रेगिस्तान का दरिंदा और जांबाज अफसर: एक खौफनाक जाल
अध्याय 1: रेगिस्तान का सन्नाटा और रहस्यमयी झोपड़ी
राजस्थान का वह तपता हुआ रेगिस्तान, जहाँ दिन में सूरज आग उगल रहा था और रात होते ही चारों तरफ एक डरावना सन्नाटा पसर जाता था। शहर से कोसों दूर, रेत के टीलों के बीच एक छोटी सी, जर्जर झोपड़ी थी। इस झोपड़ी में रामलाल नाम का एक बूढ़ा आदमी रहता था। आसपास के गाँवों में अफवाहें थीं कि जो भी अकेली लड़की उस रास्ते से गुजरी, वह फिर कभी नहीं दिखी। लेकिन पुलिस के पास कोई ठोस सबूत नहीं था।
इसी गुत्थी को सुलझाने का जिम्मा सौंपा गया इंस्पेक्टर अंजलि को। अंजलि ने तय किया कि वह वर्दी में नहीं, बल्कि एक शिकार बनकर उस भेड़िये के सामने जाएगी।

अध्याय 2: पहली रात – जाल बिछाना
रात के करीब 10 बजे थे। अंजलि एक साधारण, खूबसूरत लड़की के भेष में उस झोपड़ी के बाहर पहुँची। उसने कांपते हाथों से दरवाजा खटखटाया। “कोई है? कृपया दरवाजा खोलिए!”
दरवाजा धीरे से खुला। सामने रामलाल खड़ा था, जिसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। अंजलि ने झूठ बोला कि वह रास्ता भटक गई है और उसे रात बिताने के लिए पनाह चाहिए। रामलाल ने पहले मना किया, लेकिन अंजलि की खूबसूरती देखकर उसके चेहरे पर एक घिनौनी मुस्कान आ गई। उसने एक शर्त रखी— “तुम्हें मेरे साथ सोना पड़ेगा।”
अंजलि ने मन ही मन घृणा महसूस की, लेकिन मिशन पूरा करने के लिए उसने हामी भर दी। उस रात अंजलि ने देखा कि वह बूढ़ा किस कदर गिरा हुआ था। वह समझ गई कि शिकायतें सच थीं। वह सुबह चुपचाप वहाँ से निकली और अपने गुप्त ठिकाने पर जाकर अपनी टीम को संदेश दिया— “शिकार जाल में फँसने वाला है।”
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अध्याय 3: दूसरी रात – अंतिम प्रहार
अगली रात अंजलि फिर से एक नया रूप धारण करके पहुँची। इस बार उसने और भी मासूम दिखने का नाटक किया। उसने रामलाल से कहा कि उसके घरवाले उसे रेगिस्तान में भूल गए हैं। रामलाल को लगा कि उसकी तो चांदी हो गई है। उसने झोपड़ी की कुंडी लगा दी।
अंजलि ने डरने का नाटक किया, “दादा जी, मुझे अकेले सोने में डर लगता है, क्या मैं आपके पास बैठ सकती हूँ?” रामलाल की हवस अब सातवें आसमान पर थी। वह अंजलि को एक गुफा (गार) की तरफ ले गया, जो झोपड़ी के पीछे छिपी हुई थी। अंजलि ने अपने बालों में लगे एक पिनहोल कैमरे और कपड़ों में छिपे माइक्रोफोन के जरिए हर बात रिकॉर्ड कर ली।
अध्याय 4: दरिंदे का बेनकाब होना
अंजलि ने चालाकी से कहा, “मेरे कपड़ों में कुछ चुभ रहा है, मैं अंदर जाकर ठीक करके आती हूँ।” वह अंदर गई और पुलिस टीम को सिग्नल दे दिया। जब वह बाहर आई, तो उसने एक पुराना सूट पहना हुआ था। रामलाल अब और इंतजार नहीं कर सकता था। वह जैसे ही अंजलि की तरफ झपटा, अंजलि ने उसे एक जोरदार धक्का दिया।
अंजलि ने चिल्लाकर कहा, “बस! रामलाल, तुम्हारा खेल खत्म हुआ।”
रामलाल हँसने लगा, “तू मेरा क्या बिगाड़ लेगी? यहाँ कोई नहीं है।”
तभी अंजलि ने अपनी कमर से पिस्तौल निकाली और कड़क आवाज में कहा, “मैं पुलिस अफसर अंजलि हूँ। तुम्हारी हर हरकत, हर शब्द रिकॉर्ड हो चुका है। बाहर मेरी टीम ने तुम्हें घेर लिया है।”
अध्याय 5: इंसाफ की गूँज
कुछ ही पलों में रेगिस्तान का वह सन्नाटा सायरन की आवाजों से गूँज उठा। अंजलि की टीम ने रामलाल को दबोच लिया। उस गुफा की तलाशी ली गई, तो वहाँ से उन गायब लड़कियों के कपड़े और जेवर मिले, जिन्हें रामलाल ने अपनी हवस का शिकार बनाया था।
मामला अदालत पहुँचा। अंजलि द्वारा इकट्ठा किए गए ऑडियो और वीडियो सबूत इतने पुख्ता थे कि रामलाल का वकील भी उसे नहीं बचा सका। मुअज्ज़िज़ अदालत ने रामलाल के जुर्म को जघन्य माना और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई।
निष्कर्ष: साहस की जीत
इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया। अंजलि की बहादुरी की मिसाल दी जाने लगी। उसने साबित कर दिया कि एक औरत कमजोर नहीं होती; अगर वह ठान ले, तो वह सबसे बड़े दरिंदे का अंत भी कर सकती है।
बुराई चाहे कितना भी बड़ा नकाब पहन ले, वह सच्चाई की रोशनी के सामने कभी टिक नहीं सकती। अंजलि ने न केवल रामलाल को सजा दिलाई, बल्कि उन मासूम लड़कियों की आत्माओं को भी शांति दिलाई जिनके सपने उस रेगिस्तान की रेत में दफन हो गए थे।
कहानी की मुख्य विशेषताएं:
सस्पेंस और थ्रिल: पाठक को अंत तक जोड़े रखने के लिए पुलिसिया योजना का उपयोग।
सामाजिक संदेश: अपराध के खिलाफ आवाज उठाने और महिलाओं की बहादुरी का चित्रण।
न्याय: ‘कर्मा’ और कानून की जीत को प्रमुखता से दिखाया गया है।
लेखक का संदेश: कभी भी किसी अजनबी पर आँख मूँदकर भरोसा न करें और अगर कुछ गलत दिखे, तो तुरंत कानून की मदद लें। साहस ही वह हथियार है जो अंधेरे को खत्म करता है।
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