने तक अपराधी चैन से रहे, उन्हें लगा कि वे कभी नहीं पकड़े जाएंगे। लेकिन कुदरत का इंसाफ देखिए, जिस खेत में उन्होंने ला/श फेंकी थी, वहाँ फसल की देखरेख के लिए जब रन्नूबाई पहुँची, तब तक ला/श कंका/ल बन चुकी थी और उसी से सारा राज खुला।
पुलिस ने दिनेश और समनदीप को गिरफ्ता/र कर जे/ल भेज दिया, जबकि नाबालिग साथी को बाल सुध/ार गृह भेजा गया। पुलिस ने झाड़ियों से संगीता का मोबाइल भी बरा/मद कर लिया, जो इस केस में सबसे बड़ा सबूत बना। संगीता के पिता मुकेश इस बात पर विश्वास ही नहीं कर पा रहे थे कि उनकी शांत रहने वाली बेटी का ऐसा कोई रिश्ता था या उसका अंत इतना दर्दनाक होगा।
निष्कर्ष: यह घटना हमें सचेत करती है कि अंधा भरोसा कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकता है। युवाओं को अपने फैसलों में सावधानी बरतनी चाहिए और परिवारों को अपने बच्चों के साथ ऐसा दोस्ताना माहौल बनाना चाहिए कि वे अपनी बातें खुलकर साझा कर सकें। अपरा/ध चाहे कितना भी गहरा दफन हो, एक दिन सामने आ ही जाता है।
जय हिंद।
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